लाल किले पर राहुल गांधी और खरगे की अनुपस्थिति से गरमाई सियासत, रक्षा मंत्रालय ने पेश की पुरानी सूची स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की बैठने की व्यवस्था पर विवाद के बाद राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे समारोह में शामिल नहीं हुए, जिसके बाद सरकार ने यूपीए शासनकाल के रिकॉर्ड पेश कर पलटवार किया। स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर नई दिल्ली स्थित ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर पर आयोजित मुख्य राष्ट्रीय समारोह में भारी राजनीतिक गतिरोध देखने को मिला, जब मुख्य विपक्षी दल के शीर्ष नेताओं ने लगातार तीसरे वर्ष इस गरिमामय सरकारी कार्यक्रम से दूरी बनाए रखी। इस बार भी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष तथा राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे समारोह में उपस्थित नहीं हुए। दोनों प्रमुख नेताओं की अनुपस्थिति के पीछे मुख्य वजह कार्यक्रम स्थल पर बैठने की जगह और कतार के आवंटन को लेकर उत्पन्न हुआ विवाद बताया जा रहा है। कांग्रेस पार्टी ने जहां इसे अपने नेताओं का अपमान बताया है, वहीं रक्षा मंत्रालय और केंद्र सरकार ने पुरानी व्यवस्था का हवाला देकर इस पर त्वरित प्रतिक्रिया दी है। बैठने की कतार और प्रोटोकॉल पर कांग्रेस की कड़ी आपत्ति इस पूरे विवाद का केंद्र बिंदु समारोह के दौरान निर्धारित की गई बैठने की व्यवस्था रही। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद संभाल रहे राहुल गांधी को कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त है। कांग्रेस का तर्क है कि सरकारी प्रोटोकॉल के नियमानुसार उन्हें अग्रिम यानी पहली कतार में सीट मिलनी चाहिए थी। हालांकि, कार्यक्रम में उन्हें पहली लाइन के बजाय दूसरी कतार में काफी पीछे स्थान दिया गया था। कांग्रेस ने सरकार के इस कदम पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे केवल एक नेता का नहीं, बल्कि लोकतंत्र और आम जनता का अपमान करार दिया। दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने इस पर स्पष्टीकरण देते हुए अलग तर्क प्रस्तुत किया। सरकार की ओर से कहा गया कि पेरिस ओलंपिक से लौटे भारतीय एथलीटों और खिलाड़ियों को विशेष सम्मान देने के लिए अग्रिम पंक्ति में स्थान दिया गया था, जिसके कारण मुख्य अतिथियों की बैठने की व्यवस्था में कुछ फेरबदल करना पड़ा था। रक्षा मंत्रालय का पलटवार और यूपीए शासनकाल की सूची विवाद को तूल पकड़ते देख रक्षा मंत्रालय ने तुरंत एक्शन लेते हुए आधिकारिक मोर्चे पर कांग्रेस के दावों का खंडन किया। मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, सरकार की ओर से कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को यूपीए शासनकाल के समय का एक पुराना आधिकारिक रिकॉर्ड भेजा गया। इस दस्तावेज में यह स्पष्ट रूप से दिखाया गया कि जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, तब तत्कालीन विपक्षी नेताओं के साथ कैसा आचरण किया जाता था। रिकॉर्ड के मुताबिक, उस समय विपक्ष के प्रमुख बीजेपी नेताओं अरुण जेटली और सुषमा स्वराज को भी स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान अग्रिम पंक्ति के बजाय पीछे की कतारों में ही जगह दी जाती थी। सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया कि इस वर्ष भी सभी व्यवस्थाएं तय प्रोटोकॉल और स्थापित परंपराओं के तहत ही की गई हैं। हालांकि, सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस नेता इस स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं हुए और उन्होंने बिना कोई अन्य ठोस कारण प्रस्तुत किए लाल किले के मुख्य कार्यक्रम में जाने से स्पष्ट इनकार कर दिया। मल्लिकार्जुन खरगे का लाल किला न जाना और इंदिरा भवन में कार्यक्रम केवल राहुल गांधी ही नहीं, बल्कि राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी लाल किले के समारोह में शामिल नहीं हुए। पार्टी सूत्रों के हवाले से बताया गया कि खरगे के लिए समारोह स्थल पर दूसरी या तीसरी कतार में सीट आवंटित की गई थी। कांग्रेस पार्टी ने इस पर सफाई देते हुए तर्क दिया कि खरगे के लिए उतनी दूर तक पैदल चलकर अपनी निर्धारित सीट तक पहुंचना काफी मुश्किल और कष्टदायक था। इस वजह से उन्होंने लाल किले जाने के बजाय अपनी पार्टी के मुख्यालय इंदिरा भवन में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में भाग लिया और तिरंगा फहराया। इस अवसर पर इंदिरा भवन में उनके साथ कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी और राहुल गांधी भी मौजूद रहे, जहां तीनों नेताओं ने मिलकर पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ ध्वजारोहण कार्यक्रम संपन्न किया। बीजेपी का कड़ा ऐतराज और आरपी सिंह का तीखा हमला स्वतंत्रता दिवस जैसे पावन राष्ट्रीय पर्व के आधिकारिक बहिष्कार पर बीजेपी ने कांग्रेस पार्टी के रवैये पर अत्यंत कड़ा ऐतराज जताया है। बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं ने कांग्रेस के इस कदम की आलोचना करते हुए इसे राष्ट्रीय पर्व का अनादर करार दिया और आरोप लगाया कि विपक्ष जानबूझकर देश के संवैधानिक आयोजनों पर राजनीति कर रहा है। इसी क्रम में बीजेपी नेता आरपी सिंह ने खरगे की सेहत और चलने की समस्या वाले बहाने पर सीधा हमला बोला। आरपी सिंह ने सवाल खड़ा करते हुए कहा, ‘खरगे संसद के मकर द्वार पर तो रोज सीढ़ियां चढ़ते हैं’। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि जब वह रोजाना संसद भवन के मकर द्वार की सीढ़ियां चढ़ सकते हैं, तो फिर लाल किले पर उन्हें पैदल चलने में अचानक परेशानी क्यों होने लगी। बीजेपी का कहना है कि कांग्रेस केवल अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के कारण राष्ट्रीय आयोजनों से दूरी बना रही है। इसका आप पर असर • भारत में: यह विवाद वीआईपी प्रोटोकॉल, राष्ट्रीय समारोहों में मर्यादा और संवैधानिक पदों के सम्मान से जुड़ी प्राथमिकताओं को रेखांकित करता है। • नई दिल्ली में: लाल किले पर आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में विभिन्न श्रेणी के अतिथियों, ओलंपिक खिलाड़ियों और नेताओं के लिए सीट आवंटन के नियमों की जानकारी मिलती है। सवाल-जवाब 1. लाल किले के स्वतंत्रता दिवस समारोह में कौन से मुख्य कांग्रेस नेता शामिल नहीं हुए? लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष तथा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे समारोह में शामिल नहीं हुए। 2. कांग्रेस ने लाल किले के कार्यक्रम से दूरी बनाने का क्या कारण बताया? कांग्रेस का आरोप था कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को अग्रिम पंक्ति के बजाय दूसरी कतार में जगह दी गई, जबकि खरगे के लिए चलने-फिरने में शारीरिक परेशानी का हवाला दिया गया। 3. रक्षा मंत्रालय ने सीट विवाद पर क्या सफाई दी? मंत्रालय ने बताया कि पेरिस ओलंपिक खिलाड़ियों को आगे बैठाने के कारण सीट व्यवस्था में बदलाव किया गया था और यूपीए दौर के पुराने रिकॉर्ड दिखाते हैं कि तब भी विपक्षी नेताओं को पीछे बैठाया जाता था। 4. लाल किले जाने के बजाय मल्लिकार्जुन खरगे ने स्वतंत्रता दिवस कहां मनाया? मल्लिकार्जुन खरगे ने कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा भवन में सोनिया गांधी और राहुल गांधी की उपस्थिति में राष्ट्रीय ध्वज फहराया। 5. बीजेपी ने कांग्रेस के बहिष्कार पर क्या प्रतिक्रिया दी? बीजेपी ने इसे राष्ट्रीय पर्व का अपमान बताया और नेता आरपी सिंह ने कहा कि खरगे संसद में रोजाना सीढ़ियां चढ़ते हैं तो लाल किले पर चलने में दिक्कत क्यों हुई। https://trendkia.com/politics/red-fort-para-rahul-gandhi-aura-kharge-ki-anupasthiti-se-garamai-siyasata-raksha-mntralaya-ne-pesha-ki-purani-suchi-17018 TrendKia — Har trend, sabse pehle.