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  "title": "राष्ट्र गीत पर AIMIM नेता वारिस पठान का बड़ा बयान, कहा जबरन नहीं थोपा जा सकता वंदे मातरम्",
  "summary": "राष्ट्र गीत वंदे मातरम् को अनिवार्य बनाने के मुद्दे पर AIMIM नेता वारिस पठान ने कड़ा विरोध जताया है। इसके साथ ही उन्होंने महाराष्ट्र में मराठी भाषा लागू करने के तरीकों और 26 अगस्त को ईद-ए-मिलाद पर शराबबंदी को लेकर सरकार पर निशाना साधा।",
  "content": "संसद से हाल ही में पास हुए राष्ट्र गीत संबंधी कानून के बाद जारी राजनीतिक बयानबाजी के बीच AIMIM नेता वारिस पठान ने एक बेहद तीखा बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे राष्ट्र गीत का सम्मान करते हैं, लेकिन इसे किसी भी नागरिक पर जबरन लागू नहीं किया जा सकता। वारिस पठान ने यहां तक कहा कि चाहे उन्हें फांसी की सजा ही क्यों न दे दी जाए, वे वंदे मातरम् का गायन नहीं करेंगे। अपने इस वक्तव्य के अलावा उन्होंने महाराष्ट्र प्रशासन की भाषा नीति, त्योहारों पर शराब बिक्री के नियमों और छात्र आंदोलनों पर हो रही राजनीति को लेकर भी कई अहम सवाल खड़े किए हैं।\n\nसंसदीय कानून और लाल किले से शुरुआत के बाद भड़का विवाद\nदेश में स्वतंत्रता के 80 साल पूरे होने के अवसर पर राष्ट्र गीत को एक कानूनी ढांचा प्रदान किया गया है। इसी सिलसिले में संसद द्वारा 30 जुलाई को वंदे मातरम् बिल पारित किया गया था। बिल पास होने के बाद 13 अगस्त को इतिहास में पहली बार देश की संसद के भीतर राष्ट्रीय गीत का विधिवत गायन हुआ। इसके पश्चात स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर 15 अगस्त को दिल्ली स्थित लाल किला के प्राचीर से भी पहली बार इस राष्ट्रीय गीत का गान किया गया। हालांकि, उसी दिन विवाद की चिंगारी उस समय सुलगी जब कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान वंदे मातरम् को पूरा नहीं गाया गया। इस घटना के बाद से ही राजनीतिक दलों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है।\n\nवारिस पठान का सख्त रुख और जबरदस्ती का विरोध\nइस पूरे घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए AIMIM नेता वारिस पठान ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने अपने बयान में कहा कि किसी भी व्यक्ति की देशभक्ति को साबित करने के लिए उस पर जबरन कोई गीत नहीं थोपा जाना चाहिए। वारिस पठान ने यह साफ किया कि उनके दिल में वंदे मातरम् के प्रति पूरा सम्मान है, लेकिन दबाव बनाकर इसे गवाने की कोशिशों का वे विरोध करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि अगर इस निर्णय के विरोध स्वरूप उन्हें फांसी पर भी चढ़ा दिया जाए, तो भी वे पीछे नहीं हटेंगे। उनके इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।\n\nकेंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी की तीखी प्रतिक्रिया\nवारिस पठान और अन्य नेताओं द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने सोशल मीडिया पर बेहद सख्त लहजे में अपनी बात रखी है। जीतनराम मांझी ने लिखा कि जो लोग संसद से पारित राष्ट्र गीत का विरोध कर रहे हैं, वे देश की एकता को नुकसान पहुंचाने वाले समूह का हिस्सा हैं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि राष्ट्र गीत के टुकड़े करने की मंशा रखने वालों को देश की जनता कभी माफ नहीं करेगी। यदि ये तत्व समय रहते अपनी सोच में सुधार नहीं लाते हैं, तो आने वाले समय में आम जनता खुद इन्हें करारा सबक सिखाएगी और इनके टुकड़े-टुकड़े कर देगी।\n\nछात्रों की राजनीति और राहुल गांधी पर परोक्ष हमला\nराष्ट्र गीत के मुद्दे से आगे बढ़ते हुए वारिस पठान ने देश में चल रहे छात्र आंदोलनों का भी जिक्र किया। राहुल गांधी का नाम लिए बिना उन पर निशाना साधते हुए AIMIM नेता ने कहा कि युवाओं और GenZ विद्यार्थियों के नाम पर अपनी सियासी रोटी सेकना बंद होना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के छात्र अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरे और उनके मजबूत आंदोलन के सामने आखिरकार सरकार को भी झुकने पर मजबूर होना पड़ा। वारिस पठान ने स्पष्ट किया कि वे और उनकी पार्टी हमेशा छात्रों की न्यायसंगत मांगों के साथ खड़े हैं, परंतु छात्रों के संघर्ष को राजनीतिक हथियार बनाना पूरी तरह से गलत है।\n\nमहाराष्ट्र में मराठी भाषा और 26 अगस्त को शराबबंदी की मांग\nवारिस पठान ने इसके बाद महाराष्ट्र सरकार की क्षेत्रीय नीतियों और प्रशासनिक फैसलों पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में रहने वाले प्रत्येक नागरिक को मराठी भाषा सीखनी चाहिए और इसका सम्मान करना चाहिए, लेकिन डरा-धमकाकर, प्रशासनिक नोटिस देकर या दंडात्मक कार्रवाई के जरिए भाषा थोपना पूरी तरह अनुचित है। सरकार को चुनौती देते हुए उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन में इतनी ही हिम्मत है, तो वह यही नियम मुंबई के बड़े उद्योगपतियों और बॉलीवुड के जाने-माने फिल्मी सितारों पर लागू करके दिखाए। इसके साथ ही उन्होंने मांग रखी कि जिस प्रकार हिंदू त्योहारों के दौरान मांस-मटन और शराब की बिक्री पर रोक लगाई जाती है, ठीक उसी समानता के आधार पर 26 अगस्त को ईद-ए-मिलाद के मौके पर भी पूरे महाराष्ट्र में शराब की दुकानें पूरी तरह बंद रखी जानी चाहिए।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: संसद से पारित राष्ट्र गीत कानून के कार्यान्वयन और नागरिक अधिकारों पर राष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो सकती है।\n\nमहाराष्ट्र में: भाषा नीति और 26 अगस्त को ईद-ए-मिलाद के अवसर पर शराबबंदी की मांग को लेकर राज्य में प्रशासनिक और सियासी हलचल बढ़ सकती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. वंदे मातरम् को लेकर वारिस पठान ने क्या बयान दिया है?\nवारिस पठान ने कहा कि वे राष्ट्र गीत का सम्मान करते हैं, लेकिन इसे किसी पर जबरन नहीं थोपा जा सकता और चाहे उन्हें फांसी दे दी जाए, वे दबाव में इसे नहीं गाएंगे।\n\n2. संसद में वंदे मातरम् बिल कब पास हुआ था?\nसंसद में वंदे मातरम् बिल 30 जुलाई को पारित हुआ था, जिसके बाद 13 अगस्त को संसद में और 15 अगस्त को लाल किले पर इसका पहली बार गायन किया गया।\n\n3. केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने इस विवाद पर क्या कहा?\nजीतनराम मांझी ने कहा कि राष्ट्र गीत का विरोध करने वाले देश विरोधी सोच का हिस्सा हैं और यदि वे नहीं सुधरे तो जनता उनका करारा जवाब देगी।\n\n4. महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर वारिस पठान की क्या राय है?\nउन्होंने कहा कि सभी को मराठी सीखनी चाहिए, लेकिन डरा-धमकाकर या नोटिस देकर भाषा थोपना गलत है। उन्होंने इस नियम को फिल्म सितारों और उद्योगपतियों पर भी लागू करने की चुनौती दी।\n\n5. ईद-ए-मिलाद के अवसर पर क्या मांग की गई है?\nवारिस पठान ने 26 अगस्त को ईद-ए-मिलाद के दिन समानता का हवाला देते हुए महाराष्ट्र में एक दिन के लिए शराब की दुकानें बंद रखने यानी शराबबंदी की मांग की है।",
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  "category": "राजनीति",
  "publishedAt": "2026-08-22",
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