# पश्चिम बंगाल में उपचुनाव से पहले टीएमसी और कांग्रेस आमने-सामने, ममता बनर्जी गुट के प्रस्ताव पर छिड़ी सियासी जंग

> पश्चिम बंगाल उपचुनाव से पहले तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस ने दावा किया है कि ममता बनर्जी के दल ने नंदीग्राम और रेजीनगर सीटों पर तालमेल के लिए संपर्क किया था, जिसे टीएमसी ने खारिज कर दिया है।

**Type:** article · **Category:** राजनीति · **Published:** 2026-09-16 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/politics/tmc-and-congress-clash-in-west-bengal-ahead-of-by-elections-over-alleged-seat-sharing-offer-32616 · **Language:** Hindi
**Tags:** पश्चिम बंगाल, उपचुनाव, तृणमूल कांग्रेस, कांग्रेस, ममता बनर्जी, नंदीग्राम, रेजीनगर, शुभेंदु अधिकारी

पश्चिम बंगाल की राजनीति में उपचुनाव की सुगबुगाहट के बीच एक बार फिर तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है। इस बार सरगर्मी भारतीय जनता पार्टी की वजह से नहीं, बल्कि विपक्षी गठबंधन के दो प्रमुख घटकों तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस के आपसी रिश्तों में आए तनाव के कारण बढ़ी है। राज्य में होने वाले आगामी उपचुनावों के मद्देनजर ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले दल ने कांग्रेस के साथ चुनावी तालमेल बिठाने की पहल की थी, लेकिन कांग्रेस की ओर से अकेले ही मैदान में उतरने के फैसले के चलते यह कोशिश परवान नहीं चढ़ सकी। खास बात यह है कि तृणमूल कांग्रेस ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा तब की जब कांग्रेस पार्टी पहले ही अपने प्रत्याशियों के नामों का एलान कर चुकी थी।

 

## सीटों के लेन-देन को लेकर सामने आए दावे
 राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि तृणमूल कांग्रेस ने उपचुनाव के समीकरणों को साधने के लिए कांग्रेस से संपर्क साधा था। योजना के तहत यह प्रस्ताव रखा गया था कि नंदीग्राम सीट पर कांग्रेस अपने उम्मीदवार उतारेगी जबकि रेजीनगर सीट तृणमूल कांग्रेस के खाते में रहेगी। हालांकि, कांग्रेस के प्रदेश संगठन से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पार्टी इस प्रस्ताव पर राजी नहीं हुई क्योंकि वह राज्य स्तर पर अपना खोया हुआ आधार फिर से मजबूत करने की प्रक्रिया में जुटी है और इस वक्त किसी भी तरह का गठबंधन इस रणनीति को कमजोर कर सकता है। इसी को लेकर दोनों दलों के बीच जुबानी जंग छिड़ गई है और एक-दूसरे पर राजनीतिक स्वार्थ के आरोप लगाए जा रहे हैं।

 

## कांग्रेस नेताओं के तीखे बयान और पुरानी बातें
 यह पूरा घटनाक्रम तृणमूल कांग्रेस की लंबे समय से चली आ रही उस रणनीति से अलग नजर आता है, जिसमें पार्टी यह दावा करती रही है कि वह पश्चिम बंगाल में अकेले ही भारतीय जनता पार्टी का मुकाबला करने में पूरी तरह सक्षम है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य ने सार्वजनिक तौर पर दावा किया कि ममता बनर्जी के खेमे से जुड़े एक प्रतिनिधि ने करीब पंद्रह दिन पहले नई दिल्ली में कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता से मुलाकात कर यह प्रस्ताव रखा था कि नंदीग्राम सीट कांग्रेस लड़े और रेजीनगर सीट तृणमूल के पास रहे।

 प्रदीप भट्टाचार्य ने अपनी बात रखते हुए कहा, "प्रस्ताव यह था कि तृणमूल कांग्रेस रेजीनगर से चुनाव लड़ेगी और नंदीग्राम सीट कांग्रेस के लिए छोड़ देगी।" उन्होंने यह भी बताया कि पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने इस मामले पर वक्त मांगा और बाद में प्रांतीय नेताओं के साथ इस पर गहन चर्चा की। प्रदेश इकाई का साफ मानना था कि गठबंधन के लिए यह सही वक्त नहीं है और भविष्य में उचित समय आने पर इस पर विचार किया जा सकता है, लेकिन फिलहाल स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ना ही बेहतर फैसला है। कांग्रेस के प्रांतीय प्रवक्ता सुमन रॉय चौधरी ने भी इस बात की पुष्टि की कि सीटों के तालमेल का यह प्रस्ताव तृणमूल कांग्रेस की तरफ से ही आया था।

 सुमन रॉय चौधरी ने आगे जोड़ते हुए कहा कि जब तृणमूल सत्ता में मजबूत स्थिति में थी, तब उसने ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं दिया था, जबकि उस वक्त भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ मिलकर चुनाव लड़ने की बहुत अधिक संभावना थी। अब जब पार्टी अकेली पड़ चुकी है और पराजय का सामना कर रही है, तो उसे अचानक कांग्रेस के राजनीतिक महत्व का अहसास होने लगा है। कांग्रेस खेमे के एक अन्य नेता ने यह भी आरोप लगाया कि नंदीग्राम आज भी तृणमूल के लिए बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण सीट है, और यह प्रस्ताव देना इस बात का साफ प्रमाण है कि पार्टी वहां अपनी संभावित हार को भांप चुकी है।

 

## तृणमूल का खंडन और विपक्षी खेमे में असमंजस
 दूसरी तरफ, तृणमूल कांग्रेस ने इन तमाम दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। जब इस कथित प्रस्ताव के बारे में पार्टी के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष से पूछा गया, तो उन्होंने इसे नकार दिया। इसके अलावा तृणमूल के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने इस पर कोई भी विस्तृत टिप्पणी करने से मना कर दिया, लेकिन यह जरूर कहा कि इस तरह के बयानों और आपसी खींचतान का फायदा केवल भारतीय जनता पार्टी को ही मिलेगा। कांग्रेस और तृणमूल के इन विरोधी बयानों ने पश्चिम बंगाल के पहले से ही बिखरे हुए विपक्षी समीकरणों को और अधिक उलझा कर रख दिया है। राष्ट्रीय स्तर पर तृणमूल, कांग्रेस और वाम दल भले ही विपक्षी गठबंधन इंडिया के घटक दल माने जाते हैं, लेकिन धरातल पर राज्य के चुनावों में वे लगातार एक-दूसरे के आमने-सामने चुनाव लड़ते आए हैं।

 

## बदले हालात और उम्मीदवारों की सूची
 प्रदीप भट्टाचार्य ने सवालिया लहजे में कहा कि जो तृणमूल कभी दावा करती थी कि वह अकेले ही भाजपा से लोहा ले सकती है, उसे आज अचानक कांग्रेस की मदद की दरकार क्यों पड़ रही है। उनके मुताबिक, तृणमूल के संगठनात्मक संकट और विधानसभा चुनावों में मिले झटके ने पूरे राजनीतिक परिदृश्य को बदलकर रख दिया है। भारतीय जनता पार्टी के हाथों पराजय मिलने और वर्तमान में तृणमूल के तीन अलग-अलग धड़ों में बंट जाने के कारण ही पार्टी को राज्य में कांग्रेस की ताकत का अहसास हुआ है।

 राजनीतिक घटनाक्रम के तहत प्रमुख विपक्षी दलों में कांग्रेस ने सबसे पहले उपचुनाव के लिए अपने पत्ते खोले और 11 सितंबर को नंदीग्राम से मिलन प्रधान तथा रेजीनगर से मोहम्मद अब्दुल्लाहिल काफी को उम्मीदवार घोषित कर दिया। इसके बाद वाम दलों ने भी अपने प्रत्याशियों के नाम सामने रख दिए। वहीं, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले मुख्य तृणमूल दल ने बाद में नंदीग्राम सीट से संचिता प्रधान डे को टिकट दिया। इसके साथ ही ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी तृणमूल गुट ने भी चुनावी मैदान में कूदने का ऐलान कर दिया है, जिससे मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। अंत में भारतीय जनता पार्टी ने हसीरानी रथ को अपना उम्मीदवार बना दिया है। गौरतलब है कि 2026 के विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों ही सीटों से चुनाव लड़ा था और दोनों पर जीत दर्ज की थी। बाद में उन्होंने भवानीपुर सीट अपने पास रखी और नंदीग्राम से इस्तीफा दे दिया, जिसके कारण ही अब वहां उपचुनाव कराना पड़ रहा है।

## इसका आप पर असर
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस के बीच चल रहे इस राजनीतिक गतिरोध का सीधा असर राज्य की चुनावी प्रक्रिया और स्थानीय मतदाताओं पर पड़ रहा है।

- **भारत में राष्ट्रीय स्तर पर:** विपक्षी दलों के बीच आपसी तालमेल की कमी का असर बड़े राजनीतिक गठबंधनों की कार्यप्रणाली और रणनीतिक फैसलों पर पड़ता है।

- **पश्चिम बंगाल में:** नंदीग्राम और रेजीनगर के मतदाताओं के बीच उपचुनाव को लेकर सरगर्मी बढ़ गई है, जहां विभिन्न दलों के उम्मीदवारों के मैदान में उतरने से चुनावी मुकाबला बेहद कड़ा हो गया है।

- **राजनीतिक विश्लेषकों के लिए:** यह घटनाक्रम राज्य में क्षेत्रीय दलों और राष्ट्रीय पार्टियों के बीच बदलते समीकरणों और क्षेत्रीय नेतृत्व के प्रभाव का आकलन करने का नया अवसर देता है।

- **स्थानीय कार्यकर्ताओं के लिए:** दोनों दलों के अलग-अलग चुनाव लड़ने से जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के सामने प्रचार और रणनीति को लेकर असमंजस की स्थिति बन सकती है।

- **मतदाता सहभागिता:** बहुकोणीय मुकाबले के कारण स्थानीय मतदाताओं को अपने प्रतिनिधियों के चयन के लिए अधिक विकल्पों और बहसों का सामना करना पड़ेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
पश्चिम बंगाल में उपचुनाव से पहले टीएमसी और कांग्रेस के बीच खड़े हुए इस राजनीतिक विवाद के पीछे संगठनात्मक बदलाव और चुनावी रणनीतियां मुख्य वजह रही हैं।

- **अकेले चुनाव लड़ने का फैसला:** कांग्रेस पार्टी ने राज्य में अपना जमीनी आधार फिर से मजबूत करने के लिए किसी भी तरह के गठबंधन से इनकार कर दिया और अपने उम्मीदवार पहले ही घोषित कर दिए।

- **संगठन में बिखराव:** तृणमूल कांग्रेस के भीतर सांगठनिक मोर्चे पर आई चुनौतियों और पार्टी के विभिन्न धड़ों में बंटने के कारण राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं।

- **नंदीग्राम सीट की चुनौती:** यह निर्वाचन क्षेत्र तृणमूल कांग्रेस के लिए पारंपरिक रूप से कठिन मुकाबला माना जाता है, जिसके कारण सीट के आदान-प्रदान का प्रस्ताव चर्चा में आया।

- **शुभेंदु अधिकारी का इस्तीफा:** वर्ष 2026 के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी द्वारा दो सीटों पर जीत हासिल करने के बाद नंदीग्राम सीट खाली करने से यह उपचुनाव अनिवार्य हो गया।

## सवाल-जवाब

### 1. पश्चिम बंगाल में उपचुनाव किन सीटों पर हो रहे हैं?
उपचुनाव मुख्य रूप से नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों के लिए हो रहे हैं।

### 2. कांग्रेस ने नंदीग्राम से किसे अपना उम्मीदवार बनाया है?
कांग्रेस ने नंदीग्राम सीट से मिलन प्रधान को अपना उम्मीदवार घोषित किया है।

### 3. तृणमूल कांग्रेस ने नंदीग्राम से किस उम्मीदवार को उतारा है?
टीएमसी ने नंदीग्राम सीट से संचिता प्रधान डे को मैदान में उतारा है।

### 4. नंदीग्राम सीट पर उपचुनाव की मुख्य वजह क्या है?
शुभेंदु अधिकारी ने 2026 के विधानसभा चुनाव में दो सीटों पर जीतने के बाद नंदीग्राम सीट से इस्तीफा दे दिया था, जिससे यह उपचुनाव कराना पड़ा।

### 5. प्रदीप भट्टाचार्य कौन हैं?
प्रदीप भट्टाचार्य कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष हैं।

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