# राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ मार्च में दिखीं नेहा बोरा, कौन हैं आइसा अध्यक्ष?

> दिल्ली में इंडिया गठबंधन के सुप्रीम कोर्ट मार्च के दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा के नजर आने पर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।

**Type:** article · **Category:** राजनीति · **Published:** 2026-10-12 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/politics/rahul-gandhi-aur-priyanka-gandhi-ke-sath-march-me-dikhin-neha-bora-47043 · **Language:** Hindi
**Tags:** नेहा बोरा, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, आइसा, इंडिया गठबंधन, सुप्रीम कोर्ट मार्च, दिल्ली समाचार, राजनीति

दिल्ली की सड़कों पर सोमवार यानी 12 अक्टूबर 2026 को हुए इंडिया गठबंधन के सुप्रीम कोर्ट मार्च के दौरान एक अलग ही राजनीतिक तस्वीर देखने को मिली। कांग्रेस के कई दिग्गज और युवा चेहरे लंबे समय से संसद से लेकर सड़क तक चर्चा में बने रहते हैं, लेकिन इस मार्च में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ वामपंथी छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन यानी आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा की मौजूदगी ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। भीड़ के बीच राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ उनके कदमताल मिलाने और राहुल द्वारा कंधे पर हाथ रखकर रास्ता बनाने के दृश्य ने नई राजनीतिक चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

 

## मार्च के दौरान दिखा खास राजनीतिक तालमेल
 इंडिया गठबंधन की तरफ से निकाले गए इस मार्च की कई तस्वीरें और वीडियो सामने आए, लेकिन जिस दृश्य ने सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोरीं, वह राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और नेहा बोरा का एक साथ चलना था। मार्च के दौरान दिल्ली की सड़कों पर भारी भीड़ जुटी हुई थी और ऐसे माहौल में आगे बढ़ना आसान नहीं था। सामने आए वीडियो फुटेज में प्रियंका गांधी और नेहा बोरा आगे-आगे चलती नजर आईं, जबकि राहुल गांधी उनके ठीक पीछे रहकर भीड़ से उन्हें सुरक्षित रास्ता देते दिखाई दिए। इस दौरान राहुल गांधी ने नेहा बोरा और अपनी बहन प्रियंका गांधी के कंधे पर हाथ रखकर उन्हें आगे बढ़ने का इशारा भी किया।

 

## कौन हैं छात्र नेता नेहा बोरा?
 इस पूरे घटनाक्रम के बाद से ही नेहा बोरा देश भर में चर्चा का विषय बन गई हैं। नेहा बोरा ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, जो वामपंथी विचारधारा से जुड़ा एक प्रमुख छात्र संगठन है। इस मार्च में उनकी मौजूदगी ने इस बात को रेखांकित किया कि विपक्षी दलों के साथ अब छात्र आंदोलन की आवाजें भी मजबूती से जुड़ रही हैं। जहां एक तरफ राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा कांग्रेस पार्टी का शीर्ष नेतृत्व संभाल रहे थे, वहीं नेहा बोरा छात्र राजनीति और युवा वर्ग के प्रतिनिधित्व के तौर पर उस मार्च का हिस्सा थीं।

 

## किस बड़े मुद्दे को लेकर निकाला गया था मार्च?
 इंडिया गठबंधन की तरफ से यह मार्च मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका दायर करने के उद्देश्य से निकाला गया था। विपक्षी दलों ने इस दौरान कथित वोट चोरी और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर से जुड़े गंभीर मुद्दों को उठाया। विपक्षी नेता चुनावी प्रक्रिया में हो रही कथित अनियमितताओं को लेकर लगातार सवाल खड़े कर रहे हैं और इसी सिलसिले में वे अपनी बात सुप्रीम कोर्ट के सामने रखना चाहते थे। इस मार्च के लिए सभी नेता पहले कॉन्स्टिट्यूशन क्लब से बसों द्वारा बाराखंभा रोड पहुंचे और वहां से सुप्रीम कोर्ट की तरफ पैदल मार्च किया।

 

## कड़ी सुरक्षा के बीच राजनीतिक संदेश
 विपक्षी दलों के इस मार्च को देखते हुए दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने कड़े इंतजाम किए थे और रास्ते में कई जगहों पर बैरिकेडिंग भी की गई थी। इसके बावजूद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और नेहा बोरा की एक साथ चलती तस्वीर ने एक बड़ा राजनीतिक संदेश देने का काम किया। राजनीतिक गलियारों में अब इस बात की चर्चा शुरू हो गई है कि क्या कांग्रेस पार्टी वामपंथ से आने वाले इन युवा चेहरों को अपने साथ जोड़कर एक नया राजनीतिक समीकरण तैयार करने की कोशिश कर रही है।

## इसका आप पर असर
इस राजनीतिक घटनाक्रम का आम नागरिकों और पाठकों पर सीधा कोई आर्थिक या प्रशासनिक असर नहीं है, लेकिन यह देश की बदलती राजनीतिक दिशा को जरूर प्रभावित करता है।

- **देश भर में:** विपक्षी दलों और छात्र संगठनों के बीच संभावित नजदीकियों से राष्ट्रीय स्तर पर नए राजनीतिक समीकरण बन सकते हैं, जिसका असर आगामी चुनावों पर पड़ सकता है।

- **दिल्ली में:** मार्च और वीआईपी मूवमेंट के दौरान सड़कों पर हुई बैरिकेडिंग और सुरक्षा व्यवस्था के कारण आम जनता और यात्रियों को यातायात की भारी समस्या का सामना करना पड़ा।

## ऐसा क्यों हुआ
यह पूरा राजनीतिक घटनाक्रम और मार्च एक सुनियोजित रणनीति के तहत सामने आया, जिसके पीछे चुनावी प्रक्रिया और प्रशासनिक कदमों से जुड़े कई कारण थे।

- **निर्वाचन आयोग पर सवाल:** विपक्षी दलों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका दायर करने के लिए यह कदम उठाया क्योंकि वे चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से असंतुष्ट थे।

- **वोट चोरी के आरोप:** विपक्षी नेताओं द्वारा कथित वोट चोरी और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण जैसे मुद्दों को जोर-शोर से उठाने के लिए यह सार्वजनिक शक्ति प्रदर्शन किया गया।

- **छात्र संगठनों की भागीदारी:** वामपंथी छात्र संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष की मौजूदगी से विपक्ष ने यह संदेश देने की कोशिश की कि युवा और छात्र वर्ग भी उनके इस आंदोलन के साथ जुड़ा हुआ है।

## सवाल-जवाब

### 1. सुप्रीम कोर्ट मार्च का मुख्य उद्देश्य क्या था?
इंडिया गठबंधन के नेताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका दायर करने और कथित वोट चोरी व एसआईआर से जुड़े मुद्दों को उठाने के लिए यह मार्च निकाला था।

### 2. मार्च के दौरान राहुल गांधी के साथ कौन सी छात्र नेता नजर आईं?
मार्च के दौरान ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन यानी आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ नजर आईं।

### 3. नेहा बोरा किस संगठन से जुड़ी हैं?
नेहा बोरा वामपंथी छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन की राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।

### 4. विपक्षी नेताओं ने मार्च की शुरुआत कहां से की थी?
नेता पहले कॉन्स्टिट्यूशन क्लब से बसों में सवार होकर बाराखंभा रोड पहुंचे और वहां से सुप्रीम कोर्ट की ओर आगे बढ़े।

### 5. मार्च के दौरान सुरक्षा के क्या इंतजाम थे?
दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे और विपक्षी नेताओं के रास्ते में जगह-जगह बैरिकेडिंग की गई थी।

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