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  "title": "यूजीसी-नेट की तीन परीक्षाएं रद्द होने पर राहुल गांधी का केंद्र पर हमला, बोले- यह शिक्षा व्यवस्था नहीं बल्कि छात्रों को निचोड़ने वाली मशीन है",
  "summary": "यूजीसी-नेट की तीन परीक्षाएं रद्द होने के बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार और एनटीए पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि छात्रों को गलतियों की सजा भुगतनी पड़ रही है और अब यह पूरी व्यवस्था एक निचोड़ने वाली मशीन बन चुकी है।",
  "content": "नई दिल्लीः लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने यूजीसी-नेट की तीन प्रमुख परीक्षाएं रद्द किए जाने के बाद केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने परीक्षा के दो महीने बीत जाने के बाद जाकर पेपर रद्द करने का फैसला किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में अब कोई वास्तविक शिक्षा व्यवस्था बची ही नहीं है और मौजूदा सरकार की ही तरह एनटीए भी अपनी किसी भी गलती को स्वीकार करने से इनकार करती है।\n\n \n\nसोशल मीडिया के जरिए सरकार पर साधा निशाना\n कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए कहा कि आपकी एनटीए ने अभी हाल ही में एक बार फिर बड़ी गड़बड़ी की है। सोशियोलॉजी, इंग्लिश और कॉमर्स विषयों के लिए यूजीसी-नेट की परीक्षाएं 22 से 30 जून के बीच आयोजित की गई थीं। इसके लगभग दो महीने बाद अब एनटीए ने इन तीनों परीक्षाओं को रद्द करने का अजीबोगरीब फैसला लिया है, क्योंकि एजेंसी ने खुद गलत पेपर सेट किए थे और पुराने सवालों को ही दोबारा दोहरा दिया था।\n\n \n इस पूरी प्रक्रिया में हजारों ऐसे उम्मीदवार शामिल थे जिन्होंने कई सालों तक कठिन मेहनत करके तैयारी की थी, परीक्षा के लिए फॉर्म भरे थे, अपनी फीस जमा की थी और दूर-दराज के परीक्षा केंद्रों तक लंबी यात्राएं करके पहुंचे थे। अब इन सभी छात्रों को आगामी सितंबर महीने में एक बार फिर से इस पूरी परीक्षा प्रक्रिया से गुजरना होगा। गलती पूरी तरह से एनटीए की तरफ से की जाती है, लेकिन उसका खामियाजा और सजा सिर्फ और सिर्फ छात्रों को ही भुगतनी पड़ती है।\n\n राहुल गांधी ने आगे कहा कि उन्होंने कोटा, देहरादून और प्रयागराज के अपने दौरों के दौरान भी छात्रों के सामने यही बात कही थी और वे इस मुद्दे को आगे भी उठाते रहेंगे। आज की तारीख में यह कोई सामान्य शिक्षा प्रणाली नहीं बची है, बल्कि यह एक तरह की एक्सट्रैक्शन मशीन यानी छात्रों को पूरी तरह निचोड़ देने वाली मशीन बन चुकी है। यह व्यवस्था छात्रों से उनका पैसा, उनके बहुमूल्य साल, उनकी मानसिक सेहत और उनका आत्मविश्वास छीन लेती है और बदले में उन्हें कुछ नहीं देती, यहां तक कि कोई पक्की नौकरी भी नहीं मिलती।\n\n उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि एनटीए अभी तक इस बात का कोई जवाब नहीं दे रही है कि क्या परीक्षा शुरू होने से पहले ये पेपर लीक हुए थे या नहीं। मोदी सरकार के बाकी तमाम विभागों की तरह ही एनटीए कभी भी यह बात खुले तौर पर नहीं मानती कि उससे कोई भूल हुई है। जिस तरह से गड़बड़ी वाले बाकी तमाम पेपरों के मामलों में हुआ, उसी तरह उन्हें पूरा यकीन है कि इस मामले में भी किसी की कोई व्यक्तिगत जवाबदेही तय नहीं की जाएगी। धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इस दिशा में उठाया गया पहला कदम तो जरूर था, लेकिन वह आखिरी कदम नहीं होना चाहिए। एनटीए के पूरे नेतृत्व की भी अब कड़ी जवाबदेही तय की जानी चाहिए।\n\n  राहुल गांधी ने देश के तमाम छात्रों को यह भी याद दिलाया कि प्रधानमंत्री मोदी ने एक ऐसी लचर व्यवस्था तैयार कर दी है जो समय पर और सही ढंग से परीक्षाएं तक आयोजित नहीं करवा सकती है और बाद में परीक्षा देने वाले युवाओं को ही इसके लिए दोषी ठहराने का प्रयास करती है। युवाओं के बेशकीमती साल उनसे छीने जा रहे हैं और जब तक पीएम मोदी इस गंभीर मामले पर देश को स्पष्ट जवाब नहीं देते, तब तक उनका यह विरोध और संघर्ष रुकने वाला नहीं है।\n\n \n\nएनटीए की लापरवाही के चलते रद्द हुए तीन विषयों के पेपर\n बता दें कि एक बार फिर से नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठे हैं और देश भर में उसकी भारी किरकिरी हुई है। स्थिति यह बन गई है कि एनटीए को मजबूरन यूजीसी-नेट के 3 बड़े विषयों की परीक्षाएं रद्द करनी पड़ी हैं। राहत की बात यह है कि यूजीसी-नेट परीक्षा के 3 विषयों के पेपर दोबारा कराए जाएंगे, जिसके लिए एजेंसी ने नया शेड्यूल भी जारी कर दिया है।\n\n प्राप्त जानकारी के अनुसार, यूजीसी-नेट के तहत इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी विषयों के पेपर अब नए सिरे से संपन्न होंगे। प्रश्नपत्रों में तथ्यात्मक यानी फैक्चुअल, टाइपिंग, ट्रांसलेशन यानी अनुवाद और ग्रामर यानी व्याकरण से जुड़ी गंभीर गड़बड़ियों की लगातार शिकायतें सामने आ रही थीं, जिसके बाद आखिरकार एजेंसी को यह कड़ा फैसला लेना पड़ा। एनटीए ने खुद भी अपने स्तर पर इन परीक्षाओं में स्पेलिंग और प्रिंटिंग से जुड़ी भारी गलतियों को स्वीकार किया है।\n\n तय कार्यक्रम के अनुसार, अब ये सभी पुनर्परीक्षाएं नौ सितंबर और दस सितंबर को आयोजित की जाएंगी। इंग्लिश विषय का पेपर 9 सितंबर को सुबह 9 बजे से शुरू होगा, जबकि कॉमर्स विषय का पेपर उसी दिन यानी 9 सितंबर को दोपहर 3 बजे से आयोजित किया जाएगा। इसके अलावा सोशियोलॉजी विषय का पेपर 10 सितंबर की सुबह 9 बजे से होगा। अच्छी बात यह है कि इन परीक्षाओं में शामिल होने वाले छात्रों को दोबारा आवेदन के लिए कोई भी अतिरिक्त फीस नहीं चुकानी होगी।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: देश भर के उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों छात्रों पर परीक्षा प्रबंधन प्रणालियों की विश्वसनीयता और बार-बार होने वाली गड़बड़ियों का सीधा असर पड़ता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. यूजीसी-नेट की किन विषयों की परीक्षाएं रद्द की गई हैं?\nएनटीए ने इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी विषयों की यूजीसी-नेट परीक्षाओं को रद्द कर दिया है।\n\n2. यूजीसी-नेट की ये रद्द परीक्षाएं अब कब आयोजित की जाएंगी?\nइंग्लिश और कॉमर्स की परीक्षाएं 9 सितंबर को तथा सोशियोलॉजी की परीक्षा 10 सितंबर को आयोजित होगी।\n\n3. परीक्षाएं रद्द होने का मुख्य कारण क्या था?\nप्रश्नपत्रों में तथ्यात्मक, टाइपिंग, अनुवाद और व्याकरण से जुड़ी गड़बड़ियों तथा पुराने सवाल दोहराए जाने के कारण ये परीक्षाएं रद्द हुईं।\n\n4. क्या दोबारा परीक्षा देने के लिए छात्रों को कोई फीस देनी होगी?\nनहीं, छात्रों को इन पुनर्परीक्षाओं के लिए कोई भी फीस नहीं चुकानी होगी।\n\n5. राहुल गांधी ने परीक्षा रद्द होने को लेकर क्या बयान दिया?\nराहुल गांधी ने केंद्र सरकार और एनटीए पर निशाना साधते हुए शिक्षा व्यवस्था को छात्रों को निचोड़ने वाली एक मशीन करार दिया।",
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  "category": "राजनीति",
  "publishedAt": "2026-08-17",
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