# पटना की बांकीपुर सीट पर मतदान से पहले जनसुराज संस्थापक प्रशांत किशोर द्वारा मनमोहन सिंह की हार का वीडियो साझा कर पढ़े-लिखे वोटरों की सोच पर उठाए गए सवाल

> बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के प्रचार के अंतिम दौर में जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर का एक पुराना वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की दक्षिण दिल्ली से हुई हार का उदाहरण देकर मतदान व्यवहार का विश्लेषण कर रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** राजनीति · **Published:** 2026-07-29 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/politics/patna-ki-bankipur-sita-para-matadana-se-pahale-jan-suraaj-snsthapaka-prashant-kishor-dvara-manmohan-singh-ki-hara-ka-vidiyo-sajha--11754 · **Language:** Hindi
**Tags:** बांकीपुर उपचुनाव, प्रशांत किशोर, मनमोहन सिंह, जनसुराज, बिहार राजनीति, पटना समाचार, दक्षिण दिल्ली चुनाव, बीजेपी

बिहार की राजधानी पटना में स्थित बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने जा रहे उपचुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां अपने चरम पर पहुंच गई हैं। हालांकि चुनावी प्रचार की औपचारिक मियाद समाप्त हो चुकी है, लेकिन गलियों से लेकर सोशल मीडिया के मंचों तक राजनीतिक बहसों का दौर बेहद तेज हो चुका है। अब हर किसी की निगाहें 30 जुलाई को होने वाले मतदान और उसके बाद 3 अगस्त को आने वाले चुनावी नतीजों पर टिकी हुई हैं। इस महत्वपूर्ण विधानसभा सीट पर जहां सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी अपनी पुरानी और मजबूत पकड़ को कायम रखने की जद्दोजहद में लगी है, वहीं दूसरी ओर प्रशांत किशोर के नेतृत्व वाला जनसुराज और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) नए सामाजिक और राजनीतिक समीकरण बनाकर मुकाबले को दिलचस्प बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इस त्रिकोणीय और संवेदनशील मुकाबले में जनता किसे अपना जनादेश सौंपेगी, यह तो 3 अगस्त को ईवीएम खुलने के बाद ही पूरी तरह से साफ हो पाएगा। लेकिन मतदान की तारीख से ठीक पहले एक वायरल वीडियो ने चुनावी विमर्श का पूरा रुख मोड़ दिया है।

 जनसुराज के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल फेसबुक और इंस्टाग्राम पर साझा किए गए एक वीडियो में चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर देश के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की ऐतिहासिक चुनावी हार का जिक्र करते हुए नजर आ रहे हैं। प्रशांत किशोर ने पूर्व प्रधानमंत्री की दक्षिण दिल्ली संसदीय क्षेत्र से हुई पराजय का उदाहरण देते हुए मतदाताओं की पारंपरिक सोच, सामाजिक पूर्वाग्रहों और साक्षरता से जुड़ी पुरानी अवधारणाओं पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। जैसे-जैसे बांकीपुर उपचुनाव के लिए मतदान का समय करीब आ रहा है, वैसे-वैसे यह वीडियो बिहार के राजनीतिक हलकों में एक नई बहस का केंद्र बन गया है। इस वीडियो के माध्यम से जनसुराज की क्या रणनीति है, प्रशांत किशोर बांकीपुर के मतदाताओं को क्या संदेश देना चाहते हैं और दशकों पुरानी मनमोहन सिंह की हार का संदर्भ इस उपचुनाव में क्यों प्रासंगिक हो गया है, इसका विस्तृत विश्लेषण समझना आवश्यक है।

 

## पढ़े-लिखे मतदाताओं की श्रेष्ठता का भ्रम और प्रशांत किशोर का सीधा तर्क
 बांकीपुर उपचुनाव के दौरान चर्चा में आए इस वीडियो में प्रशांत किशोर ने समाज में फैली उस आम धारणा पर करारा प्रहार किया है, जिसमें यह माना जाता है कि एक शिक्षित और संपन्न नागरिक हमेशा एक विवेकशील और बेहतर मतदाता साबित होता है। प्रशांत किशोर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि लोगों के बीच यह एक बहुत बड़ा भ्रम फैला हुआ है कि पढ़ा-लिखा व्यक्ति हमेशा सही और बेहतर वोटिंग करता है। उन्होंने जनता को आगाह करते हुए कहा कि यह भ्रम पालना पूरी तरह गलत है क्योंकि किसी व्यक्ति का शैक्षणिक स्तर या उसकी आर्थिक समृद्धि इस बात की कोई गारंटी नहीं देती कि वह चुनाव में जाति और धर्म की संकीर्ण सीमाओं से ऊपर उठकर वोट डालेगा।

 प्रशांत किशोर के अनुसार, आम तौर पर राजनीतिक विश्लेषक और अभिजात्य वर्ग यह आरोप लगाते हैं कि गरीब, कम पढ़े-लिखे या ग्रामीण क्षेत्रों के लोग ही जातिगत और धार्मिक आधार पर होने वाली राजनीति के जाल में आसानी से फंस जाते हैं। हालांकि, अपने व्यावहारिक अनुभवों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि वास्तविक धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत नजर आती है। कई बार समाज के अत्यधिक पढ़े-लिखे, उच्च शिक्षित और संपन्न लोग ही जातिवादी और सांप्रदायिक मुद्दों को ज्यादा हवा देते हैं और उन्हीं के आधार पर अपने मताधिकार का प्रयोग करते हैं। शिक्षा का प्रसार होने के बावजूद लोगों की मानसिकता में अपेक्षित बदलाव न आना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

 

## दक्षिण दिल्ली संसदीय सीट और डॉ. मनमोहन सिंह की चुनावी हार का ऐतिहासिक संदर्भ
 अपनी इस विचार प्रक्रिया को प्रमाण के साथ प्रस्तुत करने के लिए प्रशांत किशोर ने पूर्व प्रधानमंत्री और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त अर्थशास्त्री डॉ. मनमोहन सिंह के एकमात्र लोकसभा चुनाव का उदाहरण सामने रखा। उन्होंने याद दिलाया कि डॉ. मनमोहन सिंह ने अपने पूरे राजनीतिक जीवन में केवल एक बार प्रत्यक्ष लोकसभा का चुनाव लड़ा था। उन्होंने यह चुनाव किसी दूरदराज, ग्रामीण या पिछड़े क्षेत्र से नहीं, बल्कि देश की राजधानी के सबसे प्रमुख संसदीय क्षेत्रों में से एक, दक्षिण दिल्ली लोकसभा सीट से लड़ा था। दक्षिण दिल्ली की गणना उस समय भी देश की सबसे प्रबुद्ध, जागरूक और आर्थिक रूप से संपन्न सीटों में की जाती थी, जहां बड़ी संख्या में उच्च शिक्षित, कॉर्पोरेट पेशेवर और समृद्ध नागरिक निवास करते थे।

 प्रशांत किशोर ने रेखांकित किया कि उस दौर में डॉ. मनमोहन सिंह से बड़ा और निष्कलंक छवि वाला कोई अर्थशास्त्री देश के पास नहीं था। देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने में उनकी भूमिका सर्वमान्य थी। इसके बावजूद, जब दक्षिण दिल्ली के मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया, तो उन्होंने देश के इस सबसे बड़े अर्थशास्त्री को दरकिनार करते हुए भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार विजय कुमार मल्होत्रा को विजयी बनाकर संसद भेजा। प्रशांत किशोर का तर्क था कि यदि केवल साक्षरता, उच्च शिक्षा और आर्थिक समृद्धि ही एक बेहतर मतदान और योग्य उम्मीदवार के चयन का आधार होती, तो डॉ. मनमोहन सिंह जैसी महान शख्सियत को उस चुनाव में पराजय का सामना कभी न करना पड़ता। यह ऐतिहासिक घटना साबित करती है कि शिक्षित मतदाता भी राजनीतिक और दलीय प्राथमिकताओं से परे हटकर फैसला नहीं ले पाते।

 

## बिहार के सुपौल की काल्पनिक तुलना और क्षेत्रीय पूर्वाग्रहों पर हमला
 वीडियो में अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए प्रशांत किशोर ने देश के बौद्धिक वर्ग और मीडिया में बिहार के प्रति मौजूद पूर्वाग्रहों पर भी सीधा हमला बोला। उन्होंने एक काल्पनिक स्थिति का वर्णन करते हुए कहा कि यदि डॉ. मनमोहन सिंह जैसा महान अर्थशास्त्री बिहार की किसी ग्रामीण सीट, जैसे कि सुपौल से चुनाव हार जाता, तो पूरे देश में बिहार के लोगों और उनकी समझ का मजाक उड़ाया जाता। देश भर के राजनीतिक विश्लेषक और आलोचक तुरंत यह निष्कर्ष निकाल लेते कि बिहार के लोग अनपढ़ हैं, पिछड़े हैं और वे इतने बड़े अर्थशास्त्री की योग्यता को समझने में पूरी तरह असमर्थ रहे।

 लेकिन जब वही डॉ. मनमोहन सिंह देश की सबसे शिक्षित, आधुनिक और अमीर मानी जाने वाली दक्षिण दिल्ली सीट से चुनाव हार गए, तब उन आलोचकों की भाषा बदल गई। प्रशांत किशोर ने सवाल उठाया कि जब दिल्ली के कथित तौर पर सबसे प्रबुद्ध मतदाताओं ने डॉ. मनमोहन सिंह को नकार दिया, तो क्या इसका मतलब यह निकाला जाए कि पढ़ा-लिखा और अमीर मतदाता हमेशा सही फैसले लेता है? उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई व्यक्ति कितना भी पढ़ा-लिखा क्यों न हो, वह कम जातिवादी या कम सांप्रदायिक होगा, इसकी कोई पक्की गारंटी नहीं दी जा सकती। अक्सर खुद को अत्यधिक जागरूक मानने वाले लोग ही अपनी रोजमर्रा की जिंदगी और मतदान के समय जातिगत समीकरणों को सबसे ज्यादा प्राथमिकता देते हैं।

 

## जातिगत राजनीति का दोहरा मापदंड और जनसुराज की संगठनात्मक सोच
 प्रशांत किशोर ने अपने संबोधन में राजनीति और समाज में व्याप्त दोहरे मापदंडों पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि जो लोग बड़े-बड़े मंचों पर खड़े होकर जातिवाद को खत्म करने और समाज सुधार पर लंबे-चौड़े भाषण देते हैं, उन्हें सबसे पहले अपने खुद के निजी व्यवहार और निर्णयों का अवलोकन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बहुत से लोग सार्वजनिक रूप से जातिविहीन समाज की वकालत करते हैं, लेकिन जब वोट देने या व्यक्तिगत निर्णय लेने का समय आता है, तो वे जाति के ढांचे में ही सिमट जाते हैं। इसके विपरीत, समाज का गरीब और आम आदमी अपनी बुनियादी जरूरतों, रोजगार, महंगाई, स्वास्थ्य और रोजमर्रा की समस्याओं के आधार पर सोचता और संघर्ष करता है।

 दूसरी ओर, कई शिक्षित लोग विकास के मुद्दों को पीछे छोड़कर जटिल सामाजिक और जातिगत गणित में उलझकर रह जाते हैं। जनसुराज के संस्थापक ने आम जनता से अपील की कि केवल बड़े नेताओं के विचार और अच्छे भाषण सुन लेना ही काफी नहीं है, बल्कि उन अच्छी बातों को अपने आचरण और दैनिक व्यवहार में उतारना सबसे ज्यादा जरूरी है। बदलाव केवल भाषणों से नहीं, बल्कि व्यक्तिगत सोच और आचरण में बदलाव लाने से ही संभव होगा।

 

## बांकीपुर उपचुनाव के नतीजे और जनसुराज का अंतिम संदेश
 वीडियो के अंतिम हिस्से में प्रशांत किशोर ने चुनावी नतीजों और अपनी पार्टी की भावी दिशा को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक चुनाव में हार और जीत एक स्वाभाविक प्रक्रिया का हिस्सा होती है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि राजनीतिक काम पूरी ईमानदारी, पारदर्शिता और सही नीयत के साथ किया जाना चाहिए। जनसुराज बांकीपुर उपचुनाव में अपनी पूरी जिम्मेदारी समझकर जनता के बीच काम कर रहा है और सामाजिक चेतना जगाने का प्रयास कर रहा है।

 उन्होंने कहा कि 30 जुलाई को होने वाले मतदान में जनता क्या फैसला सुनाती है और 3 अगस्त को क्या परिणाम निकलकर आते हैं, यह पूरी तरह से मतदाताओं के विवेक पर निर्भर करता है। जनसुराज चुनावी परिणाम को सहर्ष स्वीकार करने के लिए तैयार है। प्रशांत किशोर ने एक बार फिर दोहराया कि जनता को केवल राजनीतिक जुमलों और खोखले दावों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपनी वोट की ताकत को पहचानकर सही व्यवहार का परिचय देना चाहिए। बांकीपुर सीट पर इस वीडियो के अचानक वायरल होने से मुकाबला और भी रोचक हो गया है, क्योंकि अब मतदाता अपनी जातिगत सीमाओं से परे हटकर सोचने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** यह राजनीतिक बहस यह दर्शाती है कि चुनाव में मतदान का फैसला केवल औपचारिक शिक्षा या आर्थिक स्थिति पर निर्भर नहीं करता, बल्कि व्यापक सामाजिक और राजनीतिक प्राथमिकताओं से तय होता है।

**बिहार (बांकीपुर) में:** बांकीपुर के मतदाताओं के पास 30 जुलाई को होने वाली वोटिंग में अपने क्षेत्र के विकास, स्थानीय समस्याओं और उम्मीदवारों के ट्रैक रिकॉर्ड को ध्यान में रखकर वोट देने का मौका है।

## सवाल-जवाब

### 1. बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में मतदान और मतगणना किस तारीख को होगी?
बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए मतदान 30 जुलाई को होगा, जबकि वोटों की गिनती और परिणामों की घोषणा 3 अगस्त को की जाएगी।

### 2. प्रशांत किशोर ने अपने वीडियो में किस प्रमुख चुनाव का उदाहरण दिया है?
प्रशांत किशोर ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का उदाहरण दिया, जो दक्षिण दिल्ली लोकसभा सीट से चुनाव लड़े थे और उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

### 3. दक्षिण दिल्ली लोकसभा चुनाव में मनमोहन सिंह के खिलाफ कौन विजेता बने थे?
दक्षिण दिल्ली लोकसभा सीट पर हुए उस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के उम्मीदवार विजय कुमार मल्होत्रा ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को हराया था।

### 4. प्रशांत किशोर के अनुसार पढ़े-लिखे मतदाताओं को लेकर क्या बड़ा भ्रम फैला हुआ है?
प्रशांत किशोर का मानना है कि यह एक बड़ा भ्रम है कि पढ़ा-लिखा व्यक्ति हमेशा बेहतर या गैर-जातिवादी वोटर होता है, क्योंकि शिक्षित लोग भी अक्सर जाति और धर्म के मुद्दों से प्रभावित होते हैं।

### 5. मनमोहन सिंह की हार के संदर्भ में प्रशांत किशोर ने बिहार के सुपौल का जिक्र क्यों किया?
उन्होंने कहा कि यदि मनमोहन सिंह बिहार के सुपौल जैसी जगह से हारते तो लोग बिहार के लोगों को अनपढ़ बताकर दोष देते, लेकिन दक्षिण दिल्ली जैसे शिक्षित और समृद्ध क्षेत्र में उनकी हार ने इस धारणा को गलत साबित किया।

### 6. बांकीपुर उपचुनाव में मुख्य राजनीतिक मुकाबले में कौन-कौन से दल शामिल हैं?
बांकीपुर सीट पर मुख्य मुकाबला अपनी पकड़ बनाए रखने की कोशिश कर रही भारतीय जनता पार्टी, नया समीकरण बनाने में जुटी जनसुराज और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के बीच देखा जा रहा है।

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