पंजाब चुनाव 2027 से पहले बदला सियासी समीकरण, परिसीमन बिल पर पीएम मोदी से मुलाकात के बाद अकाली दल ने दिया समर्थन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के एक दिन बाद शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने परिसीमन बिल और महिला आरक्षण कानून को तुरंत लागू करने का समर्थन किया है. इस नए राजनीतिक कदम से 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी और अकाली दल के फिर से करीब आने की अटकलें तेज हो गई हैं. पंजाब के राजनीतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण मोड़ देखने को मिल रहा है, जहां पुराने राजनीतिक समीकरणों के फिर से बनने की चर्चाएं तेज हो गई हैं. शिरोमणि अकाली दल ने केंद्र सरकार के प्रस्तावित परिसीमन बिल के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया है. इसके साथ ही पार्टी ने महिला आरक्षण कानून को भी बिना किसी देरी के तत्काल लागू करने की मांग उठाई है. अकाली दल के इस अचानक बदले रुख ने राज्य की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है. इस फैसले के बाद सबसे प्रमुख सवाल यह उठ रहा है कि क्या वर्ष 2027 में होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल का दशकों पुराना गठबंधन एक बार फिर जीवित हो सकता है. परिसीमन और महिला आरक्षण पर अकाली दल का नया स्टैंड अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने एक सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से अपनी पार्टी की आधिकारिक नीति को स्पष्ट किया. उन्होंने कहा कि शिरोमणि अकाली दल एक ऐसी निष्पक्ष, पारदर्शी और समान परिसीमन प्रक्रिया का पक्षधर है जो देश के सभी राज्यों को बराबरी का प्रतिनिधित्व प्रदान करे. अकाली दल ने केंद्र सरकार के उस विचार का समर्थन किया है जिसमें देश के प्रत्येक राज्य में सीटों की संख्या में समान रूप से 50 प्रतिशत की वृद्धि करने का सुझाव शामिल है. सुखबीर सिंह बादल ने बल देकर कहा कि परिसीमन प्रक्रिया और महिला आरक्षण कानून दोनों को अब और अधिक टालने के बजाय तुरंत प्रभाव से पूरे देश में लागू किया जाना चाहिए. अप्रैल में विरोध से लेकर अब समर्थन तक का सफर परिसीमन मुद्दे पर शिरोमणि अकाली दल का यह नया रुख काफी ध्यान खींचने वाला है क्योंकि कुछ ही महीने पहले पार्टी का रुख इसके बिल्कुल विपरीत था. इस साल अप्रैल के महीने में जब परिसीमन से जुड़ा प्रस्ताव संसद में चर्चा और मतदान के लिए लाया गया था, तब अकाली दल ने इसका कड़ा विरोध किया था. उस समय पार्टी नेतृत्व की मुख्य चिंता यह थी कि प्रस्तावित ढांचे के तहत पंजाब को पड़ोसी राज्यों की तुलना में कम विधायी और संसदीय सीटें मिलेंगी, जिससे राज्य का राजनीतिक महत्व घट सकता है. इसी वजह से अप्रैल में अकाली दल ने अन्य विपक्षी दलों के साथ मिलकर इस बिल के खिलाफ मतदान किया था. हालांकि, अब पार्टी ने एक स्पष्ट शर्त के साथ केंद्र के प्रस्ताव का समर्थन किया है. अकाली दल का कहना है कि यदि सभी राज्यों में एक समान दर से 50 प्रतिशत सीटें बढ़ाई जाती हैं, तो वह इस कदम के साथ खड़ी है. प्रधानमंत्री मोदी और सुखबीर बादल की मुलाकात का प्रभाव राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अकाली दल के इस बदले हुए रुख के पीछे उच्च स्तरीय राजनीतिक संवाद की भूमिका है. परिसीमन बिल पर समर्थन की घोषणा करने से ठीक एक दिन पहले, शुक्रवार को सुखबीर सिंह बादल ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी. इस महत्वपूर्ण बैठक के तुरंत बाद राष्ट्रीय स्तर के एक बड़े मुद्दे पर अकाली दल का केंद्र सरकार के रुख के अनुकूल बयान आना राजनीतिक गलियारों में नए समीकरणों की ओर इशारा कर रहा है. हालांकि दोनों में से किसी भी दल ने औपचारिक रूप से दोबारा साथ आने की आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस कदम से दोनों दलों के बीच जमी बर्फ पिघलने के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं. 2020 के अलगाव के बाद 2027 के भावी सियासी समीकरण बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल के बीच का ऐतिहासिक रिश्ता वर्ष 2020 में तीन केंद्रीय कृषि कानूनों को लेकर उत्पन्न हुए भारी विरोध प्रदर्शनों के दौरान टूट गया था. उस समय अकाली दल ने केंद्र सरकार से अपना मंत्री वापस बुला लिया था और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से अलग होने का फैसला किया था. इसके बाद वर्ष 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव और वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव दोनों पार्टियों ने एक-दूसरे के खिलाफ स्वतंत्र रूप से लड़े. 2024 के आम चुनावों में पृथक रूप से चुनाव लड़ने का परिणाम दोनों दलों के लिए उत्साहजनक नहीं रहा. पंजाब की 13 लोकसभा सीटों में से बीजेपी अपना खाता भी नहीं खोल सकी और शून्य सीटों पर सिमट गई, जबकि शिरोमणि अकाली दल केवल एक सीट ही हासिल कर पाया. ऐसे में 2027 के आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव को देखते हुए दोनों दलों को एक बार फिर साथ आने में परस्पर राजनीतिक लाभ नजर आ सकता है. सिख परंपरा और महिला आरक्षण पर सुखबीर बादल का तर्क अपनी मांग को मजबूती से रखते हुए सुखबीर सिंह बादल ने केवल परिसीमन का ही समर्थन नहीं किया, बल्कि महिला आरक्षण कानून को तुरंत प्रभाव से लागू करने पर विशेष जोर दिया. उन्होंने कहा कि अकाली दल का यह रुख महान सिख गुरुओं की उस पवित्र परंपरा और सोच पर आधारित है जिसने समाज में महिलाओं के सम्मान, समानता और समान अधिकारों की वकालत की है. उन्होंने अपनी बात के प्रमाण के रूप में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के चुनावों का उल्लेख किया, जहां महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था पहले से सफलतापूर्वक लागू है. उन्होंने कहा कि जब सिख धार्मिक संस्थाओं में महिलाओं को बराबरी का अधिकार दिया जा सकता है, तो देश की लोकतांत्रिक प्रणाली में भी महिलाओं को उनका हक देने में अब कोई विलंब नहीं होना चाहिए. कांग्रेस पार्टी का कड़ा रुख और पवन खेड़ा की चुनौती अकाली दल के इस नए रुख पर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने केंद्र सरकार और अकाली दल के इस तालमेल पर सवाल उठाए हैं. पवन खेड़ा ने केंद्र सरकार को खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि सरकार के पास परिसीमन को लेकर सीटों में 50 प्रतिशत की समान वृद्धि जैसी कोई ठोस योजना या प्रस्ताव है, तो उसे तुरंत संसद के पटल पर प्रस्तुत किया जाना चाहिए ताकि उस पर पारदर्शी बहस हो सके. कांग्रेस का मानना है कि परिसीमन का विषय बेहद संवेदनशील है और इसे केवल राजनीतिक गठबंधनों को साधने का जरिया नहीं बनाया जाना चाहिए. पंजाब की चुनावी राजनीति पर इसका संभावित असर सुखबीर सिंह बादल की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई मुलाकात और उसके बाद परिसीमन बिल पर समर्थन की घोषणा, इन दोनों घटनाओं ने पंजाब की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है. भले ही 2027 के विधानसभा चुनाव में अभी समय बाकी है, लेकिन बीजेपी और अकाली दल दोनों के लिए अपना अस्तित्व और जनाधार बचाए रखना बेहद जरूरी है. अलग-अलग चुनाव लड़कर देख चुके दोनों दल अब यह अच्छी तरह समझ रहे हैं कि पंजाब के चुनावी समर में अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए पुराना गठबंधन फिर से जीवित करना एक व्यावहारिक विकल्प हो सकता है. हालांकि अभी तक गठबंधन को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन इस हालिया घटनाक्रम से पंजाब के सियासी गलियारों में पुरानी दोस्ती के पुनरुद्धार की सुगबुगाहट तेज हो गई है. इसका आप पर असर भारत में: केंद्र सरकार के परिसीमन प्रस्ताव से संसद और विधानसभा सीटों के पुनर्निर्धारण पर व्यापक असर पड़ेगा, जिससे देश के विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधित्व संतुलन में बदलाव आ सकता है. पंजाब में: 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी और अकाली दल के संभावित गठबंधन से राज्य का चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल सकता है और मतदाताओं के सामने नया राजनीतिक विकल्प उभरेगा. सवाल-जवाब 1. अकाली दल ने परिसीमन बिल पर क्या नया रुख अपनाया है? शिरोमणि अकाली दल ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल का समर्थन करने का ऐलान किया है, बशर्ते सभी राज्यों में सीटों की संख्या में समान रूप से 50 प्रतिशत की वृद्धि की जाए. 2. सुखबीर सिंह बादल ने परिसीमन के साथ किस अन्य कानून को लागू करने की मांग की है? उन्होंने महिला आरक्षण कानून को बिना किसी और देरी के तत्काल प्रभाव से लागू करने की मांग की है. 3. अप्रैल में संसद में परिसीमन बिल पर अकाली दल का क्या रुख था? अप्रैल में संसद में जब यह बिल पेश किया गया था, तब अकाली दल ने इसका विरोध किया था और विपक्ष के साथ मिलकर इसके खिलाफ वोट दिया था. 4. बीजेपी और अकाली दल का गठबंधन कब और क्यों टूटा था? दोनों दलों का दशकों पुराना गठबंधन वर्ष 2020 में तीन कृषि कानूनों को लेकर हुए विवाद और विरोध प्रदर्शनों के बाद टूट गया था. 5. 2024 के लोकसभा चुनाव में पंजाब में बीजेपी और अकाली दल का प्रदर्शन कैसा रहा? 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी पंजाब में एक भी सीट नहीं जीत सकी थी, जबकि अकाली दल को केवल एक सीट पर सफलता मिली थी. 6. कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने अकाली दल के समर्थन पर क्या प्रतिक्रिया दी? कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने केंद्र सरकार को चुनौती दी कि यदि उसके पास ऐसा कोई स्पष्ट प्रस्ताव है तो उसे तुरंत संसद के पटल पर लाया जाना चाहिए. https://trendkia.com/politics/punjab-chunava-2027-se-pahale-badala-siyasi-samikarana-parisimana-bila-para-pm-modi-se-mulakata-ke-bada-akali-dal-ne-diya-samartha-15144 TrendKia — Har trend, sabse pehle.