# श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स में नरेंद्र मोदी का खास अंदाज, नाराज फूफा और होम्योपैथी वाले तंज पर गूंजा हॉल

> दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के शताब्दी समारोह में पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवाओं से अनूठे अंदाज में संवाद किया। उन्होंने आलोचकों को नाराज फूफा बताने के साथ-साथ देश की आर्थिक प्रगति और भविष्य के बड़े लक्ष्यों पर खुलकर बात की।

**Type:** article · **Category:** राजनीति · **Published:** 2026-09-05 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/politics/pm-modi-addresses-srcc-centenary-celebrations-takes-sharp-j-digs-at-critics-and-highlights-economic-growth-28280 · **Language:** Hindi
**Tags:** नरेंद्र मोदी, एसआरसीसी, श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स, मेक इन इंडिया, भारतीय अर्थव्यवस्था, रक्षा उत्पादन, दिल्ली यूनिवर्सिटी

दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रतिष्ठित श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स यानी एसआरसीसी के शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिरकत की, जहां उनका यह दौरा कैंपस से लेकर सोशल मीडिया तक मुख्य चर्चा का विषय बन गया है। पारंपरिक और पुराने ढर्रे के राजनीतिक भाषणों से इतर प्रधानमंत्री ने एकदम आधुनिक और युवा शैली में अपनी बात रखी और छात्रों के साथ सीधा संवाद किया। कॉलेज के पूर्व छात्रों को असली ओजी बताने से लेकर देश की विकास यात्रा में बाधा डालने वाले आलोचकों को नाराज फूफा का अनूठा तमगा देने तक, उनका यह बेबाक अंदाज इंटरनेट पर छाया हुआ है। जब उन्होंने दिमागी नक्सलियों पर होम्योपैथी की गोली वाला तंज कसा, तो पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। साल 2013 की फ्रेजाइल-5 अर्थव्यवस्था के कमजोर दौर से लेकर आज के मेक इन इंडिया और अपने अंतरिक्ष स्टेशन के भव्य सपनों तक, प्रधानमंत्री के इस पूरे संबोधन में देश की आर्थिक, रक्षा और सामाजिक प्रगति का पूरा खाका खींचा गया। इस विशेष कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने देश के युवाओं को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए प्रेरित किया, साथ ही उन तमाम चुनौतियों को भी याद किया जिनसे देश पहले जूझ रहा था।

## एसआरसीसी के ओजी और पुराने दिग्गजों का स्मरण
दिल्ली यूनिवर्सिटी के इस प्रतिष्ठित कॉलेज के शताब्दी समारोह के मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जन-जी पीढ़ी और युवाओं के साथ उन्हीं की भाषा में जुड़ने का प्रयास किया। उन्होंने कॉलेज के पूर्व छात्रों को संबोधित करते हुए उन्हें असली ओजी करार दिया और बताया कि कैसे इस संस्थान के एलुमनाई ने दुनिया भर के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है और देश का नाम रोशन किया है। प्रधानमंत्री ने पुरानी यादों को ताजा करते हुए कहा कि उन्हें भी अपने सार्वजनिक जीवन में इनमें से कई दिग्गज हस्तियों के साथ काम करने का बहुमूल्य अवसर मिला है। उन्होंने विशेष रूप से पूर्व वित्त मंत्री स्वर्गीय अरुण जेटली का नाम लेते हुए उनके योगदान को याद किया और कहा कि ऐसे मेधावी लोग इस शिक्षण संस्थान की असली ताकत हैं जिन्होंने देश की दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभाई है। प्रधानमंत्री ने युवाओं से कहा कि वे भी इसी महान परंपरा का हिस्सा हैं और उन्हें अपनी इस विरासत पर गर्व होना चाहिए, क्योंकि इस कॉलेज से पढ़कर निकले लोगों ने हर क्षेत्र में नए मानक स्थापित किए हैं।

## विकास कार्यों में रोड़ा अटकाने वालों पर तंज
देश के बुनियादी ढांचे और विकास कार्यों में जानबूझकर अड़ंगा लगाने वाले आलोचकों पर तीखा प्रहार करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें नाराज फूफा की संज्ञा दी। उन्होंने मजाकिया लेकिन बेहद सटीक अंदाज में कहा कि हमारे समाज और राजनीति में कुछ ऐसे लोग होते हैं जो हर सकारात्मक काम से हमेशा असंतुष्ट नजर आते हैं। जब भी देश में स्टेच्यू ऑफ यूनिटी का निर्माण होता है, नए संसद भवन की इमारत बनती है, हाई-स्पीड ट्रेनें पटरियों पर दौड़ती हैं, डिजिटल भुगतान के लिए यूपीआई क्रांति आती है या फिर वीर जवानों की याद में नेशनल वॉर मेमोरियल जैसी भव्य चीजें बनाई जाती हैं, तो ये आलोचक एक ही रट लगाते रहते हैं कि इसकी क्या जरूरत थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की जनता ने इन संकीर्ण सोच वाले लोगों की परवाह किए बिना लगातार प्रगति की है और देश ने हर मोर्चे पर ऐसे लोगों को अपने काम से करारा जवाब दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब देश बड़े लक्ष्य तय करता है, तो ऐसी आवाजें उठती हैं, लेकिन विकास का पहिया कभी रुकता नहीं है।

## दिमागी नक्सलियों और होम्योपैथी का दिलचस्प जिक्र
अपने स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक भाषण का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के भीतर छिपे वैचारिक विरोधियों और आलोचकों को एक बार फिर निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि उन्होंने लाल किले की प्राचीर से ऐसे दिमागी नक्सलियों के लिए होम्योपैथी की एक छोटी सी गोली का जिक्र किया था। जिस प्रकार होम्योपैथी की कोई भी दवा बीमारी को जड़ से खत्म करने से पहले शुरुआती दौर में उसे थोड़ा उभारती है और उसके लक्षण बाहर आते हैं, ठीक उसी तरह इस बयान के बाद वे सभी वैचारिक रूप से ग्रस्त लोग खुद-ब-खुद अपने बिलों से बाहर निकलकर सामने आ गए। प्रधानमंत्री ने कहा कि अब देश की आम जनता इन लोगों के असली चरित्र और कुत्सित मानसिकता को भली-भांति देख रही है और समझ चुकी है कि कौन देश के साथ है और कौन उसके विकास के खिलाफ खड़ा है। यह तंज सभागार में बैठे युवाओं के बीच खासी चर्चा का विषय बन गया और इस पर जमकर तालियां बजीं।

## गिलास आधा खाली नहीं बल्कि पूरा भरा है
अपने पुराने दौर को याद करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2013 के अपने एसआरसीसी दौरे के पन्नों को पलटा और बताया कि उस समय देश का माहौल किस कदर निराशाजनक था। उन्होंने पानी के गिलास के प्रसिद्ध दार्शनिक उदाहरण को दोहराते हुए समझाया कि लोगों का नजरिया अलग-अलग होता है, जहां कुछ लोग गिलास को आधा खाली देखते हैं और निराशा में डूब जाते हैं, वहीं सकारात्मक सोच वाले लोग उसे आधा पानी और आधा हवा से भरा हुआ यानी पूरा भरा हुआ मानते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि वे साल 2013 के उस कठिन और निराशा भरे दौर में भी देश की युवा शक्ति और उसकी क्षमताओं को लेकर पूरी तरह आशावादी थे। उन्होंने कहा कि जब चारों तरफ अविश्वास और हताशा का वातावरण था, तब भी उन्होंने देश के भविष्य को लेकर एक सकारात्मक किरण देखी थी और आज वह विश्वास पूरी तरह सही साबित हुआ है क्योंकि देश ने हर चुनौती से पार पाते हुए अभूतपूर्व प्रगति हासिल की है।

## साल 2013 के काले दौर और आर्थिक बदहाली की याद
युवाओं को इतिहास और उस समय की वास्तविक स्थिति से अवगत कराते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2013 की मीडिया सुर्खियों और अखबारों के पन्नों का जीवंत चित्रण किया। उन्होंने याद दिलाया कि उस दौर में देश किन गंभीर संकटों और घोटालों के दलदल में फंसा हुआ था। अखबारों की मुख्य सुर्खियां सीमा पर तैनात हमारे जवानों की शहादत, दस प्रतिशत की बेलगाम और आसमान छूती महंगाई, विश्व बैंक द्वारा भारत की जीडीपी ग्रोथ में की गई भारी कटौती, वीवीआईपी हेलीकॉप्टर खरीद सौदे में बड़े पैमाने पर हुई रिश्वतखोरी और हैदराबाद में हुए भीषण बम धमाकों जैसी डरावनी खबरों से भरी रहती थीं। उस समय भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की उन पांच सबसे कमजोर अर्थव्यवस्थाओं यानी फ्रेजाइल-5 के समूह में सिमटकर रह गई थी, जिससे निवेशकों का भरोसा पूरी तरह डगमगा गया था और देश का आर्थिक भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा था।

## मेक इन इंडिया की सफलता और मोबाइल एक्सपोर्ट
मेक इन इंडिया पहल की सफलता का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जब इस योजना की शुरुआत की गई थी, तब एक खास राजनीतिक और वैचारिक इकोसिस्टम के लोग इसका लगातार मजाक उड़ाते थे। उन्होंने कहा कि वे लोग आज भी इस राष्ट्रीय अभियान का उपहास करने से बाज नहीं आते, जबकि आज पूरी दुनिया में मेड इन इंडिया स्मार्टफोन की धूम मची हुई है। आंकड़ों का हवाला देते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि साल 2014 में जहां भारत अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए भारी मात्रा में मोबाइल फोन का आयात करता था, वहीं आज तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। वर्तमान में भारत ढाई लाख करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के मोबाइल फोन का निर्माण करके उन्हें दुनिया भर के विभिन्न देशों में सफलतापूलर्व एक्सपोर्ट कर रहा है, जो देश की विनिर्माण क्षमता का सबसे बड़ा प्रमाण है।

## डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में आया ऐतिहासिक उछाल
भारतीय सेना के आधुनिकीकरण और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के मोर्चे पर बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि एक समय था जब हमारे सशस्त्र बलों को छोटी-छोटी रक्षा जरूरतों और हथियारों के लिए भी पूरी तरह विदेशी देशों पर निर्भर रहना पड़ता था। इस लाचारी को दूर करने के लिए उनकी सरकार ने रक्षा उपकरणों की एक सख्त नेगेटिव लिस्ट तैयार की और देश की अपनी घरेलू कंपनियों को आगे बढ़ने का पूरा अवसर दिया। इसके सकारात्मक परिणाम आज सबके सामने हैं कि भारत का अपना डिफेंस प्रोडक्शन बढ़कर दो लाख करोड़ रुपये के जादुई आंकड़े पर पहुंच गया है। इसके अलावा, जो देश कभी रक्षा सामान बाहर से मंगाता था, वहां से आज हमारा डिफेंस एक्सपोर्ट जो पहले छह से सात सौ करोड़ रुपये हुआ करता था, वह छलांग लगाकर सीधे चालीस हजार करोड़ रुपये के ऊंचे स्तर को पार कर गया है।

## वर्ष 2013 के विपक्षी नेता का संयमित और मर्यादित आचरण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने राजनीतिक जीवन के एक खास संस्मरण को साझा करते हुए बताया कि जब वे साल 2013 में एसआरसीसी आए थे, तब वे केंद्र की तत्कालीन सरकार के सबसे बड़े प्रखर विरोधी और मुख्य विपक्षी पार्टी के वरिष्ठ नेता थे। उस समय राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा थी और लोगों को पूरी उम्मीद थी कि वे कॉलेज के इस बड़े मंच से तत्कालीन सत्ताधारी सरकार पर बेहद तीखे और आक्रामक राजनीतिक हमले बोलेंगे। लेकिन उन्होंने उस वक्त संस्थान की गरिमा, मर्यादा और उच्च परंपराओं का पूरा ध्यान रखा और कोई भी ओछा राजनीतिक हमला करने से परहेज किया। इसके विपरीत, उन्होंने देश की युवा पीढ़ी और जनता के सामने भारत के विकास का एक सकारात्मक, ठोस और दूरदर्शी विजन रखा था, जो यह साबित करता है कि राजनीतिक विरोध के बावजूद देशहित सर्वोपरि होना चाहिए।

## वैश्विक उथल-पुथल के बीच देश की शानदार जीडीपी ग्रोथ
दुनिया भर में जारी भू-राजनीतिक तनावों, पश्चिमी एशिया के भयानक युद्ध और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों में आ रही लगातार रुकावटों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था के मजबूत प्रदर्शन की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने इसके आंकड़े रखे। उन्होंने बताया कि मौजूदा कठिन वैश्विक परिस्थितियों के बीच भी भारत की 7.8 प्रतिशत की मजबूत जीडीपी ग्रोथ रेट देश के आंतरिक आर्थिक सामर्थ्य और रीढ़ की मजबूती को दर्शाती है। प्रधानमंत्री ने इसके पक्ष में उदाहरण देते हुए कहा कि देश के भीतर आज कार और बाइकों की बिक्री में भारी इजाफा हुआ है, बिजली की खपत रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ रही है और सीमेंट तथा स्टील के इस्तेमाल में जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। यह सब इस बात का अकाट्य सबूत है कि देश में औद्योगिक गतिविधियां, बाजार की मांग और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर अत्यंत तेजी से बढ़ रहे हैं।

## अंतरिक्ष स्टेशन से लेकर ओलंपिक खेलों तक के बड़े संकल्प
देश के युवाओं को हमेशा ऊंचे और विराट सपने देखने के लिए प्रेरित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया कि वे छोटे और सीमित लक्ष्य लेकर चलने वाले इंसानों में से नहीं हैं। उन्होंने देश की जनता के सामने भविष्य का एक बड़ा संकल्प रखते हुए कहा कि आने वाले समय में भारत अनुसंधान यानी रिसर्च, अत्याधुनिक विनिर्माण यानी मैन्युफैक्चरिंग और कृषि निर्यात यानी एग्रीकल्चरल एक्सपोर्ट के क्षेत्र में दुनिया का सिरमौर यानी सुपरपावर बनेगा। प्रधानमंत्री ने बहुत बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि आने वाले दिनों में भारत का अपना खुद का अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित होगा और देश एक दिन ऐसा आएगा जब इतने भव्य और दिव्य ओलंपिक खेलों की मेजबानी करेगा कि पूरी दुनिया उसे देखकर अचंभित रह जाएगी। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे इन बड़े लक्ष्यों को हासिल करने के लिए अपनी पूरी ऊर्जा और सामर्थ्य को झोंक दें, क्योंकि अब रुकने का समय नहीं है।

## इसका आप पर असर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एसआरसीसी संबोधन का मुख्य प्रभाव देश के आर्थिक दृष्टिकोण, स्टार्टअप संस्कृति और उच्च शिक्षा संस्थानों से जुड़े युवाओं पर पड़ा है, जो भविष्य के विकास लक्ष्यों को स्पष्ट करता है।

- **भारत में:** देश के युवाओं और स्टार्टअप उद्यमियों के लिए अंतरिक्ष अनुसंधान, रक्षा विनिर्माण और मेक इन इंडिया के तहत नए अवसरों का विस्तार होगा।
- **दिल्ली में:** दिल्ली यूनिवर्सिटी और श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के छात्रों के लिए अकादमिक परिसरों में राष्ट्रीय नीतियों और आर्थिक पहलों पर सीधा संवाद और नई प्रेरणा मिलेगी।

## सवाल-जवाब

### 1. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किस कॉलेज के शताब्दी समारोह को संबोधित किया?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) के शताब्दी समारोह को संबोधित किया।

### 2. प्रधानमंत्री ने आलोचकों को क्या संज्ञा दी?
प्रधानमंत्री ने देश के विकास कार्यों में अड़ंगा लगाने वाले आलोचकों को नाराज फूफा की संज्ञा दी।

### 3. वर्ष 2013 में भारत की अर्थव्यवस्था किस समूह में गिनी जाती थी?
वर्ष 2013 में भारत की अर्थव्यवस्था फ्रेजाइल-5 समूह में सिमटकर रह गई थी।

### 4. वर्तमान में भारत का डिफेंस प्रोडक्शन कितने स्तर पर पहुंच गया है?
वर्तमान में भारत का डिफेंस प्रोडक्शन बढ़कर दो लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है।

### 5. भारत कितने मूल्य के मोबाइल फोन एक्सपोर्ट कर रहा है?
भारत ढाई लाख करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के मोबाइल फोन दुनिया भर में एक्सपोर्ट कर रहा है।

### 6. मौजूदा वैश्विक बाधाओं के बावजूद भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट कितनी है?
मौजूदा वैश्विक बाधाओं के बावजूद भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट 7.8 प्रतिशत दर्ज की गई है।

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