# तमिलनाडु विधानसभा का बड़ा फैसला, सरकारी कार्यक्रमों में सबसे पहले गाया जाएगा राज्यगीत 'तमिल थाई वाजथु'

> तमिलनाडु विधानसभा ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित कर सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत में राज्यगीत 'तमिल थाई वाजथु' को सबसे पहले गाना अनिवार्य कर दिया है। इसे केंद्र के निर्देशों के खिलाफ मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय का एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

**Type:** article · **Category:** राजनीति · **Published:** 2026-08-10 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/politics/tamil-nadu-vidhanasabha-ka-bara-phaisala-sarakari-karyakramon-men-sabase-pahale-gaya-jaega-rajyagita-tamizh-thai-vazhthu-15745 · **Language:** Hindi
**Tags:** तमिलनाडु विधानसभा, तमिल थाई वाजथु, सी जोसेफ विजय, डीएमके, एआईएडीएमके, राज्यगीत, चेन्नई

तमिलनाडु विधानसभा ने एक प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित कर दिया है, जिसके तहत अब सभी सरकारी कार्यक्रमों के आरंभ में राज्यगीत 'तमिल थाई वाजथु' को अनिवार्य रूप से सबसे पहले गाया जाएगा। राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को केंद्र सरकार के उस निर्देश के खिलाफ मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की एक ठोस चुनौती के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें शुरुआती गानों की सूची में राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' को सबसे पहले बजाने की बात कही गई थी। विधानसभा के पटल पर इस प्रस्ताव को खुद मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने रखा और इस बात पर जोर दिया कि राज्य के भीतर तमिल गान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इस प्रस्ताव के सदन में आते ही डीएमके और एआईएडीएमके दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों ने इसका खुला समर्थन किया। सदन के स्पीकर जेसीडी प्रभाकर ने प्रस्ताव के पास होने की घोषणा करते हुए स्पष्ट किया कि इसे ज़मीन पर लागू करने के लिए अब किसी अन्य प्रकार की अनुमति की कोई आवश्यकता नहीं है।

 

## तमिल भाषा और संस्कृति को समर्पित ऐतिहासिक कदम

प्रस्ताव पास होने के बाद मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से अपनी भावनाएं साझा करते हुए लिखा कि तमिल महज एक भाषा नहीं है, बल्कि यह एक सोंच, एक संस्कृति और एक समृद्ध सभ्यता का प्रतीक है। उन्होंने आगे कहा कि तमिल हमारा जीवन और हमारी गहरी भावना है, और तमिलनाडु सरकार ने इस सत्य को पूरी तरह से समझ लिया है। मुख्यमंत्री के अनुसार यह ऐतिहासिक प्रस्ताव मां तमिल को अर्पित की गई अब तक की सबसे बड़ी श्रद्धांजलि है, जो तमिल भाषा के प्रति स्थानीय लोगों की अटूट भावनाओं के साथ-साथ इस प्राचीन भाषा की विशिष्टता, गौरव, प्राचीनता और उत्कृष्टता की रक्षा करता है। उन्होंने उन सभी राजनीतिक दलों के प्रति भी अपना हृदय से आभार व्यक्त किया जिन्होंने दलगत भावनाओं से ऊपर उठकर इस प्रस्ताव का एक स्वर में समर्थन किया और इसे पारित कराया।

 

## तमिलनाडु में राज्यगीत को मिलना चाहिए सर्वोच्च स्थान

विधानसभा की कार्यवाही के दौरान प्रस्ताव को पेश करते हुए मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने कहा कि राज्य की सीमाओं के भीतर 'तमिल थाई वाजथु' को हमेशा सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि तमिल शब्द का अर्थ गर्व और शक्ति दोनों से जुड़ा है, और जैसे ही कोई तमिल का उच्चारण करता है, पूरा तमिलनाडु एकजुट होकर खड़ा हो जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राज्य में 'तमिल थाई वाजथु' को प्रथम स्थान मिलना पूरी तरह से राज्य का अपना अधिकार है। मुख्यमंत्री ने सदन के सभी विधायकों से अपील की थी कि वे अपने राजनीतिक मतभेदों को एक तरफ रखकर इस प्रस्ताव का समर्थन करें। इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि टीवीके सरकार राज्यगीत की गरिमा बनाए रखने के मामले में किसी भी प्रकार का कोई समझौता नहीं करेगी।

 

## 'तमिल थाई वाजथु' के इतिहास और कानूनी स्थिति पर एक नजर

विधानसभा में लाए गए इस प्रस्ताव में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि तमिल दुनिया की सबसे प्राचीन शास्त्रीय भाषाओं में शुमार है और इसकी सभ्यता सबसे पुरानी सांस्कृतिक परंपराओं का प्रतिनिधित्व करती है। प्रस्ताव में 'तमिल थाई वाजथु' के समृद्ध इतिहास को रेखांकित करते हुए बताया गया है कि यह गीत वर्ष 1891 में मनोन्मनीयम सुंदरनार द्वारा रचित प्रसिद्ध नाटक 'मनोन्मनीयम' से जुड़ा हुआ है। इसके बाद 23 नवंबर 1970 को एक आधिकारिक सरकारी आदेश जारी किया गया था जिसके तहत यह निर्देश दिया गया था कि तमाम सरकारी कार्यक्रमों के दौरान सबसे पहले इसी गीत को गाया जाना चाहिए। आगे चलकर 12 दिसंबर 2021 को 'तमिल थाई वाजथु' को आधिकारिक तौर पर राज्यगीत का दर्जा दे दिया गया, जिसके बाद से इसे तमिलनाडु के तमाम शैक्षणिक संस्थानों, विश्वविद्यालयों, सरकारी दफ्तरों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों तथा अन्य सार्वजनिक जगहों पर होने वाले आयोजनों से पहले गाना अनिवार्य कर दिया गया था।

## इसका आप पर असर
- **भारत में:** यह फैसला देश में राज्यों की स्वायत्तता और स्थानीय संस्कृति को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के मुकाबले प्राथमिकता देने की बहस को बढ़ावा देता है।
- **तमिलनाडु में:** सरकारी और सार्वजनिक कार्यक्रमों में अब 'तमिल थाई वाजथु' को गाना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा, जिससे स्थानीय प्रशासनिक और सांस्कृतिक प्रोटोकॉल में बदलाव आएगा।

## सवाल-जवाब

### 1. तमिलनाडु विधानसभा में कौन सा प्रस्ताव पास किया गया है?
विधानसभा ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया है जिसके तहत सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत में राज्यगीत 'तमिल थाई वाजथु' को सबसे पहले गाना अनिवार्य कर दिया गया है।

### 2. यह प्रस्ताव किसने विधानसभा में पेश किया?
इस प्रस्ताव को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने विधानसभा में पेश किया था।

### 3. किन राजनीतिक दलों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया?
डीएमके और एआईएडीएमके दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों ने इस प्रस्ताव का पूर्ण समर्थन किया।

### 4. तमिल थाई वाजथु को आधिकारिक राज्यगीत का दर्जा कब मिला था?
12 दिसंबर 2021 को 'तमिल थाई वाजथु' को आधिकारिक तौर पर तमिलनाडु का राज्यगीत घोषित किया गया था।

### 5. यह गीत मूल रूप से किस रचना से जुड़ा हुआ है?
यह गीत 1891 में मनोन्मनीयम सुंदरनार द्वारा लिखे गए नाटक 'मनोन्मनीयम' से जुड़ा हुआ है।

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