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  "type": "article",
  "title": "टीएमसी के असंतुष्ट सांसदों के न्योते पर भड़का विपक्ष, सर्वदलीय बैठक बीच में छोड़ी",
  "summary": "मानसून सत्र से पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक से विपक्षी दल टीएमसी के बागी सांसदों को न्योता दिए जाने से नाराज होकर बीच में ही वॉकआउट कर गए.",
  "content": "संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले रविवार को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक शुरू होते ही हंगामे की भेंट चढ़ गई. बैठक शुरू होते ही तमाम विपक्षी नेता अचानक अपनी सीटों से उठे और बाहर निकल गए, जिससे सरकार के लिए यह अहम बैठक बेनतीजा साबित हुई.\n\nटीएमसी के बागी सांसदों को न्योता बना नाराजगी की वजह\nबताया जा रहा है कि विपक्षी दल तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के उन असंतुष्ट सांसदों को बैठक में बुलाए जाने से खफा थे, जिनकी अलग पहचान और गुट को लेकर संसद में पहले से विवाद चल रहा है. कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके), झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो), आम आदमी पार्टी (आप), नेशनल कॉन्फ्रेंस, वाम दल और शिवसेना (यूबीटी) समेत पूरा विपक्ष एक साथ विरोध जताते हुए बैठक से बाहर निकल आया.\n\nमहुआ मोइत्रा ने बताई पूरी वजह\nटीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने बताया कि लोकसभा के टेबल ऑफिस की ओर से जारी सूची में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों की संख्या 28 दिखाई गई है, जबकि तथाकथित बागी 20 सांसदों के अलग गुट यानी एनसीपीआई (जो एक गैर-मान्यता प्राप्त पार्टी है) में विलय को लोकसभा अध्यक्ष ने अब तक मंजूरी नहीं दी है. उनके मुताबिक इन 20 सांसदों की अयोग्यता से जुड़ी याचिकाएं भी अभी लंबित पड़ी हैं और संविधान के 91वें संशोधन के बाद ऐसे किसी अलग गुट के गठन की कोई कानूनी गुंजाइश ही नहीं बचती. महुआ मोइत्रा ने सवाल उठाया कि संसदीय कार्य मंत्री ने आखिर किन आधारों पर इन 20 बागी सांसदों को बैठक का न्योता भेजा और वे इसमें शामिल कैसे हो गए. उन्होंने कहा, \"हमने अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है और विरोध स्वरूप बैठक से बाहर निकल आए हैं.\"\n\nआगे क्या\nविपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर एकजुटता दिखाते हुए सरकार से जवाब मांगा है, वहीं महुआ मोइत्रा ने वॉकआउट में साथ देने के लिए सभी विपक्षी पार्टियों का धन्यवाद भी जताया. मानसून सत्र शुरू होने से ठीक पहले हुए इस घटनाक्रम से यह साफ संकेत मिल गया है कि सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच टकराव तय है.\n\nइसका आप पर असर\nयह टकराव सीधे तौर पर आम नागरिकों की जेब पर असर नहीं डालता, लेकिन इसका सीधा असर संसद की कार्यवाही पर पड़ता है.\n\n• विपक्ष और सरकार के बीच शुरुआती टकराव से मानसून सत्र में हंगामे और कामकाज ठप रहने की आशंका बढ़ गई है, जिससे जनता से जुड़े अहम विधेयकों पर चर्चा और पारित होने में देरी हो सकती है.\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सर्वदलीय बैठक कब बुलाई गई थी?\nसंसद के मानसून सत्र से ठीक पहले रविवार को यह बैठक बुलाई गई थी.\n\n2. विपक्ष ने बैठक का बहिष्कार क्यों किया?\nविपक्षी दल टीएमसी के बागी सांसदों को बैठक में बुलाए जाने से नाराज थे, इसलिए बैठक शुरू होते ही बाहर निकल आए.\n\n3. वॉकआउट में कौन-कौन से दल शामिल हुए?\nकांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, झारखंड मुक्ति मोर्चा, आम आदमी पार्टी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, वाम दल और शिवसेना (यूबीटी) ने साथ मिलकर वॉकआउट किया.\n\n4. महुआ मोइत्रा का मुख्य आरोप क्या था?\nउनके मुताबिक टेबल ऑफिस की सूची में टीएमसी की सदस्य संख्या 28 दिखाई गई, जबकि 20 बागी सांसदों के अलग गुट के विलय को स्पीकर ने अब तक मंजूरी नहीं दी है.\n\n5. एनसीपीआई क्या है?\nयह वह गुट है जिसमें टीएमसी के 20 बागी सांसदों के विलय का दावा किया जा रहा था, लेकिन यह एक गैर-मान्यता प्राप्त पार्टी है.\n\n6. इन सांसदों की अयोग्यता को लेकर क्या स्थिति है?\nइन 20 सांसदों की अयोग्यता से जुड़ी याचिकाएं अभी भी लंबित हैं.",
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  "category": "राजनीति",
  "publishedAt": "2026-07-19",
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