# सावरकर और स्वतंत्रता सेनानियों की भूमिका पर प्रियंक खरगे के बयान से सियासत गर्म, पक्ष और विपक्ष में तकरार

> कर्नाटक के मंत्री प्रियंक खरगे द्वारा वीर सावरकर और सुभाष चंद्र बोस पर दी गई टिप्पणी के बाद राजनीतिक घमासान मच गया है। जहां एनडीए नेताओं ने इसे इतिहास की अधूरी समझ बताया है, वहीं टीएमसी और सपा ने इसे ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित बयान कहा है।

**Type:** article · **Category:** राजनीति · **Published:** 2026-07-29 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/politics/savarkar-aura-svatntrata-senaniyon-ki-bhumika-para-priyank-kharge-ke-bayana-se-siyasata-garma-paksha-aura-vipaksha-men-takarara-11831 · **Language:** Hindi
**Tags:** प्रियंक खरगे, वीर सावरकर, सुभाष चंद्र बोस, कांग्रेस, भाजपा, राजनीति, इंदिरा गांधी

कर्नाटक सरकार में मंत्री और कांग्रेस नेता प्रियंक खरगे द्वारा स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस और वीर सावरकर को लेकर दी गई एक टिप्पणी के बाद देश का राजनीतिक माहौल गर्मा गया है। इस बयान के सामने आते ही सत्तारूढ़ एनडीए के घटक दलों और नेताओं ने प्रियंक खरगे की ऐतिहासिक समझ पर सवाल उठाते हुए तीखा हमला बोला है। वहीं दूसरी तरफ, विपक्षी गठबंधन के सहयोगी दलों ने कांग्रेस नेता का समर्थन करते हुए इसे ऐतिहासिक तथ्यों की अभिव्यक्ति करार दिया है। इस मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों के बीच बयानों का दौर जारी है।

## भाजपा का कड़ा पलटवार: इंदिरा गांधी के बयानों की याद दिलाई
भाजपा प्रवक्ता गुरु प्रकाश ने कांग्रेस नेता प्रियंक खरगे के बयान पर कड़ी आपत्ति व्यक्त करते हुए उनके अध्ययन और तथ्यों पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्रीय प्रतीक या ऐतिहासिक व्यक्तित्व पर बोलने से पहले नेताओं को इतिहास का गहन अध्ययन करना चाहिए। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि प्रियंक खरगे और उनके पिता मल्लिकार्जुन खरगे जिस पार्टी का प्रतिनिधित्व करते हैं, उन्हें अपनी ही पार्टी के पुराने नेताओं के रुख को देखना चाहिए।

गुरु प्रकाश ने सवाल उठाया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी सावरकर के योगदान को स्वीकार करते हुए उन्हें 'वीर' कहा था और भारत का अनमोल रत्न बताया था। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रियंक खरगे के पास अपने दावों को साबित करने के लिए कोई ठोस आंकड़े या तथ्य नहीं हैं। उनके अनुसार, इस तरह की टिप्पणियां केवल कुछ विशेष समूहों को खुश करने की मंशा से की जा रही हैं, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।

## सहयोगी दलों की सलाह: इतिहास से सीखें, बेवजह विवाद न बनाएं
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और निषाद पार्टी के प्रमुख संजय निषाद ने इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पुरानी बातों पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने का अब कोई औचित्य नहीं रह गया है। उन्होंने कहा कि जनता ने नेताओं को वर्तमान जनसमस्याओं को हल करने के लिए चुना है, इसलिए ध्यान आज की वास्तविकताओं और काम पर होना चाहिए।

जदयू एमएलसी और पार्टी के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने भी इतिहास के इस्तेमाल पर अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इतिहास को खंगालने के बजाय उसे सही संदर्भ में समझने की आवश्यकता है। स्वतंत्रता संग्राम में सुभाष चंद्र बोस, महात्मा गांधी और भगत सिंह के रास्तों और विचारधाराओं में अंतर जरूर था, लेकिन सभी का अंतिम लक्ष्य देश की आजादी ही था। नीरज कुमार ने बल दिया कि नेताओं को इतिहास से सबक लेना चाहिए और तथ्यों की जांच के बाद ही बात करनी चाहिए।

## विपक्षी खेमे का समर्थन: टीएमसी और सपा ने ठहराया सही
दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद कीर्ति आजाद ने प्रियंक खरगे के वक्तव्य का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान में देश के इतिहास और पाठ्यक्रम को बदलने के प्रयास किए जा रहे हैं। कीर्ति आजाद का कहना था कि प्रियंक खरगे ने केवल स्थापित ऐतिहासिक तथ्यों को सामने रखा है और जो लोग राष्ट्रवाद का दावा करते हैं, उनसे उनके अतीत के कार्यों पर सवाल पूछे जाने चाहिए।

समाजवादी पार्टी (SP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने भी खरगे का पक्ष लेते हुए कहा कि यह सब दर्ज इतिहास का हिस्सा है। उन्होंने उल्लेख किया कि जब नेताजी सुभाष चंद्र बोस इंडियन नेशनल आर्मी के जरिए देश की आजादी के लिए लोगों को एकजुट कर रहे थे, उस समय सावरकर और भारतीय जनसंघ से जुड़े नेताओं का दृष्टिकोण अलग था। सपा प्रवक्ता के अनुसार, यह कोई नई बात नहीं है बल्कि इतिहास के पन्नों में दर्ज तथ्य है।

## इसका आप पर असर
- **भारत भर में:** स्वतंत्रता सेनानियों और ऐतिहासिक घटनाओं पर चलने वाली राजनीतिक बहसें आम नागरिकों को इतिहास के विभिन्न दृष्टिकोणों और तथ्यों को समझने का अवसर देती हैं।
- **कर्नाटक और उत्तर प्रदेश में:** राज्य स्तर के नेताओं द्वारा दिए गए ऐसे बयानों से स्थानीय राजनीति और पार्टी कैडर के बीच सैद्धांतिक बहसें तेज होती हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. प्रियंक खरगे ने हाल ही में किस विषय पर टिप्पणी की थी?
कर्नाटक के मंत्री प्रियंक खरगे ने स्वतंत्रता सेनानी सुभाष चंद्र बोस और वीर सावरकर को लेकर बयान दिया था, जिसके बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया।

### 2. भाजपा प्रवक्ता गुरु प्रकाश ने प्रियंक खरगे के बयान पर क्या प्रतिक्रिया दी?
गुरु प्रकाश ने प्रियंक खरगे की ऐतिहासिक समझ पर सवाल उठाए और याद दिलाया कि इंदिरा गांधी ने भी सावरकर को 'वीर' और भारत का अनमोल रत्न कहा था।

### 3. संजय निषाद और नीरज कुमार ने नेताओं को क्या सलाह दी?
संजय निषाद ने कहा कि नेताओं को आज की समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए, जबकि नीरज कुमार ने इतिहास को बेवजह विवाद का विषय बनाने के बजाय उससे सीखने की सलाह दी।

### 4. विपक्षी नेताओं में से किसने प्रियंक खरगे का समर्थन किया?
टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद और सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने प्रियंक खरगे का समर्थन करते हुए कहा कि उनके बयान ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित हैं।

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