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  "title": "ब्रिक्स पर पी. चिदंबरम के बयान पर गरमाई सियासत, गौरव वल्लभ ने गिनाए देश को मिले 5 बड़े लाभ",
  "summary": "कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम के ब्रिक्स को लेकर दिए गए बयान पर गौरव वल्लभ ने पलटवार करते हुए भारत को मिले पांच बड़े आर्थिक और कूटनीतिक फायदों का जिक्र किया है।",
  "content": "कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के ब्रिक्स संगठन को लेकर दिए गए बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ गई है। उन्होंने दावा किया था कि अब ब्रिक्स का कोई खास महत्व नहीं बचा है। इस बयान पर आर्थिक मामलों के जानकार प्रोफेसर गौरव वल्लभ ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने एक टीवी चैनल के कार्यक्रम में शिरकत करते हुए कहा कि पी. चिदंबरम एक अनुभवी और पढ़े-लिखे व्यक्ति हैं, इसलिए उन्हें इस बात की पूरी जानकारी होनी चाहिए कि ब्रिक्स समूह और उससे जुड़े बैंक से भारत को किस तरह के बड़े लाभ हासिल हुए हैं।\n\nब्रिक्स और न्यू डेवलपमेंट बैंक से मिले आर्थिक लाभ\nअपनी बात को आगे बढ़ाते हुए गौरव वल्लभ ने सिलसिलेवार तरीके से पांच ऐसे बड़े बिंदुओं का जिक्र किया जिनसे यह साबित होता है कि ब्रिक्स का मंच भारत के लिए कितना उपयोगी साबित हुआ है। उन्होंने देश के अलग-अलग हिस्सों में चल रही विकास परियोजनाओं का हवाला दिया जिन्हें इस समूह के वित्तीय संस्थानों से मदद मिली है।\n\nमध्य प्रदेश में सड़क परियोजना के लिए भारी फंड\nइस कड़ी में उन्होंने पहला उदाहरण देते हुए बताया कि 19 दिसंबर 2024 को ब्रिक्स के न्यू डेवलपमेंट बैंक ने मध्य प्रदेश की राज्य राजमार्ग सुधार परियोजना के लिए तीन हजार करोड़ रुपये के ऋण को मंजूरी दी थी। इस तरह के वित्तीय सहयोग से राज्यों में बुनियादी ढांचे का विकास तेजी से होता है और आम नागरिकों को सीधा लाभ मिलता है।\n\nगुवाहाटी में जलापूर्ति योजना को मिली मजबूती\nअपनी बात को पुख्ता करते हुए उन्होंने दूसरा उदाहरण दक्षिण-पूर्व गुवाहाटी जलापूर्ति योजना का दिया। इसके तहत 27 नवंबर 2025 को ब्रिक्स बैंक ने लगभग 890 करोड़ रुपये की फंडिंग मंजूर की थी। उनका यह कहना था कि इन आंकड़ों से साफ जाहिर होता है कि ब्रिक्स का प्रभाव केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जमीन पर चल रही विकास योजनाओं तक साफ तौर पर पहुंच रहा है।\n\nनिर्यात के मोर्चे पर शानदार बढ़त\nतीसरे बिंदु के रूप में उन्होंने व्यापारिक लाभ का जिक्र किया। उनका दावा था कि ब्रिक्स देशों के साथ व्यापार करने पर भारत का कुल निर्यात लगभग पचास फीसदी की जोरदार बढ़ोतरी के साथ 95.7 अरब डॉलर के आंकड़े तक पहुंच गया है। इसे उन्होंने भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा सकारात्मक पहलू बताया।\n\nयूएई के साथ व्यापार में भारी उछाल\nचौथे उदाहरण के तौर पर उन्होंने ब्रिक्स सदस्य देश यूएई का विशेष रूप से उल्लेख किया। उनके अनुसार संयुक्त अरब अमीरात के साथ भारत का निर्यात पिछले कुछ वर्षों के दौरान 124 प्रतिशत की छलांग लगाकर 37.4 अरब डॉलर पर जा पहुंचा है, जो दोनों देशों के बीच मजबूत होते व्यापारिक संबंधों को दर्शाता है।\n\nरियो सम्मेलन में आतंकवाद के खिलाफ कूटनीतिक सफलता\nपाँचवें और अंतिम बिंदु के रूप में उन्होंने कूटनीतिक मोर्चे की बात रखी। वर्ष 2025 में रियो में आयोजित हुए ब्रिक्स सम्मेलन का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि उस मंच पर पहलगाम में हुए आतंकी हमले की एक सुर में संयुक्त निंदा की गई थी। इसे उन्होंने भारत की एक बहुत बड़ी कूटनीतिक जीत करार दिया।\n\nअन्य वैश्विक मंचों की उपयोगिता और विपक्ष पर निशाना\nचर्चा के दौरान गौरव वल्लभ ने केवल ब्रिक्स तक सीमित न रहकर अन्य अंतरराष्ट्रीय मंचों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत को केवल एक संगठन से ही नहीं, बल्कि G20, क्वाड और SCO जैसे तमाम बड़े मंचों से भी अनगिनत लाभ मिले हैं। उन्होंने विस्तार से बताया कि G20 के जरिए भारत ने ग्लोबल साउथ और अफ्रीकी महाद्वीप के देशों की जोरदार आवाज उठाई है, जिससे वैश्विक पटल पर देश की भूमिका और अधिक मजबूत हुई है। इसी प्रकार क्वाड के माध्यम से भारत ने अपनी समुद्री सुरक्षा को पुख्ता किया है और प्राकृतिक आपदाओं के समय आपसी सहयोग को बढ़ाया है। शंघाई सहयोग संगठन की बात करते हुए उन्होंने कहा कि इस मंच ने भारत को अपने मुश्किल पड़ोसी देशों के साथ भी संवाद स्थापित करने का अवसर मुहैया कराया है।\n\nकांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी के नेताओं को हर मोर्चे पर परेशानी ही दिखाई देती है। चाहे वह ब्रिक्स हो, G20 हो, क्वाड हो या फिर SCO हो, हर संगठन पर सवाल उठाए जा रहे हैं। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने चिदंबरम पर तंज कसा और उन्हें फ्रस्ट्रेटेड अंकल करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि गहरी निराशा के चलते ऐसे बेबुनियाद आरोप गढ़े जा रहे हैं। हालांकि उन्होंने यह भी दोहराया कि पी. चिदंबरम बेहद बुद्धिमान हैं और वे अंतरराष्ट्रीय मंचों के वास्तविक महत्व को अच्छी तरह समझते हैं।\n\nवैश्विक तनाव और युद्ध समाप्त करने की संभावनाओं पर राय\nकार्यक्रम के दौरान जब उनसे यह सवाल पूछा गया कि क्या मौजूदा समय में दुनिया भर में चल रहे युद्ध और तनाव के माहौल को खत्म करने में इस तरह के सम्मेलन कोई ठोस फॉर्मूला तैयार कर सकते हैं, तो उन्होंने व्यावहारिक जवाब दिया। उनका कहना था कि इस बारे में अभी से कोई सटीक पूर्वानुमान नहीं लगाया जा सकता है। लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि जब दुनिया की विशाल आबादी और वैश्विक अर्थव्यवस्था में बड़ा हिस्सा रखने वाले देश एक ही मेज पर बैठकर चर्चा करते हैं, तो जटिल और गंभीर मुद्दों के समाधान के लिए बातचीत के नए रास्ते जरूर खुलते हैं।\n\nइसका आप पर असर\nब्रिक्स और अंतरराष्ट्रीय मंचों को लेकर चल रहे इस राजनीतिक और आर्थिक वैचारिक द्वंद्व का देश की नीतियों पर सीधा असर पड़ता है।\n\n• भारत में: ब्रिक्स बैंक से मिलने वाले हजारों करोड़ रुपये के लोन देश के विभिन्न राज्यों में सड़क और जलापूर्ति जैसी बुनियादी परियोजनाओं को गति देते हैं। इससे क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलता है और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश की रणनीतिक स्थिति मजबूत होती है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह पूरा राजनीतिक विवाद कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम द्वारा ब्रिक्स संगठन की प्रासंगिकता पर उठाए गए सवाल के बाद शुरू हुआ।\n\n• बयान की पृष्ठभूमि: पी. चिदंबरम ने सार्वजनिक रूप से यह दावा किया था कि अब ब्रिक्स संगठन का कोई खास मतलब नहीं रह गया है, जिसके बाद आर्थिक विश्लेषकों और अन्य राजनीतिक चेहरों ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी।\n• आर्थिक और कूटनीतिक आधार: आर्थिक मामलों के जानकारों ने इस बात पर जोर दिया कि मध्य प्रदेश और गुवाहाटी जैसी विकास परियोजनाओं के लिए न्यू डेवलपमेंट बैंक से मिले भारी कर्ज और वैश्विक मंचों पर बढ़े निर्यात के आंकड़े इस संगठन की उपयोगिता को स्पष्ट रूप से साबित करते हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. पी. चिदंबरम ने ब्रिक्स को लेकर क्या बयान दिया था?\nपी. चिदंबरम ने बयान दिया था कि ब्रिक्स का अब कोई मतलब नहीं रह गया है।\n\n2. गौरव वल्लभ ने ब्रिक्स के समर्थन में कौन सा मुख्य उदाहरण दिया?\nगौरव वल्लभ ने मध्य प्रदेश राजमार्ग परियोजना के लिए 19 दिसंबर 2024 को ब्रिक्स बैंक से मिले 3000 करोड़ रुपये के लोन का उदाहरण दिया।\n\n3. गुवाहाटी जलापूर्ति योजना को ब्रिक्स बैंक से कितनी राशि मंजूर हुई?\nगुवाहाटी जलापूर्ति योजना के लिए 27 नवंबर 2025 को करीब 890 करोड़ रुपये का लोन मंजूर किया गया था।\n\n4. ब्रिक्स देशों के साथ भारत का एक्सपोर्ट कितना बढ़ गया है?\nभारत का ब्रिक्स देशों के साथ एक्सपोर्ट करीब 50 फीसदी बढ़कर 95.7 अरब डॉलर हो गया है।\n\n5. यूएई के साथ निर्यात में कितनी वृद्धि दर्ज की गई है?\nयूएई के साथ भारत का निर्यात पिछले कुछ वर्षों में 124 फीसदी बढ़कर 37.4 अरब डॉलर हो गया है।",
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  "category": "राजनीति",
  "publishedAt": "2026-09-10",
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