राष्ट्रीय गीत पर जारी सियासी घमासान के बीच अशोक गहलोत का तीखा प्रहार, 90 साल पुराने इतिहास और आरएसएस की भूमिका पर उठाए सवाल वंदे मातरम् को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने भाजपा और आरएसएस पर कड़ा हमला बोला है। उन्होंने 90 साल पुराने इतिहास का हवाला देते हुए स्वतंत्रता संग्राम के दौरान संघ की भूमिका और वर्तमान सरकार की नीतियों पर गंभीर प्रश्न खड़े किए। राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् को लेकर देश के राजनीतिक गलियारों में छिड़ी नई बहस के बीच राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर अत्यंत तीखा हमला बोला है। जयपुर में अपनी बात रखते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का इस राष्ट्रीय गीत के साथ संबंध कोई आज का नहीं, बल्कि 90 वर्ष पुराना है। स्वतंत्रता संग्राम के दिनों से लेकर आज तक पार्टी के हर छोटे-बड़े अधिवेशन और आधिकारिक कार्यक्रमों में इस गीत का गायन पूरी निष्ठा के साथ किया जाता रहा है। ऐसे में वर्तमान में जो लोग कांग्रेस की देशभक्ति या वंदे मातरम् से उसके जुड़ाव पर प्रश्न उठा रहे हैं, उन्हें यह तय करने का कोई नैतिक या संवैधानिक अधिकार नहीं है। उन्होंने सत्ताधारी दल पर ऐतिहासिक तथ्यों को मरोड़ने और अपनी राजनीतिक विफलताओं से ध्यान भटकाने का गंभीर आरोप लगाया है। वंदे मातरम् का 90 साल पुराना इतिहास और टैगोर समिति का ऐतिहासिक निर्णय अशोक गहलोत ने इतिहास के पन्नों को पलटते हुए इस बात पर विशेष जोर दिया कि वंदे मातरम् के गायन की व्यवस्था आज की बनी हुई नहीं है। उन्होंने कहा कि लगभग 90 साल पहले, देश के महान साहित्यकार रवींद्रनाथ टैगोर के सानिध्य में एक विशेष समिति का गठन किया गया था। इस ऐतिहासिक समिति में पंडित जवाहरलाल नेहरू, सुभाष चंद्र बोस और आचार्य नरेंद्र देव जैसे शीर्ष स्वतंत्रता सेनानी एवं राष्ट्रीय नेता शामिल थे। उस समय इन सभी नेताओं ने विचार-विमर्श करके यह तय किया था कि वंदे मातरम् के किस अंश का सार्वजनिक रूप से गायन किया जाएगा। पूर्व मुख्यमंत्री ने सवाल उठाया कि जब नौ दशक पूर्व एक सर्वसम्मत व्यवस्था स्थापित हो चुकी थी, तो अब अचानक नए कानून, विधेयक और राजनीतिक विवाद खड़ा करने की क्या आवश्यकता आ पड़ी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लगातार 90 वर्षों से इस तय व्यवस्था के अनुसार वंदे मातरम् गाती आ रही है। भाजपा और उससे जुड़े संगठन अपनी राजनीतिक ब्रांडिंग के लिए अब नए विवाद पैदा कर रहे हैं। गहलोत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी अपनी बात रखते हुए दोहराया कि भाजपा इस मुद्दे पर चाहे जितने भी अनर्गल आरोप लगा ले, कांग्रेस पार्टी हर मंच पर इन आरोपों का मुंहतोड़ जवाब देती रहेगी। आरएसएस के नागपुर मुख्यालय पर तिरंगा न फहराने का मुद्दा और आजादी आंदोलन का रुख भारतीय जनता पार्टी और उसके वैचारिक पैतृक संगठन पर हमला बोलते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कई गंभीर सवाल दागे। उन्होंने कहा कि जो लोग आज दूसरों को राष्ट्रभक्ति का पाठ पढ़ा रहे हैं, उनका अपना इतिहास क्या रहा है, यह पूरा देश अच्छी तरह जानता है। उन्होंने आरोप लगाया कि नागपुर स्थित संघ मुख्यालय पर लगभग 50 वर्षों तक राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा नहीं फहराया गया था। ऐसे संगठन से जुड़े लोगों को तिरंगे और वंदे मातरम् के प्रति कांग्रेस की निष्ठा पर उंगली उठाने से पहले अपने अतीत में झांकना चाहिए। गहलोत ने स्वतंत्रता संग्राम का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि जब देश के स्वतंत्रता सेनानी अंग्रेजों की गोलियों और लाठियों का सामना करते हुए वंदे मातरम् का उद्घोष कर रहे थे, उस समय संघ के लोग अंग्रेजों के साथ खड़े थे। उन्होंने कहा कि आजादी के आंदोलन के दौरान जब पूरा देश वंदे मातरम् गाकर राष्ट्र को एकजुट कर रहा था, तब संघ ने अपना एक अलग गीत तैयार किया, जो आज भी उनकी शाखाओं में गाया जाता है। दुनिया इस बात से भली-भांति परिचित है कि उनका अपना गीत क्या है। ऐसी पृष्ठभूमि वाले नेताओं को कांग्रेस के राष्ट्रप्रेम पर सवाल खड़े करने का कोई हक नहीं है। भाजपा में व्याप्त अपराधबोध और घटता राजनीतिक जनाधार अशोक गहलोत ने दावा किया कि भाजपा और उससे जुड़े हुए संगठन असल में एक गहरे अपराधबोध अर्थात गिल्टी कॉन्शियस से ग्रसित हैं। इसी अपराधबोध को छिपाने के लिए वे लगातार उग्र बयानबाजी कर रहे हैं और अत्यधिक मुखर होने का नाटक कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सत्ताधारी दल की कार्यशैली में धरातल पर काम कम और प्रचार-प्रसार यानी मार्केटिंग ज्यादा दिखाई देती है। जनता अब इस दिखावे को पूरी तरह समझ चुकी है और यही कारण है कि देश में भाजपा का राजनीतिक ग्राफ लगातार नीचे गिर रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले दो दिनों से वंदे मातरम् को लेकर जिस तरह का माहौल तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है, वह केवल और केवल जनध्यान भटकाने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। सरकार अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए संवेदनशील भावनात्मक मुद्दों को तूल दे रही है। लेकिन देश की जागरूक जनता अब इनके छलावे में आने वाली नहीं है और आने वाले समय में इसका उचित जवाब देगी। सोनिया गांधी पर टिप्पणियों की कड़े शब्दों में निंदा सार्वजनिक विमर्श के गिरते स्तर पर चिंता व्यक्त करते हुए अशोक गहलोत ने सोनिया गांधी के खिलाफ की गई टिप्पणियों पर गहरा रोष प्रकट किया। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह द्वारा सोनिया गांधी को लेकर दिए गए बयानों की सख्त शब्दों में निंदा की। गहलोत ने कहा कि सोनिया गांधी का भारतीय सार्वजनिक और सामाजिक जीवन में एक बहुत ही प्रतिष्ठित और विशिष्ट स्थान है। उन्होंने देश के लिए अनेक त्याग किए हैं और उनकी भूमिका ने भारतीय राजनीति में एक अमिट छाप छोड़ी है। उन्होंने आगे कहा कि सोनिया गांधी की छवि एक ऐसी महिला की है जो भारतीय संस्कृति, परंपराओं और मूल्यों से गहराई से जुड़ी हुई हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह जैसे शीर्ष संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों द्वारा उनके बारे में जिस प्रकार की अमर्यादित टिप्पणियां की गई हैं, उन पर देश भर में गंभीर सवाल उठने चाहिए। सार्वजनिक विमर्श में गरिमा का पालन होना आवश्यक है, लेकिन सत्ता के अहंकार में विरोधी नेताओं के सम्मान को ठेस पहुंचाई जा रही है। राहुल गांधी के दौरे, युवाओं का जनआक्रोश और सरकार की विफलता देश के वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक वातावरण पर प्रकाश डालते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने राहुल गांधी के एक हालिया वक्तव्य का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने बिल्कुल सही कहा है कि देश के भीतर परिस्थितियां तेजी से बदल रही हैं। जब राहुल गांधी देश के विभिन्न हिस्सों के दौरे पर निकले या बाहर गए, तो पूरे देश में युवाओं के भीतर एक नया आक्रोश और आंदोलन देखने को मिला। राष्ट्रीय राजधानी के ऐतिहासिक जंतर मंतर पर देश की नई पीढ़ी यानी जेन जी के युवाओं ने सरकार की नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतरकर उग्र प्रदर्शन किया। गहलोत ने कहा कि युवाओं का यह व्यापक आंदोलन इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि देश में वर्तमान समय में सरकार नाम की कोई संस्था बची ही नहीं है। देश के कोने-कोने से बेरोजगार युवाओं और नागरिकों की आवाजें उठ रही हैं। केंद्र सरकार को समय रहते इन युवाओं की मांगों और देश भर में उठ रही आक्रोश की आवाजों को गंभीरता से समझना चाहिए। यदि सरकार ने युवाओं की अनदेखी जारी रखी, तो यह असंतोष और अधिक व्यापक रूप धारण कर लेगा। लोकतांत्रिक मूल्यों का हनन, विश्वविद्यालय राजनीति और चंदा चोरी का आरोप पूर्व मुख्यमंत्री ने भाजपा पर लोकतंत्र की मूल भावना को नष्ट करने का आरोप लगाया। उन्होंने अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल का उदाहरण देते हुए कहा कि जब वे सत्ता में थे, तब विरोधी दल के लोग उन्हें काले झंडे दिखाते थे और सरकार की नीतियों का विरोध करते थे। लेकिन उन्होंने कभी भी इस प्रकार के लोकतांत्रिक विरोध का बुरा नहीं माना और न ही प्रदर्शनकारियों पर दमनकारी कार्रवाई की। इसके विपरीत, आज स्थिति यह हो गई है कि जो भी व्यक्ति सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाता है या विरोध दर्ज कराता है, उसे सीधे जेल में डालने की धमकियां दी जा रही हैं। यह साफ दर्शाता है कि सरकार विरोध प्रदर्शनों से घबरा गई है और जनप्रतिनिधियों तथा विपक्ष की आवाज को कुचलने का प्रयास कर रही है। इसके साथ ही गहलोत ने विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक वातावरण और राजनीतिक हस्तक्षेप का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा के नेता और मंत्री चुनिंदा विश्वविद्यालयों में आसानी से जा सकते हैं और अपने कार्यक्रम आयोजित कर सकते हैं। परंतु जहां कांग्रेस की सरकारें हैं या स्वतंत्र वातावरण है, वहां विरोधी विचारों वाले लोगों को जाने से रोका जा रहा है। उन्होंने इस व्यवस्था के पीछे विश्वविद्यालयों के कुलपतियों की भूमिका पर भी गंभीर प्रश्न खड़े किए। इसके अलावा, उन्होंने चुनावी चंदा चोरी और प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक जैसे ज्वलंत मुद्दों पर पार्टी का पक्ष रखते हुए कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता इन मुद्दों को लेकर जनता के बीच जा रहे हैं और उन्हें अपार जनसमर्थन मिल रहा है। पार्टी ने इस संदर्भ में बाकायदा प्रस्ताव पास करके जो कदम उठाया है, वह पूरी तरह से सही और सामयिक है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू की सफाई पर पलटवार और राजनीतिक संदेश वंदे मातरम् विवाद के दौरान केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा दी गई सफाई पर चुटकी लेते हुए अशोक गहलोत ने कहा कि सत्ताधारी दल के बयानों में भारी विरोधाभास नजर आता है। उन्होंने कहा कि जब बयानों पर विवाद बढ़ जाता है, तो बाद में यह सफाई पेश की जाती है कि कही गई बात विपक्ष या किसी खास व्यक्ति के लिए नहीं थी। गहलोत ने सवाल किया कि यदि वह टिप्पणी विपक्ष या किसी नेता के खिलाफ नहीं थी, तो फिर वह आखिर किसके लिए की गई थी? इस प्रकार की लीपापोती से भाजपा की कथनी और करनी का अंतर उजागर होता है। अपने संबोधन के अंत में पूर्व मुख्यमंत्री ने दोहराया कि भाजपा दिन-प्रतिदिन जनता के सामने पूरी तरह एक्सपोज हो रही है। देश की जनता अब उनके झूठे दावों और ध्रुवीकरण की राजनीति को समझ चुकी है, जिसके कारण भाजपा का ग्राफ तेजी से गिर रहा है। कांग्रेस पार्टी का राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के साथ जुड़ाव दशकों पुराना और अटूट है। भाजपा को कोई अधिकार नहीं है कि वह इस मुद्दे को ढाल बनाकर कांग्रेस पार्टी की देशभक्ति पर सवालिया निशान लगाए। इसका आप पर असर भारत में: राजनीतिक बयानों और राष्ट्रीय प्रतीकों पर जारी बहस देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और ऐतिहासिक तथ्यों की चर्चा को प्रभावित करती है। राजस्थान में: राज्य के वरिष्ठ नेताओं द्वारा राष्ट्रीय मुद्दों पर आक्रामक रुख अपनाने से स्थानीय राजनीतिक माहौल और प्रशासनिक बहसों में तेजी आ सकती है। सवाल-जवाब 1. वंदे मातरम् विवाद पर अशोक गहलोत ने क्या मुख्य दावा किया? अशोक गहलोत ने दावा किया कि कांग्रेस का वंदे मातरम् से 90 साल पुराना संबंध है और पार्टी के अधिवेशनों में इसे लंबे समय से गाया जाता रहा है। 2. रवींद्रनाथ टैगोर और समिति का इस विवाद से क्या संबंध है? गहलोत ने बताया कि लगभग 90 साल पहले रवींद्रनाथ टैगोर के सानिध्य में बनी समिति में पंडित जवाहरलाल नेहरू और सुभाष चंद्र बोस जैसे नेताओं ने तय किया था कि वंदे मातरम् का कौन सा हिस्सा गाया जाएगा। 3. आरएसएस के नागपुर मुख्यालय को लेकर क्या आरोप लगाया गया? अशोक गहलोत ने आरोप लगाया कि आरएसएस ने 50 सालों तक अपने नागपुर स्थित मुख्यालय पर तिरंगा नहीं फहराया था। 4. सोनिया गांधी पर हुई टिप्पणियों के बारे में क्या कहा गया? गहलोत ने सोनिया गांधी पर गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा की गई टिप्पणियों की निंदा की और कहा कि देश में उनकी एक विशिष्ट पहचान है। 5. किरेन रिजिजू के बयान पर क्या प्रतिक्रिया दी गई? गहलोत ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू की सफाई पर सवाल उठाया कि यदि टिप्पणी विपक्ष के लिए नहीं थी तो फिर आखिर किसके लिए की गई थी। https://trendkia.com/politics/rashtriya-gita-para-jari-siyasi-ghamasana-ke-bicha-ashok-gehlot-ka-tikha-prahara-90-sala-purane-itihasa-aura-rss-ki-bhumika-para-u-19680 TrendKia — Har trend, sabse pehle.