तेलंगाना विधानसभा में बीआरएस की रणनीति कैसे पड़ी उल्टी, कांग्रेस ने कैसे पलट दिया पूरा राजनीतिक खेल तेलंगाना विधानसभा सत्र के दौरान काले कपड़े पहनकर प्रदर्शन करने उतरी बीआरएस पार्टी खुद अपने ही बुने हुए राजनीतिक जाल में उलझ गई है। पुलिस से झड़प, महिला विधायकों के विवाद और स्पीकर पर की गई टिप्पणियों के कारण विपक्षी दल पूरी तरह से रक्षात्मक मुद्रा में आ गया है। तेलंगाना की राजनीति इन दिनों बेहद गर्म है और राज्य की विधानसभा का मौजूदा सत्र सत्तारूढ़ कांग्रेस और विपक्षी पार्टी बीआरएस के बीच तीखे टकराव का मुख्य केंद्र बन चुका है। विपक्षी दल ने सरकार को विभिन्न जनहित के मुद्दों और चुनावी वादों पर घेरने की पुख्ता योजना बनाई थी। मगर जिस तरह से विरोध प्रदर्शन की रूपरेखा तैयार की गई, वह पूरी तरह से उनके खिलाफ ही साबित हुई। सदन के परिसर में काले रंग की टी-शर्ट पहनकर प्रवेश करने के प्रयास और वहां पुलिस बल के साथ हुई तीखी झड़प ने असल राजनीतिक मुद्दों को पूरी तरह से पीछे धकेल दिया। इसके बाद महिला जनप्रतिनिधियों को लेकर उठे विवाद, विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ की गई अमर्यादित टिप्पणियों और उसके बाद हुई निलंबन की कार्यवाहियों ने इस घमासान को और अधिक भड़का दिया। इसके अलावा बीआरएस प्रमुख के चंद्रशेखर राव के फार्महाउस की ओर कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा मार्च निकालने की कोशिश ने इस माहौल को चरम सीमा पर पहुंचा दिया है। इन तमाम अप्रत्याशित विवादों के चलते अब सियासी गलियारों में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि क्या बीआरएस ने अपनी शुरुआती बढ़त गंवा दी है और क्या पार्टी अब पूरी तरह से डिफेंसिव मोड में आ चुकी है। काले कपड़ों का प्रदर्शन और पुलिस के साथ टकराव से कैसे शुरू हुआ विवाद इस पूरे राजनीतिक ड्रामे की शुरुआत विधानसभा सत्र के पहले दिन ही हो गई थी। विपक्षी दल के विधायक सरकार विरोधी संदेशों लिखी काली टी-शर्ट पहनकर सदन के अंदर जाने की कोशिश कर रहे थे, जिन्हें सुरक्षा में तैनात पुलिस कर्मियों ने द्वार पर ही रोक लिया। इस रोकटोक के बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी धक्का-मुक्की और हंगामा शुरू हो गया। विपक्षी पार्टी ने कड़ा आरोप लगाया कि पुलिस ने उनकी महिला विधायकों के साथ बेहद आक्रामक और अमर्यादित व्यवहार किया। पार्टी का यह भी दावा किया गया कि इस गहमागहमी के दौरान पूर्व मंत्री और विधायक सुनीता लक्ष्मा रेड्डी की साड़ी तक खींची गई और एक अन्य पूर्व मंत्री सबिता इंद्रा रेड्डी की गर्दन पर हाथ रखा गया। हरीश राव का शर्ट उतारना और सीताक्का का कीचक पर्व वाला बयान इस घटनाक्रम के दौरान जो वीडियो फुटेज सामने आए, उन्होंने इस पूरे मामले को एक नया मोड़ दे दिया। प्रसारित वीडियो में बीआरएस विधायक टी हरीश राव अपनी शर्ट उतारते और पुलिसकर्मियों के साथ बहस करते हुए साफ दिखाई दिए। पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामाराव भी पुलिस अधिकारियों के साथ काफी आक्रामक अंदाज में बहस करते नजर आए। इसके तुरंत बाद मंत्री सीताक्का ने कुछ वीडियो सार्वजनिक किए। उन्होंने दावा किया कि इन वीडियो साक्ष्यों में विपक्षी पार्टी के पुरुष विधायक खुद अपनी महिला सहयोगियों को पीछे से धक्का देते हुए साफ देखे जा सकते हैं। मंत्री सीताक्का ने तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि विधायक गंगुला कमलाकर और सुधीर रेड्डी को महिला विधायकों के बीच जाकर धक्का-मुक्की करने की क्या आवश्यकता थी। उन्होंने विपक्षी सदस्यों पर गंभीर कदाचार का आरोप लगाते हुए इस पूरी घटना की तुलना महाभारत के कीचक पर्व से कर डाली, जो कि महिलाओं के साथ हुए अनुचित व्यवहार के प्रसंग से जुड़ा है। पॉलिटिकल एनालिस्ट की नजर में खुद के जाल में फंसी बीआरएस इस पूरे घटनाक्रम पर टिप्पणी करते हुए वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक डॉ सरव्वजुला रामू ने बताया कि बीआरएस की सोची-समझी रणनीति किस तरह पूरी तरह से उलट दिशा में चली गई। उन्होंने कहा कि मंत्री सीताक्का द्वारा यह सवाल पूरी तरह से वाजिब उठाया गया कि महिला जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी के बीच टी हरीश राव को अपनी शर्ट उतारने की आखिर क्या जरूरत थी। उन्होंने आगे कहा कि वीडियो फुटेज के जरिए यह स्पष्ट हो गया है कि पुरुष नेताओं ने ही महिलाओं को धकेला था। विश्लेषक ने कहा कि विपक्षी दल भले ही कितना भी शोर मचा ले, लेकिन मैदानी हकीकत यह है कि वे अब पूरी तरह से रक्षात्मक स्थिति में आ चुके हैं। स्पीकर के अपमान पर भड़के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और गर्माया माहौल विधानसभा परिसर के बाहर हुए भारी हंगामे के बाद सदन के भीतर एक और बड़ा विवाद खड़ा हो गया। विपक्षी दल के एमएलसी टाटा मधु और नवीन रेड्डी द्वारा विधानसभा अध्यक्ष गद्दाम प्रसाद कुमार को लेकर कुछ ऐसी टिप्पणियां कर दी गईं, जिन पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई। मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने इस आचरण को सदन की गरिमा पर सीधा आघात करार दिया। उन्होंने मांग की कि इस मामले में बीआरएस प्रमुख को सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए और ऐसी भाषा का इस्तेमाल करने वाले सदस्य के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए। हरीश राव के सवालों पर अचानक क्यों रो पड़े स्पीकर गद्दाम प्रसाद अगले दिन की कार्यवाही के दौरान टी हरीश राव ने अपनी पार्टी के विधायकों के खिलाफ की गई कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि महिला विधायकों के साथ दुर्व्यवहार करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ अभी तक कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया गया। राव ने यह भी सफाई दी कि उनके नेताओं ने अध्यक्ष के खिलाफ की गई टिप्पणी पर पहले ही खेद जता दिया है। इस बात पर विधानसभा अध्यक्ष गद्दाम प्रसाद कुमार बेहद आहत और गुस्से में नजर आए। उन्होंने बेहद भावुक अंदाज में कहा कि एमएलसी ने उनकी मां को गाली दी है, किसी और की नहीं, और उनके पास भी भावनाएं हैं। घटना से एक दिन पहले भी सदन की कार्यवाही के दौरान अध्यक्ष की आंखें नम हो गई थीं जब मंत्री सीताक्का इस पूरे प्रकरण पर अपनी बात रख रही थीं। राजनीतिक विश्लेषक डॉ रामू ने स्पष्ट किया कि अध्यक्ष का इस तरह से भावुक होना या गुस्सा होना कोई सामान्य बात नहीं है, बल्कि यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि उन्हें अंदर तक ठेस पहुंची है। केसीआर के फार्महाउस के बाहर मार्च और नेताओं के बीच तीखे जुबानी हमले यह पूरा राजनीतिक गतिरोध अब विधानसभा की चारदीवारी से निकलकर सड़कों पर आ चुका है। कांग्रेस नेताओं ने पूर्व मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव से माफी की मांग करते हुए उनके एरावल्ली स्थित फार्महाउस की तरफ मार्च निकालने का प्रयास किया। केटीआर ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और उनके सहयोगी नेता पूर्व सीएम को जानबूझकर निशाना बनाने की खतरनाक साजिश रच रहे हैं। दूसरी ओर कांग्रेस विधायक वीरवेल्ली शंकर पर भी कथित तौर पर केसीआर की मौत की कामना करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए, जिसे विपक्षी दल ने एक बड़ा मुद्दा बना लिया है। इसके जवाब में टीपीसीसी अध्यक्ष महेश कुमार गौड़ ने भी तीखा पलटवार किया है। इसका आप पर असर तेलंगाना विधानसभा में चल रहे इस राजनीतिक घमासान का सीधा असर राज्य की प्रशासनिक स्थिरता और नीतिगत फैसलों पर पड़ रहा है। • भारत में: राजनीतिक दलों के बीच इस तरह के आक्रामक टकराव से जनता से जुड़े असल विधाई मुद्दों पर चर्चा में देरी होती है। इससे संसद और विधानसभाओं में आम नागरिकों के कल्याणकारी कानूनों को पारित करने की प्रक्रिया प्रभावित होती है। • तेलंगाना में: राज्य के आम नागरिकों और मतदाताओं को शासन प्रणाली में गतिरोध का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप के कारण विकास कार्य और जनहित की योजनाएं प्रभावित हो रही हैं। ऐसा क्यों हुआ विधानसभा सत्र के दौरान पैदा हुआ यह बड़ा विवाद विपक्षी दल की सोची-समझी रणनीति के उलट दिशा में जाने और दोनों पक्षों के बीच बढ़ते अविश्वास का परिणाम है। • राजनीतिक रणनीति का उलटना: विपक्षी पार्टी द्वारा सरकार को घेरने के लिए काले कपड़े पहनकर सदन में प्रवेश करने और विरोध प्रदर्शन करने के प्लान ने पुलिस के साथ सीधी झड़प को जन्म दे दिया। • आचरण और बयानों का विवाद: महिला विधायकों के साथ कथित बदसलूकी के आरोपों और सदन के अध्यक्ष को लेकर की गई अमर्यादित टिप्पणियों ने बहस के मूल मुद्दों को पूरी तरह से किनारे कर दिया। • बढ़ता राजनीतिक तनाव: पूर्व मुख्यमंत्री के आवास की ओर मार्च निकालने के प्रयासों और नेताओं के बीच तीखे जुबानी हमलों ने माहौल को और अधिक तनावपूर्ण बना दिया। सवाल-जवाब 1. तेलंगाना विधानसभा में हालिया विवाद की मुख्य वजह क्या थी? विपक्ष द्वारा काले रंग की टी-शर्ट पहनकर विरोध प्रदर्शन करना और पुलिस के साथ हुई झड़प इस पूरे विवाद की मुख्य वजह बनी। 2. बीआरएस नेताओं ने पुलिस पर क्या गंभीर आरोप लगाए थे? पार्टी ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनकी महिला विधायकों के साथ आक्रामक व्यवहार किया और सुनीता लक्ष्मा रेड्डी की साड़ी खींची गई। 3. मंत्री सीताक्का ने बीआरएस के प्रदर्शन की तुलना किससे की थी? मंत्री सीताक्का ने विपक्षी सदस्यों के आचरण की तुलना महाभारत के कीचक पर्व से की थी। 4. विधानसभा अध्यक्ष गद्दाम प्रसाद कुमार क्यों भावुक हो गए थे? विपक्षी एमएलसी द्वारा उनके खिलाफ की गई अमर्यादित टिप्पणियों के कारण अध्यक्ष को गहरी ठेस पहुंची और वे भावुक हो गए। 5. मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी ने इस मामले में क्या मांग की थी? मुख्यमंत्री ने बीआरएस प्रमुख से सार्वजनिक माफी मांगने और अमर्यादित टिप्पणी करने वाले सदस्य के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की। https://trendkia.com/politics/telangana-assembly-mein-brs-ki-ranneeti-kaise-ulti-padi-30476 TrendKia — Har trend, sabse pehle.