# तिहाड़ से रिहा हुए सीजेपी नेता सौरव दास और आशुतोष रांका, अदालत में दी जंतर-मंतर पर प्रदर्शन न करने की अंडरटेकिंग

> जंतर-मंतर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के मामले में सात दिनों की न्यायिक हिरासत के बाद सीजेपी के आशुतोष रांका और सौरव दास को निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया है।

**Type:** article · **Category:** राजनीति · **Published:** 2026-10-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/politics/tihara-se-riha-hue-cjp-neta-saurav-das-aura-ashutosh-ranka-adalata-men-di-jantar-mantar-para-pradarshana-na-karane-ki-andarateking-50362 · **Language:** Hindi
**Tags:** सौरव दास, आशुतोष रांका, सीजेपी, तिहाड़ जेल, जंतर मंतर, अभिजीत दिपके, नई दिल्ली

नागरिक अधिकार संगठन सीजेपी के दो प्रमुख नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को तिहाड़ जेल में एक सप्ताह बिताने के बाद बुधवार को रिहाई मिल गई। नई दिल्ली स्थित विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (एसईएम) की अदालत में दोनों नेताओं द्वारा औपचारिक शपथ पत्र और वचनबद्धता प्रस्तुत करने के बाद यह रिहाई संभव हुई। अदालत ने दोनों को पचास-पचास हजार रुपये के व्यक्तिगत बांड और जमानती बांड जमा करने का निर्देश देकर जमानत मंजूर की, हालांकि उनके खिलाफ चल रही आधिकारिक जांच पूरी तरह जारी रहेगी और इस प्रकरण की अगली अदालती सुनवाई शुक्रवार को तय की गई है।

## अदालत के समक्ष दिए गए लिखित वादे
जमानत की औपचारिक शर्तों के तहत सीजेपी के दोनों पदाधिकारियों ने विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष विस्तृत कानूनी हलफनामा दाखिल किया। इस दस्तावेज में दोनों कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट रूप से कहा कि वे राष्ट्रीय राजधानी में किसी भी प्रकार से सार्वजनिक शांति भंग नहीं होने देंगे। उन्होंने लिखित रूप में दर्ज कराया कि उन्हें भारतीय न्यायपालिका, उसकी पूरी कार्यप्रणाली और संबंधित मजिस्ट्रेट अदालत की अधिकारिता पर अटूट विश्वास है।

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हलफनामे की दूसरी सबसे अहम शर्त धरना स्थल से जुड़ी थी। दोनों नेताओं ने दोहराया कि जब तक सक्षम कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से जंतर-मंतर को दोबारा आधिकारिक प्रदर्शन स्थल के रूप में विज्ञापित या अधिसूचित नहीं किया जाता, तब तक वे उस परिसर में किसी भी नए धरने या विरोध प्रदर्शन का आह्वान नहीं करेंगे। इसके अलावा उन्होंने यह भी वचन दिया कि भविष्य में यदि कोई भी सार्वजनिक विरोध कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, तो वह पूरी तरह से देश के संविधान और विधि-सम्मत सीमाओं के भीतर ही संचालित होगा।

## जेल भेजने की पूरी पृष्ठभूमि
सौरव दास और आशुतोष रांका को 14 अक्टूबर के दिन न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। इस कार्रवाई की शुरुआत 13 अक्टूबर की एक घटना से हुई थी, जब दोनों नेताओं ने जंतर-मंतर के बंद प्रवेश द्वार को फांदकर अंदर प्रवेश किया और राष्ट्रीय ध्वज फहरा दिया था। उनका यह कदम जंतर-मंतर को धरना स्थलों की आधिकारिक सूची से हटाए जाने के प्रशासनिक फैसले के विरोध में था।

सरकारी अभियोजन का मुख्य तर्क यह था कि दोनों नेताओं ने पूर्व में दिए गए शांति बांड का सीधा उल्लंघन किया है। इससे पहले चुनावी धांधली के आरोपों को लेकर एक प्रदर्शन के सिलसिले में उन्हें 10 अक्टूबर को हिरासत में लिया गया था, जिसके बाद उन्होंने शांति बनाए रखने वाले बांड पर हस्ताक्षर किए थे। अभियोजन ने आरोप लगाया कि बंद गेट लांघना उसी शांति समझौते की सीधी अवहेलना थी।

## रिहाई पर अभिजीत दिपके का सार्वजनिक संदेश
दोनों नेताओं के जेल से बाहर आने के तत्काल बाद संगठन से जुड़े अभिजीत दिपके ने सार्वजनिक रूप से अपनी प्रतिक्रिया साझा की। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि सौरव और आशुतोष न केवल उनसे बेहतर हैं, बल्कि काफी बड़े कद के नेता हैं। उन्होंने कहा कि अपने इन साथियों के निर्देशों का पालन करना उनके लिए गर्व की बात है, साथ ही हल्के-फुल्के अंदाज में जोड़ा कि भविष्य में उनके बिना कोई भी अकेला उद्यान में नहीं घूमेगा।

## इसका आप पर असर
इस अदालती आदेश और कानूनी घटनाक्रम का सीधा असर दिल्ली में नागरिक अधिकारों और सार्वजनिक प्रदर्शन की सीमाओं पर देखने को मिलेगा।

- **भारत में:** देश भर के सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक संगठनों के लिए यह स्पष्ट संकेत है कि गैर-अधिसूचित स्थलों पर किए गए प्रदर्शनों पर मजिस्ट्रेट अदालतें कड़ी कानूनी शर्तें और बांड लागू कर रही हैं। शांति बांड के उल्लंघन पर जेल की सजा का यह मामला अन्य राज्यों के आंदोलनों के कानूनी विकल्पों को भी प्रभावित करेगा।
- **नई दिल्ली में:** जंतर-मंतर पर सार्वजनिक धरने और सभाएं आयोजित करने की योजना बना रहे समूहों को अब केवल अनुमति प्राप्त वैकल्पिक स्थानों का ही रुख करना होगा। इस आदेश के बाद लुटियंस दिल्ली के आसपास सुरक्षा व्यवस्था और जांच चौकियां सख्त बनी रहेंगी।
- **प्रदर्शनकारियों के लिए:** शांति बांड पर हस्ताक्षर करने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए नियमों की अवहेलना तत्काल न्यायिक हिरासत का कारण बन सकती है। पचास हजार रुपये की जमानत राशि और नियमित अदालती पेशी कानूनी जटिलताओं को काफी बढ़ा देती है।
- **कानूनी प्रक्रिया पर:** शुक्रवार को होने वाली अगली सुनवाई इस बात की मिसाल बनेगी कि गैर-अधिसूचित स्थल पर तिरंगा फहराने को शांति भंग की श्रेणी में किस तरह परखा जाता है। इससे यह भी तय होगा कि विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेटों के विशेषाधिकारों की कानूनी सीमाएं कहां तक हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
यह कानूनी विवाद मुख्य रूप से जंतर-मंतर के प्रशासनिक दर्जे में हुए बदलाव और पहले से लागू शांति बांड की शर्तों की अनदेखी के चलते खड़ा हुआ। अधिकारियों ने चुनावी धांधली के विरोध में शुरू हुए आंदोलन को सार्वजनिक व्यवस्था के नजरिए से देखा।

- **प्रदर्शन स्थल की स्थिति बदलना:** नई दिल्ली प्रशासन ने जंतर-मंतर को आधिकारिक धरना स्थलों की सूची से बाहर कर दिया था, जिसके चलते वहां किसी भी प्रकार के राजनीतिक या नागरिक जमावड़े पर पाबंदी लगा दी गई थी। इसके विरोध में कार्यकर्ताओं ने प्रतीकात्मक असंतोष दर्ज कराने का फैसला किया।
- **गेट फांदने की घटना:** 13 अक्टूबर को दोनों सीजेपी नेताओं ने जंतर-मंतर के बंद मुख्य द्वार को पार किया और अंदर जाकर राष्ट्रीय ध्वज फहराया। प्रशासन ने इसे सरकारी आदेश की अवहेलना और सुरक्षित परिसर में अनधिकृत प्रवेश माना।
- **शांति बांड का उल्लंघन:** इससे पूर्व 10 अक्टूबर को चुनावी धांधली के खिलाफ निकाले गए मार्च के दौरान दोनों को हिरासत में लिया गया था और उन्होंने शांति व्यवस्था बनाए रखने के बांड पर हस्ताक्षर किए थे। अभियोजन का आरोप था कि 13 अक्टूबर की कार्रवाई सीधे तौर पर उस कानूनी वादे का उल्लंघन थी, जिसके आधार पर उन्हें 14 अक्टूबर को तिहाड़ जेल भेजा गया।

## सवाल-जवाब

### 1. सीजेपी नेताओं को तिहाड़ जेल से कब रिहा किया गया?
सौरव दास और आशुतोष रांका को सात दिनों की न्यायिक हिरासत के बाद बुधवार को तिहाड़ जेल से रिहा किया गया।

### 2. दोनों नेताओं की जमानत के लिए क्या शर्तें रखी गईं?
अदालत ने दोनों को 50-50 हजार रुपये के निजी और जमानती बांड भरने और जंतर-मंतर पर कोई प्रदर्शन न बुलाने की अंडरटेकिंग देने का निर्देश दिया।

### 3. उन्हें पहली बार हिरासत में किस कारण से लिया गया था?
उन्हें 10 अक्टूबर को चुनावी धांधली के खिलाफ बुलाए गए एक प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था।

### 4. 14 अक्टूबर को उन्हें न्यायिक हिरासत में क्यों भेजा गया था?
13 अक्टूबर को उन्होंने जंतर-मंतर का बंद गेट फांदकर तिरंगा फहराया था, जिसे पुलिस ने पहले भरे गए शांति बांड का उल्लंघन माना।

### 5. मामले की अगली अदालती सुनवाई कब होनी है?
विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत में इस मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार को होगी।

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