# ऑपरेशन टाइगर की सुगबुगाहट के बीच उद्धव ठाकरे ने बुलाई सांसदों की अहम बैठक

> शिवसेना यूबीटी के सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट के संपर्क में होने की अटकलों के बीच उद्धव ठाकरे ने 14 जून को मातोश्री में सांसदों की बैठक बुलाई है।

**Category:** राजनीति · **Published:** 2026-06-12 · **Source:** TrendKia
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महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर सरगर्मी बढ़ गई है। राज्य के राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि उद्धव ठाकरे की पार्टी में दोबारा बिखराव हो सकता है और उनके कई सांसद एकनाथ शिंदे की शिवसेना के संपर्क में बताए जा रहे हैं। इन्हीं अटकलों और तथाकथित ऑपरेशन टाइगर की चर्चाओं के बीच उद्धव ठाकरे ने अपने सांसदों की बैठक बुला ली है। यह बैठक रविवार 14 जून को दोपहर 12 बजे मातोश्री में होगी। शिवसेना यूबीटी के सांसदों के शिंदे खेमे से संपर्क में रहने की खबरों को देखते हुए इस बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है।

## क्या है पूरा माजरा?

असल में महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर है कि शिवसेना यूबीटी के 7 सांसद पार्टी से नाता तोड़कर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले शिवसेना गुट का हिस्सा बन सकते हैं। सूत्रों की मानें तो 7 जून को दिल्ली में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और ठाकरे खेमे के कुछ सांसदों के बीच एक गोपनीय मुलाकात भी हुई थी। दावा यह भी किया जा रहा है कि शिवसेना यूबीटी के एक सांसद को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह दिलाने तथा बाकी सांसदों को अहम जिम्मेदारियां और पद देने की पेशकश की गई है।

## भाजपा का क्या कहना है?

महाराष्ट्र में ऑपरेशन टाइगर को लेकर छिड़ी सियासी बहस के बीच भाजपा नेता प्रवीण दारेकर ने विपक्ष के आरोपों पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि भाजपा कोई कमजोर दल नहीं है और जो नेता केवल घर बैठकर राजनीति करते हैं, जनता अब उनसे ऊब चुकी है। दारेकर के अनुसार, जो जनप्रतिनिधि अपने इलाके में सक्रिय रहकर लोगों के बीच काम करना चाहते हैं, वे अपनी मर्जी से भाजपा से जुड़ना चाहते हैं और पार्टी ने किसी पर कोई दबाव नहीं डाला है।

## कांग्रेस ने क्या प्रतिक्रिया दी?

उद्धव ठाकरे की पार्टी में टूट की अटकलों पर महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। ऑपरेशन टाइगर पर सपकाल ने कहा- "भाजपा और उसके सहयोगी दल जिस तरह जोड़-तोड़ और दल-बदल की राजनीति करते हैं, उससे साफ झलकता है कि वे राजनीतिक तौर पर कमजोर हैं। उन्होंने कहा कि अगर भाजपा सचमुच मजबूत होती तो उसे विपक्षी दलों को तोड़ने और उनके नेताओं को अपने पाले में लाने की जरूरत ही नहीं पड़ती। मगर ऐसा करना उनकी मजबूरी है, क्योंकि वे अपनी कमजोरी को छिपाने की कोशिश में जुटे हैं।"

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