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  "type": "article",
  "title": "शशि पांजा फिर पहुंचीं काकोली घोष दस्तीदार के क्लिनिक, टीएमसी में हलचल तेज",
  "summary": "तृणमूल कांग्रेस नेता शशि पांजा लगातार दूसरे दिन एनसीपीआई सांसद काकोली घोष दस्तीदार के क्लिनिक पहुंचीं, जिसके बाद पार्टी से उनके अलग होने की अटकलें तेज हो गई हैं।",
  "content": "पश्चिम बंगाल की सियासत में सोमवार को एक बार फिर हलचल मच गई, जब तृणमूल कांग्रेस की नेता शशि पांजा एनसीपीआई से जुड़ी सांसद काकोली घोष दस्तीदार के क्लिनिक जा पहुंचीं। यह लगातार दूसरा दिन था जब पांजा इस क्लिनिक में देखी गईं, और इसके साथ ही ममता बनर्जी की पार्टी से उनके अलग होने को लेकर अटकलों ने फिर जोर पकड़ लिया। पूर्व मंत्री रह चुकीं पांजा ने तृणमूल छोड़ने की संभावना से जुड़े सवालों का कोई सीधा जवाब नहीं दिया।\n\nक्लिनिक से निकलते वक्त सिर्फ इतना कहा\nजैसे ही पांजा क्लिनिक से बाहर निकलीं, वहां मौजूद पत्रकारों ने उन्हें रोककर पूछा कि क्या वह तृणमूल कांग्रेस को छोड़ने की तैयारी कर रही हैं। जवाब में पांजा ने हल्की मुस्कान के साथ बस इतना कहा, 'मुझे जाना है।' इतना कहकर वह बिना कुछ और बोले वहां से निकल गईं। उनका यह छोटा सा जवाब खुद कई सवाल खड़े कर गया, क्योंकि उन्होंने न तो अटकलों को सिरे से खारिज किया और न ही इसकी पुष्टि की। पत्रकारों के बार बार पूछने पर भी वह किसी नतीजे पर पहुंचने वाला जवाब देने से बचती रहीं।\n\nममता के घर से महज 800 मीटर दूर मुलाकात\nगौर करने वाली बात यह है कि जिस क्लिनिक में पांजा पहुंचीं, वह पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास से करीब 800 मीटर की दूरी पर ही स्थित है। इतनी कम दूरी पर हुई इस मुलाकात ने पांजा के राजनीतिक रुख को लेकर चर्चाओं को और हवा दे दी है। पिछले हफ्ते भी वह इसी क्लिनिक जा चुकी हैं, और तब भी राजनीतिक गलियारों में इसी तरह की अटकलें शुरू हो गई थीं। लगातार दो हफ्तों में दो बार एक ही जगह पहुंचना संयोग से ज्यादा किसी संकेत जैसा माना जा रहा है।\n\nकाकोली बोलीं, रिश्ता तीन दशक पुराना और सिर्फ इलाज से जुड़ा\nतृणमूल से बगावत कर चुकीं काकोली घोष दस्तीदार ने हालांकि इन मुलाकातों को किसी भी राजनीतिक एंगल से जोड़े जाने से साफ इनकार किया है। उनका कहना है कि पांजा के साथ उनका नाता तीन दशक से भी ज्यादा पुराना है और यह रिश्ता पूरी तरह उनके डॉक्टर वाले पेशे से जुड़ा हुआ है, राजनीति से इसका कोई लेना देना नहीं है। घोष दस्तीदार के इस स्पष्टीकरण के बावजूद राजनीतिक हलकों में अटकलें थमने का नाम नहीं ले रही हैं।\n\nअब तक 20 सांसद तोड़ चुके हैं ममता का साथ\nअसल में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के भीतर दरार साफ नजर आने लगी है। पार्टी के 20 लोकसभा सांसद पहले ही बगावत कर तृणमूल से अलग हो चुके हैं। इन सभी सांसदों ने मिलकर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया यानी एनसीपीआई के नाम से अपना अलग समूह बना लिया है और सभी ने एनडीए को अपना समर्थन दे दिया है। हाल ही में ये सांसद पहली बार एनडीए के संसदीय दल की बैठक में भी शामिल हुए। इसके अलावा पार्टी के कई और नेता भी ममता बनर्जी का साथ छोड़ने के लिए तैयार बैठे हैं, और इसी वजह से तृणमूल के नेता लगातार इन बागी नेताओं से मुलाकात कर उन्हें मनाने में जुटे हुए हैं।\n\nइसका आप पर असर\nयह खबर सीधे किसी की जेब से नहीं जुड़ी, लेकिन बंगाल की सियासत को समझने वालों के लिए मायने रखती है।\n\n• भारत में: तृणमूल कांग्रेस में जारी टूट का असर आगे राष्ट्रीय स्तर की गठबंधन राजनीति और एनडीए-विरोधी खेमे के समीकरणों पर पड़ सकता है।\n• पश्चिम बंगाल में: अगर शशि पांजा जैसी वरिष्ठ, पूर्व मंत्री रह चुकीं नेता भी पार्टी छोड़ती हैं, तो इससे तृणमूल कांग्रेस का संगठनात्मक आधार और कमजोर हो सकता है, जिसका असर राज्य की राजनीतिक स्थिरता पर पड़ेगा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. शशि पांजा कौन हैं?\nशशि पांजा तृणमूल कांग्रेस की नेता और पार्टी में पूर्व मंत्री रह चुकी हैं, जो हाल ही में लगातार दो दिन काकोली घोष दस्तीदार के क्लिनिक पहुंचीं।\n\n2. काकोली घोष दस्तीदार कौन हैं?\nवह एनसीपीआई से जुड़ी सांसद हैं, जो पहले तृणमूल कांग्रेस से बगावत कर चुकी हैं।\n\n3. पांजा ने क्लिनिक से निकलते वक्त क्या कहा?\nपत्रकारों के सवाल पर उन्होंने हल्की मुस्कान के साथ सिर्फ इतना कहा, 'मुझे जाना है', और सीधा जवाब देने से बचीं।\n\n4. यह क्लिनिक कहां स्थित है?\nयह क्लिनिक ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास से करीब 800 मीटर की दूरी पर है।\n\n5. अब तक कितने सांसद तृणमूल छोड़ चुके हैं?\n20 लोकसभा सांसद पार्टी से बगावत कर चुके हैं, जिन्होंने एनसीपीआई नाम से अलग समूह बनाकर एनडीए को समर्थन दिया है।\n\n6. काकोली ने इन मुलाकातों पर क्या सफाई दी?\nउन्होंने कहा कि पांजा से उनका रिश्ता तीन दशक से ज्यादा पुराना है और यह पूरी तरह चिकित्सा पेशे से जुड़ा है, राजनीति से नहीं।",
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  "category": "राजनीति",
  "publishedAt": "2026-08-04",
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    "टीएमसी बागी सांसद"
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