# तमिलनाडु में परिसीमन पर सांसदों की बैठक से डीएमके का किनारा, मेकेदातू जल विवाद पर सर्वदलीय चर्चा की मांग से गहराया सियासी संकट

> केंद्र के प्रस्तावित परिसीमन विधेयक के प्रभावों पर चर्चा के लिए मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय द्वारा बुलाई गई सांसदों की बैठक का डीएमके ने बहिष्कार किया है, जिससे राज्य में राजनीतिक खींचतान बढ़ गई है।

**Type:** article · **Category:** राजनीति · **Published:** 2026-08-08 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/politics/tamil-nadu-men-delimitation-para-sansadon-ki-baithaka-se-dmk-ka-kinara-mekedatu-jala-vivada-para-sarvadaliya-charcha-ki-manga-se-g-15101 · **Language:** Hindi
**Tags:** तमिलनाडु राजनीति, परिसीमन विधेयक, सी जोसेफ विजय, डीएमके बॉयकॉट, मेकेदातू जल विवाद, कावेरी नदी विवाद, तमिलनाडु सांसद बैठक, टीवीके

केंद्र सरकार की ओर से प्रस्तावित लोकसभा परिसीमन विधेयक को लेकर तमिलनाडु के राजनीतिक गलियारों में हलचल काफी तेज हो गई है। राज्य के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने परिसीमन अभ्यास से तमिलनाडु पर पड़ने वाले संभावित प्रशासनिक और राजनीतिक असर का आकलन करने और रणनीति बनाने के लिए प्रदेश के सभी सांसदों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई थी। यह उच्चस्तरीय बैठक शनिवार दोपहर तीन बजे राजधानी चेन्नई के ऐतिहासिक कलैवनार अरंगम में आयोजित की जानी तय की गई थी। हालांकि, बैठक का सत्र शुरू होने से ठीक पहले राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक परिदृश्य में एक बड़ा मोड़ आ गया, जब सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम यानी डीएमके ने मुख्यमंत्री विजय की अध्यक्षता में होने वाले इस संवाद का पूरी तरह बहिष्कार करने की घोषणा कर दी।

## सांसदों को निमंत्रण और डीएमके के बहिष्कार की मुख्य वजह
प्रशासनिक तंत्र के माध्यम से जारी तैयारियों के अनुसार, तमिलनाडु सरकार के मुख्य सचिव एम. साई कुमार ने 6 अगस्त और 7 अगस्त को राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले सभी सांसदों को व्यक्तिगत रूप से आधिकारिक निमंत्रण पत्र भेजे थे। इस निमंत्रण का मुख्य उद्देश्य सांसदों को एक मंच पर लाकर परिसीमन के कारण राज्य के राजनीतिक प्रतिनिधित्व में आने वाले बदलावों पर एक स्वर में चिंता व्यक्त करना था। परंतु, डीएमके नेतृत्व ने औपचारिक रूप से यह स्पष्ट कर दिया है कि उनके दल का कोई भी प्रतिनिधि अथवा सांसद इस बैठक का हिस्सा नहीं बनेगा।

डीएमके का यह सख्त रुख एक विशेष शर्त पर आधारित है। पार्टी का कहना है कि जब तक राज्य सरकार कर्नाटक के साथ चल रहे मेकेदातू बांध विवाद पर एक विस्तृत सर्वदलीय बैठक का आयोजन नहीं करती, तब तक वह परिसीमन जैसी अन्य किसी भी सरकारी चर्चा या बैठक में भाग नहीं लेगी। डीएमके का मानना है कि कावेरी नदी पर प्रस्तावित बांध परियोजना का मुद्दा तमिलनाडु के किसानों और आम जनता के जीवन से सीधे जुड़ा हुआ है, इसलिए इसे सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

## प्रशासनिक प्रक्रिया और पार्टी नेतृत्व के अधिकार पर सवाल
बैठक में शामिल न होने के फैसले को विस्तार से समझाते हुए डीएमके के एक सांसद ने समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में सरकार के रुख पर प्रक्रियात्मक सवाल उठाए। सांसद का तर्क था कि राज्य सरकार द्वारा सीधे सांसदों को बुलावा पत्र भेजना प्रशासनिक दृष्टिकोण से अनुचित कदम है। उन्होंने कहा कि किसी भी गंभीर राज्यव्यापी मुद्दे पर परामर्श करने के लिए सरकार को सबसे पहले संबंधित राजनीतिक दलों के शीर्ष नेतृत्व से संपर्क साधना चाहिए था और उन्हें चर्चा के लिए आमंत्रित करना चाहिए था।

सांसद ने आगे स्पष्ट किया कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में सांसदों की भूमिका अपनी पार्टी के घोषित रुख और नीतियों के अनुसार चलने की होती है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व को दरकिनार कर बुलाई गई यह बैठक पूरी तरह से अनावश्यक और दिशाहीन लगती है। उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि तमिलनाडु के अधिकारों और जनहित की रक्षा के लिए उनकी पार्टी हमेशा अग्रिम पंक्ति में रही है। उन्होंने याद दिलाया कि परिसीमन के संभावित दुष्परिणामों के खिलाफ सबसे पहले आवाज उठाने वाले जननेता डीएमके प्रमुख एम.के. स्टालिन ही थे, इसलिए पार्टी के प्रतिबद्धता पर सवाल नहीं उठाया जा सकता।

## परिसीमन की चिंताएं बनाम मेकेदातू जल विवाद का पेंच
तमिलनाडु की राजनीति में परिसीमन का विषय लंबे समय से एक संवेदनशील और ज्वलंत मुद्दा रहा है। राज्य के प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच यह गहरी आशंका व्याप्त है कि यदि आगामी वर्षों में जनसंख्या के आधार पर लोकसभा सीटों का पुनर्गठन किया गया, तो जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण के राष्ट्रीय लक्ष्यों को सफलतापूर्वक लागू किया है, उनके राजनीतिक प्रतिनिधित्व का दायरा घट जाएगा। इसी डर के कारण दक्षिणी राज्यों में अपने बजटीय और विधायी अधिकारों की रक्षा के लिए एक संयुक्त राजनीतिक मोर्चा बनाने की कोशिशें होती रही हैं। मुख्यमंत्री विजय की ओर से सांसदों का सम्मेलन बुलाना भी इसी राजनीतिक एकजुटता की कोशिश के रूप में देखा जा रहा था।

हालांकि, इस साझा मंच को स्थापित करने की प्रक्रिया में मेकेदातू विवाद एक बड़ी बाधा बनकर सामने आ गया है। पड़ोसी राज्य कर्नाटक में कावेरी नदी पर proposed मेकेदातू बांध परियोजना तमिलनाडु के लिए जल संकट की स्थिति उत्पन्न कर सकती है। डीएमके का स्पष्ट तर्क है कि कावेरी नदी के पानी पर तमिलनाडु के कानूनी और ऐतिहासिक अधिकार अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। पार्टी के अनुसार, राज्य के अस्तित्व और अधिकारों से जुड़े परिसीमन तथा मेकेदातू जैसे दो अति-महत्वपूर्ण मुद्दों को अलग-अलग करके देखना उचित नहीं है, और सरकार को पहले पानी के अधिकार की रक्षा के लिए सर्वदलीय सहमति बनानी चाहिए।

## कांग्रेस की तीखी प्रतिक्रिया और गठबंधन के राजनीतिक संकेत
डीएमके द्वारा सर्वदलीय संवाद से दूरी बनाए जाने के फैसले पर कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ सांसद मणिकम टैगोर ने कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने डीएमके के रुख की आलोचना करते हुए कहा कि जो राजनीतिक दल राज्य के दीर्घकालिक हितों की तुलना में अपने संकीर्ण दलीय हितों को प्राथमिकता देते हैं, वे इस प्रकार के साझा सम्मेलनों से बाहर रहने का विकल्प चुन सकते हैं। इसके विपरीत, जो लोग राजनीति को द्वितीयक मानकर तमिलनाडु के भविष्य को सर्वोपरि रखते हैं, उन्हें मुख्यमंत्री द्वारा आयोजित इस महत्वपूर्ण मंच पर अवश्य उपस्थित होना चाहिए।

सांसद मणिकम टैगोर ने इस विषय को दलीय राजनीति से ऊपर बताते हुए कहा कि यह तमिलनाडु के संवैधानिक अधिकारों, संघीय ढांचे और भविष्य के राजनीतिक अस्तित्व की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता इस पूरे घटनाक्रम को करीब से देख रही है और आने वाले समय में यह भली-भांति याद रखेगी कि संकट और निर्णय के क्षणों में कौन सा दल राज्य के साथ खड़ा था। उल्लेखनीय है कि तमिलनाडु के राजनीतिक समीकरणों में कांग्रेस पार्टी, मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कषगम यानी टीवीके की एक प्रमुख सहयोगी दल है, जिसके कारण इस बयान के सियासी मायने और बढ़ जाते हैं।

## विधानसभा में मेकेदातू पर बहस और भावी राजनीतिक दिशा
इस अंतर-राज्यीय जल विवाद और परिसीमन पर जारी बयानबाजी के बीच राज्य विधानसभा में भी यह मुद्दा प्रमुखता से गूंज चुका है। बीते शुक्रवार को जब विधानसभा सत्र के दौरान विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने मेकेदातू बांध का विषय प्रमुखता से उठाया, तो मुख्यमंत्री विजय ने सरकार की ओर से स्थिति स्पष्ट की थी। मुख्यमंत्री ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि कावेरी जल बंटवारे से जुड़ी मेकेदातू समस्या के समाधान के लिए उन्होंने स्वयं कर्नाटक सरकार के साथ सीधी बातचीत की पहल की थी, क्योंकि उन्हें संवाद के जरिए सकारात्मक परिणाम निकलने की उम्मीद थी।

मुख्यमंत्री विजय ने विधानसभा के पटल पर यह भी जोर देकर कहा था कि वह राज्य के इतने गंभीर और संवेदनशील विषय पर किसी भी तरह की ओछी या संकीर्ण राजनीति करने के पक्षधर नहीं हैं। मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद अब परिसीमन बैठक के बहिष्कार को लेकर राजनीतिक विशेषज्ञों के बीच बहस तेज हो गई है। एक ओर जहां मुख्यमंत्री विजय तमिलनाडु के सभी राजनीतिक प्रतिनिधियों को एकजुट कर केंद्र के सामने एक मजबूत पक्ष रखना चाहते हैं, वहीं दूसरी ओर डीएमके अपनी मांगों पर अड़ी हुई है। शनिवार की यह बैठक अब केवल परिसीमन की बारीकियों तक सीमित न रहकर तमिलनाडु की भावी राजनीतिक गोलबंदी और गठबंधनों के आपसी संबंधों की एक नई तस्वीर पेश कर रही है।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** परिसीमन का मुद्दा इस बात को तय करेगा कि भविष्य में देश की संसद में विभिन्न राज्यों की कितनी हिस्सेदारी होगी और जनसंख्या नियंत्रण लागू करने वाले राज्यों का प्रतिनिधित्व प्रभावित होता है या नहीं।

**तमिलनाडु में:** राज्य की प्रमुख पार्टियों के बीच खींचतान से केंद्र के सामने तमिलनाडु के संसदीय अधिकारों और कावेरी नदी के पानी की सुरक्षा की लड़ाई कमजोर पड़ने की आशंका है।

## सवाल-जवाब

### 1. मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने सांसदों की यह बैठक क्यों बुलाई थी?
मुख्यमंत्री ने प्रस्तावित केंद्र सरकार के परिसीमन विधेयक के तमिलनाडु पर पड़ने वाले राजनीतिक और प्रशासनिक असर पर चर्चा करने के लिए यह बैठक बुलाई थी।

### 2. डीएमके ने परिसीमन पर बुलाई गई इस बैठक का बहिष्कार क्यों किया?
डीएमके की मांग है कि परिसीमन से पहले सरकार कर्नाटक के साथ जारी मेकेदातू बांध विवाद पर एक विस्तृत सर्वदलीय बैठक आयोजित करे।

### 3. यह बैठक कब और कहां आयोजित होनी तय हुई थी?
यह बैठक शनिवार दोपहर 3 बजे चेन्नई स्थित कलैवनार अरंगम में आयोजित की जानी तय की गई थी।

### 4. डीएमके की गैरमौजूदगी पर कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने क्या कहा?
मणिकम टैगोर ने कहा कि जो लोग दलीय राजनीति से ऊपर राज्य के हित को रखते हैं, उन्हें मुख्यमंत्री द्वारा बुलाई गई बैठक में शामिल होना चाहिए।

### 5. मेकेदातू विवाद पर मुख्यमंत्री विजय का क्या रुख रहा है?
मुख्यमंत्री विजय ने विधानसभा में स्पष्ट किया कि उन्होंने सकारात्मक परिणाम की उम्मीद में कर्नाटक के साथ बातचीत का प्रस्ताव दिया था और वह इस मुद्दे पर राजनीति नहीं करना चाहते।

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