# शरद पवार गुट के भीतर NDA में सीधे जाने का दबाव, फैसला दो हफ्ते में मुमकिन

> शरद पवार की NCP के NDA में शामिल होने पर बातचीत आखिरी दौर में पहुंच गई है और अगले 8 से 15 दिनों में फैसला आ सकता है, वहीं अजित पवार की पार्टी के भीतर सुनेत्रा पवार-पार्थ पवार और प्रफुल्ल पटेल-सुनील तटकरे के बीच खींचतान मर्जर की राह मुश्किल बना रही है।

**Type:** article · **Category:** राजनीति · **Published:** 2026-07-17 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/politics/sharada-pawar-guta-ke-bhitara-nda-men-sidhe-jane-ka-dabava-phaisala-do-haphte-men-mumakina-8403 · **Language:** Hindi
**Tags:** शरद पवार, NCP, NDA, अजित पवार, महाराष्ट्र राजनीति, सुप्रिया सुले, भाजपा, मर्जर

महाराष्ट्र की सियासत में इन दिनों एक बड़ा सवाल घूम रहा है, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों धड़े आखिर किस दिशा में जाएंगे। सूत्रों की मानें तो शरद पवार के नेतृत्व वाली NCP के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) से जुड़ने पर बातचीत गंभीर मोड़ पर पहुंच चुकी है और अगले करीब 8 से 15 दिनों में इस पर मुहर लग सकती है।

## दो फॉर्मूलों के बीच पेच
पार्टी के भीतर और बाहर, दोनों जगह इस समय दो अलग-अलग रास्तों पर चर्चा हो रही है। पहला रास्ता यह है कि अजित पवार वाली NCP और शरद पवार वाली NCP आपस में मिल जाएं और फिर एक साथ NDA का हिस्सा बनें। दूसरा रास्ता तब खुलता है जब यह विलय किसी वजह से टल जाए, ऐसी स्थिति में शरद पवार की पार्टी अपनी अलग पहचान बनाए रखते हुए ही गठबंधन से जुड़ सकती है, या फिर सरकार को अंदर या बाहर से समर्थन देने का रास्ता चुन सकती है।

## पार्टी के भीतर सीधी एंट्री की मांग तेज
सूत्रों का कहना है कि शरद पवार खेमे के ज्यादातर विधायक और सांसद विलय की बजाय सीधे गठबंधन में शामिल होने के हक में खड़े हैं। इनकी दलील है कि केंद्र और राज्य, दोनों जगह सत्ता में हिस्सेदारी मिलने पर ही संगठन असल मायनों में मजबूत होगा, कार्यकर्ताओं का उत्साह बना रहेगा और आने वाले समय में पार्टी का दायरा भी बढ़ सकेगा। इसके उलट अगर पार्टी सिर्फ बाहर से समर्थन देने तक सीमित रह गई तो उसे राजनीतिक तौर पर बहुत कुछ हासिल नहीं होगा, ऐसा इन नेताओं का मानना है। यही वजह है कि कई विधायक और सांसद अपने स्तर पर भाजपा के केंद्रीय और राज्य के नेताओं से बातचीत भी कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक अगर फैसला लटकता रहा तो आगे चलकर पार्टी में बिखराव का खतरा भी टला नहीं है, इसलिए संगठन के भीतर सीधे गठबंधन में शामिल होने का पक्ष लगातार मजबूत होता दिख रहा है।

## अजित पवार की पार्टी में भी अंदरूनी खींचतान
उधर अजित पवार की NCP के भीतर भी हालात सीधे नहीं हैं। एक तरफ सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार का खेमा है तो दूसरी तरफ प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे की टोली सक्रिय है। अजित पवार के निधन के बाद जब सुनेत्रा पवार को पार्टी की राष्ट्रीय कमान सौंपी गई, तभी से उनके और पार्थ पवार के कामकाज के तरीके को लेकर संगठन के भीतर बेचैनी बढ़ने लगी। प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे को लगता है कि उन्हें किनारे किया जा रहा है और वे इस पूरी व्यवस्था में सहज महसूस नहीं कर रहे। इसकी एक झलक तब दिखी जब चुनाव आयोग को भेजी गई एक चिट्ठी में कार्यकारी अध्यक्ष के तौर पर प्रफुल्ल पटेल और प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर सुनील तटकरे, दोनों के नाम ही गायब मिले। इस पर हंगामे के बाद सुधार का भरोसा तो दिलाया गया, लेकिन सूत्रों का कहना है कि हकीकत में कुछ नहीं बदला। साथ ही पार्टी के अंदर कई विधायक भी पार्थ पवार की कार्यशैली से खफा बताए जाते हैं और यही खीझ प्रफुल्ल पटेल तथा सुनील तटकरे के समर्थकों में भी नजर आती है।

## मंत्रिमंडल विस्तार की मांग ने बढ़ाई दूरी
आने वाले समय में अगर केंद्र में मंत्रिमंडल का विस्तार होता है तो सुनेत्रा पवार खेमा चाहता है कि प्रफुल्ल पटेल की जगह पार्थ पवार को मंत्री पद दिया जाए। इस मांग ने भी अंदरखाने नाराजगी को और हवा दी है। इसी बीच सचिनानंद सिंह के नाम से लिखे एक पत्र में सुनेत्रा पवार की नियुक्ति को गैरकानूनी बताया गया, जिस पर सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार खेमे ने सीधा शक प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे गुट पर जताया। इसके साथ ही सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार यह भी चाहते हैं कि प्रफुल्ल पटेल संगठन और सरकार, दोनों में से किसी एक ही जिम्मेदारी तक सीमित रहें। बताया जा रहा है कि इसी मुद्दे को लेकर प्रफुल्ल पटेल के भीतर भी गहरी नाराजगी है।

## पुराने साथियों की शरद पवार से नजदीकी
इन्हीं हालात के बीच प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे की शरद पवार से मुलाकातें और बातचीत लगातार बढ़ी हैं। सूत्रों के अनुसार ये दोनों नेता कुछ विधायकों को साथ लेकर पुरानी, अविभाजित NCP को दोबारा एक मंच पर लाने की कोशिश में जुटे हैं, ताकि संगठन मजबूत बना रहे और राजनीति में उनकी अपनी अहमियत भी कम न हो।

## विलय से सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार क्यों बच रहे
वहीं सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार दोनों गुटों के विलय के पक्ष में नहीं हैं। उन्हें डर है कि प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे पहले से ही उनके विरोधी खेमे में खड़े हैं, ऐसे में अगर सुप्रिया सुले और शरद पवार गुट के विधायक-सांसद भी जुड़ गए तो संगठन पर उनकी पकड़ पूरी तरह ढीली पड़ सकती है। इसी आशंका के चलते वे मर्जर को टालने की कोशिश में हैं। दूसरी ओर सुप्रिया सुले भी यह जता चुकी हैं कि उनकी ओर से आगे बढ़ी बात पर सामने से कोई सकारात्मक जवाब नहीं आया, इसलिए फिलहाल विलय की गुंजाइश खत्म हो चुकी लगती है, क्योंकि वे अपने आत्मसम्मान से समझौता करने को तैयार नहीं हैं।

## भाजपा किस समीकरण पर काम कर रही
भाजपा की कोशिश यही है कि दोनों NCP अलग-अलग रहने के बजाय एक साथ ही NDA में आएं। अगर दोनों अलग रहीं और अजित पवार वाली पार्टी में गुटबाजी भी बनी रही तो राज्य और केंद्र के बीच तालमेल बिठाना मुश्किल हो सकता है। भाजपा के भीतर यह चिंता भी है कि अजित पवार के जाने के बाद पार्टी के पास ऐसा कोई असरदार सेक्युलर चेहरा नहीं बचा जो कांग्रेस और विपक्ष के परंपरागत वोट बैंक में सेंध लगा सके। इसी वजह से शरद पवार, सुप्रिया सुले और उनके साथियों का गठबंधन से जुड़ना भाजपा को सियासी तौर पर फायदेमंद सौदा लग रहा है। साथ ही भाजपा यह भी नहीं भूलती कि मुश्किल वक्त में अजित पवार ने शरद पवार से अलग राह चुनकर NDA का साथ दिया था, इसलिए उनकी गैरमौजूदगी में सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार को पूरी तरह नजरअंदाज करना गलत संदेश दे सकता है। यही कारण है कि भाजपा दोनों खेमों के बीच किसी सहमति की जमीन तैयार करने में जुटी है।

## अगर विलय नहीं हुआ तो आगे क्या
सूत्रों के मुताबिक अगर दोनों NCP के बीच विलय पर बात नहीं बनती है तो शरद पवार की पार्टी अपना अलग वजूद कायम रखते हुए ही गठबंधन का हिस्सा बन सकती है। ज्यादातर विधायक-सांसदों की राय है कि पार्टी को सीधे सत्ता में शामिल होना चाहिए, क्योंकि इसी से संगठन मजबूत रहेगा, कार्यकर्ता जुड़े रहेंगे और पार्टी का फैलाव भी हो सकेगा। इसके लिए अजित पवार वाली NCP को भी राजी करने की कोशिश जारी है। अगर यह रास्ता भी नहीं निकला तो आखिरी विकल्प के तौर पर शरद पवार की पार्टी सरकार में शामिल हुए बिना संसद और विधानसभा में जरूरी बिलों तथा बड़े फैसलों पर परोक्ष रूप से साथ दे सकती है। एक और विकल्प यह भी चर्चा में रहा कि अगर अजित पवार की पार्टी के साथ विलय न हो सके तो शरद पवार गुट के विधायक-सांसद एकनाथ शिंदे की शिवसेना से जुड़कर गठबंधन में शामिल हो जाएं, लेकिन सूत्रों के मुताबिक इस सुझाव को खास तवज्जो नहीं मिली, क्योंकि खुद शरद पवार, सुप्रिया सुले और ज्यादातर विधायक-सांसद मानते हैं कि उनकी सोच और कामकाज का तरीका शिवसेना से सीधे जुड़ने के साथ मेल नहीं खाता। फिलहाल सबसे ज्यादा जोर इसी पर है कि पहले दोनों NCP एक हों और फिर मिलकर गठबंधन में शामिल हों, तभी न बन पाए तो अलग इकाई के तौर पर जुड़ने का रास्ता अपनाया जाए।

## दिल्ली और मुंबई की बैठकों पर टिकीं निगाहें
सूत्रों का कहना है कि अगर यह व्यवस्था सिरे चढ़ती है तो केंद्र की राजनीति में सुप्रिया सुले और महाराष्ट्र में जयंत पाटिल को अहम जिम्मेदारी मिल सकती है, और दोनों ही सरकार का हिस्सा बन सकते हैं। अब सबकी नजरें दिल्ली में होने वाली NDA की बैठकों और महाराष्ट्र में महायुति की भीतरी सियासी बैठकों पर टिकी हैं। इन बैठकों के बाद ही अगले कुछ दिनों में तस्वीर पूरी तरह साफ होने की उम्मीद है। मौजूदा हालात को देखते हुए यह कयास लगाया जा रहा है कि शरद पवार की NCP आने वाले दिनों में प्रत्यक्ष या परोक्ष तौर पर NDA के साथ जाने का फैसला ले सकती है, हालांकि अंतिम तस्वीर दोनों NCP, गठबंधन के नेतृत्व और आगे होने वाली बैठकों के बाद ही सामने आएगी।

## पार्थ पवार के लिए मंत्री पद की पैरवी
इस बीच एक और घटनाक्रम पर भी नजर है। दिवंगत अजित पवार और डिप्टी सीएम सुनेत्रा पवार के बेटे पार्थ पवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह दिलाने के लिए NCP की तरफ से लॉबिंग शुरू हो चुकी है।

## इसका आप पर असर
- **भारत में:** अगर शरद पवार गुट NDA से जुड़ता है तो केंद्र में सत्तारूढ़ गठबंधन के सहयोगियों और सीटों का समीकरण बदल सकता है, जिसका असर आगे की गठबंधन राजनीति और नीतिगत फैसलों पर पड़ सकता है।
- **महाराष्ट्र में:** राज्य में महायुति सरकार के भीतर सत्ता-साझेदारी और मंत्री पदों के बंटवारे को लेकर नई खींचतान शुरू हो सकती है, जिसका सीधा असर राज्य की राजनीतिक स्थिरता पर पड़ेगा।

## सवाल-जवाब

### 1. शरद पवार की NCP NDA में कब तक शामिल हो सकती है?
सूत्रों के मुताबिक अगले 8 से 15 दिनों में इस पर अंतिम फैसला आ सकता है।

### 2. NDA में जुड़ने के लिए किन दो फॉर्मूलों पर चर्चा हो रही है?
पहला फॉर्मूला दोनों NCP के विलय के बाद साथ NDA में शामिल होने का है, दूसरा फॉर्मूला शरद पवार की NCP के अलग इकाई के तौर पर गठबंधन से जुड़ने या बाहर से समर्थन देने का है।

### 3. शरद पवार खेमे के ज्यादातर विधायक-सांसद क्या चाहते हैं?
उनका मानना है कि सीधे सत्ता में हिस्सेदारी मिलने से संगठन मजबूत होगा, इसलिए वे विलय की प्रक्रिया में देरी के बजाय सीधे NDA में शामिल होने के पक्ष में हैं।

### 4. अजित पवार की NCP में विवाद की वजह क्या है?
अजित पवार के निधन के बाद सुनेत्रा पवार को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए जाने से उनके और पार्थ पवार के कामकाज को लेकर प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे खेमे में नाराजगी बढ़ी है।

### 5. सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार मर्जर का विरोध क्यों कर रहे हैं?
उन्हें डर है कि विलय होने पर प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे, सुप्रिया सुले और शरद पवार गुट मिलकर संगठन पर उनकी पकड़ कमजोर कर सकते हैं।

### 6. सुप्रिया सुले ने विलय को लेकर क्या रुख दिखाया है?
उन्होंने संकेत दिया है कि दूसरे पक्ष से सकारात्मक जवाब न मिलने के चलते फिलहाल विलय की गुंजाइश खत्म हो चुकी है।

### 7. भाजपा इस पूरे मामले में क्या चाहती है?
भाजपा चाहती है कि दोनों NCP मिलकर एक साथ NDA में आएं, ताकि राज्य और केंद्र के बीच तालमेल बना रहे और कांग्रेस-विपक्ष के वोट बैंक में सेंध लगाई जा सके।

### 8. अगर मर्जर नहीं हुआ तो शरद पवार गुट के पास क्या विकल्प बचेंगे?
वह अलग इकाई के तौर पर NDA से जुड़ सकती है या सरकार में शामिल हुए बिना बाहर से समर्थन दे सकती है, जबकि शिवसेना से जुड़ने के विकल्प को ज्यादा समर्थन नहीं मिला है।

### 9. पार्थ पवार को लेकर हाल में क्या मांग सामने आई है?
NCP की तरफ से पार्थ पवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह दिलाने के लिए लॉबिंग शुरू हो गई है।

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