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  "type": "article",
  "title": "क्रिटिकल मिनरल्स और टेक्नोलॉजी को हथियार न बनाएं ताकतवर देश, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो टूक",
  "summary": "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के दौरान वैश्विक ताकतों को चेतावनी दी कि महत्वपूर्ण खनिजों और तकनीक का हथियारीकरण साझा विकास के लिए बड़ा खतरा है। उन्होंने स्वास्थ्य, कृषि और आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए कई नए प्रस्ताव रखे।",
  "content": "नई दिल्ली में आयोजित हो रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 के दूसरे दिन के खुले सत्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक अस्थिरता और आपूर्ति श्रृंखला के अवरोधों पर तीखा रुख अपनाया है। भारत की अध्यक्षता के एजेंडे को रखते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि मौजूदा समय में बढ़ते तनाव का सीधा और बुरा असर आम नागरिकों के जीवन पर पड़ रहा है। आज की परस्पर जुड़ी दुनिया में महामारियां, जलवायु आपदाएं और आपूर्ति श्रृंखला का टूटना किसी एक सीमा तक सीमित नहीं रहता। प्रधानमंत्री ने शक्तिशाली देशों को चेतावनी दी कि टेक्नोलॉजी और क्रिटिकल मिनरल्स का राजनीतिकरण या हथियारीकरण सामूहिक प्रगति के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा है, इसलिए तकनीक का समावेशी उपयोग सुनिश्चित करना अनिवार्य हो गया है।\n\nभारत के चार प्रमुख स्तंभों यानी सतर्कता, नवाचार, सहयोग और स्थिरता पर आधारित इस विजन के तहत वैश्विक सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए कई अहम रणनीतिक फैसले लिए गए हैं। प्रधानमंत्री ने घोषणा की कि संक्रामक रोगों से मुकाबला करने के वास्ते एक एकीकृत अर्ली वॉर्निंग सिस्टम स्थापित करने पर सहमति बन चुकी है। इसके अलावा आपदा प्रबंधन डेटा इंटीग्रेशन गाइडलाइन और लॉजिस्टिक्स सप्लाई चेन ऑपरेशन फ्रेमवर्क को भी औपचारिक मंजूरी दे दी गई है। आने वाले समय की अनिश्चितताओं से निपटने के खातिर प्रधानमंत्री ने एक नए स्टार्टअप इनोवेशन फंड की स्थापना का प्रस्ताव रखा और किसानों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, जियोस्पेशियल तकनीक तथा डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर को एकीकृत करने वाले डिजिटल एग्रीकल्चर नेटवर्क की रूपरेखा प्रस्तुत की।\n\nवैश्विक संकटों से पार पाने के लिए सुरक्षा कवच\nप्रधानमंत्री ने इस बात पर बल दिया कि वर्तमान वैश्विक परिवेश में किसी भी संकट की समय रहते पहचान करना, उसकी पूर्व तैयारी करना और त्वरित कदम उठाना ही स्थिरता का मूल मंत्र है। ब्रिक्स समूह अब केवल औपचारिक वार्ताओं का मंच बनकर नहीं रहा गया है, बल्कि यह धरातल पर ठोस परिणाम देने वाले एक प्रभावी तंत्र में तब्दील हो चुका है।\n\nमहामारियों और आपदाओं पर साझा नियंत्रण स्थापित करने के लिए सदस्य देशों ने संक्रामक रोगों की रोकथाम हेतु अर्ली वॉर्निंग सिस्टम पर सहमति जताई है, जो अचानक आने वाले स्वास्थ्य संकटों से निपटने में मददगार होगा। वहीं, नई आपदा दिशा-निर्देशों के माध्यम से देशों के बीच वास्तविक समय में आंकड़ों का आदान-प्रदान संभव हो सकेगा। इसके साथ ही, लॉजिस्टिक्स सप्लाई चेन का नया ढांचा व्यापारिक बाधाओं को दूर करते हुए आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आवाजाही को सुनिश्चित करेगा।\n\nस्टार्टअप और डिजिटल खेती से बदलेगा परिदृश्य\nनवाचार को वास्तविक धरातल पर उतारने के लिए भारत ने आर्थिक और तकनीकी सहयोग का एक नया खाका खींचा है। ब्रिक्स इनक्यूबेटर नेटवर्क के माध्यम से सदस्य राष्ट्रों के स्टार्टअप और इनक्यूबेटर्स को सीधे तौर पर जोड़ा जाएगा, ताकि वैश्विक चुनौतियों के स्थानीय स्तर पर व्यावहारिक समाधान तलाशे जा सकें।\n\nनए और तीव्र गति से आगे बढ़ने वाले तकनीकी समाधानों को वित्तीय रूप से समर्थन देने के उद्देश्य से एक विशेष स्टार्टअप इनोवेशन फंड का प्रस्ताव रखा गया है। इसके अतिरिक्त, डिजिटल एग्रीकल्चर नेटवर्क के अंतर्गत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, उपग्रह और जियोस्पेशियल तकनीक को किसानों की रोजमर्रा की कृषि गतिविधियों से जोड़ा जाएगा, जिससे कृषि क्षेत्र को और अधिक सक्षम बनाया जा सके।\n\nइसका आप पर असर\nब्रिक्स शिखर सम्मेलन में लिए गए इन फैसलों का सीधा असर वैश्विक व्यापार, स्वास्थ्य सुरक्षा और कृषि क्षेत्र पर पड़ेगा, जिससे भारत और सदस्य देशों के आम नागरिकों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।\n\n• भारत में: डिजिटल एग्रीकल्चर नेटवर्क और एआई आधारित कृषि पहलों से देश के किसानों को सटीक मौसम और फसल डेटा मिलेगा, जिससे उनकी आय और उत्पादकता में सुधार होगा।\n• वैश्विक स्तर पर: सप्लाई चेन फ्रेमवर्क और अर्ली वॉर्निंग सिस्टम लागू होने से भविष्य की महामारियों और व्यापारिक बाधाओं से आम लोगों को राहत मिलेगी।\n• व्यापार और स्टार्टअप: नए स्टार्टअप इनोवेशन फंड और इनक्यूबेटर नेटवर्क से युवा उद्यमियों को वैश्विक स्तर पर फंडिंग और बाजार तक आसान पहुंच मिलेगी।\n• आपूर्ति और सुरक्षा: महत्वपूर्ण खनिजों और तकनीक के मुक्त प्रवाह से वैश्विक बाजारों में कीमतों की स्थिरता बनी रहेगी और आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह प्रस्ताव और चेतावनियां वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, महामारी के खतरों और आपूर्ति श्रृंखलाओं में बार-बार आ रही रुकावटों की पृष्ठभूमि में सामने आई हैं।\n\n• भू-राजनीतिक तनाव: दुनिया भर में तकनीकी वर्चस्व और महत्वपूर्ण खनिजों पर नियंत्रण को लेकर बढ़ते संघर्ष ने आपूर्ति श्रृंखलाओं को खतरे में डाल दिया है।\n• महामारी के सबक: पिछले वैश्विक स्वास्थ्य संकटों ने यह साबित कर दिया कि पारंपरिक प्रणालियां अचानक फैलने वाले संक्रमणों से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।\n• कृषि और तकनीकी अंतराल: किसानों को आधुनिक तकनीक से लैस करने की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी ताकि जलवायु परिवर्तन के दौर में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 का आयोजन कहाँ हो रहा है?\nब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 का आयोजन नई दिल्ली में किया जा रहा है।\n\n2. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किस बात पर सबसे अधिक जोर दिया?\nप्रधानमंत्री ने तकनीक और क्रिटिकल मिनरल्स को हथियार न बनाने तथा उनके समावेशी इस्तेमाल पर जोर दिया।\n\n3. संक्रामक बीमारियों से निपटने के लिए क्या सहमति बनी है?\nसंक्रामक रोगों की रोकथाम के लिए ब्रिक्स इंटीग्रेटेड अर्ली वॉर्निंग सिस्टम बनाने पर सहमति बनी है।\n\n4. किसानों के लिए कौन सी नई पहल पेश की गई है?\nकिसानों के लिए एआई, जियोस्पेशियल तकनीक और डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर को जोड़ने वाला डिजिटल एग्रीकल्चर नेटवर्क पेश किया गया है।\n\n5. स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए किस फंड का प्रस्ताव रखा गया है?\nयुवा उद्यमों और नए समाधानों को आर्थिक मदद देने के लिए ब्रिक्स स्टार्टअप इनोवेशन फंड का प्रस्ताव रखा गया है।",
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  "category": "राजनीति",
  "publishedAt": "2026-09-13",
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