तेलंगाना सरकार कराएगी केसीआर के एर्रावेल्ली फार्महाउस की जांच, सरकारी जमीन पाए जाने पर गरीबों को बांटने का एलान मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने पूर्व मुख्यमंत्री केसीआर के 700 एकड़ में फैले एर्रावेल्ली फार्महाउस की 30 दिनों के भीतर जांच करने का आदेश दिया है, जिसमें सरकारी जमीन पाए जाने पर उसे गरीबों में वितरित किया जाएगा। इसके साथ ही सरकार धरणी पोर्टल के जरिए हुए कथित 1 लाख करोड़ रुपये के भूमि घोटाले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल का गठन करने की तैयारी में है। तेलंगाना के राजनीतिक गलियारे में उस समय भारी हलचल मच गई, जब मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने विधानसभा में पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के एर्रावेल्ली स्थित फार्महाउस को लेकर एक बहुत बड़ा एलान किया। मुख्यमंत्री ने इस आलीशान और बेहद चर्चित फार्महाउस के जमीन रिकॉर्ड और उसके वास्तविक मालिकाना हक की गहन जांच कराने का आदेश दिया है। इस संबंध में स्थानीय राजस्व अधिकारियों को अपनी पूरी पड़ताल समाप्त कर अंतिम रिपोर्ट पेश करने के लिए मात्र 30 दिनों का समय दिया गया है। विधानसभा के पटल पर चर्चा के दौरान यह दावा किया गया कि यह पूरा फार्महाउस लगभग 700 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें से करीब 388 एकड़ ऐसी सरकारी भूमि है जिसका कोई आधिकारिक ब्योरा या स्पष्ट हिसाब-किताब नहीं दिया गया है। मुख्यमंत्री ने सदन में स्पष्ट घोषणा की कि यदि इस फार्महाउस की सीमा में थोड़ी सी भी सरकारी जमीन पाई गई, तो उसे तत्काल प्रभाव से सरकार अपने नियंत्रण में लेगी और उस पूरी जमीन को बेघर और गरीब लोगों में बांट दिया जाएगा। ३० दिनों का समय और तीन कैबिनेट मंत्रियों की विशेष समिति इस महत्वपूर्ण जांच प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और समय पर पूरा करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने तीन वरिष्ठ कैबिनेट मंत्रियों की एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया है। इस विशेष समिति में मंत्री दामोदर राजनरसिंहा, विवेक वेंकटस्वामी और पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी को शामिल किया गया है। यह समिति सीधे जमीन पर जाकर पैमाइश की प्रक्रिया की निगरानी करेगी और राजस्व विभाग के पुराने तथा नए दस्तावेजों का बारीकी से मिलान कराएगी। मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने विधानसभा में बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा कि अगले 30 दिनों के भीतर पूरी जांच को मुकम्मल कर लिया जाएगा, जिससे जनता के सामने दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। संबंधित अधिकारियों को तुरंत नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि इस फार्महाउस के स्वामित्व और सीमाओं के वास्तविक कानूनी दर्जे का पता लगाया जा सके। मंत्रियों की यह टीम जमीन की पैमाइश और राजस्व रिकॉर्ड्स की पड़ताल के हर चरण की खुद निगरानी करेगी। केसीआर के पूरे परिवार की संपत्ति का आधिकारिक ब्योरा विधानसभा की कार्यवाही के दौरान मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने केसीआर के परिवार के पास मौजूद कुल जमीन का पूरा ब्योरा सदन के सामने रखा। प्रस्तुत किए गए आंकड़ों के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री के पूरे परिवार के पास कुल मिलाकर 439 एकड़ जमीन है, जो राज्य के 9 अलग-अलग जिलों, 24 मंडलों और 31 गांवों में फैली हुई है। इसमें से खुद केसीआर और उनके परिवार के सीधे नाम पर लगभग 67.5 एकड़ जमीन दर्ज है। आंकड़ों के विस्तृत विश्लेषण में यह भी बताया गया कि केसीआर के बेटे केटीआर और उनके परिवार के पास कुल 123.19 एकड़ जमीन का मालिकाना हक है। इस कुल हिस्से में से केटीआर के नाम पर 49.5 एकड़ जमीन है, जबकि उनकी पत्नी शैलइमा के नाम पर 17.5 एकड़ जमीन दर्ज है। इसके अलावा, केटीआर की बेटी आलेख्या के नाम पर 9.38 एकड़ और उनके बेटे हिमांशु राव के नाम पर 46.35 एकड़ जमीन का मालिकाना अधिकार दर्ज है। साथ ही, हरीश राव के परिवार के पास भी कुल 30.5 एकड़ जमीन होने की बात सामने आई है, जिसमें से 21 एकड़ स्वयं हरीश राव और 8.5 एकड़ उनकी पत्नी श्रीनिथा के नाम पर है। लैंड सीलिंग एक्ट के दायरे में आएंगे करीबी रिश्तेदार और सहयोगी मुख्यमंत्री द्वारा विधानसभा में रखे गए आंकड़े केवल केसीआर के बेहद करीबी पारिवारिक सदस्यों तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि इसमें उनके अन्य रिश्तेदारों और करीबियों के नाम भी उजागर किए गए। MLC के. कविता के परिवार के पास कुल 37.26 एकड़ जमीन होने का दावा किया गया है, जिसमें से 14 एकड़ स्वयं के. कविता और 23 एकड़ उनके पति डी.आर. अनिल कुमार के नाम पर है। इसके साथ ही, पूर्व BRS सांसद जोगिनीपल्ली संतोष कुमार के परिवार के पास करीब 79 एकड़ जमीन का मालिकाना हक होने की बात कहा गया है। इस जमीन में से रविंदर राव के नाम पर 53.16 एकड़, संतोष कुमार के नाम पर 18.21 एकड़ और उनकी पत्नी रोहिणी के नाम पर 7.23 एकड़ जमीन दर्ज है। अन्य करीबियों में नवीन कुमार के नाम पर 52.16 एकड़ और कोंडल राव के नाम पर 48.38 एकड़ जमीन की बात सामने आई है। इस विशाल भू-संपत्ति का ब्योरा देते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य में एग्रीकल्चरल लैंड सीलिंग एक्ट को पूरी सख्ती से लागू करने की चेतावनी दी। इस कानून के प्रावधानों के अनुसार, पति, पत्नी और उनके नाबालिग बच्चों को मिलाकर एक ही इकाई माना जाता है और उसी के आधार पर जमीन की अधिकतम सीमा तय होती है। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी परिवार की जमीन कानून द्वारा निर्धारित सीमा से अधिक पाई गई, तो सरकार उस अतिरिक्त भूमि को अपने कब्जे में लेने के लिए कठोर कदम उठाएगी। धरणी पोर्टल के जरिए १ लाख करोड़ का कथित घोटाला मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने सदन में पिछली BRS सरकार के कार्यकाल के दौरान शुरू किए गए भू-रिकॉर्ड प्रबंधन पोर्टल धरणी पर भी बेहद गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि इस पोर्टल के माध्यम से राज्यभर में जमीनों के रिकॉर्ड में बड़े पैमाने पर हेरफेर और धोखाधड़ी की गई, जिसके कारण लगभग 1 लाख करोड़ रुपये का भारी-भरकम घोटाला हुआ है। इस पूरे मामले की तह तक जाने के लिए वर्तमान कांग्रेस सरकार ने एक स्पेशल इंक्वायरी टीम यानी SIT के गठन की घोषणा की है, जिसे धरणी पार्ट 2 का नाम दिया गया है। मुख्यमंत्री ने साफ किया कि इस नए अभियान के तहत पिछली सरकार के दौरान पोर्टल के माध्यम से किए गए हर संदेहास्पद और गलत ट्रांजैक्शन की फाइलों को दोबारा खोला जाएगा। सरकार उन सभी फार्महाउसों और सरकारी भूमियों की एक विस्तृत सूची तैयार कर रही है, जिन पर पिछली सरकार के रसूखदार नेताओं द्वारा कथित तौर पर कब्जा किया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में दोषी पाए जाने वाले किसी भी बड़े या प्रभावशाली नेता को बख्शा नहीं जाएगा। सेक्शन 22-A और ऐतिहासिक भूमि विवादों पर सरकार का रुख विपक्ष द्वारा कांग्रेस सरकार पर यह आरोप लगाया जा रहा था कि वह प्रतिबंधित जमीनों के पंजीकरण से जुड़े सेक्शन 22-A का दुरुपयोग करके जमीन मालिकों को परेशान कर रही है। इस पर तीखा पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने सदन में कहा कि विपक्ष जनता को गुमराह करने के लिए जानबूझकर झूठा प्रचार कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार का इरादा किसी भी सामान्य नागरिक को परेशान करना नहीं है, बल्कि वे केवल वास्तविक विसंगतियों को दूर करने और सच्चाई को सामने लाने का प्रयास कर रहे हैं। जिन आम लोगों की निजी या पैतृक संपत्तियां तकनीकी गड़बड़ियों के कारण गलती से प्रतिबंधित सेक्शन 22-A की सूची में शामिल हो गई हैं, उन्हें इस समस्या से निजात दिलाने और राहत देने के लिए सरकार ठोस रास्ते तलाश रही है। मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि तेलंगाना में जमीन से जुड़े विवाद काफी जटिल हैं, जिनकी जड़ें निजाम के ऐतिहासिक शासनकाल से लेकर अविभाजित आंध्र प्रदेश के दौर तक फैली हुई हैं। इनमें से कई मामले विभिन्न अदालतों के आदेशों और कानूनी जटिलताओं से भी जुड़े हुए हैं, जिन्हें सरकार बेहद व्यवस्थित तरीके से सुलझाने का काम करेगी। इसका आप पर असर उच्च-स्तरीय भू-संपत्तियों की जांच प्रशासनिक प्रक्रियाओं में भूमि सुधारों और डिजिटल पारदर्शिता की दिशा में एक बड़े कदम को दर्शाती है। • भारत में: एग्रीकल्चरल लैंड सीलिंग एक्ट का कड़ाई से पालन अन्य राज्यों के लिए भी ऐतिहासिक भूमि वितरण की जांच करने का एक उदाहरण पेश करता है। यह बड़े पैमाने पर होने वाले संस्थागत भ्रष्टाचार को रोकने के लिए पारदर्शी भूमि रिकॉर्ड प्रणालियों के महत्व पर जोर देता है। • तेलंगाना में: स्थानीय भूमिहीन और बेघर गरीब परिवारों को आने वाले समय में वापस ली गई सरकारी जमीनों के वितरण से सीधा लाभ मिल सकता है। इसके अलावा, पूर्व में तकनीकी त्रुटियों के कारण प्रतिबंधित सेक्शन 22-A की सूची से प्रभावित आम जमीन मालिकों को प्रशासनिक राहत मिलने की उम्मीद है क्योंकि सरकार इन रिकॉर्ड्स को दुरुस्त करने का काम कर रही है। ऐसा क्यों हुआ यह बड़ी जांच तेलंगाना में दशकों पुराने भूमि विवादों और हालिया राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के कारण शुरू हुई है। • अतिक्रमण की आशंका: इस कार्रवाई का मुख्य कारण यह आरोप है कि पूर्व मुख्यमंत्री केसीआर के निजी फार्महाउस में लगभग 388 एकड़ सरकारी जमीन शामिल है जिसका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं है। इसने वर्तमान सरकार को भूमि सर्वेक्षण और राजस्व ऑडिट शुरू करने के लिए प्रेरित किया है। • धरणी पोर्टल के विवाद: पिछली BRS सरकार द्वारा शुरू किए गए डिजिटल धरणी पोर्टल के कारण भूमि रिकॉर्ड में हेरफेर और सेक्शन 22-A के तहत जमीनों के गलत वर्गीकरण की कई शिकायतें मिली थीं। इन गड़बड़ियों के कारण भारी संख्या में भूमि विवाद खड़े हुए और लगभग 1 लाख करोड़ रुपये के घोटाले के आरोप लगे। • ऐतिहासिक जटिलताएं: तेलंगाना में भूमि प्रशासन की जड़ें ऐतिहासिक रूप से काफी उलझी हुई हैं, जिसमें निजाम के शासनकाल और अविभाजित आंध्र प्रदेश के दौर के अनसुलझे मालिकाना हक के मामले शामिल हैं, जो लंबे समय से अदालती लड़ाइयों में फंसे हुए हैं। सवाल-जवाब 1. केसीआर के एर्रावेल्ली फार्महाउस की जांच क्यों की जा रही है? मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने जांच के आदेश दिए हैं क्योंकि यह आशंका है कि फार्महाउस के कुल 700 एकड़ में से लगभग 388 एकड़ जमीन बिना किसी हिसाब-किताब की सरकारी भूमि है। 2. राजस्व अधिकारियों को रिपोर्ट सौंपने के लिए कितनी समय सीमा दी गई है? राजस्व अधिकारियों को भौतिक सत्यापन पूरा करने और अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंपने के लिए 30 दिनों की सख्त समय सीमा दी गई है। 3. इस जांच की निगरानी करने वाली उच्च स्तरीय समिति के सदस्य कौन हैं? इस जांच की निगरानी दामोदर राजनरसिंहा, विवेक वेंकटस्वामी और पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी की तीन सदस्यीय कैबिनेट मंत्रियों की समिति करेगी। 4. यदि फार्महाउस की सीमा के भीतर सरकारी जमीन पाई जाती है तो क्या होगा? सरकार तुरंत उस जमीन को अपने कब्जे में ले लेगी और उसे बेघर तथा भूमिहीन गरीब परिवारों में बांट देगी। 5. मुख्यमंत्री द्वारा बताए गए धरणी पोर्टल के कथित घोटाले का विवरण क्या है? मुख्यमंत्री ने दावा किया कि पिछली BRS सरकार ने धरणी पोर्टल के जरिए भूमि रिकॉर्ड में हेरफेर किया, जिससे लगभग 1 लाख करोड़ रुपये का घोटाला हुआ। इसकी जांच के लिए धरणी पार्ट 2 के तहत एक विशेष जांच दल का गठन किया जाएगा। 6. बड़ी जोत वाले परिवारों पर एग्रीकल्चरल लैंड सीलिंग एक्ट कैसे लागू होता है? इस कानून के तहत, अधिकतम अनुमति प्राप्त भूमि स्वामित्व की गणना के लिए पति, पत्नी और नाबालिग बच्चों को एक इकाई माना जाता है, और इस सीमा से अधिक पाई गई जमीन को सरकार द्वारा जब्त किया जा सकता है। https://trendkia.com/politics/telangana-sarakara-karaegi-kcr-ke-erravelli-pharmahausa-ki-jancha-sarakari-jamina-pae-jane-para-garibon-ko-bantane-ka-elana-32659 TrendKia — Har trend, sabse pehle.