संविधान का हवाला देकर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद बोले, 'वंदे मातरम' गाने के लिए कोई मजबूर नहीं कर सकता स्वतंत्रता दिवस पर 'वंदे मातरम' विवाद के बीच कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कहा कि वे राष्ट्रीय गीत नहीं गाएंगे और किसी पर इसे गाने का दबाव नहीं बनाया जा सकता। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान 'वंदे मातरम' के गायन को लेकर शुरू हुआ राजनीतिक विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। इस बीच कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने बड़ा बयान देकर विवाद को और बढ़ा दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे इस राष्ट्रीय गीत को नहीं गाएंगे, लेकिन सम्मान में खड़े जरूर होंगे। उनका कहना है कि यह उनका संवैधानिक अधिकार है और वे अपने धार्मिक नियमों का पालन करेंगे। स्वतंत्रता दिवस समारोह से जुड़ा पूरा विवाद 15 अगस्त के स्वतंत्रता दिवस समारोह में 'वंदे मातरम' के गायन के दौरान कांग्रेस संसदीय दल की चेयरपर्सन सोनिया गांधी अपने पास खड़े मल्लिकार्जुन खरगे और अन्य नेताओं से बातचीत करती हुई नजर आई थीं। इस घटना के सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी ने आक्रामक रुख अपनाते हुए सोनिया गांधी पर गंभीर आरोप लगाए। भाजपा का दावा है कि सोनिया गांधी ने पूरे राष्ट्रीय गीत के गायन को रोकने की कोशिश की और ऐसा करके उन्होंने इसका अनादर किया। इसके अलावा केरल में भी अधूरा राष्ट्रीय गीत गाए जाने का मुद्दा उठाकर भाजपा ने विरोध दर्ज कराया था। इतिहास पढ़ने की सलाह और संवैधानिक अधिकार का तर्क भाजपा के इन हमलों का जवाब देते हुए इमरान मसूद ने कहा कि वे न तो पहले 'वंदे मातरम' गाते थे और न ही भविष्य में इसे गाएंगे। उन्होंने कहा कि सम्मान देने के लिए खड़े होना एक अलग बात है, लेकिन गाना अनिवार्य नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा को इस गीत से विशेष प्रेम है तो वे इसे जरूर गाएं, लेकिन दूसरों को इसके लिए विवश नहीं कर सकते। आलोचकों को सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि आरोप लगाने से पहले लोगों को 'वंदे मातरम' का पूरा इतिहास, इसकी रचना का समय और इसके लिखे जाने के कारणों को गहराई से पढ़ना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि समाज में इस मुद्दे को लेकर गलत धारणा बनाई जा रही है जो कि सही नहीं है। एनटीए के मुद्दे पर राहुल गांधी का समर्थन 'वंदे मातरम' विवाद के अलावा इमरान मसूद ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) से जुड़े मुद्दे पर भी अपनी राय व्यक्त की। उन्होंने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा उठाए गए सवालों का खुलकर समर्थन किया। इमरान मसूद ने कहा कि राहुल गांधी के सवाल पूरी तरह वाजिब हैं क्योंकि परीक्षा एजेंसी की गलतियों के कारण देश का युवा वर्ग परेशान हो रहा है। इससे पूर्व राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि एनटीए की गड़बड़ियों और प्रशासनिक खामियों का खामियाजा अंततः निर्दोष छात्रों को ही भुगतना पड़ता है। इसका आप पर असर राष्ट्रीय स्तर पर: यह मामला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, संवैधानिक अधिकारों और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति व्यक्तिगत प्राथमिकताओं से जुड़ी राजनीतिक बहस को रेखांकित करता है। सवाल-जवाब 1. इमरान मसूद ने 'वंदे मातरम' गाने के बारे में क्या कहा? इमरान मसूद ने कहा कि वे 'वंदे मातरम' नहीं गाएंगे, केवल इसके सम्मान में खड़े होंगे। उन्होंने इसे अपना संवैधानिक अधिकार बताया। 2. भाजपा ने सोनिया गांधी पर क्या आरोप लगाया था? भाजपा का आरोप था कि स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान सोनिया गांधी ने पूरा राष्ट्रीय गीत गाने से रोकने की कोशिश की और इसका अनादर किया। 3. इमरान मसूद ने 'वंदे मातरम' के आलोचकों को क्या सलाह दी? उन्होंने आलोचकों और भाजपा को 'वंदे मातरम' का पूरा इतिहास, इसकी रचना और पृष्ठभूमि पढ़ने की सलाह दी। 4. एनटीए के मुद्दे पर इमरान मसूद ने किसकी टिप्पणी का समर्थन किया? इमरान मसूद ने राहुल गांधी के बयानों का समर्थन करते हुए कहा कि एनटीए की गलतियों का नुकसान देश के युवाओं को उठाना पड़ रहा है। https://trendkia.com/politics/snvidhana-ka-havala-dekara-congress-mp-imran-masood-bole-vande-mataram-gane-ke-lie-koi-majabura-nahin-kara-sakata-17626 TrendKia — Har trend, sabse pehle.