अमेरिकी प्रशासन में निजी टेक फंडिंग का खेल: मस्क के करीबी वकील के एनजीओ से सरकारी कर्मियों को मिल रही तनख्वाह व्हाइट हाउस से जुड़े नेशनल डिजाइन स्टूडियो में तैनात कर्मियों के वेतन का भुगतान एक निजी गैर-लाभकारी संस्था द्वारा किए जाने की जानकारी सामने आई है, जिसका संचालन स्पेसएक्सएआई के मुख्य कानूनी सलाहकार जेम्स बर्नहैम कर रहे हैं। अमेरिकी संघीय तंत्र के भीतर निजी तकनीकी क्षेत्र के बढ़ते दखल और वित्तीय लेनदेन को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। प्रशासनिक सुधारों के नाम पर गठित डिजिटल इकाइयों में कार्यरत कुछ प्रमुख कर्मचारियों के वेतन का भुगतान सीधे तौर पर सरकारी खजाने के बजाय एक निजी गैर-लाभकारी संगठन की जेब से हो रहा है। इस संस्था की कमान स्पेसएक्सएआई के मुख्य कानूनी सलाहकार जेम्स बर्नहैम के हाथों में है, जो पहले डीओजीई की कानूनी रूपरेखा तैयार करने में भी शामिल रह चुके हैं। इस व्यवस्था ने प्रशासनिक विशेषज्ञों के बीच गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या निजी कॉरपोरेट नेटवर्क नियमों की अनदेखी करके सरकारी फैसलों और डिजिटल बुनियादी ढांचे को प्रभावित कर रहे हैं। प्रशासनिक स्टूडियो और निजी संस्था का ताना-बाना अगस्त 2025 के दौरान व्हाइट हाउस ने एक शासकीय आदेश के जरिए अमेरिका बाय डिजाइन नामक व्यापक पहल के तहत नेशनल डिजाइन स्टूडियो (एनडीएस) के गठन का ऐलान किया था। इस पहल का आधिकारिक उद्देश्य अमेरिकी नागरिकों के लिए डिजिटल सेवाओं के अनुभव को बेहतर बनाना बताया गया। पिछले एक वर्ष में इस स्टूडियो ने ट्रम्पआरएक्स और रियलफूड.गॉव जैसी आधिकारिक वेबसाइटों को विकसित किया है। इस पूरे ढांचे में जो गैबिया के अलावा डीओजीई से जुड़े कई अन्य लोग भी काम कर रहे हैं। इनमें 19 वर्ष की उम्र में प्रशासन से जुड़ने वाले एडवर्ड "बिग बॉल्स" कॉरिस्टाइन प्रमुख हैं, जो वर्तमान में एनडीएस के इंजीनियरिंग प्रमुख के रूप में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इसके साथ ही आकाश बोब्बा और स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी जैकरी टेरेल भी इन दोनों समूहों की गतिविधियों में साझीदार रहे हैं। सामने आए प्रशासनिक विवरणों के अनुसार, एनडीएस से जुड़े दो प्रमुख सदस्य अमिताई ग्रूट और जॉन कफाजा वास्तव में अमेरिका बाय डिजाइन फाउंडेशन नामक गैर-लाभकारी संस्था के कर्मचारी हैं। इन दोनों कर्मियों को कार्मिक प्रबंधन कार्यालय (ओपीएम) में प्रतिनियुक्ति पर तैनात किया गया था। यह दोनों क्रिस्टीना बोनारिगो को रिपोर्ट करते थे, जो हाल के महीनों तक ओपीएम की चीफ ऑफ स्टाफ थीं और अब एनडीएस में इसी पद पर कार्यरत हैं। इंटरगवर्नमेंटल पर्सनल एक्ट का उपयोग और प्रक्रियागत सवाल संघीय व्यवस्था में पहले भी डीओजीई के कई लोगों को विशेष सरकारी कर्मचारी का दर्जा देकर लाया गया था, जिससे वे नियमित भर्ती और पारदर्शिता प्रकटीकरण की जटिलताओं के बिना साल में 120 दिन काम कर सकते थे। एनडीएस में कर्मचारियों को लाने के लिए इंटरगवर्नमेंटल पर्सनल एक्ट (आईपीए) का सहारा लिया गया है। यह कानून मूल रूप से अकादमिक संस्थानों, विश्वविद्यालयों और गैर-लाभकारी संगठनों के अनुभवी विशेषज्ञों को अधिकतम दो वर्ष के लिए प्रशासन में सेवा देने की अनुमति देता है। हालांकि, इस प्रक्रिया के नियमों का पालन किस हद तक हुआ, इस पर सवाल उठ रहे हैं। नियमों के मुताबिक, किसी भी बाहरी व्यक्ति को सरकार में प्रतिनियुक्त किए जाने से पहले अपनी मूल संस्था में न्यूनतम 90 दिन कार्यरत रहना आवश्यक होता है। लेकिन अमिताई ग्रूट के दस्तावेजों से पता चलता है कि उन्होंने अप्रैल 2026 में अमेरिका बाय डिजाइन फाउंडेशन में नौकरी शुरू की और उसी महीने एनडीएस से जुड़ गए। इसके बाद 5 मई 2026 से 30 सितंबर 2026 के बीच उन्हें ओपीएम में अंशकालिक जिम्मेदारी दी गई। इससे पहले वे जुलाई 2025 से अप्रैल 2026 तक सामाजिक सुरक्षा प्रशासन में साइबर सुरक्षा सलाहकार रह चुके हैं। इसी तरह जॉन कफाजा, जो एनडीएस में वरिष्ठ उत्पाद डिजाइनर हैं और पूर्व में ट्रम्प मीडिया एंड टेक्नोलॉजी ग्रुप में काम कर चुके हैं, उनकी प्रतिनियुक्ति 7 मई 2026 से 7 मई 2028 तक दो साल की अवधि के लिए तय की गई। इन दोनों कर्मियों की प्रतिनियुक्ति के समझौतों पर अमेरिका बाय डिजाइन फाउंडेशन के प्रतिनिधि ने हस्ताक्षर किए थे। वेतन भुगतान का असमान ढांचा और कानूनी पेचीदगियां नियमों के तहत सरकार बाहरी संस्था को उनके कर्मचारी के वेतन का पुनर्भुगतान करती है। लेकिन ग्रूट और कफाजा के मामलों में वित्तीय शर्तें बेहद अलग हैं। ओपीएम के दस्तावेजों के मुताबिक, ग्रूट के काम के बदले संस्था को हर महीने 13,691 डॉलर की राशि लौटाई जाएगी। यह ग्रूट के वास्तविक वेतन का केवल एक हिस्सा है, क्योंकि उनका कुल पारिश्रमिक सरकारी वेतनमान की अधिकतम सीमा से अधिक है। शेष वेतन और सभी प्रकार के भत्ते यह गैर-लाभकारी संस्था स्वयं वहन करेगी। दूसरी ओर, कफाजा के मामले में सरकार कोई पैसा नहीं देगी और उनके रोजगार का पूरा खर्च सीधे फाउंडेशन द्वारा उठाया जाएगा। बाइडन प्रशासन के दौरान कंज्यूमर फाइनेंशियल प्रोटेक्शन ब्यूरो की मुख्य प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ रहीं एरी मेयर ने इस पूरी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा है कि इस तरह के समझौतों के जरिए संघीय भर्ती सुरक्षा नियमों से बचना उचित नहीं है। उनका मानना है कि एक ही संगठन से आने वाले दो अलग-अलग कर्मियों के लिए भुगतान की अलग-अलग व्यवस्था होना बेहद अजीब है। मिशिगन विश्वविद्यालय में लोक नीति के प्रोफेसर डॉन मोयनिहान ने भी इस पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि सरकारी काम कर रहे लोगों को पैसा कौन दे रहा है। फाउंडेशन की पृष्ठभूमि और स्पेसएक्सएआई से जुड़ाव अमेरिका बाय डिजाइन फाउंडेशन का पंजीकरण 25 अगस्त 2025 को हुआ था, यानी एनडीएस की आधिकारिक घोषणा के ठीक चार दिन बाद। इसे 22 सितंबर 2025 को कर-मुक्त दर्जा प्राप्त हुआ। इस संस्था की फंडिंग का स्रोत क्या है और इसके पास कुल कितनी संपत्ति है, इसका कोई सार्वजनिक ब्योरा उपलब्ध नहीं है। सरकारी खरीद प्रणाली (एसएएम) में इस संस्था का पंजीकृत पता अलेक्जेंड्रिया, वर्जीनिया का एक आवासीय मकान है, जो दस्तावेजों के मिलान में जेम्स बर्नहैम का निजी आवास प्रतीत होता है। बर्नहैम रूढ़िवादी कानूनी समूह फेडरलिस्ट सोसाइटी से जुड़े रहे हैं और वे वेलेसिटो कैपिटल के अध्यक्ष भी हैं। बर्नहैम की मौजूदगी सीधे तौर पर इस संस्था का संबंध स्पेसएक्सएआई से जोड़ती है। स्पेसएक्सएआई को अरबों डॉलर के संघीय अनुबंध मिले हुए हैं और वह अपनी ग्रॉक एआई प्रणाली को सरकारी तंत्र के साथ एकीकृत करने पर काम कर रही है। बर्नहैम के इस दोहरे जुड़ाव के कारण हितों के टकराव की आशंका गहरा गई है। वीजा आवेदन और अन्य विदेशी कर्मियों की मौजूदगी श्रम विभाग के रिकॉर्ड बताते हैं कि इसी फाउंडेशन ने तकनीकी स्टाफ सदस्य के पद के लिए एच-1बी वीजा का आवेदन भी किया था। इसमें संस्था का पता वाशिंगटन डीसी के कनेक्टिकट एवेन्यू स्थित उस दफ्तर का दिया गया, जहां बर्नहैम किंग स्ट्रीट लीगल के प्रबंध साझेदार के रूप में नवंबर 2025 तक काम कर चुके थे। इस वीजा का कार्यकाल 6 अप्रैल 2026 से 5 अप्रैल 2029 तक के लिए दर्ज है, जो दूसरे ट्रंप प्रशासन के कार्यकाल से मेल खाता है। इस पद के लिए वेतन दायरा 175,427 डॉलर से 340,000 डॉलर के बीच निर्धारित किया गया था, जबकि संघीय वेतनमान की ऊपरी सीमा 197,200 डॉलर पर समाप्त होती है। इस पूरे तंत्र में विदेशी नागरिकों की मौजूदगी का इतिहास भी रहा है। एलन मस्क के करीबी और तुर्की के नागरिक बारिस अकीस पहले डीओजीई की भर्ती प्रक्रिया से जुड़े रहे थे। वहीं याट चोई, जो पूर्व में एयरबीएनबी से जुड़े थे और कनाडा को अपना गृह क्षेत्र बताते हैं, वे भी अप्रैल 2025 से ओपीएम में वरिष्ठ प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ के अनुबंध पर कार्यरत रहे हैं। इसके अलावा होमलैंड सिक्योरिटी की वेबसाइट पर जेनिफर माइकलसन का नाम इस संस्था से जुड़ा मिला है। जेनिफर गनार नामक चश्मा कंपनी की सह-संस्थापक हैं और उनके पति मैट माइकलसन की कंपनी गोथम्स एलएलसी ने फ्लोरिडा के आव्रजन केंद्र के लिए 3.3 करोड़ डॉलर का ठेका हासिल किया था। हाल ही में एनडीएस द्वारा पेश किए गए नए अमेरिका.गॉव पोर्टल के विकास में ग्रूट की भूमिका को कॉरिस्टाइन ने सार्वजनिक रूप से स्वीकारा है, जिससे यह साफ होता है कि कोर सरकारी परियोजनाओं की बागडोर निजी हाथों से वित्तपोषित कर्मियों के पास है। इसका आप पर असर अमेरिकी संघीय प्रशासन में निजी संस्थाओं द्वारा कर्मचारियों के वेतन भुगतान से सरकारी पारदर्शिता और आम नागरिकों के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा पर सीधा असर पड़ सकता है। • नागरिक सेवाओं पर प्रभाव: सरकारी वेबसाइटों और डेटाबेस का नियंत्रण निजी संस्थाओं से जुड़े तकनीकी विशेषज्ञों के पास जा रहा है। इसका सीधा मतलब है कि आम नागरिकों द्वारा टैक्स भरने और पासपोर्ट आवेदन जैसी आवश्यक सेवाओं में उपयोग किए जाने वाले व्यक्तिगत विवरणों की गोपनीयता पर नए सवाल खड़े होंगे। • पारदर्शिता और जवाबदेही: निजी संगठनों से वेतन पाने वाले कर्मचारी सामान्य सिविल सेवा आचार संहिता के पूर्ण दायरे में नहीं आते हैं। इसके चलते प्रशासनिक निर्णयों में जनता के प्रति जवाबदेही कम होने और कॉर्पोरेट प्राथमिकताओं को बढ़ावा मिलने का जोखिम बढ़ जाता है। • करदाताओं के पैसे का उपयोग: सरकारी खजाने और निजी गैर-लाभकारी संस्थाओं के बीच जटिल वेतन समझौतों से सार्वजनिक धन के आवंटन में अस्पष्टता आती है। इससे करदाताओं के लिए यह ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है कि सार्वजनिक परियोजनाओं में किन वित्तीय स्रोतों का वास्तविक उपयोग हो रहा है। • वैश्विक डिजिटल नीतियां: अमेरिकी सरकारी प्रणालियों में एआई और निजी तकनीकी कंपनियों के प्रवेश से वैश्विक स्तर पर प्रशासनिक डिजिटल सुरक्षा मानकों में बदलाव आ सकता है। अन्य देशों के नीति-निर्माता भी इन व्यवस्थाओं के नतीजों को देखकर अपनी ई-गवर्नेंस सुरक्षा नीतियों की समीक्षा कर सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ यह घटनाक्रम इसलिए सामने आया क्योंकि हालिया अमेरिकी प्रशासन ने पारंपरिक सिविल सेवा भर्ती प्रक्रियाओं से बचकर तकनीकी विशेषज्ञों को तेजी से सरकारी विभागों में तैनात करने के लिए गैर-पारंपरिक कानूनी प्रावधानों का सहारा लिया। इसके पीछे निजी तकनीकी कंपनियों के तंत्र को सार्वजनिक तंत्र में शामिल करने की रणनीति काम कर रही है। • नियमों की वैकल्पिक राह: नियमित भर्ती में लगने वाले समय और सख्त आचार संहिता प्रकटीकरण से बचने के लिए इंटरगवर्नमेंटल पर्सनल एक्ट का इस्तेमाल किया गया। इस कानून के लचीलेपन का लाभ उठाकर निजी फाउंडेशन से जुड़े लोगों को सीधे कार्मिक प्रबंधन कार्यालय में बैठाया गया। • डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का निजीकरण: डीओजीई और एनडीएस जैसी इकाइयों का उद्देश्य संघीय पोर्टलों को आधुनिक बनाना था, जिसके लिए निजी तकनीकी उद्योग से प्रतिभाओं को लाया गया। इस प्रक्रिया में सार्वजनिक बजट के बजाय निजी संस्थाओं से वेतन दिलाने की व्यवस्था बनाई गई ताकि उच्च वेतनमान की सीमा आड़े न आए। • स्पेसएक्सएआई का रणनीतिक हित: स्पेसएक्सएआई के शीर्ष वकील द्वारा इस गैर-लाभकारी संस्था का संचालन करना यह दर्शाता है कि प्रमुख टेक कंपनियां सरकारी प्रणालियों में अपनी एआई तकनीक और प्रभाव को गहरा करना चाहती हैं। यह व्यवस्था सरकार और कॉर्पोरेट हितों के बीच की रेखा को धुंधला करती है। सवाल-जवाब 1. नेशनल डिजाइन स्टूडियो क्या है? नेशनल डिजाइन स्टूडियो (एनडीएस) व्हाइट हाउस द्वारा अगस्त 2025 में स्थापित एक सरकारी इकाई है, जिसका काम सरकारी डिजिटल सेवाओं और वेबसाइटों का निर्माण एवं सुधार करना है। 2. अमेरिका बाय डिजाइन फाउंडेशन की कमान किसके पास है? इस गैर-लाभकारी संस्था के प्रबंध निदेशक जेम्स बर्नहैम हैं, जो स्पेसएक्सएआई के मुख्य कानूनी सलाहकार हैं और पूर्व में डीओजीई की कानूनी संरचना बना चुके हैं। 3. सरकारी कर्मचारियों के वेतन भुगतान को लेकर क्या विवाद है? ओपीएम में तैनात कर्मचारियों को सरकार के बजाय एक निजी गैर-लाभकारी फाउंडेशन द्वारा वेतन दिया जा रहा है, जिससे प्रशासनिक स्वतंत्रता और हितों के टकराव पर सवाल उठे हैं। 4. अमिताई ग्रूट और जॉन कफाजा की सरकार में क्या भूमिका है? अमिताई ग्रूट और जॉन कफाजा एनडीएस में क्रमशः तकनीकी और डिजाइनिंग का काम देख रहे हैं, जिन्हें फाउंडेशन से ओपीएम में प्रतिनियुक्ति पर लाया गया है। 5. इंटरगवर्नमेंटल पर्सनल एक्ट (आईपीए) का नियम क्या कहता है? इस नियम के अनुसार किसी बाहरी संस्था के कर्मचारी को सरकार में लाने से पहले कम से कम 90 दिनों तक उस संस्था में काम करना अनिवार्य होता है, जिसका इस मामले में उल्लंघन दिखता है। 6. क्या इस फाउंडेशन में विदेशी नागरिकों की भागीदारी के सबूत मिले हैं? दस्तावेजों के अनुसार फाउंडेशन ने एक तकनीकी पद के लिए एच-1बी वीजा का आवेदन किया था, और इससे पहले भी डीओजीई तथा एनडीएस में विदेशी नागरिकों के काम करने के मामले सामने आ चुके हैं। https://trendkia.com/politics/us-administration-men-private-tech-backing-ka-khela-musk-ke-karibi-lawyer-james-burnham-ke-ngo-se-government-staff-ko-mila-rahi-sa-44585 TrendKia — Har trend, sabse pehle.