सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ याचिकाओं पर आज होगी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में आज मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ राहुल गांधी समेत 13 विपक्षी नेताओं की याचिकाओं पर सुनवाई होगी। चुनाव आयोग ने अदालत में हलफनामा दाखिल कर विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है। भारतीय राजनीति के लिहाज से आज का दिन काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज के तरीकों, चुनावी अनियमितताओं और एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ दायर की गई विभिन्न याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की जाएगी। अदालत ने इन सभी मामलों का दायरा बढ़ाते हुए इन्हें एक साथ संलग्न कर लिया है और कुल 11 याचिकाओं को सुनवाई के लिए स्वीकार किया गया है, जिन पर आज शीर्ष अदालत अपना रुख साफ कर सकती है। राहुल गांधी और अन्य दिग्गजों ने दी है चुनौती इस कानूनी लड़ाई में देश के कई जाने-माने राजनेता आमने-सामने नजर आ रहे हैं। याचिकाकर्ताओं में प्रमुख रूप से राहुल गांधी के साथ-साथ मल्लिकार्जुन खरगे, सौगत राय, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव, संजय राउत, एम.ए. बेबी, डी. राजा, महुआ माझी, सुप्रिया सुले और ई.टी. मोहम्मद बशीर शामिल हैं। इन सभी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के अलावा चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी को भी प्रतिवादी के तौर पर इस कानूनी याचिका में शामिल किया है। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पहले चुनाव आयोग का कड़ा हलफनामा न्यायालय में आज होने वाली इस अहम सुनवाई से ठीक पहले चुनाव आयोग ने अपना पक्ष रखते हुए एक कड़ा हलफनामा दाखिल किया है। इस आधिकारिक जवाब के माध्यम से आयोग ने स्पष्ट किया है कि कांग्रेस पार्टी और अन्य याचिकाकर्ताओं द्वारा एसआईआर से जुड़े फैसलों पर उठाए गए तमाम सवाल केवल मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित हैं और इनका जमीनी वास्तविक तथ्यों से कोई ताल्लुक नहीं है। आयोग के अनुसार ये दावे पूरी तरह से बेबुनियाद हैं। सामूहिक सहमति से लिए गए सभी महत्वपूर्ण निर्णय चुनाव आयोग की तरफ से अदालत में पेश किए गए हलफनामे में इस बात पर जोर दिया गया है कि संस्थान द्वारा लिए गए सभी निर्णय किसी एक व्यक्ति के जरिए नहीं, बल्कि तीनों चुनाव आयुक्तों की संयुक्त बैठक और पूर्ण सहमति से तय किए गए हैं। आयोग ने यह भी साफ किया है कि मतदाता सूची में किसी भी नए वोटर का नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया केवल ईआरओ की औपचारिक सहमति के बाद ही पूरी की जाती है और फॉर्म 6 में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया है। बीएलओ की भूमिका और विपक्ष की तीखी प्रतिक्रिया न्यायालय में दाखिल किए गए इस हलफनामे में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अनमैप्ड मतदाताओं को सुनवाई के लिए व्यक्तिगत रूप से बुलाना अनिवार्य नहीं है, बल्कि बीएलओ खुद घर-घर जाकर जरूरी दस्तावेजों का संकलन करेंगे। चुनाव आयोग के इस कदम ने विपक्ष के उस अभियान को एक बड़ा झटका दिया है, जिसके तहत वे मुख्य चुनाव आयुक्त और पूरी चुनाव संस्था के कामकाज पर सवाल खड़े कर रहे थे। दूसरी ओर, विपक्ष इस पूरे घटनाक्रम को केंद्र सरकार के दबाव में दिया गया हलफनामा बता रहा है। इसका आप पर असर सुप्रीम कोर्ट में आज होने वाली इस सुनवाई का असर देश की चुनावी व्यवस्था और राजनीतिक दिशा पर पड़ सकता है। • भारत में: यह सुनवाई देश की पूरी चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची सत्यापन के नियमों को प्रभावित कर सकती है। आम नागरिकों को भविष्य में चुनावी सुधारों और बीएलओ सत्यापन से जुड़े नए दिशा-निर्देश देखने को मिल सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ यह पूरा कानूनी विवाद देश की चुनावी प्रक्रियाओं और मुख्य चुनाव आयुक्त के कामकाज के तरीकों को लेकर खड़े किए गए सवालों के कारण सामने आया है। विपक्षी नेताओं ने एसआईआर प्रक्रिया और चुनावी अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया है। • याचिकाकर्ताओं के आरोप: राहुल गांधी सहित 13 विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग के फैसलों और कामकाज की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। • आयोग का जवाब: चुनाव आयोग ने इन सभी आरोपों को निराधार बताया है और कहा है कि उनके सभी निर्णय सामूहिक सहमति से लिए गए हैं। सवाल-जवाब 1. सुप्रीम कोर्ट में आज किस मामले पर सुनवाई हो रही है? सुप्रीम कोर्ट में आज मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एसआईआर प्रक्रिया और चुनावी अनियमितताओं को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई हो रही है। 2. इस मामले में मुख्य याचिकाकर्ता कौन-कौन हैं? राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे, अखिलेश यादव, तेजस्वी यादव और संजय राउत समेत 13 विपक्षी नेताओं ने ये याचिकाएं दाखिल की हैं। 3. चुनाव आयोग ने अपने हलफनामे में क्या कहा है? चुनाव आयोग ने कहा है कि विपक्ष के सवाल मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित हैं और आयोग के सभी फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों ने मिलकर लिए हैं। 4. मतदाता सूची में नाम जोड़ने के संबंध में क्या नियम बताया गया है? आयोग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी वोटर का नाम ईआरओ की सहमति के बाद ही जोड़ा या हटाया जा सकता है और फॉर्म 6 में कोई बदलाव नहीं हुआ है। 5. अनमैप्ड मतदाताओं के सत्यापन के लिए क्या प्रक्रिया है? अनमैप्ड मतदाताओं को सुनवाई के लिए बुलाना जरूरी नहीं है क्योंकि बीएलओ खुद घर जाकर दस्तावेज एकत्र करेंगे। https://trendkia.com/politics/supreme-court-men-sir-prakriya-aura-mukhya-chunava-ayukta-ke-khilapha-yachikaon-para-aja-hogi-sunavai-52090 TrendKia — Har trend, sabse pehle.