# टीएमसी की स्थापना के 28 साल बाद पहली बार तीन गुटों में बंटा शहीद दिवस, हाईकोर्ट ने तय कीं मध्य कोलकाता की सीमाएं

> तृणमूल कांग्रेस के गठन के 28 साल बाद पहली बार पार्टी तीन गुटों में बंट गई है, जिससे 21 जुलाई का शहीद दिवस कार्यक्रम भी बंट गया है. कोलकाता पुलिस ने धारा 163 के तहत रोक लगाई तो कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता बनर्जी के गुट को बिड़ला तारामंडल के पास सीमित कार्यक्रम की इजाज़त दी.

**Type:** article · **Category:** राजनीति · **Published:** 2026-07-19 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/politics/tmc-ki-sthapana-ke-28-sala-bada-pahali-bara-tina-guton-men-bnta-shahida-divasa-haikorta-ne-taya-kin-madhya-kolkata-ki-simaen-8684 · **Language:** Hindi
**Tags:** तृणमूल कांग्रेस, ममता बनर्जी, शहीद दिवस, कलकत्ता हाईकोर्ट, पश्चिम बंगाल राजनीति, अभिषेक बनर्जी, एनसीपीआई

पश्चिम बंगाल की सियासत में तृणमूल कांग्रेस के लिए 21 जुलाई का शहीद दिवस हर साल एक बड़ा शक्ति प्रदर्शन रहा है, लेकिन इस बार पार्टी की अंदरूनी टूट ने इस आयोजन की तस्वीर पूरी तरह बदल दी है. टीएमसी के 28 साल के इतिहास में यह पहला मौका है जब पार्टी तीन अलग-अलग गुटों में बंटकर अपनी विरासत का दावा कर रही है, और हर गुट अपने तरीके से शहीद दिवस मनाने की तैयारी में जुट गया है.

## तीन हिस्सों में बंटी पार्टी
मई में हुए विधानसभा चुनाव में मिली हार के कुछ ही हफ्तों बाद टीएमसी में पहली दरार सामने आई. विपक्ष के नेता रिताब्रता बनर्जी ने पार्टी के 80 विधायकों में से 60 से ज़्यादा को साथ लेकर एक नया खेमा खड़ा किया और खुद को "असली टीएमसी" बताया. इसके बाद दूसरी टूट तब हुई जब पार्टी के 29 लोकसभा सांसदों में से 20 सांसद एक कम चर्चित पार्टी नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया यानी एनसीपीआई में चले गए. संकट यहीं नहीं थमा, चार राज्यसभा सांसदों ने भी इस्तीफा दे दिया, जिनमें से तीन बाद में बीजेपी का दामन थाम चुके हैं.

## कालीघाट तृणमूल का नया नाम
इन सब उठापटक के बीच ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी की अगुवाई वाले मूल गुट को अब राजनीतिक हलकों में "कालीघाट तृणमूल" कहा जाने लगा है. इस उपनाम की जड़ दक्षिण कोलकाता के कालीघाट इलाके से जुड़ी है, जहां पार्टी की संस्थापक का घर मौजूद है और जो लंबे समय से टीएमसी की सियासी गतिविधियों का केंद्र रहा है.

## पुलिस की सख्ती, धारा 163 लागू
राज्य में टीएमसी की 15 साल पुरानी सरकार खत्म होने के बाद सियासी समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं, और इसका सीधा असर शहीद दिवस के आयोजन पर भी पड़ा है. पिछले करीब दो दशकों से ममता बनर्जी मध्य कोलकाता के सेंट्रल एवेन्यू पर सालाना रैली करती रही हैं, लेकिन इस साल वहां कोई कार्यक्रम नहीं होगा. एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट की हैसियत से कोलकाता पुलिस कमिश्नर अजय नंद ने सेंट्रल एवेन्यू समेत मध्य कोलकाता के कई इलाकों में निषेधाज्ञा जारी कर दी है. यह रोक धारा 163 के तहत लगाई गई है, जो भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी बीएनएसएस, 2023 का प्रावधान है. आदेश 2 जुलाई से लागू हो चुका है और 30 अगस्त तक जारी रहेगा. पुलिस ने खुफिया इनपुट का हवाला देते हुए बताया कि इन इलाकों में राजनीतिक आयोजनों से हिंसा और कानून-व्यवस्था बिगड़ने का खतरा है.

## हाईकोर्ट ने दी सीमित इजाज़त
पुलिस की रोक के बाद मामला कलकत्ता हाईकोर्ट पहुंचा, जहां से ममता गुट को राहत मिली है. जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने आदेश दिया कि ममता गुट बिड़ला तारामंडल के आसपास, मध्य कोलकाता में, 12 से 3 बजे दोपहर तक शहीद दिवस मना सकता है, बशर्ते इसमें 2,500 से ज़्यादा लोग शामिल न हों. अदालत ने पुलिस को इस दौरान कड़े सुरक्षा बंदोबस्त सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया है.

## बाकी गुटों के अलग-अलग कार्यक्रम
रिताब्रता बनर्जी का गुट उसी दिन मेयो रोड पर महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने अपना अलग कार्यक्रम करेगा. वहीं राज्य कांग्रेस ने शहर के शहीद मीनार के पास अपना आयोजन रखा है. एनसीपीआई ने भी ऐलान किया है कि वह शहीद दिवस का आयोजन करेगी, लेकिन पार्टी ने अभी तक अपने कार्यक्रम की जगह तय नहीं की है. इस तरह पहली बार पश्चिम बंगाल एक ही दिन टीएमसी की विरासत को लेकर चार अलग-अलग कार्यक्रमों का गवाह बनेगा.

## इसका आप पर असर
यह खबर सीधे तौर पर आम लोगों की जेब पर असर नहीं डालती, लेकिन पश्चिम बंगाल की राजनीति और कोलकाता के निवासियों के लिए इसके व्यावहारिक मायने हैं.

- **भारत में:** किसी भी बड़ी पार्टी में इस तरह की टूट से यह संकेत मिलता है कि आने वाले चुनावों में गठबंधन और सियासी समीकरण तेज़ी से बदल सकते हैं.
- **कोलकाता में:** धारा 163 के तहत लगी निषेधाज्ञा की वजह से 2 जुलाई से 30 अगस्त तक मध्य कोलकाता के कई इलाकों में आवाजाही और सार्वजनिक जमावड़े पर असर पड़ सकता है, खासकर 21 जुलाई को जब चार अलग-अलग कार्यक्रम एक साथ होंगे.

## सवाल-जवाब

### 1. टीएमसी में तीन गुट क्यों बने?
मई के विधानसभा चुनाव में हार के बाद विपक्ष के नेता रिताब्रता बनर्जी की अगुवाई में एक गुट बना, फिर 20 लोकसभा सांसद एनसीपीआई में चले गए, जिससे पार्टी तीन हिस्सों में बंट गई.

### 2. शहीद दिवस पर सेंट्रल एवेन्यू पर कार्यक्रम क्यों नहीं होगा?
कोलकाता पुलिस ने धारा 163 के तहत सेंट्रल एवेन्यू समेत कई इलाकों में 2 जुलाई से 30 अगस्त तक निषेधाज्ञा लागू कर दी है.

### 3. ममता बनर्जी के गुट को कहां कार्यक्रम की इजाज़त मिली?
कलकत्ता हाईकोर्ट ने बिड़ला तारामंडल के पास दोपहर 12 से 3 बजे तक, अधिकतम 2,500 लोगों के साथ कार्यक्रम की इजाज़त दी है.

### 4. रिताब्रता बनर्जी का गुट कहां कार्यक्रम करेगा?
उनका गुट उसी दिन मेयो रोड पर महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने कार्यक्रम करेगा.

### 5. राज्य कांग्रेस और एनसीपीआई क्या करेंगे?
राज्य कांग्रेस शहीद मीनार के पास कार्यक्रम करेगी, जबकि एनसीपीआई ने कार्यक्रम की घोषणा तो कर दी है लेकिन अभी जगह तय नहीं की.

### 6. ममता गुट को अब क्या कहा जाता है?
ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी के गुट को अब राजनीतिक हलकों में "कालीघाट तृणमूल" कहा जाता है.

### 7. राज्यसभा सांसदों के इस्तीफे से टीएमसी को क्या झटका लगा?
चार राज्यसभा सांसदों ने इस्तीफा दिया, जिनमें से तीन बाद में बीजेपी में शामिल हो गए.

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