# नंदीग्राम में ममता बनर्जी के पैर में लगी चोट की दोबारा जांच होगी, सुवेंदु अधिकारी ने उठाए सवाल

> सुवेंदु अधिकारी ने 2021 के नंदीग्राम चुनाव के दौरान ममता बनर्जी की चोट को लेकर नई मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर जांच कराने की घोषणा की है।

**Type:** article · **Category:** राजनीति · **Published:** 2026-10-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/politics/nndigrama-men-mamata-banerjee-ke-paira-men-lagi-chota-ki-dobara-jancha-hogi-suvendu-adhikari-ne-uthae-savala-42386 · **Language:** Hindi
**Tags:** ममता बनर्जी, सुवेंदु अधिकारी, नंदीग्राम, पश्चिम बंगाल, एसएसकेएम अस्पताल, चुनाव आयोग

पश्चिम बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान सामने आया एक पुराना सियासी विवाद फिर गरमा गया है। नंदीग्राम में चुनाव प्रचार के वक्त ममता बनर्जी के पैर में लगी चोट के मामले को लेकर राज्य प्रशासन ने नए सिरे से जांच कराने का फैसला किया है। सुवेंदु अधिकारी ने दावा किया है कि उस वक्त इस घटना को बहुत ज्यादा बढ़ाकर दिखाया गया था और असलियत सामने लाने के लिए पड़ताल जरूरी है।

## मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर उठाए गए सवाल
सुवेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम में आयोजित एक चुनावी सभा के दौरान इस मसले को उठाया। इसके बाद उन्होंने राज्य सचिवालय नबन्ना में एक प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कागजात पेश किए। उन्होंने बंगुर इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसाइंसेज से संबंधित जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि रिपोर्ट में किसी भी तरह की हड्डी टूटने या जोड़ खिसकने की पुष्टि नहीं मिलती है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी लाभ उठाने के मकसद से उस समय घटना को गलत तरीके से पेश किया गया था। अधिकारी के मुताबिक, _“ममता बनर्जी ने 2021 में नंदीग्राम में चुनाव प्रचार के दौरान पैर की चोट को फर्जी तरीके से पेश किया था।”_ उन्होंने कहा कि सरकार इस पूरे घटनाक्रम की तह तक जाएगी, लेकिन आचार संहिता लागू होने के चलते इस पड़ताल की बाकी रूपरेखा 9 अक्टूबर के बाद सार्वजनिक की जाएगी।

## 10 मार्च 2021 का नंदीग्राम घटनाक्रम
यह विवाद 10 मार्च 2021 का है, जब ममता बनर्जी नंदीग्राम के बिरुलिया क्षेत्र स्थित रायपाड़ा में चुनावी दौरे पर थीं। उस दिन उन्होंने कहा था कि भीड़ में से कुछ लोगों के धक्के के कारण उनकी गाड़ी का खुला दरवाजा सीधे उनके पैर पर आ लगा, जिससे वे बुरी तरह जख्मी हो गईं।

घटना के तुरंत बाद उन्हें कोलकाता ले जाया गया और एसएसकेएम अस्पताल में दाखिल कराया गया था। वहां से जारी एक वीडियो संदेश के जरिए उन्होंने बताया था कि जब वह लोगों का अभिवादन स्वीकार कर रही थीं, तब भारी भीड़ गाड़ी की तरफ उमड़ पड़ी थी। उसी आपाधापी में उनका पैर दरवाजे और वाहन के बीच दब गया था।

## अस्पताल का रुख और व्हीलचेयर पर प्रचार
एसएसकेएम अस्पताल प्रशासन ने उस समय जो विवरण दिया था, उसमें बाएं टखने और पैर के लिगामेंट व हड्डी से संबंधित क्षति का उल्लेख था। इसके अलावा उनके दाहिने कंधे, गर्दन, बांह और कमर में गंभीर दर्द तथा अंदरूनी चोट दर्ज की गई थी।

कुछ दिनों के उपचार के उपरांत उनके पैर पर प्लास्टर चढ़ाकर उन्हें अस्पताल से छुट्टी दी गई थी। इसके बाद ममता बनर्जी ने व्हीलचेयर का सहारा लेते हुए पूरे राज्य में चुनावी रैलियों और सभाओं को संबोधित किया था, जो उस चुनाव का एक प्रमुख राजनीतिक दृश्य बन गया था।

## पर्यवेक्षकों की पड़ताल और सुरक्षा चूक पर कार्रवाई
चोट लगने के तुरंत बाद यह तीखी बहस शुरू हो गई थी कि यह महज एक आकस्मिक दुर्घटना थी या कोई सोचा-समझा हमला। विवाद बढ़ने पर चुनाव आयोग ने हालात का जायजा लेने के लिए अपने दो विशेष पर्यवेक्षकों, विवेक दुबे और अजय नायक को तैनात कर विस्तृत ब्योरा मांगा था।

दोनों पर्यवेक्षकों ने अपनी समीक्षा में निष्कर्ष निकाला था कि काफिले पर किसी सुनियोजित हमले का कोई आधार नहीं मिला और यह एक हादसा था। चुनाव आयोग ने भी आधिकारिक तौर पर हमले की बात से इनकार किया था। हालांकि, सुरक्षा व्यवस्था में पाई गई गंभीर लापरवाहियों को देखते हुए आयोग ने उस समय मुख्यमंत्री की सुरक्षा में तैनात जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए थे।

## ताजा विवाद की वजह और भविष्य की रूपरेखा
सुवेंदु अधिकारी का ताजा रुख मुख्य रूप से 11 मार्च 2021 को कराए गए सीटी स्कैन और तंत्रिका विज्ञान संस्थान की रिपोर्ट पर टिका है। उनका तर्क है कि जब जांच में फ्रैक्चर या डिसलोकेशन का कोई साक्ष्य नहीं था, तो चोट को असाधारण रूप से गंभीर क्यों बताया गया।

दूसरी तरफ, रिकॉर्ड दर्शाते हैं कि उस दौरान केवल पैर ही नहीं, बल्कि शरीर के अन्य हिस्सों में भी चोट और सूजन की पुष्टि की गई थी। अब 9 अक्टूबर के बाद आचार संहिता के नियमों की सीमा समाप्त होते ही राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित इस जांच की आधिकारिक दिशा तय होगी।

## इसका आप पर असर
पश्चिम बंगाल की राजनीति में 2021 के इस बहुचर्चित मामले की नई जांच से राज्य के राजनीतिक माहौल और प्रशासनिक जवाबदेही पर सीधा असर पड़ सकता है।

- **पश्चिम बंगाल में:** इस जांच की घोषणा से राज्य में सत्तारूढ़ और विपक्षी खेमों के बीच राजनीतिक टकराव और तेज होगा। चुनाव आचार संहिता समाप्त होने के बाद 9 अक्टूबर से इस पर प्रशासनिक प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है।
- **आम मतदाताओं के लिए:** पुराने चुनावी बयानों और दावों की सत्यता को लेकर जनता के बीच एक नई बहस शुरू होगी। मतदाता यह देख सकेंगे कि राजनीतिक प्रचार में स्वास्थ्य संबंधी घटनाओं की क्या भूमिका रही है।
- **प्रशासनिक व्यवस्था पर:** वीआईपी सुरक्षा प्रोटोकॉल और मेडिकल रिकॉर्ड की विश्वसनीयता फिर से जांच के दायरे में आएगी। इससे भविष्य के राजनीतिक अभियानों के दौरान सुरक्षा प्रक्रियाओं में बदलाव हो सकता है।
- **कानूनी और चुनावी पहलू:** आयोग की पुरानी रिपोर्ट और नई जांच के निष्कर्षों के बीच तालमेल पर सवाल खड़े हो सकते हैं। आने वाले दिनों में यह विवाद अदालती या चुनावी मंचों पर बड़ा मुद्दा बन सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
सुवेंदु अधिकारी द्वारा 2021 की मेडिकल रिपोर्ट को सार्वजनिक कर जांच की मांग करने के पीछे पुरानी चुनावी घटनाओं और उनके राजनीतिक प्रभाव से जुड़े कारण हैं।

- **मेडिकल दस्तावेजों का दावा:** 11 मार्च 2021 के सीटी स्कैन में कथित रूप से फ्रैक्चर या डिसलोकेशन न पाए जाने के आधार पर यह सवाल उठाया गया है। अधिकारी का दावा है कि चोट को राजनीतिक लाभ के लिए बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया था।
- **2021 का नंदीग्राम अभियान:** नंदीग्राम के रायपाड़ा में कार के दरवाजे से चोट लगने के बाद इसे हमले के रूप में पेश किया गया था। इस घटना के बाद पूरा चुनाव व्हीलचेयर पर प्रचार के इर्द-गिर्द सिमट गया था।
- **चुनाव आयोग की पुरानी रिपोर्ट:** विशेष पर्यवेक्षकों ने जांच के बाद हमले की संभावना खारिज करते हुए इसे महज एक दुर्घटना करार दिया था। इसके बावजूद राजनीतिक दलों के बीच इस पर लंबे समय से मतभेद बने हुए थे।
- **आगामी समयसीमा:** चुनाव आचार संहिता प्रभावी होने के कारण पूरी जानकारी 9 अक्टूबर के बाद साझा की जाएगी। इसके बाद ही जांच की औपचारिक दिशा तय होगी।

## सवाल-जवाब

### 1. सुवेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी की चोट को लेकर क्या नया दावा किया है?
उन्होंने दावा किया है कि 2021 की मेडिकल रिपोर्ट में किसी फ्रैक्चर या डिसलोकेशन का सबूत नहीं था और चोट को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया था।

### 2. यह मूल घटना कब और कहां हुई थी?
यह घटना 10 मार्च 2021 को नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र के बिरुलिया इलाके में चुनाव प्रचार के दौरान हुई थी।

### 3. 2021 में चुनाव आयोग के पर्यवेक्षकों ने अपनी रिपोर्ट में क्या कहा था?
विशेष पर्यवेक्षक विवेक दुबे और अजय नायक ने इसे सुनियोजित हमला नहीं बल्कि एक दुर्घटना बताया था।

### 4. इस मामले की जांच से जुड़ी विस्तृत जानकारी कब सामने आएगी?
आदर्श आचार संहिता लागू होने की वजह से जांच से जुड़ी पूरी जानकारी 9 अक्टूबर के बाद दी जाएगी।

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