ठाणे की मुंब्रा सियासत में नया मोड़, एआईएमआईएम पार्षद सहर शेख के पिता यूनुस शेख को मिली शिंदे सेना से जुड़ी केबल सेना की कमान एआईएमआईएम की पार्षद सहर शेख के पिता यूनुस शेख को एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना से जुड़ी केबल सेना का अध्यक्ष बनाया गया है, हालांकि उन्होंने पार्टी में औपचारिक प्रवेश से इनकार किया है। महाराष्ट्र के ठाणे जिले के मुंब्रा इलाके की स्थानीय राजनीति में एक अप्रत्याशित घटनाक्रम सामने आया है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) की स्थानीय कॉर्पोरेटर सहर शेख के पिता यूनुस शेख का नाम एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना से जुड़ गया है। ठाणे नगर निगम चुनाव में जीत दर्ज करने के बाद सहर शेख अपने आक्रामक बयानों के चलते राज्य की राजनीति में खासी चर्चा में रही थीं, और अब उनके पिता की इस नई संगठनात्मक जिम्मेदारी ने स्थानीय राजनीतिक हलकों में सरगर्मी बढ़ा दी है। विवादित जीत और सहर शेख का पुराना बयान ठाणे नगर निगम चुनाव में मिली कामयाबी के बाद सहर शेख ने खुले मंच से एक बयान दिया था, जिस पर लंबा विवाद छिड़ा था। अपनी चुनावी जीत के बाद उन्होंने दावा किया था कि अगले पांच वर्षों के भीतर मुंब्रा का हर प्रत्याशी एआईएमआईएम से ही होगा और पूरे मुंब्रा को हरे रंग में रंग दिया जाएगा। उनके इस बयान के सामने आने के बाद कई राजनीतिक दलों और हिंदुत्व समर्थकों ने उन पर तीखे हमले किए थे, जिससे मुंब्रा क्षेत्र में ध्रुवीकरण की स्थिति बन गई थी। केबल सेना के अध्यक्ष पद पर नियुक्ति और यूनुस शेख की सफाई इस पूरे मामले में उस वक्त नया मोड़ आया जब यह बात सामने आई कि यूनुस शेख शिंदे गुट की शिवसेना से जुड़ गए हैं। हालांकि, यूनुस शेख ने पार्टी में किसी भी तरह के राजनीतिक प्रवेश को सिरे से नकार दिया है। उनका पक्ष है कि वे लंबे समय से केबल और इंटरनेट के व्यवसाय में सक्रिय हैं और उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी गई है, वह विशुद्ध रूप से व्यावसायिक मोर्चे तक सीमित है। उन्होंने राजनीतिक दल में शामिल होने की बात को विरोधियों द्वारा फैलाई गई महज एक अफवाह करार दिया है। नियुक्ति पत्र के दावों से उपजे राजनीतिक सवाल यूनुस शेख की दलीलों के उलट संगठनात्मक दस्तावेजों की तस्वीरें कुछ अलग ही तस्वीर पेश कर रही हैं। जिस केबल सेना की अध्यक्षता यूनुस शेख को सौंपी गई है, उसके आधिकारिक नियुक्ति पत्र पर स्पष्ट रूप से बड़े अक्षरों में एकनाथ शिंदे के आशीर्वाद का उल्लेख किया गया है। चूंकि यह केबल विंग सीधे तौर पर शिंदे गुट के राजनीतिक दायरे और संरक्षण में संचालित होती है, इसलिए पदभार संभालने के बाद पार्टी से दूरी बनाए रखने का यूनुस शेख का दावा राजनीतिक जानकारों के गले नहीं उतर रहा है। संगठन की महत्वपूर्ण कुर्सी स्वीकार करने के साथ-साथ पार्टी से बेरुखी जताने का यह रुख इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है। मुंब्रा के स्थानीय सियासी समीकरणों पर असर एक तरफ सहर शेख मुंब्रा में एआईएमआईएम के प्रमुख चेहरे के रूप में अपनी राजनीतिक पहचान मजबूत कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके पिता का एकनाथ शिंदे की शिवसेना के प्रभाव वाले संगठन की कमान संभालना विरोधाभासी तस्वीर पेश करता है। पिता और पुत्री के अलग-अलग राजनीतिक खेमों से जुड़ने के इस घटनाक्रम के बाद मुंब्रा में एआईएमआईएम और शिवसेना के बीच भविष्य के शक्ति संतुलन पर सभी की निगाहें टिक गई हैं। इसका आप पर असर मुंब्रा के स्थानीय निवासियों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए यह घटनाक्रम आने वाले दिनों में नगर निगम के कामकाज और राजनीतिक ध्रुवीकरण की दिशा तय कर सकता है। • भारत में: यह घटनाक्रम दिखाता है कि स्थानीय निकायों में वैचारिक रूप से विरोधी दलों के बीच व्यक्तिगत और व्यावसायिक स्तर पर कैसे गठजोड़ बनते हैं। मतदाताओं के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि बयानबाजी के परे स्थानीय समीकरण अक्सर जमीनी कारोबारी हितों से तय होते हैं। • मुंब्रा में: मुंब्रा के मतदाताओं और स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच इस कदम से असमंजस की स्थिति बन सकती है। आने वाले दिनों में स्थानीय नागरिक समस्याओं और प्रशासनिक मामलों में दोनों विरोधी दलों के बीच शक्ति संतुलन पर इसका सीधा असर देखने को मिलेगा। • केबल व इंटरनेट उपभोक्ताओं के लिए: संगठनात्मक स्तर पर केबल सेना के नए नेतृत्व से स्थानीय स्तर पर सेवा प्रदाताओं के नियमन और व्यावसायिक मामलों पर नजर रहेगी। आम उपभोक्ताओं को स्थानीय ऑपरेटरों के बीच होने वाले किसी भी संभावित प्रशासनिक बदलाव की जानकारी रखनी होगी। • स्थानीय कार्यकर्ताओं के लिए: जमीनी स्तर पर एआईएमआईएम और शिवसेना के कार्यकर्ताओं के बीच आपसी तालमेल और चुनावी रणनीति को लेकर नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। कार्यकर्ताओं को वार्ड स्तर की राजनीति में अपने नेताओं के रुख को देखकर आगे की रणनीति तय करनी होगी। ऐसा क्यों हुआ यह स्थिति तब पैदा हुई जब ठाणे नगर निगम चुनाव में जीत के बाद उपजे विवाद के बीच यूनुस शेख को शिंदे गुट से जुड़ी केबल सेना का प्रमुख बनाया गया। • सीधा कारण: यूनुस शेख को केबल सेना का अध्यक्ष नियुक्त किया गया, जिसके आधिकारिक पत्र पर एकनाथ शिंदे के आशीर्वाद का सीधा उल्लेख था। इस औपचारिक नियुक्ति के सार्वजनिक होते ही राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। • व्यावसायिक पृष्ठभूमि: यूनुस शेख का केबल और इंटरनेट संचालन का पुराना व्यवसाय रहा है, जिसके चलते उन्हें इस ट्रेड यूनियन जैसी विंग में जिम्मेदारी दी गई। उन्होंने इसे विशुद्ध कारोबारी दायित्व बताया, जबकि यह संगठन सीधे तौर पर राजनीतिक संरक्षण में चलता है। • पुराने विवाद की पृष्ठभूमि: उनकी बेटी सहर शेख ने चुनाव जीतने के बाद मुंब्रा को हरा करने का विवादास्पद नारा दिया था। उस बयान से उपजे तनाव के ठीक बाद परिवार के सदस्य का विरोधी खेमे से जुड़ाव सामने आने से विवाद और गहरा गया। सवाल-जवाब 1. सहर शेख कौन हैं और वे चर्चा में क्यों आई थीं? सहर शेख एआईएमआईएम की पार्षद हैं, जो ठाणे नगर निगम चुनाव जीतने के बाद मुंब्रा को हरे रंग में रंगने वाले अपने बयान को लेकर चर्चा में आई थीं। 2. यूनुस शेख को कौन सी नई जिम्मेदारी मिली है? यूनुस शेख को एकनाथ शिंदे की शिवसेना के संरक्षण वाली केबल सेना का अध्यक्ष बनाया गया है। 3. क्या यूनुस शेख ने शिवसेना में शामिल होने की बात स्वीकार की है? नहीं, यूनुस शेख ने शिवसेना में शामिल होने की बात से इनकार करते हुए इसे केवल व्यावसायिक दायित्व और विरोधियों की फैलाई अफवाह बताया है। 4. नियुक्ति पत्र में ऐसा क्या है जिस पर विवाद हो रहा है? केबल सेना के आधिकारिक नियुक्ति पत्र पर बड़े अक्षरों में एकनाथ शिंदे के आशीर्वाद से लिखा हुआ है, जिससे उनका पार्टी से जुड़ाव स्पष्ट दिखता है। https://trendkia.com/politics/thane-ki-mumbra-siyasata-men-naya-mora-aimim-parshada-sahar-shaikh-ke-pita-yunus-shaikh-ko-mili-eknath-shinde-sena-se-juri-cable-s-47951 TrendKia — Har trend, sabse pehle.