# अमेरिकी मध्यावधि चुनाव से पहले 32 राज्यों के चुनाव कार्यालयों में भेजे गए सफेद पाउडर वाले संदिग्ध पत्र, संघीय एजेंसियां अलर्ट पर

> अमेरिका में मध्यावधि चुनाव से ठीक दो सप्ताह पहले कम से कम 32 राज्यों के चुनाव दफ्तरों और सांसदों को सफेद पाउडर से भरे संदिग्ध पत्र भेजे गए, जिससे कई जगह अफरातफरी मच गई और जांच एजेंसियां सतर्क हो गईं।

**Type:** article · **Category:** राजनीति · **Published:** 2026-10-30 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/politics/us-men-madhyavadhi-chunava-se-pahale-32-rajyon-ke-chunava-karyalayon-men-bheje-gae-sapheda-paudara-vale-sndigdha-patra-fbi-alarta--53413 · **Language:** Hindi
**Tags:** अमेरिकी चुनाव, मध्यावधि चुनाव, सफेद पाउडर, चुनाव कार्यालय, अमेरिकी राजनीति, सुरक्षा अलर्ट

अमेरिका में महत्वपूर्ण मध्यावधि चुनावों में जब केवल दो सप्ताह का समय बचा है, तब देश भर के चुनाव कार्यालयों को निशाना बनाकर संदिग्ध डाक भेजने का एक बड़ा और सुनियोजित सिलसिला सामने आया है। इस घटनाक्रम की शुरुआत पिछले मंगलवार को दोपहर 12:20 बजे हुई, जब लुइसियाना के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट के कार्यालय में एक कर्मचारी ने डाक से आया एक पत्र खोला। लिफाफा खुलते ही उसमें से सफेद पाउडर बाहर गिर गया, जिसके बाद पूरे दफ्तर में हड़कंप मच गया। सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए पूरे कार्यालय को आनन-फानन में खाली कराया गया और प्रभावित कर्मचारी को तत्काल नजदीकी अस्पताल के इमरजेंसी रूम में ले जाया गया। राहत की बात यह रही कि कर्मचारी को कोई शारीरिक नुकसान नहीं हुआ और बाद की प्रयोगशाला जांच में यह पुष्टि हुई कि लिफाफे में मौजूद पाउडर खतरनाक या जहरीला नहीं था। इस पूरी घटना के बाद अगले ही दिन बुधवार को दफ्तर को दोबारा नियमित कामकाज के लिए खोल दिया गया। लुइसियाना के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट के प्रवक्ता ट्रे विलियम्स ने स्पष्ट किया कि मंगलवार की इस अप्रिय घटना से आगामी चुनाव की तैयारियों या चुनाव संचालन की गतिविधियों पर कोई असर नहीं पड़ा। 

## कम से कम 32 राज्यों में फैले धमकी भरे पत्रों के तार

शुरुआत में स्थानीय स्तर की घटना प्रतीत होने वाला यह मामला असल में एक व्यापक और संगठित अभियान का हिस्सा निकला। इसके बाद के दिनों में कम से कम 31 अन्य अमेरिकी राज्यों के चुनाव कार्यालयों को भी इसी तरह के संदिग्ध लिफाफों से निशाना बनाया गया। कई राज्यों ने सार्वजनिक बयान जारी करके ऐसे धमकी भरे पत्र मिलने की पुष्टि की है। यह अभियान ऐसे नाजुक समय पर चलाया जा रहा है जब पूरे देश में चुनाव मशीनरी मध्यावधि चुनाव कराने की अंतिम तैयारियों में जुटी हुई है।

इस खतरनाक अभियान में भेजे गए अधिकांश लिफाफों को यूनाइटेड स्टेट्स पोस्टल सर्विस की मुस्तैदी के चलते उनके लक्षित पतों तक पहुंचने से पहले ही रास्ते में रोक लिया गया। हालांकि, पांच राज्यों यानी एरिज़ोना, डेलावेयर, ओक्लाहोमा, साउथ कैरोलिना और लुइसियाना में ये पत्र सुरक्षा जांच से निकलकर सीधे कार्यालयों तक पहुंच गए। इन जगहों पर जब कर्मचारियों ने लिफाफे खोले और सफेद पाउडर देखा, तो वहां अफरातफरी मच गई और एहतियातन पूरे परिसरों को खाली कराना पड़ा।

 

## किन राज्यों को मिले पत्र और कहां नहीं पहुंचा कोई लिफाफा

आधिकारिक रूप से ऐसे संदिग्ध पत्र मिलने की पुष्टि करने वाले राज्यों में अलास्का, एरिज़ोना, कैलिफोर्निया, कनेक्टिकट, डेलावेयर, फ्लोरिडा, जॉर्जिया, इडाहो, इलिनोइस, कंसास, लुइसियाना, मेन, मैरीलैंड, मैसाचुसेट्स, मिनेसोटा, मिसिसिपी, नेब्रास्का, न्यू हैम्पशायर, न्यू मैक्सिको, नॉर्थ डकोटा, ओहियो, ओक्लाहोमा, ओरेगन, पेंसिल्वेनिया, साउथ कैरोलिना, साउथ डकोटा, टेनेसी, यूटा, वर्जीनिया, वाशिंगटन, विस्कॉन्सिन और व्योमिंग शामिल हैं। इस तरह कुल 32 राज्यों में यह संदिग्ध डाक पहुंची या रोकी गई।

दूसरी ओर, 10 राज्यों यानी कोलोराडो, इंडियाना, केंटकी, मिशिगन, न्यूयॉर्क, नॉर्थ कैरोलिना, रोड आइलैंड, टेक्सास, वरमोंट, वेस्ट वर्जीनिया और डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया के चुनाव अधिकारियों ने पुष्टि की है कि उन्हें ऐसा कोई संदिग्ध पैकेज नहीं मिला है। शेष आठ राज्यों के चुनाव कार्यालयों ने इस संबंध में कोई जानकारी साझा नहीं की है। अब तक खोले गए सभी पत्रों में मिले सफेद पाउडर के परीक्षण में किसी हानिकारक पदार्थ की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसके बावजूद सभी राज्यों के चुनाव मुख्यालयों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

 

## अधिकारियों की प्रतिक्रिया और एकजुटता

इस तरह के डराने-धमकाने वाले हथकंडों पर कड़ा रोष जताते हुए नेशनल एसोसिएशन ऑफ सेक्रेटरीज ऑफ स्टेट और नेशनल एसोसिएशन ऑफ स्टेट इलेक्शन डायरेक्टर्स ने एक संयुक्त बयान जारी किया। दोनों संगठनों ने कहा, "हम इन घटनाओं से बेहद चिंतित हैं।" उन्होंने आगे जोर देकर कहा कि चुनाव अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ खतरों का लोकतंत्र में कोई स्थान नहीं है और जो लोग चुनाव संपन्न कराने की संवैधानिक जिम्मेदारी निभा रहे हैं, उन्हें अपने आवश्यक कर्तव्यों का पालन करते समय अपनी सुरक्षा को लेकर कभी डरने की जरूरत नहीं होनी चाहिए।

कमेटी फॉर सेफ एंड सिक्योर इलेक्शंस के सह-अध्यक्ष मिशेल मूर ने भी चुनाव कर्मियों के समर्थन में आवाज उठाई। मिशेल मूर ने कहा, "हमारे चुनावों में खतरों और धमकियों के लिए कोई जगह नहीं है।" उन्होंने बताया कि चुनावों के संचालन और सुरक्षा के लिए जिम्मेदार पेशेवर अधिकारियों ने पहले से ही ठोस योजनाएं तैयार की हैं, अपने आपातकालीन उपायों का अभ्यास किया है और वे चुनाव कार्यकर्ताओं तथा मतदाताओं दोनों की हिफाजत सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं।

 

## संघीय एजेंसियों की अग्रिम चेतावनियां और जब्ती

पिछले सप्ताह जैसे ही इन पत्रों के भेजे जाने की जानकारी सामने आई, संघीय एजेंसियों ने उन राज्यों को सक्रिय रूप से सतर्क करना शुरू कर दिया जहां संभावित रूप से खतरनाक पार्सल रास्ते में थे। फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन ने शुक्रवार को अलास्का के अधिकारियों को पहले ही सचेत कर दिया था कि शनिवार को वहां एक संदिग्ध लिफाफा पहुंच सकता है। इसके बाद शनिवार सुबह करीब 9 बजे डाक विभाग ने उस संदिग्ध पैकेज की पहचान कर उसे समय रहते जब्त कर लिया।

यूटा में भी प्रशासनिक अधिकारी शुक्रवार से ही ऐसी किसी धमकी भरे डाक से निपटने की तैयारी कर रहे थे। यूटा की लेफ्टिनेंट गवर्नर डिएड्रे हेंडरसन के एक प्रवक्ता ने बताया कि उनका कार्यालय डाक सेवा के कर्मचारियों के साथ निरंतर संपर्क में था और डाक विभाग के कर्मचारी आने वाली सभी चिट्ठियों की कड़ी निगरानी कर रहे थे ताकि लिफाफा दफ्तर तक पहुंचने से पहले ही पकड़ा जा सके। रविवार को डिएड्रे हेंडरसन ने जब्त किए गए संदिग्ध पत्र की एक तस्वीर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म थ्रेड्स पर साझा की। यह पत्र एक सादे सफेद लिफाफे में भेजा गया था, जिस पर हाथ से पता लिखा हुआ था।

 

## फर्जी संगठन का नाम और अधिकारियों का कड़ा रुख

यूटा में मिले लिफाफे के ऊपरी बाएं कोने पर प्रेषक के रूप में डीएसए लिखा हुआ था, जिसका सीधा संबंध डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट्स ऑफ अमेरिका संगठन से प्रतीत होता है, साथ ही उस पर उस समूह से जुड़ा न्यूयॉर्क का ज़िप कोड भी दर्ज था। हालांकि, डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट्स ऑफ अमेरिका ने इस पूरे धमकी भरे अभियान में अपनी किसी भी तरह की संलिप्तता से साफ इनकार किया है और इसे उन्हें बदनाम करने या भ्रम फैलाने की साजिश बताया है।

चुनाव कर्मियों को डराने की इस कोशिश पर लेफ्टिनेंट गवर्नर डिएड्रे हेंडरसन ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, "मध्यावधि चुनाव में कोई भी बाधा नहीं डाल पाएगा। हम ऐसा कभी नहीं होने देंगे।" उनके इस बयान ने साफ कर दिया कि अधिकारी किसी भी तरह के दबाव या भय के आगे झुकने वाले नहीं हैं।

 

## एफबीआई जांच और सांसदों के दफ्तरों को भी निशाना बनाने की साजिश

पूरे मामले में अमेरिकी डाक सेवा ने आधिकारिक बयानों के लिए एफबीआई की ओर रुख करने को कहा। एफबीआई ने यह उजागर करने से मना कर दिया कि इस अभियान के तहत अब तक कुल कितने पत्र चिन्हित किए गए हैं या इसके पीछे कौन लोग हैं, इस पर उनके पास कोई सुराग है या नहीं। हालांकि, एफबीआई ने अपने बयान में कहा, "एफबीआई और अमेरिकी पोस्टल इंस्पेक्शन सर्विस देश भर में विभिन्न पतों पर भेजी गई संदिग्ध डाक की एक श्रृंखला की जांच कर रहे हैं, जिसमें सेक्रेटरी ऑफ स्टेट के कार्यालय और उनसे जुड़े चुनाव कार्यालय शामिल हैं। कुछ पत्रों में अज्ञात पदार्थ पाया गया था, और हम प्रत्येक घटना से निपटने के लिए अपने कानून प्रवर्तन सहयोगियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।"

मिसिसिपी के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट की प्रवक्ता एलिजाबेथ जॉनसन ने बताया कि अन्य राज्यों की घटनाओं को देखते हुए उन्हें भी सतर्क किया गया था। इस पत्र को यूएसपीएस और होमलैंड सिक्योरिटी इन्वेस्टिगेशंस की संयुक्त टीम ने दफ्तर पहुंचने से पहले ही पकड़ लिया। इसके बाद सामग्री को एफबीआई को सौंप दिया गया, जिसने बाद में पुष्टि की कि इसमें कोई खतरनाक तत्व नहीं था। डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी के प्रवक्ता ने बताया कि उनकी फेडरल प्रोटेक्टिव सर्विस पिछले एक सप्ताह के दौरान संघीय परिसरों में स्थित सांसदों के दफ्तरों को प्रभावित करने वाली संदिग्ध पत्रों की घटनाओं पर कार्रवाई कर रही है।

चुनाव कार्यालयों के साथ-साथ यह अभियान देश भर के कई सांसदों के कार्यालयों तक भी पहुंचा, जिसमें डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन दोनों दलों के नेताओं को निशाना बनाया गया। इनमें सीनेटर टेड क्रूज़, क्रिस मर्फी और एलेक्स पाडिला जैसे प्रमुख नेता शामिल हैं। मिशिगन से डेमोक्रेटिक प्रतिनिधि हिलेरी शोल्टेन को भी ऐसा ही एक पत्र मिला था। हिलेरी शोल्टेन ने एक बयान में खुलासा किया कि उनके पास आए पत्र में मध्यावधि चुनाव के तुरंत बाद देश में "गृहयुद्ध" शुरू होने की खुली चेतावनी दी गई थी।

## इसका आप पर असर
अमेरिकी चुनाव प्रणाली से जुड़े कर्मियों और मतदाताओं की सुरक्षा व्यवस्था को तात्कालिक रूप से कड़ा कर दिया गया है ताकि मतदान प्रक्रिया निर्बाध चलती रहे।

- **मतदान प्रक्रिया पर असर:** सभी प्रभावित राज्यों में चुनाव संचालन पूरी तरह सामान्य बना हुआ है और मतदान की तिथियों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। मतदाता बिना किसी हिचकिचाहट के अपने निर्धारित मतदान केंद्रों पर जाकर मतदान कर सकते हैं।
- **डाक और चुनाव कर्मियों की सुरक्षा:** चुनाव मुख्यालयों और डाक छंटाई केंद्रों पर सुरक्षा जांच और स्कैनिंग प्रोटोकॉल को कड़ा कर दिया गया है। कर्मचारियों को संदिग्ध लिफाफों को छूने से बचने और आपातकालीन प्रोटोकॉल का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।
- **विदेशी या अनिवासी मतदाताओं के लिए:** डाक द्वारा भेजे जाने वाले मतपत्रों की आवाजाही पर सुरक्षा बलों और डाक विभाग की विशेष निगरानी बढ़ा दी गई है। अनुपस्थित मतपत्रों की प्रोसेसिंग में मामूली अतिरिक्त समय लग सकता है लेकिन सभी वैध मत गिने जाएंगे।
- **जनता के विश्वास पर प्रभाव:** डराने-धमकाने के इन प्रयासों के बीच प्रशासनिक एजेंसियों ने लोगों को आश्वस्त किया है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था पूरी तरह सुरक्षित है। आम नागरिकों को किसी भी तरह की अफवाह या दहशत फैलाने वाले संदेशों पर ध्यान न देने की सलाह दी गई है।

## ऐसा क्यों हुआ
मध्यावधि चुनाव से ठीक पहले चुनाव तंत्र और निर्वाचित प्रतिनिधियों में डर और भ्रम पैदा करने के इरादे से यह संगठित अभियान चलाया गया है।

- **प्रत्यक्ष कारण:** किसी अज्ञात समूह या व्यक्ति ने डर फैलाने और चुनाव कार्य को बाधित करने के उद्देश्य से दर्जनों राज्यों में सफेद पाउडर वाले पत्र भेजे। हालांकि जांच में पाउडर हानिरहित पाया गया, लेकिन इसका तात्कालिक असर दफ्तरों को खाली कराने और दहशत फैलाने के रूप में सामने आया।
- **राजनीतिक तनाव का माहौल:** अमेरिकी चुनावों के नजदीक आते ही राजनीतिक धुव्रीकरण और चुनाव कर्मियों को निशाना बनाने की प्रवृत्तियों में पहले भी वृद्धि देखी गई है। इसी संवेदनशील माहौल का फायदा उठाकर असामाजिक तत्वों ने डाक व्यवस्था का दुरुपयोग किया।
- **जिम्मेदारी का अभाव और छद्म नाम:** लिफाफों पर राजनीतिक संगठन का फर्जी नाम और पता लिखकर भ्रम की स्थिति पैदा करने की कोशिश की गई है। अभी तक किसी भी वास्तविक संगठन ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली है और मामले की व्यापक जांच जारी है।

## सवाल-जवाब

### 1. कितने राज्यों के चुनाव कार्यालयों को ये संदिग्ध पत्र मिले?
कम से कम 32 राज्यों के चुनाव कार्यालयों ने ऐसे संदिग्ध पत्र मिलने या डाक विभाग द्वारा उन्हें रोके जाने की पुष्टि की है।

### 2. क्या पत्रों में मिला सफेद पाउडर खतरनाक था?
प्रयोगशाला जांच में यह पुष्टि हुई है कि अब तक खोले गए सभी पत्रों में मिला सफेद पाउडर गैर-हानिकारक और सुरक्षित था।

### 3. किन राज्यों में पत्र सीधे कार्यालयों तक पहुंच गए थे?
एरिज़ोना, डेलावेयर, ओक्लाहोमा, साउथ कैरोलिना और लुइसियाना में ये पत्र कार्यालयों तक पहुंच गए थे, जिसके कारण वहां दफ्तर खाली कराने पड़े।

### 4. किन प्रमुख सांसदों को भी इस तरह के पत्र मिले हैं?
सीनेटर टेड क्रूज़, क्रिस मर्फी, एलेक्स पाडिला और प्रतिनिधि हिलेरी शोल्टेन के कार्यालयों को भी ऐसे संदिग्ध पत्र भेजे गए।

### 5. क्या इससे मध्यावधि चुनाव की तैयारियों पर कोई असर पड़ा है?
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इन घटनाओं से चुनाव संचालन या मतदान की तैयारियों पर कोई असर नहीं पड़ा है।

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