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  "title": "ठाणे में डेटा सेंटर और रिंग मेट्रो प्रोजेक्ट का आदित्य ठाकरे ने किया विरोध, पर्यावरण पर खतरे को लेकर जताई चिंता",
  "summary": "शिवसेना (उबाठा) नेता आदित्य ठाकरे ने ठाणे के बालकुम में बनने वाले डेटा सेंटर और आंतरिक रिंग मेट्रो परियोजना का विरोध करते हुए जन स्वास्थ्य और पर्यावरण पर भारी खतरे की आशंका जताई है।",
  "content": "शिवसेना (उबाठा) के नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री आदित्य ठाकरे ने ठाणे में प्रस्तावित डेटा सेंटर और आंतरिक रिंग मेट्रो परियोजना के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को बालकुम में प्रस्तावित डेटा सेंटर स्थल पर स्थानीय नागरिकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि शहर के बीचों-बीच 53 एकड़ जमीन पर इस तरह की विशाल परियोजना का निर्माण करना पूरी तरह अनुचित है।\n\nडेटा सेंटर से बढ़ेगा प्रदूषण और पानी की किल्लत\nआदित्य ठाकरे ने डेटा सेंटर के संचालन से जुड़ी दिक्कतों को रेखांकित करते हुए कहा कि इसे ठंडा रखने के लिए भारी मात्रा में पानी की आवश्यकता पड़ेगी। इसके अतिरिक्त, आपातकालीन बिजली आपूर्ति के जनरेटरों का संचालन करने के लिए लगभग 5 लाख लीटर डीजल का भंडारण किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि इस संयत्र से लगातार 90 डेसीबल तक का ध्वनि प्रदूषण फैलेगा, जिससे आसपास के रहवासियों को परेशानी होगी।\n\nरिंग मेट्रो के लिए 3500 पेड़ों की कटाई पर सवाल\nआंतरिक रिंग मेट्रो परियोजना की आलोचना करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि इसके निर्माण के लिए लगभग 3,500 पेड़ों को काटा जाएगा। मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि अगर डेटा सेंटर इतना ही जरूरी है, तो इसे ठाणे के बजाय दरे गांव में स्थित उनके बड़े बंगले में बना देना चाहिए। आदित्य ठाकरे ने स्थानीय लोगों से दोनों परियोजनाओं का मिलकर विरोध करने की अपील की और उन्हें हर संभव राजनीतिक समर्थन का आश्वासन दिया।\n\nइसका आप पर असर\nठाणे में प्रस्तावित निर्माण और विकास परियोजनाओं से स्थानीय रहवासियों के दैनिक जीवन और पर्यावरण पर सीधा असर पड़ेगा।\n\n• भारत में: तेजी से बढ़ते डेटा सेंटर और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से बिजली, पानी की खपत और कार्बन उत्सर्जन को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर नीतियां सख्त हो सकती हैं।\n• ठाणे में: बालकुम और आसपास के इलाकों में 3500 पेड़ों की कटाई और डीजल जनरेटरों के धुएं से वायु और ध्वनि प्रदूषण बढ़ेगा, जिससे स्थानीय लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nठाणे में चल रहे बुनियादी ढांचा विकास और स्थानीय पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन न बन पाने के कारण यह विरोध शुरू हुआ है।\n\n• रिहाइशी इलाके में भारी उद्योग: शहर के केंद्र में 53 एकड़ जमीन पर डेटा सेंटर लगाने से पानी की भारी खपत और ध्वनि प्रदूषण की समस्या पैदा हो रही है।\n• पर्यावरण की क्षति: आंतरिक रिंग मेट्रो के मार्ग निर्माण के लिए 3,500 पेड़ों को काटने की योजना से हरित क्षेत्र घटने का डर है।\n• राजनीतिक खींचतान: पूर्व मंत्री आदित्य ठाकरे ने राज्य सरकार और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के फैसलों को पर्यावरण विरोधी बताते हुए नागरिकों को लामबंद किया है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. आदित्य ठाकरे ने ठाणे में किन परियोजनाओं का विरोध किया है?\nआदित्य ठाकरे ने ठाणे के बालकुम में प्रस्तावित डेटा सेंटर और आंतरिक रिंग मेट्रो परियोजना का विरोध किया है।\n\n2. डेटा सेंटर से पर्यावरण और जन स्वास्थ्य को क्या खतरा बताया गया है?\nडेटा सेंटर को ठंडा करने के लिए भारी पानी, जनरेटर के लिए 5 लाख लीटर डीजल भंडारण और 90 डेसीबल तक ध्वनि प्रदूषण होने की बात कही गई है।\n\n3. रिंग मेट्रो परियोजना से कितने पेड़ प्रभावित होने का दावा किया गया है?\nरिंग मेट्रो परियोजना के निर्माण के लिए लगभग 3,500 पेड़ों को काटे जाने का दावा किया गया है।\n\n4. आदित्य ठाकरे ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के खिलाफ क्या टिप्पणी की?\nउन्होंने कहा कि अगर डेटा सेंटर इतना ही जरूरी है तो इसे ठाणे के बजाय दरे गांव में मुख्यमंत्री के बड़े बंगले पर बना दिया जाए।",
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  "category": "राजनीति",
  "publishedAt": "2026-09-09",
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