# तृणमूल कांग्रेस को बड़ी राहत: फ्रीज किए गए तीन बैंक खातों को शर्तों के साथ मिली संचालन की अनुमति

> कलकत्ता हाई कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस के तीन फ्रीज किए गए बैंक खातों को अस्थायी रूप से बहाल कर दिया है। कोर्ट ने जांच प्रक्रिया और पार्टी के दैनिक कामकाज के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए एक विशेष अधिकारी की नियुक्ति की है।

**Type:** article · **Category:** राजनीति · **Published:** 2026-07-09 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/politics/tmc-bank-accounts-unfrozen-calcutta-high-court-permits-limited-operations-6171 · **Language:** Hindi
**Tags:** तृणमूल कांग्रेस, कलकत्ता हाई कोर्ट, बैंक खाते, राजनीति, ममता बनर्जी

कलकत्ता हाई कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस को एक बड़ी राहत देते हुए पार्टी के फ्रीज किए गए तीन बैंक खातों को फिर से चालू करने के लिए अस्थायी अनुमति प्रदान कर दी है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पुलिस द्वारा जिन साक्ष्यों के आधार पर यह कड़ी कार्रवाई की गई थी, वे फिलहाल प्रथम दृष्टया संतोषजनक प्रतीत नहीं होते हैं। हालांकि, इस राहत के साथ कई कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं। अब पार्टी इन बैंक खातों का उपयोग केवल अपने अनिवार्य और नियमित दिन-प्रतिदिन के खर्चों को पूरा करने के लिए ही कर सकेगी।

## विशेष अधिकारी की देखरेख में होगा कामकाज
इस पूरे मामले की निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से हाई कोर्ट की सिंगल बेंच के जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने कलकत्ता हाई कोर्ट के ही सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस सुब्रत तालुकदार को विशेष अधिकारी (स्पेशल ऑफिसर) के रूप में नियुक्त किया है। यह नई व्यवस्था फिलहाल 30 सितंबर तक प्रभावी रहेगी। पार्टी को खातों के प्रबंधन में इन नियुक्त अधिकारी के निर्देशों का पालन करना होगा।

## अदालत ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर गहरी हैरानी जताई कि आखिर किस तरह से एफआईआर दर्ज होने के तुरंत बाद इतनी त्वरित और जल्दबाजी भरी कार्रवाई की गई। अदालत ने रिकॉर्ड पर टिप्पणी की कि 18 जून को प्राथमिकी दर्ज हुई थी और ठीक अगले दिन, यानी 19 जून को आनन-फानन में ये खाते फ्रीज कर दिए गए। कोर्ट का मानना है कि प्रारंभिक चरण में जांच एजेंसी ऐसा कोई ठोस आधार पेश करने में विफल रही है, जो इस तरह की हड़बड़ी को उचित ठहरा सके। अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि जब आम नागरिकों को पुलिस की सहायता की आवश्यकता होती है, तो ऐसी तत्परता और संवेदनशीलता देखने को नहीं मिलती है।

## धन निकासी की अनिवार्य शर्तें
न्यायालय ने खातों के उपयोग के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए हैं:

- पार्टी इन खातों से केवल अपने नियमित राजनीतिक कामकाज और दफ्तर के दैनिक खर्चों का भुगतान कर सकेगी, अन्य किसी भी प्रकार के लेनदेन की अनुमति नहीं होगी।
- बैंक में चेक प्रस्तुत करने से पहले उस पर तृणमूल कांग्रेस के दो अधिकृत पदाधिकारियों के हस्ताक्षर होने आवश्यक हैं।
- पदाधिकारियों के हस्ताक्षर के पश्चात, उस चेक पर विशेष अधिकारी यानी सेवानिवृत्त न्यायाधीश के काउंटर-हस्ताक्षर (सहमति) का होना अनिवार्य है।

## कानूनी बहस और दलीलें
लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस की पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि एक मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के खातों को इस तरह पूरी तरह से ठप कर देना पार्टी के संवैधानिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने जोर दिया कि शिकायत में कोई भी आरोप स्पष्ट नहीं है और पार्टी का संपूर्ण वित्तीय कामकाज चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों व इनकम टैक्स एक्ट के तहत पूरी तरह पारदर्शी है। इसके विपरीत, राज्य पुलिस का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तर्क दिया कि जांच के दौरान साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ या धन के दुरुपयोग को रोकने के लिए पुलिस के पास ऐसे कदम उठाने का अधिकार है। वहीं, शिकायतकर्ता के वकील नीरज किशन कौल ने यह दावा किया कि उनके मुवक्किल ही असली तृणमूल कांग्रेस हैं और खातों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है।

## राजनीतिक गुटों के विवाद पर अदालत का रुख
अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि खातों को चलाने की यह अस्थायी अनुमति किसी भी पक्ष के पक्ष में फैसला नहीं है। यह अनुमति इस बात का प्रमाण नहीं है कि कोर्ट किसी एक विशिष्ट गुट को 'असली' तृणमूल कांग्रेस के रूप में मान्यता दे रहा है। हाई कोर्ट ने दोहराया कि पार्टी के मालिकाना हक का विवाद चुनाव आयोग के समक्ष लंबित है और उस पर अंतिम निर्णय आयोग ही लेगा। साथ ही, अदालत ने यह भी संज्ञान लिया कि शिकायतकर्ता ने पहले इन्हीं खातों के धन का उपयोग कर तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था और बाद में दूसरे खेमे में शामिल होकर शिकायत दर्ज की है। चुकी शिकायत में किसी विशिष्ट गलत वित्तीय लेनदेन का कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला, इसलिए कोर्ट ने जांच और राजनीतिक कामकाज के बीच संतुलन बनाने के लिए यह मध्यस्थ रास्ता चुना है।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** राजनीतिक दलों की वित्तीय गतिविधियों पर पुलिसिया कार्रवाई के मामलों में अदालतें अब अधिक सतर्कता बरत रही हैं, जो राजनीतिक कामकाज की निरंतरता के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल है।

**पश्चिम बंगाल में:** तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों और कार्यकर्ताओं के लिए यह राहत की खबर है, क्योंकि पार्टी का दैनिक कार्यालय कामकाज और खर्च अब बिना पूरी तरह ठप हुए जारी रह सकेगा।

## सवाल-जवाब

### 1. कलकत्ता हाई कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस को क्या राहत दी है?
हाई कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस को अपने तीन फ्रीज किए गए बैंक खातों का उपयोग केवल दैनिक और अनिवार्य खर्चों के लिए करने की अस्थायी अनुमति दी है।

### 2. खातों के संचालन की निगरानी कौन करेगा?
इस प्रक्रिया की निगरानी के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस सुब्रत तालुकदार को विशेष अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया है।

### 3. बैंक खातों से पैसे निकालने के लिए क्या शर्तें हैं?
पैसे निकालने के लिए चेक पर पार्टी के दो अधिकृत पदाधिकारियों के हस्ताक्षर होने चाहिए और उसके बाद विशेष अधिकारी का काउंटर-हस्ताक्षर होना अनिवार्य है।

### 4. यह व्यवस्था कब तक लागू रहेगी?
यह अस्थायी व्यवस्था फिलहाल 30 सितंबर तक के लिए लागू की गई है।

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