# राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और पीएम नरेंद्र मोदी ने मनाया दशहरा, देश की एकता पर दिया जोर

> देशभर में विजयादशमी का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में अलग-अलग कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हुए बुराई पर अच्छाई की जीत के इस पर्व पर जनता को संबोधित किया।

**Type:** article · **Category:** राजनीति · **Published:** 2026-10-20 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/politics/president-droupadi-murmu-aur-pm-narendra-modi-ne-manaya-dussehra-desh-ki-ekta-par-diya-zor-49825 · **Language:** Hindi
**Tags:** दशहरा, द्रौपदी मुर्मू, नरेंद्र मोदी, विजयादशमी, रामलीला, दिल्ली

पूरे देश में विजयादशमी का पावन पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है और विभिन्न स्थानों पर रावण दहन के कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने द्वारका सेक्टर-10 में आयोजित समारोह में भाग लिया, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्वी दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन में दशहरा उत्सव की शोभा बढ़ाई। इन कार्यक्रमों के दौरान देश के शीर्ष नेताओं ने भगवान श्रीराम के जीवन आदर्शों को याद करते हुए समाज में समानता, समावेशिता और जनकल्याण के मूल्यों को अपनाने पर विशेष बल दिया। राष्ट्रपति मुर्मू ने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि आज का भारत समानता के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है, वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने सुशासन के मूल मंत्र को रेखांकित किया।

 

## **द्वारका में राष्ट्रपति ने किया प्रतीकात्मक रावण दहन**

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने द्वारका सेक्टर-10 स्थित श्री राम लीला कमिटी मैदान पहुंचकर दशहरा उत्सव में शिरकत की। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने रावण के पुतले की तरफ प्रतीकात्मक तीर चलाकर उसका दहन किया। इस अवसर पर जनसमूह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया भर में आयोजित होने वाली रामलीलाओं के जरिए करोड़ों लोग श्रीराम की कथाओं से मिलने वाले महान संदेशों को अपने जीवन में उतारते हैं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि हमारी प्राचीन संस्कृति में प्रकृति के प्रति आदर का भाव रहा है, जो हमारे संविधान के मूल कर्तव्यों में भी स्पष्ट रूप से झलकता है। संविधान के तहत नागरिकों का यह दायित्व है कि वे झीलों, नदियों, जंगलों और वन्यजीवों की पूरी सुरक्षा करें। उन्होंने कहा कि यह देखकर अत्यंत हर्ष होता है कि आधुनिक भारत भगवान राम की कथाओं में निहित समावेशिता और समानता के सिद्धांतों के अनुरूप निरंतर प्रगति कर रहा है। इस संबंध में अधिक जानकारी एक्स पर साझा की गई पोस्ट में देखी जा सकती है।

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## **पूर्वी दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन**

पूर्वी दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन में दशहरा समारोह में शामिल होते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को पर्व की शुभकामनाएं दीं और भगवान राम, मां जानकी तथा बजरंगबली को नमन किया। उन्होंने कहा कि आज देश का प्रत्येक हिस्सा राममय हो चुका है और जगह-जगह रामलीलाओं का मंचन हो रहा है। उन्होंने कहा कि यह परंपरा आतंक और अत्याचार के अंत का संदेश देने के साथ-साथ असत्य पर सत्य की सनातन विजय का गहरा विश्वास जगाती है, जो केवल एक त्योहार न होकर भारत की जीवंत प्राण ऊर्जा का प्रतीक है। इस आयोजन से जुड़ी झलकियों को एक्स प्लेटफॉर्म पर देखा जा सकता है।

 

## **सुशासन और जनसेवा को बताया सबसे बड़ा धर्म**

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में आगे कहा कि हजारों वर्षों से इस देश की संस्कृति और पूर्वजों ने श्रीराम की पूजा सिर्फ इसलिए नहीं की कि उन्होंने रावण का वध किया था, बल्कि इसलिए भी की क्योंकि उनके आदर्श मानव इतिहास में अद्वितीय हैं। उन्होंने सुशासन का जिक्र करते हुए कहा कि रामराज्य का अर्थ ऐसा शासन है जहां किसी भी तरह का भेदभाव न हो, हर नागरिक को समान अवसर मिलें और सत्ता का उपयोग शासन चलाने के लिए नहीं बल्कि जनहित के लिए किया जाए। उन्होंने आह्वान किया कि जनता को ही जनार्दन मानकर नागरिक देवो भव के मार्ग पर चलना चाहिए और समाज के सबसे गरीब तथा वंचित वर्ग की सेवा को हमेशा सर्वोपरि रखना चाहिए।

 

## **सामूहिक शक्ति से हर असंभव लक्ष्य संभव**

संकटों का सामना करने के तौर-तरीकों पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कितनी भी बड़ी चुनौती सामने क्यों न आ जाए, कभी भी दूसरों के सहारे नहीं बैठना चाहिए। व्यक्ति को अपनी आंतरिक ताकत और उपलब्ध संसाधनों पर भरोसा रखना चाहिए ताकि अपने कठिन परिश्रम से समाधान निकाला जा सके। उन्होंने याद दिलाया कि प्रभु राम ने हमें सिखाया है कि रास्ते की बाधाएं कभी भी यात्रा को रोक नहीं सकतीं। विशाल समुद्र सामने था और लंका की दूरी भी बहुत अधिक थी, लेकिन अडिग संकल्प के कारण ही सामूहिक जनशक्ति को जागृत किया गया, जिससे वह लक्ष्य संभव हो सका जिसे पहले असंभव माना जा रहा था।

 

## **खोई हुई सांस्कृतिक धरोहरों की वापसी**

देश की सांस्कृतिक विरासत का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सदियों तक देश की अमूल्य धरोहरों को विदेशी ताकतों द्वारा लूटा गया और बाहर ले जाया गया, लेकिन अब उन प्राचीन कलाकृतियों और मूर्तियों को वापस लाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले 12 वर्षों के दौरान साढ़े छह सौ से अधिक प्राचीन मूर्तियों को सुरक्षित भारत वापस लाया गया है और आज देश वैश्विक स्तर पर अपने सांस्कृतिक केंद्रों को एक नई पहचान दिला रहा है। यह पर्व हमें यह साहस देता है कि शत्रु कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, लेकिन यदि हम सत्य और मानवता के पक्ष में खड़े हैं तो अंत में विजय हमारी ही होती है।

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## **राष्ट्रहित में एकजुट होने का आह्वान**

अपने भाषण के अंत में प्रधानमंत्री ने राष्ट्र की एकता और सुरक्षा पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश की सभी संस्थाओं और राजनीतिक दलों को राष्ट्रहित के मुद्दों पर एक मंच पर आना होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि समाज को विभाजित करने वाली प्रवृत्तियां, देश को नुकसान पहुंचाने वाली ताकतें और हमारी संस्कृति के प्रति द्वेष रखने वाली मानसिकताएं राष्ट्र की दुश्मन हैं, जिनका मिलकर सामना करना होगा। इस विषय पर एक्स पर पोस्ट किए गए संदेश में विस्तार से बताया गया है।

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## इसका आप पर असर
यह समाचार देश भर में मनाए जा रहे पर्व और शीर्ष नेताओं के संदेशों से जुड़ा है, जिसका सीधा असर आम नागरिकों के दैनिक जीवन पर नहीं पड़ता।

- **राष्ट्रीय स्तर पर:** देशभर में सुरक्षा व्यवस्था और यातायात प्रबंधन को कड़े इंतजामों के तहत संचालित किया जाता है। भीड़भाड़ वाले आयोजनों के दौरान नागरिकों को स्थानीय प्रशासन की एडवाइजरी का पालन करना चाहिए।

- **दिल्ली में:** द्वारका और आईपी एक्सटेंशन जैसे इलाकों में मुख्य कार्यक्रमों के चलते यातायात डायवर्जन लागू किए गए। वाहन चालकों को जाम से बचने के लिए तय वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करना पड़ा।

## ऐसा क्यों हुआ
विजयादशमी का यह पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय के प्रतीक के रूप में हर साल मनाया जाता है। राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री द्वारा इन आयोजनों में भाग लेना सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित रखने की दिशा में एक अहम कदम है।

- **सांस्कृतिक परंपरा:** देश भर में रामलीलाओं का मंचन और रावण दहन सदियों पुरानी सनातन संस्कृति और मूल्यों को जीवंत रखने के लिए किया जाता है।

- **राष्ट्रीय एकता:** प्रधानमंत्री द्वारा समाज को तोड़ने वाली ताकतों के खिलाफ एकजुट होने का आह्वान देश की आंतरिक सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया है।

- **धरोहर संरक्षण:** सरकार द्वारा पिछले 12 वर्षों में प्राचीन मूर्तियों को वापस लाने के प्रयास सांस्कृतिक पुनरुत्थान की नीति के तहत किए जा रहे हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दशहरा समारोह में कहाँ हिस्सा लिया?
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नई दिल्ली के द्वारका सेक्टर-10 में दशहरा समारोह में भाग लिया।

### 2. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किस स्थान पर रावण दहन कार्यक्रम में शिरकत की?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्वी दिल्ली के आईपी एक्सटेंशन में दशहरा समारोह में हिस्सा लिया।

### 3. राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में किस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की?
उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि आज का भारत भगवान राम की कथा में दर्शाए गए समानता और समावेशिता के आदर्शों के अनुरूप आगे बढ़ रहा है।

### 4. प्रधानमंत्री मोदी ने पिछले 12 वर्षों में किन प्राचीन वस्तुओं की वापसी का जिक्र किया?
उन्होंने पिछले 12 वर्षों में साढ़े 600 से ज्यादा प्राचीन मूर्तियों को भारत वापस लाने का उल्लेख किया।

### 5. पीएम मोदी ने रामराज्य का क्या अर्थ बताया?
रामराज्य का अर्थ ऐसा शासन है जहाँ किसी के प्रति भेदभाव न हो, सभी को न्याय और समान अवसर मिले तथा सत्ता का उद्देश्य जनकल्याण हो।

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