राहुल गांधी का यूपीआई शुल्क पर विरोध, लेकिन कांग्रेस सांसदों की समिति रिपोर्ट में एमडीआर का समर्थन यूपीआई पर संभावित शुल्क को लेकर राहुल गांधी का विरोध सामने आया है, जबकि संसद की एक समिति की रिपोर्ट में कांग्रेस सांसदों की मौजूदगी में एमडीआर लागू करने की सिफारिश की गई है। नई दिल्ली में यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर को लेकर राजनीतिक खींचतान बढ़ गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इस डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म पर किसी भी प्रकार का शुल्क थोपे जाने का कड़ा विरोध कर रहे हैं। दूसरी ओर, संसद की वित्त मामलों की स्थायी समिति की एक नई रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद सियासी गलियारों में बहस छिड़ गई है। इस दस्तावेज में डिजिटल भुगतान प्रणाली के वास्ते चरणबद्ध तरीके से एमडीआर ढांचे को अमल में लाने की जोरदार पैरवी की गई है। दिलचस्प बात यह है कि जब 12 अगस्त 2026 को इस समिति ने उक्त रिपोर्ट पर अपनी मुहर लगाई थी, तब उस बैठक में पी. चिदंबरम और मनीष तिवारी सहित कांग्रेस पार्टी के पांच वरिष्ठ सांसद भी उपस्थित थे। अब यह बड़ा सवाल बन गया है कि जिस वित्तीय ढांचे पर पार्टी के सांसदों ने अपनी सहमति दी थी, उसी का शीर्ष स्तर पर विरोध क्यों हो रहा है। संसदीय समिति की बैठक में कांग्रेस सांसदों की भूमिका संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति के दायरे में कांग्रेस के पांच सांसद सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं। इस समूह में देश के पूर्व वित्त मंत्री पी. चिदंबरम के साथ-साथ गौरव गोगोई, मनीष तिवारी, किशोरी लाल और के. गोपीनाथ के नाम शामिल हैं। इस आधिकारिक रिपोर्ट को 12 अगस्त 2026 के दिन बिना किसी असहमति नोट के पूरी तरह से सर्वसम्मति के साथ स्वीकार कर लिया गया था। प्रकाशित हुए मिनट्स के दस्तावेजों में किसी भी सदस्य द्वारा आपत्ति जताने का कोई उल्लेख नहीं मिलता है। ऐसे हालात में यह प्रश्न स्वाभाविक है कि जब पार्टी के दिग्गज नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री उस प्रस्ताव को हरी झंडी दे रहे थे, तब इस नीतिगत मामले पर आंतरिक स्तर पर क्या विचार-विमर्श हुआ होगा। डिजिटल भुगतान प्रणाली को चलाने में आने वाला भारी घाटा कमेटी के दस्तावेजों के मुताबिक यूपीआई नेटवर्क को सुरक्षित रखने का खर्च और मिलने वाली सरकारी वित्तीय सहायता के बीच बहुत बड़ा फासला बना हुआ है। सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए लगभग 2,000 करोड़ रुपये की सब्सिडी का प्रावधान तय किया है। इसके विपरीत, पूरे डिजिटल पेमेंट उद्योग का अनुमानित परिचालन खर्च बढ़कर लगभग 20,700 करोड़ रुपये तक जा पहुंचा है। समिति ने स्पष्ट शब्दों में रेखांकित किया कि सरकारी इमदाद इस कुल ऑपरेटिंग लागत का केवल 11 प्रतिशत हिस्सा ही पूरा कर पाती है। यदि इसके लिए कोई टिकाऊ और मजबूत राजस्व मॉडल तैयार नहीं किया गया, तो साइबर सुरक्षा और वित्तीय धोखाधड़ी रोकने के वास्ते किए जाने वाले अनिवार्य निवेश पर बहुत प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। नेतृत्व के रुख और संसदीय रिपोर्ट के बीच विरोधाभास संसदीय समिति ने भारी भरकम भुगतानों पर चरणों के हिसाब से एमडीआर शुल्क लगाने की सिफारिश की है ताकि छोटे दुकानदारों और आम उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त दबाव न पड़े। इसके विपरीत, राहुल गांधी का स्पष्ट आरोप है कि सरकार आम नागरिकों पर वित्तीय बोझ बढ़ाने की तैयारी में है। विश्लेषकों का मानना है कि समिति की किसी बैठक में भाग लेने का मतलब हर प्रशासनिक दर पर व्यक्तिगत मुहर लगाना नहीं होता है। इसके बावजूद, इस स्पष्ट विरोधाभास ने राजनीतिक विरोधियों को कांग्रेस के खिलाफ हमलावर होने का पूरा मौका दे दिया है। इसका आप पर असर डिजिटल भुगतान पर शुल्क नीति को लेकर चल रहे इस विवाद का असर आम उपयोगकर्ताओं और कारोबारियों पर पड़ सकता है। • भारत में: यदि भविष्य में बड़े लेनदेन पर कोई शुल्क लागू होता है, तो डिजिटल भुगतान की लागत बढ़ सकती है। इससे आम जनता और छोटे व्यापारियों के रोजमर्रा के लेन-देन प्रभावित हो सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ यूपीआई नेटवर्क के संचालन और उसकी सुरक्षा लागत में भारी अंतर के कारण यह नया विवाद सामने आया है। • परिचालन लागत का अंतर: सरकार की तरफ से मिलने वाली सब्सिडी कुल खर्च का बहुत छोटा हिस्सा ही पूरा कर पाती है। • वित्तीय घाटा: डिजिटल पेमेंट इंडस्ट्री का खर्च सरकारी सहायता से कई गुना अधिक बढ़ चुका है। • संसदीय सहमति: वित्त मामलों की स्थायी समिति ने सिस्टम को टिकाऊ बनाने के लिए एमडीआर लागू करने की सिफारिश की थी। • राजनीतिक मतभेद: पार्टी के भीतर नीतिगत समर्थन और नेतृत्व के खुले विरोध के बीच विरोधाभास नजर आ रहा है। सवाल-जवाब 1. यूपीआई पर एमडीआर चार्ज को लेकर विवाद क्यों चल रहा है? राहुल गांधी यूपीआई पर किसी भी प्रकार का शुल्क लगाने का विरोध कर रहे हैं, जबकि संसदीय समिति ने इसे लागू करने की सिफारिश की है। 2. संसदीय समिति की बैठक में कांग्रेस के कौन से सांसद शामिल थे? इस बैठक में पी. चिदंबरम, गौरव गोगोई, मनीष तिवारी, किशोरी लाल और के. गोपीनाथ मौजूद थे। 3. समिति की रिपोर्ट को कब स्वीकार किया गया था? इस रिपोर्ट को 12 अगस्त 2026 को सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया था। 4. डिजिटल पेमेंट इंडस्ट्री का अनुमानित ऑपरेटिंग खर्च कितना है? डिजिटल पेमेंट इंडस्ट्री का अनुमानित परिचालन खर्च लगभग 20,700 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। https://trendkia.com/politics/rahul-gandhi-opposing-upi-fees-while-congress-mps-backed-mdr-in-a-parliamentary-panel-report-32765 TrendKia — Har trend, sabse pehle.