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  "title": "पाकिस्तान के परमाणु ठिकाने के पास कैसे गिरा था भारत का ड्रोन? पूर्व सीडीएस अनिल चौहान का बड़ा खुलासा",
  "summary": "ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के किराना हिल्स पर हुए हमले को लेकर पूर्व सीडीएस अनिल चौहान ने स्पष्ट किया है कि भारत ने सीधे तौर पर उस ठिकाने को निशाना नहीं बनाया था, बल्कि एक आत्मघाती ड्रोन मिशन खत्म होने के बाद वहां जा गिरा था।",
  "content": "ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय कार्रवाई को लेकर लंबे समय से कई तरह के सवाल और कयास लगाए जाते रहे हैं, खासकर पाकिस्तान के संवेदनशील किराना हिल्स पर हुई घटना को लेकर। हालांकि, अब इस मामले पर देश के पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने खुलकर बात की है और एक बड़ा खुलासा करते हुए स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। उन्होंने बताया कि भारतीय सेना ने रणनीतिक रूप से किराना हिल्स को कोई सीधा निशाना नहीं बनाया था, बल्कि उस स्थान पर भारत का एक आत्मघाती ड्रोन के गिरने की संभावना जताई गई है।\n\nसरगोधा के रडार सिस्टम को तलाशने भेजे गए थे ड्रोन\nइस पूरे घटनाक्रम पर विस्तार से रोशनी डालते हुए जनरल चौहान ने बताया कि भारतीय पक्ष की ओर से पाकिस्तान के सरगोधा क्षेत्र के आसपास कई ड्रोन रवाना किए गए थे। इन मानवरहित विमानों का मुख्य और स्पष्ट उद्देश्य उस इलाके में सक्रिय पाकिस्तानी रडार प्रणालियों का पता लगाना और जरूरत पड़ने पर उन्हें नेस्तनाबूद करना था। सरगोधा से लगभग 10 किलोमीटर उत्तर दिशा में ही किराना हिल्स स्थित है, जिसे पाकिस्तान के सबसे सुरक्षित और बेहद महत्वपूर्ण परमाणु जखीरे वाले ठिकानों में से एक माना जाता है।\n\nमिशन का समय पूरा होने पर नीचे गिरा था ड्रोन\nआत्मघाती ड्रोन की कार्यप्रणाली को समझाते हुए उन्होंने आगे बताया कि ऐसे ड्रोन्स के पास करीब दो घंटे की ऑपरेशनल क्षमता होती है। इस समयावधि के दौरान वे हवा में रहकर अपने निर्धारित लक्ष्यों की तलाश करते रहते हैं। यदि उड़ान के इस तय समय में ड्रोन को कोई उपयुक्त और सक्रिय लक्ष्य नहीं मिल पाता है, तो अपनी मिशन लाइफ समाप्त होने के बाद वह किसी भी स्थान पर नीचे आ सकता है या टकरा सकता है। पूर्व सीडीएस के अनुसार, किराना हिल्स के मामले में भी ठीक यही तकनीकी प्रक्रिया लागू हुई होगी और संभवतः लक्ष्य न मिलने के कारण ड्रोन वहां जा गिरा।\n\nदिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान साझा की जानकारी\nराजधानी दिल्ली स्थित विवेकानंद में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम में हिस्सा लेते हुए जनरल अनिल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े इन तमाम सामरिक पहलुओं पर खुलकर चर्चा की। उन्होंने जोर देकर कहा कि किराना हिल्स पर जो घटना घटी, वह किसी सुनियोजित सीधे हमले का परिणाम नहीं थी, बल्कि यह ड्रोन की तकनीकी कार्यशैली और उसकी तयशुदा क्षमता के दायरे में हुआ एक संभावित संयोग था। इस खुलासे के बाद इस संवेदनशील सैन्य घटना को लेकर बनी असमंजस की स्थिति काफी हद तक दूर हो गई है।\n\nइसका आप पर असर\nयह समाचार मुख्य रूप से रणनीतिक और रक्षा मामलों से जुड़ा हुआ है और इसका सीधा असर आम नागरिकों की दैनिक गतिविधियों पर नहीं पड़ता है।\n\n• भारत में: देश की रक्षा तैयारियों और रणनीतिक अभियानों से जुड़े फैसलों की पारदर्शिता को समझने में मदद मिलती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. किराना हिल्स पर भारत का कौन सा उपकरण गिरने की बात कही गई है?\nपूर्व सीडीएस अनिल चौहान के अनुसार, वहां एक भारतीय आत्मघाती ड्रोन के गिरने की संभावना है।\n\n2. इन ड्रोन्स को किस उद्देश्य के लिए भेजा गया था?\nइन ड्रोन्स को पाकिस्तान के सरगोधा इलाके में रडार सिस्टम तलाशने और जरूरत पड़ने पर निशाना बनाने के लिए भेजा गया था।\n\n3. किराना हिल्स क्यों महत्वपूर्ण माना जाता है?\nकिराना हिल्स को पाकिस्तान का बेहद अहम और संवेदनशील ठिकाना माना जाता है, जहां उसने अपने परमाणु जखीरे को छुपा रखा है।\n\n4. यह बयान पूर्व सीडीएस ने कहाँ दिया था?\nयह बयान उन्होंने नई दिल्ली स्थित विवेकानंद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिया था।",
  "url": "https://trendkia.com/politics/pakistana-ke-paramanu-thikane-ke-pasa-kaise-gira-tha-bharata-ka-drona-purva-cds-anil-chauhan-ka-bara-khulasa-21983",
  "category": "राजनीति",
  "publishedAt": "2026-08-25",
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    "ऑपरेशन सिंदूर",
    "अनिल चौहान",
    "किराना हिल्स",
    "भारतीय सेना",
    "परमाणु ठिकाना"
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  "site": "TrendKia"
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