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  "title": "समुद्र की तेज लहरों वाले बयान से राहुल गांधी ने साधा निशाना, मुख्य चुनाव आयुक्त पर उठाए गंभीर सवाल",
  "summary": "लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है। इस बीच विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहा है और चुनाव आयोग के फैसलों पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं।",
  "content": "राजनीतिक गलियारों में इन दिनों एक बार फिर सरगर्मी तेज हो गई है जिसकी मुख्य वजह लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का एक ताजा सोशल मीडिया पोस्ट है। राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में लिखा कि उन्हें समंदर के भीतर तब तैरना पसंद है जब वहां लहरें काफी तेज होती हैं क्योंकि इससे यह सीख मिलती है कि उथल-पुथल भी दरअसल शांति का ही एक रूप होती है। उनका यह बयान ऐसे नाजुक दौर में सामने आया है जब चुनाव आयोग के भीतर वैचारिक मतभेदों की खबरें आने के बाद विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग चलाने की अपनी मांग को काफी मुखर कर दिया है।\n\nविपक्ष का प्रदर्शन और गंभीर आरोप\nइस पूरे विवाद की जड़ में केरल कांग्रेस की तरफ से साझा की गई एक जानकारी है। इसके मुताबिक केरल के पूर्व मुख्य सचिव जीजी थॉमसन का यह दावा रहा है कि ज्ञानेश कुमार ने उनसे संपर्क साधा था और भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनावी मैदान में उतरने के साथ-साथ मंत्री पद हासिल करने का प्रस्ताव भी दिया था। इस मामले को तूल देते हुए कांग्रेस के साथ-साथ कई अन्य घटक दलों ने दिल्ली समेत देश के विभिन्न हिस्सों में धरने प्रदर्शन आयोजित किए और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग उठाई। विपक्षी दलों का यह कहना रहा है कि आखिरकार इस तरह के राजनीतिक प्रस्ताव देने का अधिकार ज्ञानेश कुमार के पास कहां से आया और साल 2016 के दौरान इस कथित संलिप्तता के क्या मायने थे।\n\nमैच फिक्सिंग और एसआईआर पर घमासान\nविपक्ष के इन तीखे हमलों के बीच राहुल गांधी ने आगे बढ़कर यह भी आरोप लगाया कि जब ज्ञानेश कुमार एक सेवारत आईएएस अधिकारी की भूमिका में थे तब उनका इस्तेमाल पार्टी विशेष के लिए राजनीतिक भर्ती कराने में किया गया था और बाद में उन्हें एक बड़ी जिम्मेदारी सौंप दी गई। राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का नाम लेते हुए कहा कि उन्हें निष्पक्ष अंपायर की कुर्सी पर बैठाकर चुनावी प्रक्रिया में कथित तौर पर गड़बड़ी करने का जिम्मा सौंप दिया गया। विपक्षी दलों का लगातार यही आरोप रहा है कि निर्वाचन आयोग सत्ताधारी खेमे के इशारों पर काम कर रहा है और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर के जरिए मतदाता सूचियों से सुनियोजित तरीके से नाम हटाए जा रहे हैं।\n\nनिर्वाचन आयोग की तरफ से सफाई और प्रेस नोट\nइन तमाम गंभीर आरोपों के जवाब में चुनाव आयोग ने एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद विस्तृत प्रेस नोट जारी करके अपनी स्थिति बिल्कुल साफ कर दी थी। आयोग की तरफ से यह स्पष्ट किया गया कि पिछले कुछ महीनों के दौरान देश भर में एसआईआर समेत जितने भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं वे सभी पूरी तरह से सर्वसम्मति का परिणाम रहे हैं। आयोग की विज्ञप्ति के अनुसार 24 जून 2025 को सभी राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों के लिए एसआईआर का निर्देश जारी कर दिया गया था जिसकी शुरुआत सबसे पहले बिहार राज्य से की गई थी और उसके बाद पश्चिम बंगाल समेत देश के अन्य राज्यों में इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया था। आयोग ने जोर देकर कहा कि यह पूरा निर्देश संस्था की आपसी सहमति और मंजूरी के बाद ही प्रभाव में आया था।\n\nकार्यक्रम की तारीखों और चरणों का विवरण\nअपने आधिकारिक स्पष्टीकरण में चुनाव आयोग ने आगे यह भी जानकारी साझा की कि देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए एसआईआर का विस्तृत कार्यक्रम 27 अगस्त 2025 को जारी किया गया था। इसके अलावा बाकी बचे हुए 19 राज्यों और केंद्र शासित क्षेत्रों के लिए इसी तरह का कार्यक्रम 14 मई 2026 को आयोग की सर्वसम्मत सहमति से तय किया गया था। आयोग ने यह भी बात साफ की कि तीसरे चरण के अंतर्गत आने वाले शेष 12 राज्यों में मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन होने के बाद ही कुल मतदाताओं की वास्तविक संख्या सामने आ पाएगी।\n\nभारतीय जनता पार्टी का पलटवार\nजैसे ही चुनाव आयोग की तरफ से यह प्रेस रिलीज सामने आई, भारतीय जनता पार्टी ने तुरंत आक्रामक रुख अपनाते हुए कांग्रेस पार्टी और उसके सहयोगियों पर जोरदार जवाबी हमला बोल दिया। सत्ताधारी दल का यह कहना रहा है कि जब आयोग की तरफ से लिए गए प्रत्येक फैसले पर सभी आयुक्तों की सहमति दर्ज है और हर निर्णय सर्वसम्मति से हुआ है, तब फिर किसी एक आयुक्त के बीच मतभेद होने की बात का कोई आधार ही नहीं बचता है। भाजपा ने विपक्ष के इन तमाम आरोपों को राजनीति से प्रेरित और संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को ठेस पहुंचाने वाला करार दिया है।\n\nइसका आप पर असर\nचुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची संशोधन से जुड़े इस विवाद का असर आम नागरिकों की चुनावी प्रक्रिया पर पड़ सकता है।\n\n• भारत में: देश भर में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रक्रिया के कारण आम मतदाताओं को अपनी वोटर लिस्ट में नाम की जांच करने की आवश्यकता पड़ सकती है। इस राजनीतिक खींचतान से यह भी स्पष्ट होता है कि आगामी चुनावों से पहले चुनावी नियमों को लेकर प्रशासनिक चर्चाएं तेज रहेंगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह राजनीतिक टकराव मुख्य रूप से चुनाव आयोग के भीतर वैचारिक मतभेदों की मीडिया रिपोर्ट्स और पूर्व प्रशासनिक अधिकारियों के दावों के बाद शुरू हुआ है।\n\n• आयोग के फैसले: निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि एसआईआर से जुड़े सभी आदेश और चरण पूरी तरह से सर्वसम्मति से तय किए गए थे।\n• विपक्ष के आरोप: विपक्षी दलों का दावा है कि संस्था की स्वायत्तता प्रभावित हो रही है और इसी वजह से मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग की मांग उठी है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में क्या लिखा?\nराहुल गांधी ने लिखा कि उन्हें समुद्र में तब तैरना पसंद है जब लहरें तेज होती हैं क्योंकि उथल-पुथल भी शांति का ही एक रूप है।\n\n2. विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ क्यों प्रदर्शन कर रहा है?\nविपक्ष चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद की खबरों और पूर्व अधिकारी द्वारा लगाए गए राजनीतिक भर्ती के दावों के बाद इस्तीफे और महाभियोग की मांग कर रहा है।\n\n3. जीजी थॉमसन कौन हैं?\nजीजी थॉमसन केरल के पूर्व मुख्य सचिव हैं, जिनके हवाले से दावा किया गया है कि उन्हें भाजपा के टिकट और मंत्री पद का प्रस्ताव मिला था।\n\n4. चुनाव आयोग ने अपने प्रेस नोट में क्या स्पष्ट किया?\nआयोग ने स्पष्ट किया कि एसआईआर से जुड़े सभी निर्देश और कार्यक्रम सभी राज्यों के लिए सर्वसम्मति से मंजूर किए गए थे।\n\n5. एसआईआर की प्रक्रिया कब शुरू हुई थी?\nएसआईआर का आदेश 24 जून 2025 को जारी किया गया था जिसकी शुरुआत बिहार से हुई थी।",
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  "category": "राजनीति",
  "publishedAt": "2026-09-27",
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