पंजाब पीएससी मेन्स नतीजों में धांधली का आरोप, भाजपा ने ‘पेपर लीक माफिया’ पर AAP को घेरा पंजाब लोक सेवा आयोग की मेन्स परीक्षा के परिणाम घोषित होते ही भाजपा ने आम आदमी पार्टी सरकार पर भ्रष्ट तरीकों से अभ्यर्थियों के चयन का आरोप लगाया है। पार्टी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने दावा किया कि बिना पंजीकरण वाले उम्मीदवारों को पास किया गया और एक ही परीक्षा केंद्र से 24.2 प्रतिशत अभ्यर्थी चुने गए। पंजाब लोक सेवा आयोग की प्रांतीय नागरिक सेवा मेन्स परीक्षा के परिणाम जारी होते ही बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। भारतीय जनता पार्टी ने राज्य की सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी सरकार पर प्रशासनिक भर्ती प्रक्रिया में भारी धांधली और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि राज्य में नशीले पदार्थों के कारोबार के बाद अब सत्ताधारी दल के शीर्ष नेतृत्व के संरक्षण में संगठित पेपर लीक माफिया सक्रिय रूप से काम कर रहा है। प्रशासनिक नतीजों में धांधली और चयन प्रक्रिया पर सवाल भाजपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि पंजाब पीएससी मेन्स परीक्षा के हाल ही में घोषित परिणामों में कई चौंकाने वाली गड़बड़ियां सामने आई हैं। उनके अनुसार राज्य के युवाओं और प्रतियोगी छात्रों ने इस चयन प्रक्रिया पर सीधे सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि परिणाम सूची में ऐसे अभ्यर्थियों के नाम भी शामिल हैं, जिन्होंने इस परीक्षा के लिए औपचारिक पंजीकरण तक नहीं कराया था। बिना आवेदन या पंजीकरण के उम्मीदवारों का चयन सीधे तौर पर परीक्षा एजेंसी और सरकारी तंत्र की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है। एक ही परीक्षा केंद्र से भारी संख्या में चयन पर घेरा प्रेस कॉन्फ्रेंस में आंकड़ों का हवाला देते हुए भाजपा ने बताया कि कुल सफल अभ्यर्थियों में से 24.2 प्रतिशत उम्मीदवार केवल एक ही परीक्षा केंद्र से चुने गए हैं। इसके विपरीत, उसी केंद्र के बिल्कुल समीप स्थित दूसरे परीक्षा केंद्र से महज दो प्रतिशत अभ्यर्थियों का चयन हुआ। एक ही केंद्र से लगभग एक-चौथाई परीक्षार्थियों का उत्तीर्ण होना किसी भी सामान्य परीक्षा पैटर्न से परे है। पार्टी ने आरोप लगाया कि इतनी बड़ी विसंगति बिना प्रशासनिक मिलीभगत और सत्ता के सीधे हस्तक्षेप के संभव नहीं हो सकती। राजनीतिक गठजोड़ और साक्षात्कार प्रक्रिया के उल्लंघन का दावा भाजपा ने यह मुद्दा भी उठाया कि यह परीक्षा मूल रूप से वर्ष 2020 में आयोजित की गई थी और इसके परिणाम पिछले दो वर्षों से लंबित रखे गए थे। इसके अलावा, राज्य सेवा अधिकारी बनाने के लिए निर्धारित अनिवार्य साक्षात्कार प्रक्रिया के पालन पर भी सवाल उठाए गए हैं। जिस पटियाला जिले के परीक्षा केंद्र से करीब 25 प्रतिशत अभ्यर्थी पास घोषित हुए हैं, वह क्षेत्र आम आदमी पार्टी के विधायक और कांग्रेस सांसद के निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत आता है। भाजपा प्रवक्ता ने सवाल खड़ा किया कि क्या इस पूरे मामले में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच कोई गुप्त सहमति या मिलीभगत रही है। इसका आप पर असर यह विवाद पंजाब में राज्य प्रशासनिक सेवाओं की परीक्षा देने वाले हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य और सरकारी भर्ती प्रणाली की पारदर्शिता से सीधे जुड़ा हुआ है। • भारत में: राज्य स्तरीय सिविल सेवा परीक्षाओं में बार-बार लगने वाले धांधली के आरोपों से देश भर में प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता पर छात्रों का भरोसा कमजोर होता है। विभिन्न राज्यों में निष्पक्ष परीक्षा आयोगों के गठन की मांग तेजी से जोर पकड़ सकती है। • पंजाब में: महीनों से पीएससी नतीजों का इंतजार कर रहे स्थानीय युवाओं के बीच गहरी निराशा और अनिश्चितता का माहौल बन गया है। इस विवाद के कारण भर्ती प्रक्रिया पर कानूनी रोक या पुनर्जांच की संभावना से चयनित और गैर-चयनित दोनों अभ्यर्थियों का समय लटक सकता है। • प्रतियोगी छात्रों के लिए: परीक्षा परिणामों में कथित विसंगतियों के खिलाफ छात्र संगठन और अभ्यर्थी विरोध प्रदर्शन या अदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं। आने वाली भर्ती परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों को अपनी रणनीति और सरकारी बयानों पर नजर रखनी होगी। • प्रशासनिक व्यवस्था पर: राज्य लोक सेवा आयोग को अपनी विश्वसनीयता साबित करने के लिए पारदर्शी उत्तर कुंजी और सेंटर-वार आंकड़े सार्वजनिक करने का दबाव रहेगा। भविष्य में केंद्रों के आवंटन और मूल्यांकन नियमों में सख्त बदलाव किए जा सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ यह राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद पंजाब लोक सेवा आयोग द्वारा दो साल से लंबित प्रांतीय नागरिक सेवा परीक्षा के नतीजों की अचानक घोषणा के बाद पैदा हुआ है। • देरी से जारी नतीजे: वर्ष 2020 में आयोजित मुख्य परीक्षा के परिणाम दो साल तक अटके रहने के कारण अभ्यर्थियों और विपक्षी दलों में पहले से असंतोष व्याप्त था। • आंकड़ों में असमानता: एक ही केंद्र से 24.2 प्रतिशत चयन और पड़ोसी केंद्र से केवल 2 प्रतिशत चयन के चौंकाने वाले आंकड़ों ने अनियमितताओं के संदेह को जन्म दिया। • गैर-पंजीकृत अभ्यर्थियों का मुद्दा: स्थानीय अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि रोल नंबर और चयन सूची में ऐसे नाम शामिल हैं जिनके पास वैध पंजीकरण प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं थे। • विपक्षी दलों की आक्रामकता: भाजपा ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी को भुनाते हुए सत्ताधारी दल पर भ्रष्टाचार और सांठगांठ के गंभीर आरोप लगाकर राजनीतिक दबाव बनाया। सवाल-जवाब 1. भाजपा ने पंजाब पीएससी मेन्स नतीजों पर मुख्य रूप से क्या आरोप लगाए हैं? भाजपा ने आरोप लगाया है कि बिना रजिस्ट्रेशन वाले उम्मीदवारों का चयन किया गया और पटियाला के एक ही परीक्षा केंद्र से 24.2 प्रतिशत अभ्यर्थी पास हुए हैं। 2. पंजाब पीसीएस मेन्स परीक्षा मूल रूप से कब आयोजित की गई थी? यह परीक्षा मूल रूप से वर्ष 2020 में आयोजित की गई थी और इसके परिणाम दो साल तक लंबित रहने के बाद हाल ही में घोषित किए गए हैं। 3. पटियाला जिले के परीक्षा केंद्र को लेकर क्या विवाद है? पटियाला के एक सेंटर से कुल सफल अभ्यर्थियों के 24.2% चुने गए, जबकि उसके पास वाले सेंटर से केवल 2% अभ्यर्थी ही पास हो सके। 4. भाजपा के किस प्रवक्ता ने इस मुद्दे पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की? भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके यह आरोप लगाए। https://trendkia.com/politics/punjab-pcs-mensa-natijon-men-dhandhali-ka-aropa-bjp-ne-pepara-lika-maphiya-para-aap-ko-ghera-56979 TrendKia — Har trend, sabse pehle.