सड़क, सुरक्षा और सफाई: कोटा के वार्डों में वादों से नहीं, काम से पक्का होगा वोट कोटा में नगर निकाय चुनाव की सरगर्मी के बीच वार्डों के वोटर टूटी सड़कों, महिला सुरक्षा, स्ट्रीट लाइट और आवारा मवेशियों जैसे मुद्दों पर खुलकर बोल रहे हैं और कह रहे हैं कि वोट अब सिर्फ जमीन पर काम करने वाले प्रत्याशी को ही मिलेगा। कोटा में नगर निकाय चुनाव की घोषणा होते ही उम्मीदवार वार्ड दर वार्ड घर-घर पहुंचने लगे हैं, हाथ जोड़कर वोट मांग रहे हैं और विकास के भरोसे भी दे रहे हैं। मगर वोटरों का मिजाज इस बार पहले से अलग दिख रहा है, उनका कहना है कि सिर्फ भाषण और वादों से जीत तय नहीं होगी, पर्ची उसी नाम पर पड़ेगी जो जमीन पर वाकई काम करके दिखाएगा। शहर के अलग-अलग वार्डों में घूमकर बात करने पर सड़क, सुरक्षा, स्ट्रीट लाइट, सफाई और आवारा मवेशियों की समस्या सबसे ज्यादा उभरकर सामने आई। सड़कों की बदहाली सबसे बड़ी नाराजगी अलग-अलग वार्डों में लोगों से बात करने पर सबसे ज्यादा गुस्सा टूटी सड़कों और गड्ढों को लेकर सामने आया। वोटरों का कहना है कि सड़क एक बार बन जाने के बाद उसकी क्वालिटी और रखरखाव पर किसी का ध्यान नहीं जाता, काम पूरा दिखाकर सब भूल जाते हैं। बारिश के मौसम में यही सड़कें और बदतर हो जाती हैं, गड्ढों में पानी भरने से दुर्घटना का डर बना रहता है और दोपहिया वाहन चालकों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। लोगों की मांग है कि अब बार-बार खुदाई और पैचवर्क की जगह ऐसी सड़कें बनें जो सालों तक टिकें और जिनकी नियमित निगरानी भी हो। महिला सुरक्षा के लिए सीसीटीवी की मांग महिला सुरक्षा को लेकर भी वार्डों के वोटर काफी सजग नजर आए। लोगों का कहना है कि भीड़भाड़ वाली और संवेदनशील गलियों में सीसीटीवी कैमरे लगाने की व्यवस्था को मजबूत किया जाए, ताकि चोरी, चेन स्नेचिंग जैसी घटनाओं पर निगरानी रखी जा सके और वारदातें रुकें। कई महिलाओं ने कहा कि रात में सुनसान गलियों से गुजरना उनके लिए आज भी असहज अनुभव है। आवारा पशु और अंधेरी सड़कें भी चिंता का विषय सड़कों पर घूमते आवारा कुत्तों और मवेशियों की समस्या भी लोगों की एक बड़ी शिकायत के रूप में सामने आई। इसके अलावा कई इलाकों में स्ट्रीट लाइट खराब पड़ी होने से रात में अंधेरा पसरा रहता है, जिससे असुरक्षा का माहौल बनता है। वोटरों की मांग है कि लाइट खराब होने की शिकायत मिलते ही उसे जल्द ठीक कराने का सिस्टम बनाया जाए, ताकि लोगों को बार-बार निगम के चक्कर न काटने पड़ें। गौशाला से लेकर राशन दुकानों तक सुधार की उम्मीद लोगों ने नगर निगम की गौशालाओं में बेहतर इंतजाम, वहां पशु चिकित्सकों की नियमित मौजूदगी और सड़क पर बीमार या मृत मवेशी मिलने पर उसे तुरंत हटाने की मांग रखी। इसके साथ ही घर-घर से कचरा उठाने का काम नियमित हो, सामुदायिक भवनों की देखभाल ठीक से हो और राशन दुकानों पर लगने वाली लंबी लाइनों से राहत मिले, ऐसी उम्मीद भी जताई गई। कई लोगों ने यह भी कहा कि छोटी-छोटी शिकायतों के लिए भी उन्हें कई बार निगम कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं। वोटरों को चाहिए ऐसा पार्षद जो फोन न काटे ज्यादातर लोगों की एक ही मांग रही कि जीतने वाला पार्षद पढ़ा-लिखा, ईमानदार और जनता के बीच रहने वाला हो। लोगों ने साफ कहा कि चुनाव जीतने के बाद पार्षद का मोबाइल बंद नहीं होना चाहिए, बल्कि समस्या बताते ही उसके समाधान की कोशिश तुरंत शुरू हो जानी चाहिए। कोटा के वार्डों में उठ रहे ये सारे मुद्दे बिल्कुल जमीनी हैं, अब देखना यह है कि प्रत्याशियों के घोषणापत्र में इन्हें कितनी जगह मिलती है और जीत के बाद कितने वादे हकीकत में बदलते हैं। इसका आप पर असर यह खबर सीधे तौर पर कोटा के वार्डों में रहने वाले वोटरों और आगामी नगर निकाय चुनाव से जुड़ी है, इसका असर लोगों के रोजमर्रा के मुद्दों पर सीधे दिखेगा। • भारत में: जहां भी नगर निकाय चुनाव होने वाले हैं, वहां वोटर अब सिर्फ वादों पर नहीं बल्कि सड़क, सफाई और सुरक्षा जैसे बुनियादी कामों पर उम्मीदवारों को परख रहे हैं। इसका मतलब है कि आने वाले समय में स्थानीय चुनावों में जमीनी काम का रिकॉर्ड जीत-हार तय करने वाला बड़ा कारक बन सकता है। • कोटा में: अगर आप कोटा के किसी वार्ड में रहते हैं, तो वोट डालने से पहले उम्मीदवार से सड़क, स्ट्रीट लाइट और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर उसका ठोस प्लान पूछ सकते हैं। जीतने के बाद पार्षद से आसानी से संपर्क बना रहे, यह मांग अब खुलकर उठ रही है, जिससे शिकायत दर्ज कराना पहले से आसान होने की उम्मीद बंधी है। • रात में निकलने पर असर: सीसीटीवी और स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था सुधरती है तो रात में बाहर निकलना, खासकर महिलाओं के लिए, ज्यादा सुरक्षित हो सकता है। • रोजमर्रा के काम पर असर: डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण और राशन दुकानों की कतारों में सुधार होता है तो लोगों का रोजाना का समय और मेहनत दोनों बचेंगे। सवाल-जवाब 1. कोटा में यह राजनीतिक हलचल किस चुनाव को लेकर है? यह हलचल कोटा के आगामी नगर निकाय चुनाव को लेकर है, जिसमें प्रत्याशी वार्डों में घर-घर जनसंपर्क कर रहे हैं। 2. वार्डों में लोगों की सबसे बड़ी शिकायत क्या रही? सबसे ज्यादा नाराजगी टूटी सड़कों और गड्ढों को लेकर सामने आई, इसके बाद महिला सुरक्षा, स्ट्रीट लाइट और आवारा मवेशियों की समस्या का नंबर रहा। 3. वोटर किस तरह का पार्षद चाहते हैं? लोग ऐसा पार्षद चाहते हैं जो पढ़ा-लिखा, ईमानदार हो, जनता के बीच रहे और जीतने के बाद फोन बंद न करे। 4. महिला सुरक्षा को लेकर लोगों की क्या मांग है? लोग चाहते हैं कि भीड़भाड़ वाली और संवेदनशील गलियों में सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था मजबूत की जाए ताकि चोरी और चेन स्नेचिंग जैसी घटनाओं पर निगरानी रखी जा सके। 5. गौशालाओं को लेकर क्या मांग उठी? लोगों ने गौशालाओं में बेहतर इंतजाम, नियमित पशु चिकित्सक की मौजूदगी और सड़क पर बीमार या मृत मवेशियों को तुरंत हटाने की मांग की। 6. राशन दुकानों को लेकर लोगों ने क्या कहा? लोगों ने राशन दुकानों पर लगने वाली लंबी कतारों से राहत दिलाने की उम्मीद जताई। https://trendkia.com/politics/saraka-suraksha-aura-saphai-kota-ke-vardon-men-vadon-se-nahin-kama-se-pakka-hoga-vota-28913 TrendKia — Har trend, sabse pehle.