सोनिया गांधी के बाबरी विध्वंस वाले बयान पर सियासी घमासान, बीजेपी ने साधा तीखा निशाना सोनिया गांधी के एक हालिया इंटरव्यू ने देश की राजनीति में नया उबाल ला दिया है। उन्होंने 1992 के बाबरी विध्वंस को याद करते हुए कहा कि वह टीवी पर यह देखकर रो पड़ी थीं, जिसके बाद बीजेपी ने उन पर वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया है। बाबरी मस्जिद विध्वंस की यादें एक बार फिर से देश के राजनीतिक गलियारों में चर्चा के केंद्र में आ गई हैं। इस बार इस पूरे विवाद की मुख्य वजह कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी का एक मीडिया इंटरव्यू है। एक प्रतिष्ठित ब्रिटिश अखबार को दिए गए इस साक्षात्कार में सोनिया गांधी ने साझा किया कि 6 दिसंबर 1992 को जब बाबरी मस्जिद गिराई जा रही थी, तब उन्होंने यह घटना टेलीविजन पर देखी थी। उस भयावह दृश्य को देखकर उनकी आंखों से आंसू छलक आए थे। सोनिया ने कहा कि उसी पल उन्हें इस बात का गहरा अहसास हो गया था कि महात्मा गांधी और जवाहरलाल नेहरू द्वारा परिकल्पित धर्मनिरपेक्ष भारत के मूल स्वरूप को सुरक्षित रखने के लिए एक लंबी और कठिन राजनीतिक लड़ाई लड़नी होगी। उनके इस खुलासे ने देश में एक नया राजनीतिक घमासान शुरू कर दिया है। उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनावों से ठीक पहले इस बयान ने भारतीय जनता पार्टी को कांग्रेस पार्टी पर जोरदार हमला करने का एक और बड़ा मौका दे दिया है। भाजपा नेता प्रदीप भंडारी ने सोनिया गांधी के इस बयान को आड़े हाथों लेते हुए कांग्रेस और गांधी परिवार पर तीखा राजनीतिक प्रहार किया है। कांग्रेस की रणनीतिक भूलों पर भी रखी अपनी बात सोनिया गांधी ने अपने इस इंटरव्यू में केवल बाबरी मस्जिद के विध्वंस के समय अपनी व्यक्तिगत प्रतिक्रिया तक ही बात सीमित नहीं रखी, बल्कि उन्होंने कांग्रेस पार्टी की ऐतिहासिक और राजनीतिक गलतियों को भी खुले तौर पर स्वीकार किया। उन्होंने इस बात को माना कि उनकी पार्टी की कुछ अंदरूनी नाकामियों और ढिलाई ने ही बीजेपी और उसकी हिंदुत्व की आक्रामक राजनीति को देश में पैर पसारने का पूरा अवसर दिया। सोनिया के अनुसार, कांग्रेस कई मोर्चों पर जरूरत से ज्यादा निश्चिंत हो गई थी और उसका जमीनी रवैया भी काफी सुस्त और लापरवाह था। उनके इसी कबूलनामे के बाद बीजेपी ने इसे सीधे तौर पर कांग्रेस की वैचारिक कमजोरी और उसके पुराने तुष्टिकरण के रुख से जोड़ दिया है। भाजपा नेता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया के माध्यम से सोनिया गांधी पर सीधे तौर पर वोट बैंक साधने की राजनीति करने का गंभीर आरोप मढ़ा है। इस पूरे घटनाक्रम और बयानों के दौर ने अयोध्या और बाबरी मस्जिद से जुड़े पुराने संवेदनशील राजनीतिक मुद्दों को एक बार फिर से जिंदा कर दिया है, जिससे चुनावी सरगर्मी काफी बढ़ गई है। विपक्ष के चेहरे और राजनीतिक समीकरणों पर चर्चा इस पूरे इंटरव्यू में सोनिया गांधी ने केवल अतीत की घटनाओं पर ही चर्चा नहीं की, बल्कि वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य और विपक्षी गठबंधन के भीतर चल रही कसमसाहट पर भी खुलकर अपने विचार रखे। विपक्षी खेमे में नेतृत्व को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच सोनिया के इन बयानों को काफी अहम माना जा रहा है। विपक्षी दलों का यह इंडिया गठबंधन आने वाले समय में राज्य स्तर पर होने वाले महत्वपूर्ण चुनावों में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश में जुटा है। हालांकि सोनिया गांधी के बयानों ने बीजेपी को वैचारिक मोर्चे पर एक नया हथियार दे दिया है, जिससे चुनावी सभाओं और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वार-पलटवार का दौर और अधिक तेज हो गया है। राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि इस प्रकार के पुराने और भावनात्मक मुद्दों के उठने से ध्रुवीकरण की राजनीति को और अधिक हवा मिलती है, जिसका सीधा असर चुनाव परिणामों पर पड़ सकता है। मस्जिद गिराए जाने पर छलके थे आंसू अखबार को दिए गए अपने इस विस्तृत साक्षात्कार में सोनिया गांधी ने बाबरी मस्जिद के विध्वंस के उस दौर को याद करते हुए अपनी मनोस्थिति का खुलकर जिक्र किया। उन्होंने बताया कि जब टेलीविजन पर उस ढांचे को ढाया जा रहा था, तो उस मंजर को देखकर वह खुद को रोक नहीं पाईं और रो पड़ी थीं। सोनिया ने कहा कि उन्हें उसी क्षण यह बात पूरी तरह स्पष्ट हो गई थी कि देश के धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र होने के विचार को बचाए रखने के लिए अब एक कठिन और लंबी लड़ाई लड़नी ही होगी। उन्होंने इस धर्मनिरपेक्ष विचार का पूरा श्रेय देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू, महात्मा गांधी और उन तमाम स्वतंत्रता सेनानियों को दिया जिन्होंने एक समावेशी और आधुनिक भारत के निर्माण के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया था। पार्टी की अंदरूनी कमजोरियों का किया जिक्र साक्षात्कार के दौरान सोनिया गांधी ने इस बात पर भी विस्तार से मंथन किया कि आखिर देश में बीजेपी का ग्राफ इतनी तेजी से कैसे ऊपर उठा और इसमें कांग्रेस की क्या भूमिका रही। उन्होंने बिना किसी झिझक के स्वीकार किया कि कांग्रेस की कुछ बड़ी रणनीतिक नाकामियों ने ही बीजेपी और उसकी कट्टर हिंदुत्ववादी राजनीति को आगे बढ़ने का खुला मैदान दे दिया। उन्होंने इंटरव्यू में स्पष्ट शब्दों में कहा कि उन्हें लगता है कि कई मायनों में उनकी पार्टी जरूरत से ज्यादा आत्मविश्वासी और निश्चिंत हो गई थी। पार्टी का अंदरूनी रवैया कुछ ऐसा बन गया था कि हालात अपने आप ठीक दिशा में चलते रहेंगे और उन्हें इसके लिए कोई विशेष प्रयास नहीं करना पड़ेगा, जो कि एक बड़ी भूल साबित हुई। बटला हाउस एनकाउंटर का भी उठाया गया मुद्दा बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और नेता प्रदीप भंडारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सोनिया गांधी के इस साक्षात्कार के अंशों को साझा करते हुए उन पर तीखा और आक्रामक हमला बोला। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि सोनिया गांधी बाबरी विध्वंस के लिए रोती हैं, सोनिया गांधी बटला हाउस मुठभेड़ के लिए भी आंसू बहाती हैं, और वह अपने राजनीतिक स्वार्थ तथा वोट बैंक को सुरक्षित रखने के लिए किसी भी हद तक जा सकती हैं। भंडारी ने अपने बयान में कड़े शब्दों में आरोप लगाया कि कांग्रेस पार्टी मूल रूप से हिंदुओं के खिलाफ भावना रखती है और हमेशा तुष्टिकरण को प्राथमिकता देती है। गांधी परिवार के पुराने फैसलों पर तीखे सवाल प्रदीप भंडारी ने सोनिया गांधी पर सीधा निशाना साधते हुए देश के इतिहास से जुड़े कई अन्य संवेदनशील मुद्दों को भी इस बहस में खींच लिया। उन्होंने अपने तीखे हमले में देश में लगाए गए आपातकाल यानी इमरजेंसी और वर्ष 1984 में हुए सिख विरोधी दंगों की भयावह यादों का भी खुलकर जिक्र किया। भंडारी ने गंभीर आरोप लगाया कि सोनिया गांधी अपने इस तरह के बयानों के माध्यम से सहानुभूति बटोरने की कोशिश कर रही हैं और इंदिरा गांधी को हमेशा एक पीड़ित के रूप में जनता के सामने पेश करना चाहती हैं। उन्होंने राजीव गांधी द्वारा 1984 के दंगों के संदर्भ में दिए गए उस पुराने बयान का भी हवाला दिया जिसकी राजनीतिक हलकों में अक्सर आलोचना की जाती है। भंडारी ने कड़े शब्दों में कहा कि देश की जनता गांधी-वाड्रा परिवार के इन पुराने गुनाहों और फैसलों को कभी माफ नहीं करेगी। सक्रिय राजनीति में आने के अपने सफर पर बोलीं इस बहुचर्चित इंटरव्यू में सोनिया गांधी ने अपने पूरे राजनीतिक सफर, कांग्रेस पार्टी की कमान संभालने और अध्यक्ष बनने के कठिन फैसले के पीछे की पूरी कहानी भी साझा की। उन्होंने स्वीकार किया कि उनके मन में राजनीति को लेकर हमेशा से एक गहरा अविश्वास और दूरी का भाव रहा था। उन्होंने राजनीति को स्पष्ट रूप से महत्वाकांक्षा, लालच और पाखंड से भरा हुआ क्षेत्र बताया, जिससे वह दूर रहना चाहती थीं। सोनिया के मुताबिक, वर्ष 1998 का वह दौर था जब कांग्रेस पार्टी बेहद मुश्किल और चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रही थी, और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के लगातार दबाव और आग्रह के बाद ही उन्होंने मजबूरी में कांग्रेस अध्यक्ष पद की बागडोर अपने हाथों में लेने का बड़ा फैसला किया था। राजीव गांधी के प्रति कर्तव्य का निभाया था दायित्व सोनिया गांधी ने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस अध्यक्ष पद संभालने का उनका वह फैसला पूरी तरह से उनके दिवंगत पति और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के प्रति उनके कर्तव्य और निष्ठा की भावना से जुड़ा हुआ था। उन्होंने महसूस किया कि उस संकट की घड़ी में पार्टी को संभालना उनकी नैतिक जिम्मेदारी है। इसके अलावा, सोनिया ने वर्ष 2004 के लोकसभा चुनावों का भी जिक्र किया, जिसमें कांग्रेस पार्टी देश की सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर सामने आई थी, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने खुद प्रधानमंत्री बनने से साफ इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा कि उनके मन में इस बात को लेकर पूरी तरह स्पष्टता थी कि वह कभी प्रधानमंत्री का पद नहीं संभालेंगी क्योंकि यह उनकी मूल शख्सियत और स्वभाव के बिल्कुल अनुकूल नहीं था। इसका आप पर असर सोनिया गांधी के इस बयान और उसके बाद शुरू हुई राजनीतिक बयानबाजी का सीधा असर आगामी विधानसभा चुनावों की आचार संहिता और चुनावी प्रचार के मुद्दों पर पड़ सकता है। • भारत में: देश भर में राजनीतिक दलों के बीच वैचारिक और ऐतिहासिक मुद्दों पर बयानबाजी तेज हो जाएगी। इससे चुनाव से पहले ध्रुवीकरण की राजनीति को नया प्रोत्साहन मिल सकता है। • उत्तर प्रदेश में: आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर राज्य में राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ जाएगी। राजनीतिक दल इस मुद्दे को चुनावी मंचों पर भुनाने का पूरा प्रयास करेंगे। ऐसा क्यों हुआ यह राजनीतिक विवाद सोनिया गांधी द्वारा एक विदेशी मीडिया हाउस को दिए गए इंटरव्यू के बाद उत्पन्न हुआ, जिसमें उन्होंने 1992 की घटनाओं और पार्टी की नीतियों पर खुलकर विचार रखे। • साक्षात्कार का प्रभाव: द गार्जियन को दिए गए इंटरव्यू में बाबरी विध्वंस पर सोनिया गांधी की व्यक्तिगत प्रतिक्रिया ने दशकों पुराने मुद्दे को फिर से सतह पर ला दिया। • चुनावी समीकरण: उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए बीजेपी और अन्य दल इस प्रकार के बयानों को अपने राजनीतिक एजेंडे और प्रचार का मुख्य हिस्सा बना रहे हैं। • ऐतिहासिक नीतियां: कांग्रेस पार्टी के आंतरिक कामकाज और अतीत के फैसलों को लेकर बीजेपी लगातार गांधी परिवार पर आक्रामक रुख अपनाती रही है। सवाल-जवाब 1. सोनिया गांधी ने किस अखबार को इंटरव्यू दिया था? सोनिया गांधी ने ब्रिटिश अखबार द गार्जियन को यह इंटरव्यू दिया था। 2. बाबरी मस्जिद विध्वंस की घटना कब हुई थी? बाबरी मस्जिद विध्वंस की यह घटना 6 दिसंबर 1992 को हुई थी। 3. सोनिया गांधी ने इंटरव्यू में क्या देखकर रोने की बात कही? सोनिया गांधी ने टेलीविजन पर बाबरी मस्जिद को गिरते हुए देखकर रोने की बात कही थी। 4. सोनिया गांधी के बयान पर किस बीजेपी नेता ने प्रतिक्रिया दी? बीजेपी नेता प्रदीप भंडारी ने सोनिया गांधी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। 5. सोनिया गांधी ने किस वर्ष कांग्रेस अध्यक्ष पद संभालने का फैसला किया था? सोनिया गांधी ने 1998 में पार्टी नेताओं के दबाव के बाद कांग्रेस अध्यक्ष पद संभालने का फैसला किया था। 6. सोनिया गांधी ने 2004 के चुनाव के बाद किस पद को ठुकरा दिया था? सोनिया गांधी ने 2004 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद प्रधानमंत्री बनने से इनकार कर दिया था। https://trendkia.com/politics/soniya-gandhi-ke-babri-vidhvnsa-vale-bayana-para-siyasi-ghamasana-bjp-ne-sadha-tikha-nishana-57486 TrendKia — Har trend, sabse pehle.