{
  "type": "article",
  "title": "राहुल गांधी और विपक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती, जानिए कौन है याचिकाकर्ता नंबर 11",
  "summary": "राहुल गांधी और विपक्ष के दस अन्य नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के फैसलों को चुनौती दी है। इस याचिका में अंतिम नाम केरल के नेता ई. टी. मोहम्मद बशीर का है।",
  "content": "नई दिल्ली में राजनीतिक हलचल के बीच राहुल गांधी और विपक्षी दलों के दस अन्य प्रमुख नेताओं ने देश के सर्वोच्च न्यायालय यानी सुप्रीम कोर्ट में एक महत्वपूर्ण याचिका दायर की है। इस याचिका के माध्यम से चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़े कामकाज के तरीकों और निर्णयों को सीधी चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं की मांग है कि चुनाव आयोग अपने विवादित फैसलों से जुड़ी पूरी फाइलें, बैठकों का एजेंडा, मिनट-दर-मिनट नोटिंग और जनता तथा दलों की आपत्तियों का पूरा विवरण सार्वजनिक करे।\n\n \n\nशीर्ष नेताओं की फेहरिस्त और याचिकाकर्ताओं का क्रम\n\nसुप्रीम कोर्ट में दायर की गई इस संयुक्त याचिका में राहुल गांधी को सूची में पहले नंबर का याचिकाकर्ता बनाया गया है। इसके बाद क्रमवार अन्य वरिष्ठ विपक्षी नेताओं के नाम शामिल हैं जिनमें दूसरे स्थान पर मल्लिकार्जुन खरगे, तीसरे पर सौगत राय, चौथे पर अखिलेश यादव, पांचवें पर तेजस्वी यादव, छठे पर संजय राउत, सातवें पर एम ए बेबी, आठवें पर डी राजा, नौवें पर महुआ मांझी और दसवें स्थान पर सुप्रिया सुले का नाम दर्ज है। हालांकि इस पूरी सूची में ग्यारहवें यानी अंतिम स्थान पर एक ऐसे शख्स को जगह दी गई है जिन्हें राहुल गांधी के बेहद करीबी माना जाता है, जिससे राजनीतिक गलियारों में इस नाम को लेकर खासी चर्चा है।\n\n \n\nकौन हैं ग्यारहवें याचिकाकर्ता ई. टी. मोहम्मद बशीर\n\nसुप्रीम कोर्ट में इंडिया ब्लॉक की तरफ से दाखिल इस याचिका में जिस ग्यारहवें चेहरे का जिक्र किया गया है, वे ई. टी. मोहम्मद बशीर हैं जो दक्षिण भारत के केरल राज्य से ताल्लुक रखते हैं। वे लंबे समय से इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग यानी IUML के प्रमुख नेता और सांसद के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। ई. टी. मोहम्मद बशीर की पार्टी आईयूएमएल और कांग्रेस पार्टी का केंद्र स्तर पर मजबूत गठबंधन है। इसके अलावा आईयूएमएल विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक का भी एक अहम हिस्सा है। केरल की राजनीति में यह पार्टी कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट यानी यूडीएफ की एक प्रमुख और पुरानी सहयोगी मानी जाती है।\n\n \n\nलोकतंत्र मार्च और चुनाव आयोग के खिलाफ कानूनी कदम\n\nबीते 12 अक्टूबर 2026 को मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों और गंभीर वोट चोरी के आरोपों को लेकर राहुल गांधी के नेतृत्व में तमाम विपक्षी दलों ने सुप्रीम कोर्ट तक एक बड़ा लोकतंत्र मार्च निकाला था। इसी राजनीतिक और वैधानिक संघर्ष को आगे बढ़ाते हुए चुनाव आयोग के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में यह संयुक्त जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे जैसे दिग्गजों के साथ ग्यारहवां नाम ई. टी. मोहम्मद बशीर का शामिल किया गया है।\n\n \n\nयाचिका में उठाए गए मुख्य कानूनी और तकनीकी मुद्दे\n\nराहुल गांधी के नेतृत्व में दायर इस याचिका में मुख्य रूप से 24 जून 2025 को एसआईआर शुरू करने के फैसले को चुनौती दी गई है। इसके साथ ही ईसीनेट और एरोनेट के एक्सेस लॉग्स की मांग भी उठाई गई है। याचिका में इस बात की गंभीर न्यायिक जांच की गुहार लगाई गई है कि क्या चुनाव आयोग के ये फैसले संविधान के अनुच्छेद 324, चुनाव आयोग को नियंत्रित करने वाले साल 2023 के नए कानून और ऐतिहासिक टी.एन. शेषन बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय किए गए सिद्धांतों के अनुरूप लिए गए थे या नहीं।\n\n \n\nवोटरों के अधिकारों की सुरक्षा और स्वतंत्र समिति की मांग\n\nकानूनी दस्तावेजों के अनुसार याचिका में मुख्य तौर पर यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया है कि किसी भी मतदाता का नाम बिना उचित नोटिस और सुनवाई का पर्याप्त मौका दिए बिना मतदाता सूची से न हटाया जाए। साथ ही यह निर्देश देने की भी मांग की गई है कि हटाए गए मतदाताओं की पूरी सूची बूथ-वार प्रकाशित की जाए जिसमें नाम काटने के पुख्ता कारणों और डेमोग्राफिक यानी जनसांख्यिकीय जानकारियों का स्पष्ट उल्लेख हो। याचिका में ईसीनेट और एरोनेट समेत पूरे मतदाता सूची डेटाबेस में होने वाले बदलावों और नाम हटाने की प्रक्रिया के ऑडिट के लिए सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति के गठन की मांग भी की गई है। इसके अलावा मामले का अंतिम निपटारा होने तक चल रहे एसआईआर पर अंतरिम रोक लगाने की भी गुहार लगाई गई है।\n\n \n\nरणनीतिक संदेश और राजनीतिक मायने\n\nयाचिका के माध्यम से अदालत से विशेष रूप से यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि चुनाव आयोग यह सुनिश्चित करे कि विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़ा उसका प्रत्येक निर्णय साल 2023 के कानून के मुताबिक हो और उसका विधिवत रिकॉर्ड रखा जाए। इस पूरी कवायद में राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट की याचिका के जरिए समाज के हर वर्ग को प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया है। इसी कड़ी में एक प्रमुख मुस्लिम चेहरे के रूप में ई. टी. मोहम्मद बशीर का नाम शामिल कर राजनीतिक जानकारों के मुताबिक उत्तर प्रदेश के आगामी चुनावों और राष्ट्रीय स्तर पर मुसलमानों को एक बड़ा राजनीतिक संदेश देने की सोची-समझी कोशिश की गई है।\n\nइसका आप पर असर\nयह याचिका देश की चुनावी व्यवस्था और मतदाता सूचियों के प्रबंधन को सीधे प्रभावित करती है, जिसका असर हर मतदाता और राजनीतिक दल पर पड़ेगा।\n\n• भारत में: यदि अदालत मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया पर सख्त दिशानिर्देश देती है, तो देश भर के आम नागरिकों को बिना नोटिस नाम काटे जाने से कानूनी सुरक्षा मिलेगी। इस फैसले से आगामी चुनावों में पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद है और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली अधिक जवाबदेह बनेगी।\n\n• केरल और क्षेत्रीय स्तर पर: याचिका में ग्यारहवें स्थान पर शामिल नेता के राज्य केरल तथा अन्य सहयोगी क्षेत्रों में राजनीतिक दलों के बीच मतदाता पुनरीक्षण के मुद्दों को लेकर लामबंदी तेज होगी। इससे स्थानीय मतदाताओं में अपने मताधिकार के प्रति जागरूकता और सतर्कता बढ़ेगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह कानूनी कदम मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण और कथित अनियमितताओं के विरोध में उठाया गया है। चुनाव आयोग के फैसलों और कार्यप्रणाली को लेकर विपक्षी दलों में लंबे समय से असंतोष था।\n\n• विशेष गहन पुनरीक्षण की शुरुआत: चुनाव आयोग द्वारा 24 जून 2025 को एसआईआर शुरू करने के फैसले और डिजिटल डेटाबेस प्रबंधन को लेकर विवाद पैदा हुआ था।\n\n• वोट चोरी के आरोप: विपक्षी दलों ने मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों और मनमाने ढंग से नाम हटाने का आरोप लगाते हुए अक्टूबर 2026 में बड़ा विरोध प्रदर्शन किया था।\n\n• संवैधानिक प्रावधानों की मांग: विपक्षी नेताओं ने यह सुनिश्चित करने के लिए अदालत का रुख किया कि चुनाव आयोग के निर्णय साल 2023 के कानून और संविधान के दायरे में लिए जाएं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सुप्रीम कोर्ट में याचिका किसने दायर की है?\nयह याचिका राहुल गांधी और विपक्ष के दस अन्य नेताओं द्वारा संयुक्त रूप से दायर की गई है।\n\n2. याचिका में मुख्य रूप से क्या मांग की गई है?\nयाचिका में चुनाव आयोग के एसआईआर फैसलों से जुड़ी फाइलें सार्वजनिक करने और बिना नोटिस नाम हटाने पर रोक लगाने की मांग की गई है।\n\n3. सुप्रीम कोर्ट की याचिका में सूची में पहले स्थान पर कौन हैं?\nकांग्रेस नेता राहुल गांधी को इस याचिका में पहले नंबर का याचिकाकर्ता बनाया गया है।\n\n4. याचिका में ग्यारहवें नंबर पर किसका नाम है?\nग्यारहवें स्थान पर केरल के सांसद और आईयूएमएल नेता ई. टी. मोहम्मद बशीर का नाम शामिल है।\n\n5. लोकतंत्र मार्च कब निकाला गया था?\nमतदाता सूची में गड़बड़ियों के खिलाफ विपक्षी दलों ने 12 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट तक लोकतंत्र मार्च निकाला था।\n\n6. याचिका में किस नए कानून का हवाला दिया गया है?\nयाचिका में चुनाव आयोग को नियंत्रित करने वाले साल 2023 के कानून का हवाला दिया गया है।",
  "url": "https://trendkia.com/politics/rahul-gandhi-aura-vipaksha-ne-suprima-korta-men-di-chunauti-janie-kauna-hai-yachikakarta-nnbara-11-47064",
  "category": "राजनीति",
  "publishedAt": "2026-10-12",
  "tags": [
    "राहुल गांधी",
    "सुप्रीम कोर्ट",
    "चुनाव आयोग",
    "SIR",
    "इंडिया गठबंधन",
    "ई. टी. मोहम्मद बशीर"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}