# संसद में दो-तिहाई बहुमत की तैयारी, दिल्ली में नाश्ते पर पीएम मोदी ने बागी सांसदों को दिया साथ रहने का भरोसा

> दिल्ली में आयोजित विशेष नाश्ते की बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्षी दलों से अलग होकर एनडीए में शामिल हुए 45 सांसदों से बातचीत की और आगामी राजनीतिक प्राथमिकताओं पर चर्चा की।

**Type:** article · **Category:** राजनीति · **Published:** 2026-08-07 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/politics/snsada-men-do-tihai-bahumata-ki-taiyari-delhi-men-nashte-para-pm-modi-ne-bagi-sansadon-ko-diya-satha-rahane-ka-bharosa-14745 · **Language:** Hindi
**Tags:** पीएम मोदी, एनडीए नाश्ता बैठक, विपक्षी बागी सांसद, पश्चिम बंगाल राजनीति, संसद दो-तिहाई बहुमत, काकोली घोष दस्तीदार, शिवसेना शिंदे गुट

संसद के जारी मानसून सत्र के दौरान राष्ट्रीय राजधानी में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में विपक्षी दलों से नाता तोड़कर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए के पाले में आए सांसदों की एक विशेष बैठक बुलाई। दिल्ली में आयोजित इस नाश्ते की बैठक में मुख्य रूप से उन जनप्रतिनिधियों पर ध्यान केंद्रित किया गया जो अपनी पुरानी पार्टियों को छोड़कर नए राजनीतिक रास्ते पर आगे बढ़े हैं। अपने पुराने सहयोगियों से अलग होने के बाद पैदा हुई राजनीतिक चिंताओं को दूर करते हुए प्रधानमंत्री ने इन नए साथियों में नया विश्वास भरने का प्रयास किया।

## नये राजनीतिक साथियों को भरोसा और संवाद
बैठक में शामिल हुए नेताओं को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने उनके मन में उठ रही आशंकाओं को शांत करने की दिशा में सीधा संवाद कायम किया। राजनीतिक गलियारों में हो रही चर्चाओं और पुराने सहयोगियों की प्रतिक्रियाओं के बीच उन्होंने सांसदों को आश्वस्त किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, **"जो आपके बारे में कहा जा रहा है, उसकी चिंता मत कीजिए, परेशान होने की जरूरत नहीं है, मैं आपके साथ हूं।"** यह आश्वासन मुख्य रूप से तृणमूल कांग्रेस और उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट को छोड़कर आए सांसदों को ध्यान में रखकर दिया गया था। इस मुलाकात का प्राथमिक उद्देश्य एनडीए के भीतर इन नए सदस्यों को सहज वातावरण प्रदान करना और आगामी विधायी रणनीति को अधिक प्रभावी बनाना था।

## नाश्ते की टेबल पर उपस्थित नेताओं की संख्या और गणित
इस अनौपचारिक बैठक में करीब 45 सांसदों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इन सदस्यों में तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर हाल ही में गठित नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया यानी एनसीपीआई में शामिल हुए 20 सांसद, उद्धव सेना से अलग हुए 7 सांसद, नेशनल पीपुल्स पार्टी के 20 सांसद और अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के 2 सांसद शामिल रहे। शिवसेना से अलग हुए सात सांसदों में से छह औपचारिक रूप से मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का हिस्सा बन चुके हैं। बैठक में प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से पश्चिम बंगाल से आने वाले जनप्रतिनिधियों को सलाह दी कि वे अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों की जनता के साथ सीधा संवाद बढ़ाएं। सभी सांसदों को उनके सोशल मीडिया गतिविधियों का डेटा प्रिंटआउट के रूप में सौंपा गया और डिजिटल मंचों पर सक्रियता बढ़ाने का निर्देश दिया गया।

## पश्चिम बंगाल का विकास और पूर्वोत्तर भारत की कनेक्टिविटी
पश्चिम बंगाल की रणनीतिक और ऐतिहासिक महत्ता को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्य की प्रगति सीधे तौर पर पूरे देश के विकास से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा, **"जब बंगाल आगे बढ़ता है, तो भारत आगे बढ़ता है।"** उन्होंने सांसदों को संकेत दिया कि पश्चिम बंगाल में अभी विकासात्मक कार्यों की अपार संभावनाएं हैं जिन्हें पूरा किया जाना बाकी है। बंगाल के अतिरिक्त उन्होंने पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में अवसंरचनात्मक विकास और बेहतर कनेक्टिविटी की आवश्यकता पर बल दिया। इस दौरान सांसदों को निरंतर अपने इलाकों में सक्रिय रहने और डिजिटल साधनों के माध्यम से आम नागरिकों तक अपनी बात पहुंचाने का परामर्श दिया गया।

## स्वास्थ्य परामर्श और मैचा चाय पर चर्चा
राजनीतिक प्राथमिकताओं के अलावा बैठक में सांसदों के व्यक्तिगत स्वास्थ्य पर भी विस्तार से चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने कहा कि लंबे संसदीय और राजनीतिक जीवन में शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने सभी उपस्थित सांसदों को हर साल नियमित रूप से स्वास्थ्य जांच कराने का सुझाव दिया ताकि वे आने वाले बड़े दायित्वों को कुशलता से संभाल सकें। इसी दौरान मैचा चाय परोसी गई, जिस पर भाजपा सांसद शताब्दी रॉय ने प्रधानमंत्री को इसके प्रकार और पश्चिम बंगाल में इसकी उपलब्धता की जानकारी दी। इस संवाद के बाद प्रधानमंत्री ने बंगाल के समृद्ध इतिहास का स्मरण करते हुए कहा कि एक समय जब बंगाल आर्थिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध था, तब पूरा देश तरक्की की दिशा में अग्रसर था। उन्होंने आह्वान किया कि बंगाल को एक बार फिर भारत की आर्थिक प्रगति का मुख्य इंजन बनना चाहिए।

## हल्के-फुल्के क्षण और मराठी भाषा में आत्मीय संवाद
संसदीय चर्चा के बीच माहौल उस समय खुशनुमा हो गया जब वरिष्ठ सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय ने प्रधानमंत्री के आसपास मौजूद अभिनय जगत से राजनीति में आईं महिला सांसदों का उल्लेख किया। इनमें शताब्दी रॉय, सायानी घोष, जून मालिया और रचना बनर्जी शामिल थीं। सुदीप बंद्योपाध्याय ने चुटकी लेते हुए कहा कि इन ऊर्जावान नेताओं के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए खुद प्रधानमंत्री को भी शारीरिक रूप से पूरी तरह फिट रहना पड़ेगा। इस टिप्पणी पर पूरी बैठक ठहाकों से गूंज उठी। वहीं दूसरी ओर, प्रधानमंत्री ने उद्धव ठाकरे के गुट से अलग हुए सांसदों से मराठी भाषा में बातचीत की और उनके अनुभव साझा किए। तृणमूल से अलग हुए उन सांसदों के साथ भी गर्मजोशी से चर्चा हुई जो अयोग्यता की याचिकाओं और अपने क्षेत्रों में मतदाताओं की प्रतिक्रियाओं को लेकर आशंकित थे।

## सामने आई अहम हस्तियों की भूमिका और 2/3 बहुमत का लक्ष्य
एनसीपीआई की अध्यक्ष और चीफ व्हिप काकोली घोष दस्तीदार, जिन्हें कभी ममता बनर्जी का करीबी माना जाता था, बैठक की अग्रिम पंक्ति में नजर आईं। वे प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ बैठी दिखीं, जिससे एनडीए के नए राजनीतिक ढांचे में उनके महत्व का संकेत मिलता है। इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य संसद के दोनों सदनों में एनडीए के संख्याबल को दो-तिहाई बहुमत तक पहुंचाना है। यह विशिष्ट संख्याबल परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे दूरगामी महत्व वाले ऐतिहासिक विधेयकों को आसानी से पारित कराने के लिए आवश्यक माना जा रहा है। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केवल आंकड़े बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि इन सांसदों को दल-बदल के बाद अपने-अपने क्षेत्रों में राजनीतिक आधार और जनता का विश्वास बनाए रखने की चुनौती से भी निपटना होगा।

## मुर्शिदाबाद के तीन सांसदों की दूरी
हालांकि एनसीपीआई के अधिकांश नए सदस्य एनडीए की इन बैठकों में पूरे उत्साह के साथ भाग ले रहे हैं, लेकिन मुर्शिदाबाद क्षेत्र से ताल्लुक रखने वाले तीन मुस्लिम सांसदों ने इस बैठक से दूरी बनाए रखी। यह अनुपस्थिति संकेत देती है कि कुछ स्थानीय राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों के चलते नए गठबंधन के भीतर भी आंतरिक समन्वय की चुनौतियां मौजूद हैं।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** संसद में एनडीए के दो-तिहाई बहुमत की दिशा में बढ़ते कदम से महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे बड़े राष्ट्रीय विधेयकों के पास होने की प्रक्रिया तेज हो सकती है।

**पश्चिम बंगाल में:** तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए सांसदों की एनडीए में सक्रियता से राज्य में डिजिटल संपर्क और विकास परियोजनाओं को नई गति मिलने की संभावना है।

## सवाल-जवाब

### 1. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में किस उद्देश्य से नाश्ते की बैठक बुलाई थी?
इस बैठक का उद्देश्य विपक्षी दलों से अलग होकर एनडीए में आए सांसदों की चिंताओं को दूर करना, उन्हें नए गठबंधन में सहज महसूस कराना और विधायी रणनीति पर चर्चा करना था।

### 2. इस बैठक में कुल कितने सांसदों ने भाग लिया?
बैठक में विभिन्न दलों से अलग हुए और सहयोगी पक्षों के लगभग 45 सांसदों ने भाग लिया।

### 3. पश्चिम बंगाल के सांसदों को प्रधानमंत्री ने क्या विशेष सलाह दी?
प्रधानमंत्री ने बंगाल के सांसदों को राज्य के विकास पर ध्यान केंद्रित करने, सोशल मीडिया पर सक्रियता बढ़ाने और अपने क्षेत्रों में जनता से सीधा संपर्क बनाए रखने की सलाह दी।

### 4. एनडीए संसद में दो-तिहाई बहुमत हासिल क्यों करना चाहता है?
दो-तिहाई बहुमत हासिल करने से सरकार के लिए परिसीमन और महिला आरक्षण के क्रियान्वयन से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराना आसान हो जाएगा।

### 5. बैठक में स्वास्थ्य से जुड़ी क्या सलाह दी गई?
प्रधानमंत्री मोदी ने सभी सांसदों को काम के दबाव के बीच फिट रहने के लिए हर साल नियमित रूप से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य जांच कराने का परामर्श दिया।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._