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  "title": "एसआईआर विवाद पर निर्मला सीतारमण की दो टूक, विपक्ष से बोलीं- अदालत जाएं और रखें अपना पक्ष",
  "summary": "केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया पर घमासान के बीच विपक्षी दलों को अदालत जाने की सलाह दी है। उधर, महाराष्ट्र में दो करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है।",
  "content": "विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया को लेकर मचे सियासी घमासान के बीच केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को विपक्षी दलों को स्पष्ट शब्दों में सलाह दी है। उन्होंने कहा कि जिन राजनीतिक दलों और लोगों को इस प्रक्रिया से कोई भी शिकायत है, वे न्याय की गुहार लगाने के लिए सीधे अदालतों का दरवाजा खटखटा सकते हैं और वहां अपना पक्ष मजबूती से रख सकते हैं। विपक्षी दलों द्वारा लगातार किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों और मुख्य निर्वाचन अधिकारी के समक्ष कड़ी कार्रवाई की मांग के संदर्भ में पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने यह बात कही। निर्मला सीतारमण ने इस बात पर भी जोर दिया कि देश के विभिन्न हिस्सों से इस प्रक्रिया के खिलाफ सामने आई शिकायतों को सुप्रीम कोर्ट सहित कई अन्य अदालतें पहले ही संज्ञान में ले चुकी हैं।\n\n उन्होंने आगे अपनी बात रखते हुए स्पष्ट किया कि लोग अदालती कार्यवाही में सक्रिय रूप से हिस्सा ले सकते हैं, अपना पक्ष न्यायपटल पर रख सकते हैं और अदालती तंत्र के माध्यम से उचित न्याय पा सकते हैं, और देश में कई लोग इस रास्ते पर पहले से ही चल रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि विपक्षी दल अपनी राजनीतिक रणनीति के तहत राजनीतिक विरोध-प्रदर्शनों के माध्यम से भी जनता के बीच इस मुद्दे को पूरी तरह उठाने के लिए स्वतंत्र हैं।\n\n \n\nमहाराष्ट्र में दो करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम हटाने पर छिड़ा विवाद\n यह पूरा राजनीतिक और कानूनी विवाद तब और गहरा गया जब महाराष्ट्र में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान भारी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने का मामला सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंचा। इस महत्वपूर्ण मामले पर सुनवाई करने के लिए सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने सहमति जता दी और देश की शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार, निर्वाचन आयोग तथा अन्य संबंधित पक्षों को औपचारिक रूप से नोटिस जारी कर दिया है। अब इस पूरे प्रकरण की अगली और अहम सुनवाई आगामी 5 नवंबर को तय की गई है।\n\n सामने आई याचिका के आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र में एसआईआर प्रक्रिया के क्रियान्वयन के दौरान भारी संख्या में आम मतदाताओं के नाम मसौदा मतदाता सूची से बाहर कर दिए गए हैं। वर्तमान में राज्य के भीतर कुल पंजीकृत मतदाताओं की संख्या लगभग 9.79 करोड़ है, जिनमें से लगभग 2.07 करोड़ मतदाताओं के नाम इस नई मसौदा सूची से हटा दिए गए हैं। महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, कुल 9,78,54,049 पंजीकृत मतदाताओं में से कुल 2,06,88,487 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने की बात सामने आई है, जो कि कुल मतदाताओं का लगभग 21.14 प्रतिशत बैठता है। बताया गया कि एसआईआर सत्यापन प्रक्रिया के दौरान ये सभी मतदाता अपने नियत पते पर मौजूद नहीं मिले थे।\n\n \n\nमुंबई और पुणे में पुनर्विकास कार्यों के कारण आई दिक्कतें\n इस पूरे मामले में याचिकाकर्ता की पैरवी करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दलील दी कि मुंबई और पुणे जैसे बड़े शहरों में चल रहे व्यापक पुनर्विकास कार्यों के चलते अनगिनत लोग अपने घरों को छोड़कर अस्थायी रूप से दूसरी जगहों पर रहने चले गए थे। ऐसे तमाम मतदाताओं के नाम भी सूची से बेरहमी से काट दिए गए क्योंकि मैदानी सत्यापन के दौरान वे अपने पुराने और मूल पतों पर नहीं पाए गए। याचिका के जरिए यह गंभीर दावा भी किया गया है कि इसके अलावा करीब 1.22 करोड़ अन्य मतदाताओं के नाम कथित तौर पर 'तार्किक विसंगतियों' का हवाला देकर सूची से बाहर कर दिए गए हैं।\n\n \n\nसुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में क्या मांगें रखी गईं\n इस पूरी एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिका एक चार्टर्ड अकाउंटेंट और पत्रकार अरुण आनंदगिरि की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई है। याचिका के माध्यम से यह प्रमुख मांग उठाई गई है कि जब तक देश की सर्वोच्च अदालत इस पूरे मामले पर अपना कोई अंतिम फैसला नहीं सुना देती, तब तक महाराष्ट्र राज्य में एसआईआर की पूरी प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए। इसके साथ ही यह भी आग्रह किया गया है कि जिन मतदाताओं के नाम इस पुनरीक्षण प्रक्रिया से ठीक पहले की वैध मतदाता सूची में शामिल थे, उनके नाम अदालत का अंतिम फैसला आने तक बिल्कुल न हटाए जाएं।\n\n प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली एक विशेष तीन सदस्यीय पीठ ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार, निर्वाचन आयोग और अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर दिया है। इस न्यायपीठ में प्रधान न्यायाधीश के साथ-साथ न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल हैं।\n\nइसका आप पर असर\nएसआईआर प्रक्रिया और मतदाता सूची से नाम हटने के इस विवाद का देश भर के नागरिकों और विशेषकर महाराष्ट्र के मतदाताओं पर गहरा असर पड़ सकता है।\n\n• भारत में: देश भर के मतदाताओं को यह सुनिश्चित करना होगा कि वे अपनी मतदाता सूचियों में अपनी सही स्थिति की जांच कर लें ताकि चुनावी अधिकार सुरक्षित रहें। इस मामले पर सर्वोच्च अदालत का रुख भविष्य के सभी चुनावी पुनरीक्षण अभियानों के लिए एक बड़ा कानूनी मानक तय करेगा।\n\n• महाराष्ट्र में: राज्य के लगभग दो करोड़ से अधिक मतदाताओं पर इसका सीधा प्रभाव पड़ा है जिनके नाम मसौदा सूची से हटाए गए हैं। प्रभावित लोग आगामी 5 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई से पहले निर्वाचन आयोग के समक्ष अपने पते का सत्यापन कराने के लिए प्रेरित हो सकते हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nएसआईआर प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटने और उसके विरोध में राजनीतिक दलों के उतरने के पीछे प्रशासनिक सत्यापन और शहरी पुनर्विकास से जुड़ी कई वजहें शामिल हैं।\n\n• सत्यापन के दौरान अनुपस्थिति: अधिकारियों द्वारा घर-घर जाकर किए गए सत्यापन में बड़ी संख्या में मतदाता अपने पंजीकृत पतों पर नहीं मिले, जिसके चलते उनके नाम सूची से हटाए गए।\n\n• शहरी पुनर्विकास कार्य: मुंबई और पुणे जैसे महानगरों में बड़े पैमाने पर चल रहे पुनर्विकास कार्यों के कारण हजारों लोग अस्थायी रूप से दूसरे स्थानों पर रहने चले गए थे।\n\n• तार्किक विसंगतियां: मसौदा मतदाता सूची तैयार करते समय करीब 1.22 करोड़ मतदाताओं के नाम रिकॉर्ड में पाई गई तार्किक विसंगतियों के आधार पर भी हटाए गए।\n\n• कानूनी चुनौती: बड़े पैमाने पर नाम कटने से नाराज याचिकाकर्ताओं ने इस प्रक्रिया को मनमाना बताते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. निर्मला सीतारमण ने विपक्षी दलों को क्या सलाह दी है?\nनिर्मला सीतारमण ने विपक्षी दलों को सलाह दी है कि यदि उन्हें एसआईआर प्रक्रिया से कोई शिकायत है, तो वे अदालतों का रुख कर सकते हैं और वहां अपना पक्ष रख सकते हैं।\n\n2. महाराष्ट्र में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान कितने नाम हटाए गए हैं?\nमहाराष्ट्र में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान कुल 2,06,88,487 मतदाताओं के नाम मसौदा सूची से हटाए गए हैं, जो कुल पंजीकृत मतदाताओं का लगभग 21.14 प्रतिशत है।\n\n3. सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर अगली सुनवाई कब करेगा?\nसुप्रीम कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई आगामी 5 नवंबर को करेगा।\n\n4. सुप्रीम कोर्ट में याचिका किसने दायर की है?\nचार्टर्ड अकाउंटेंट और पत्रकार अरुण आनंदगिरि ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर महाराष्ट्र में एसआईआर प्रक्रिया को चुनौती दी है।\n\n5. शीर्ष अदालत की पीठ का नेतृत्व कौन कर रहा है?\nप्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है।",
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  "category": "राजनीति",
  "publishedAt": "2026-10-26",
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