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  "type": "article",
  "title": "उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफे के एक वर्ष बाद भी सरकारी आवास के इंतजार में जगदीप धनखड़, जानिए क्या हैं नियम और कहाँ अटका मामला",
  "summary": "देश के पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के पद छोड़ने के एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी उन्हें आधिकारिक टाइप-VIII सरकारी बंगला आवंटित नहीं हो सका है। फिलहाल वह दिल्ली के छतरपुर स्थित एक निजी फार्महाउस में रह रहे हैं, जबकि नियमों के अनुसार वे आजीवन सुसज्जित सरकारी आवास के हकदार हैं।",
  "content": "दिल्ली के लुटियंस जोन में स्थित सरकारी आवासों का अपना एक अलग प्रशासनिक और राजनीतिक महत्व है। केंद्र सरकार के अंतर्गत किसे कौन सा बंगला मिलेगा, आवंटन की शर्तें क्या होंगी और किस श्रेणी का मकान प्रदान किया जाएगा, इसके लिए संपदा निदेशालय द्वारा बेहद स्पष्ट और सख्त नियम तय किए गए हैं। सामान्यतः देश के उच्च संवैधानिक पदों से सेवानिवृत्त होने वाले महानुभावों को तुरंत प्रभाव से आधिकारिक आवास उपलब्ध कराया जाता है। हालांकि, भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के संदर्भ में यह प्रशासनिक व्यवस्था एक असाधारण मोड़ लेती नजर आ रही है। उपराष्ट्रपति पद से अपने अप्रत्याशित इस्तीफे के एक वर्ष से अधिक की लंबी अवधि बीत जाने के बावजूद उन्हें अब तक राज्य द्वारा निर्धारित आधिकारिक बंगला आवंटित नहीं किया जा सका है। वर्तमान में वे देश की राजधानी नई दिल्ली के छतरपुर इलाके में स्थित एक निजी फार्महाउस में निवास कर रहे हैं। उपलब्ध जानकारियों के अनुसार, यह विशाल फार्महाउस इंडियन नेशनल लोकदल के वरिष्ठ नेता अभय सिंह चौटाला का है। संवैधानिक पद त्यागने के बाद लंबा वक्त गुजर जाने के उपरांत भी पूर्व उपराष्ट्रपति का सरकारी घर में प्रवेश का इंतजार बना हुआ है।\n\nइस्तीफे का घटनाक्रम और छतरपुर फार्महाउस में प्रवास\nजगदीप धनखड़ का उपराष्ट्रपति पद से त्यागपत्र देना भारतीय राजनीति की एक प्रमुख परिघटना रही है। उन्होंने 21 जुलाई 2025 की शाम को अचानक अपने पद से त्यागपत्र देने की घोषणा की थी। उन्होंने अपना आधिकारिक त्यागपत्र देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को प्रेषित किया था। अपने पत्र में धनखड़ ने स्पष्ट रूप से अपने स्वास्थ्यगत कारणों का उल्लेख करते हुए लिखा था कि वे चिकित्सकीय सलाह का पालन करना चाहते हैं और अपनी सेहत को सर्वोच्च प्राथमिकता देना चाहते हैं। हालांकि, उस समय राजनीतिक गलियारों में इस निर्णय को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई गई थीं। विपक्षी दलों के शीर्ष नेताओं ने सार्वजनिक रूप से यह दावा किया था कि उन्हें पद छोड़ने के लिए बाध्य किया गया था। इस दावे के पीछे तर्क दिया गया था कि अपने इस्तीफे से कुछ ही घंटे पूर्व जगदीप धनखड़ ने उच्च सदन यानी राज्यसभा में पूर्व दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा के विरुद्ध जांच प्रक्रिया प्रारंभ करने के संबंध में विपक्ष द्वारा प्रस्तुत किए गए नोटिस को स्वीकार किया था।\n\nउपराष्ट्रपति का पद छोड़ने के लगभग छह सप्ताह पश्चात, यानी 1 सितंबर 2025 को जगदीप धनखड़ छतरपुर स्थित फार्महाउस में स्थानांतरित हुए थे। उस दौरान उनके नजदीकी सहयोगियों एवं प्रशासनिक सूत्रों ने इस कदम को केवल एक तात्कालिक अथवा अल्पकालिक व्यवस्था करार दिया था। लेकिन आज एक वर्ष से भी अधिक का समय बीत चुका है और वही तात्कालिक ठिकाना उनके नियमित निवास स्थान के रूप में निरंतर बना हुआ है। केंद्रीय प्रशासनिक रिकॉर्ड्स के अनुसार, अब तक उनके नाम पर लुटियंस दिल्ली अथवा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में किसी भी सरकारी बंगले का औपचारिक आवंटन आदेश जारी नहीं किया जा सका है।\n\nपूर्व उपराष्ट्रपति के आवास अधिकार और सरकारी नियम\nभारत में पूर्व उपराष्‍ट्रपतियों को प्रदान की जाने वाली सेवानिवृत्ति सुविधाओं, पेंशन तथा आवास अधिकारों को लेकर बेहद स्पष्ट वैधानिक नियम बनाए गए हैं। इन नियमों के प्रावधानों के अनुसार, देश का पूर्व उपराष्ट्रपति भारत के किसी भी शहर या स्थान पर अपनी पसंद के अनुसार आजीवन किराए से मुक्त तथा पूर्णतः सुसज्जित सरकारी आवास पाने का वैधानिक अधिकार रखता है। लुटियंस दिल्ली जैसे प्रशासनिक क्षेत्रों में, जहां केंद्र सरकार के पास टाइप-VIII श्रेणी के बंगले मौजूद हैं, पूर्व उपराष्ट्रपति को इसी सर्वोच्च श्रेणी का बंगला आवंटित किए जाने का नियम है। यदि किसी विशिष्ट शहर या क्षेत्र में टाइप-VIII श्रेणी का बंगला उपलब्ध न हो, तो वहां मौजूद सर्वोच्च श्रेणी का सरकारी आवास उन्हें प्रदान किया जाता है।\n\nयह व्यवस्था केवल सरकारी स्वामित्व वाले बंगलों तक ही सीमित नहीं है। नियमों में यह स्पष्ट रूप से उल्लेखित है कि यदि किसी परिस्थिति में उपयुक्त सरकारी आवास उपलब्ध न हो पा रहा हो, तो केंद्र सरकार पूर्व उपराष्ट्रपति के लिए लगभग 2,000 वर्ग फुट के रहने योग्य क्षेत्र वाले किसी निजी रिहायशी मकान को लीज पर लेकर उपलब्ध करा सकती है। इस प्रकार प्रशासनिक नियमों में एक वैकल्पिक और व्यावहारिक मार्ग पहले से विद्यमान है। आमतौर पर इन आवासों का प्रबंध केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय के अधीन आने वाले जनरल पूल रिहायशी आवास स्टॉक से किया जाता है। इस प्रक्रिया को प्रारंभ करने हेतु पूर्व उपराष्ट्रपति या उनके कार्यालय द्वारा मंत्रालय के संपदा निदेशालय को एक औपचारिक अनुरोध पत्र भेजना होता है।\n\nमंत्रालय की स्थिति और प्रशासनिक अड़चनें\nइस पूरे आवंटन मामले में प्रशासनिक स्तर पर एक अजीब सी असमंजस की स्थिति दिखाई दे रही है। केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि राजधानी में नए प्रशासनिक ढांचे और विकास कार्यों के बीच, धनखड़ अथवा उनके कार्यालय की ओर से आधिकारिक आवास आवंटन के लिए कोई औपचारिक अनुरोध पत्र मंत्रालय को प्राप्त नहीं हुआ है। दूसरी ओर, लुटियंस दिल्ली की संपत्तियों का रखरखाव और आवंटन संभालने वाले संपदा निदेशालय के अधिकारियों का तर्क है कि यदि ऐसा कोई आवेदन प्रस्तुत भी किया गया होगा, तो संभव है कि वह सीधे केंद्रीय मंत्रालय के उच्च स्तर पर प्रक्रियाधीन हो और उसकी आधिकारिक प्रति निदेशालय तक न पहुंची हो। इस बीच, जब इस संबंध में केंद्रीय आवास और शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर से प्रतिक्रिया लेने का प्रयास किया गया, तो उनकी तरफ से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया।\n\nएम. वेंकैया नायडू के आवंटन की पृष्ठभूमि और तुलना\nजगदीप धनखड़ से ठीक पूर्व देश के उपराष्ट्रपति रहे एम. वेंकैया नायडू के सेवानिवृत्ति के बाद के आवास आवंटन से यदि वर्तमान स्थिति की तुलना की जाए, तो अंतर बेहद स्पष्ट हो जाता है। एम. वेंकैया नायडू ने 11 अगस्त 2022 को अपना उपराष्ट्रपति पद का कार्यकाल पूर्ण किया था। पद छोड़ने के मात्र दो महीने के भीतर, यानी अक्टूबर 2022 में, वे अपने परिवार के साथ लुटियंस दिल्ली के 1, त्यागराज मार्ग स्थित भव्य टाइप-VIII बंगले में रहने चले गए थे। यह बंगला पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री डी. सदानंद गौड़ा के पास आवंटित था और नायडू के लिए इसे समय रहते तैयार कर लिया गया था।\n\nजगदीप धनखड़ का मामला एक और विशेष कारण से चर्चा के केंद्र में है। वे नई दिल्ली के चर्च रोड पर निर्मित नए और अत्याधुनिक उपराष्ट्रपति एन्क्लेव में निवास करने वाले देश के पहले उपराष्ट्रपति थे। उनके पद छोड़ने के कुछ ही महीनों बाद संपदा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने अनौपचारिक रूप से यह संकेत भी दिया था कि लुटियंस दिल्ली स्थित बड़े टाइप-VIII बंगलों में से एक बंगला उनके भावी निवास के रूप में चिन्हित कर तैयार रखा गया है। हालांकि, उन प्रारंभिक संकेतों और तैयारियों के बावजूद वह बंगला अब तक उनके नाम पर हस्तांतरित या आवंटित नहीं हो पाया है। ऐसे में यह प्रश्न केवल एक बंगले की उपलब्धता का नहीं रह गया है, बल्कि यह भी है कि जब स्पष्ट विधायी नियम मौजूद हैं, तो फिर आवंटन की फाइल किस प्रशासनिक मेज पर अटकी हुई है।\n\nइसका आप पर असर\nयह समाचार देश के शीर्ष संवैधानिक पदों से सेवानिवृत्त होने वाले व्यक्तियों के आवास नियमों, प्रशासनिक प्रक्रियाओं और सरकारी परिसंपत्तियों के प्रबंधन को उजागर करता है।\n\n• राष्ट्रीय स्तर पर: पूर्व संवैधानिक पदाधिकारियों के लिए बने नियमों के क्रियान्वयन में पारदर्शिता की आवश्यकता स्पष्ट होती है। इससे यह पता चलता है कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं में देरी से शीर्ष पदों की सेवानिवृत्ति सुविधाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।\n• नई दिल्ली में: लुटियंस जोन में स्थित टाइप-VIII बंगलों के आवंटन और जनरल पूल स्टॉक के प्रबंधन पर सार्वजनिक नजर बनी रहती है। संपदा निदेशालय पर खाली बंगलों की स्थिति स्पष्ट करने का प्रशासनिक दबाव बनता है।\n• प्रशासकों और अधिकारियों के लिए: सरकारी आवास हेतु औपचारिक आवेदनों की ट्रैकिंग और मंत्रालय स्तर पर फाइल प्रबंधन की सुधार प्रक्रिया रेखांकित होती है। इससे मंत्रालयों के बीच समन्वय स्थापित करने में मदद मिलती है।\n• नागरिकों और करदाताओं के लिए: सरकारी संपत्तियों के नियमबद्ध आवंटन और पूर्व अधिकारियों को मिलने वाली आजीवन सुविधाओं के प्रति जन-जागरूकता बढ़ती है। नागरिक समझ सकते हैं कि देश के पूर्व उपराष्‍ट्रपतियों को क्या अधिकार प्राप्त हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. जगदीप धनखड़ वर्तमान में कहां निवास कर रहे हैं?\nपूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ वर्तमान में नई दिल्ली के छतरपुर स्थित एक निजी फार्महाउस में रह रहे हैं, जो इंडियन नेशनल लोकदल के नेता अभय सिंह चौटाला का है।\n\n2. जगदीप धनखड़ ने उपराष्ट्रपति पद से कब इस्तीफा दिया था?\nउन्होंने 21 जुलाई 2025 की शाम को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से त्यागपत्र दिया था।\n\n3. पूर्व उपराष्ट्रपति के लिए सरकारी आवास के क्या नियम हैं?\nनियमों के अनुसार, पूर्व उपराष्ट्रपति भारत में अपनी पसंद की जगह पर जीवनभर के लिए बिना किराए के सुसज्जित टाइप-VIII सरकारी आवास पाने का हकदार होता है।\n\n4. यदि सरकारी बंगला उपलब्ध न हो तो क्या विकल्प मौजूद है?\nयदि टाइप-VIII सरकारी आवास उपलब्ध नहीं है, तो केंद्र सरकार लगभग 2,000 वर्ग फुट के रहने योग्य क्षेत्र वाले किसी मकान को लीज पर लेकर पूर्व उपराष्ट्रपति को दे सकती है।\n\n5. आवास मंत्रालय का इस मामले पर क्या कहना है?\nआवास और शहरी कार्य मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार धनखड़ की ओर से आवास का कोई औपचारिक अनुरोध प्राप्त नहीं हुआ है, जिससे आवंटन प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है।",
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  "category": "राजनीति",
  "publishedAt": "2026-09-02",
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