अमेरिकी चुनावी चंदे के अनचाहे संदेशों का मायाजाल और डेटा कंपनियों की अंदरूनी हकीकत अमेरिका में राजनीतिक दलों के चंदा जुटाने वाले अनचाहे संदेश आम नागरिकों के फोन पर लगातार आ रहे हैं। जांच में सामने आया कि गलत संपर्कों और डेटा ब्रोकरों के गठजोड़ के कारण लोग ऑप्ट-आउट करने के बाद भी परेशान हो रहे हैं। अमेरिका में चुनावी सरगर्मियों के बीच मोबाइल फोन पर आने वाले राजनीतिक चंदे के संदेशों ने आम लोगों के दैनिक जीवन में भारी दखल पैदा कर दिया है। कार चलाने, शाम का खाना पकाने या दफ्तर का जरूरी काम निपटाने के दौरान अचानक स्क्रीन पर तीन संदेश कौंधते हैं, जिनमें कभी बराक ओबामा को तत्काल मदद की दरकार बताई जाती है तो कभी चंदे की समयसीमा खत्म होने का डर दिखाया जाता है। कुछ संदेशों में तो दानदाताओं के चंदे पर 800 प्रतिशत का मैचिंग फंड जोड़ने का दावा भी किया जाता है। मोंटाना के पहले कांग्रेस जिले से चुनाव लड़ रहे डेमोक्रेटिक उम्मीदवार सैम फोर्स्टैग की बिल्ली एंगस के नाम से भी मतदाताओं को संदेश भेजे गए, जिसमें रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी और उनके अमीर समर्थकों को हराने की गुहार लगाई गई थी। चुनावी चंदे की अपील वाले यह संदेश बेहद नाटकीय और लगातार आने वाले बन चुके हैं। सिर्फ एक वर्ष की अवधि के भीतर एक ही निजी नंबर पर 725 ऐसे संदेश दर्ज किए गए। अक्टूबर के शुरुआती 20 दिनों में 190 से अधिक संदेश आए, जो औसतन हर दिन करीब 10 संदेशों का आंकड़ा बैठता है। 14 अक्टूबर को तो अकेले 21 संदेश एक ही दिन में फोन पर पहुंचे। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह संदेश उस व्यक्ति के लिए थे ही नहीं जिसके पास नंबर था, बल्कि कैलिफोर्निया में रहने वाले उनके एक रिश्तेदार जॉन के लिए थे जिन्होंने पूर्व में डेमोक्रेट्स को छोटे दान दिए थे। न्यूयॉर्क में रहने वाले व्यक्ति ने कभी कोई राजनीतिक चंदा नहीं दिया था। दोनों के नाम, बैंक खाते और फोन नंबर पूरी तरह अलग थे, फिर भी राजनीतिक अभियान चलाने वाली मशीनरी इन दोनों में फर्क नहीं कर पाई। अनचाहे संदेश रोकने के प्रयास और तकनीकी विफलताएं लंबे समय से इन संदेशों से पीछा छुड़ाने के लिए उपयोगकर्ताओं ने व्यवस्था के मुताबिक कई तरीके अपनाए। वर्ष 2021 से अब तक एक फोन पर 49 बार 'STOP' लिखकर जवाब भेजा गया। जब नियमों में बदलाव हुआ तो 'Stop2End' भी लिखकर भेजा गया। नवंबर 2025 में जॉन ओसॉफ के चुनावी अभियान को रोकने का अनुरोध भेजा गया, लेकिन इसके बावजूद उनके प्रचार से जुड़े 13 और संदेश नौ अलग-अलग नंबरों से लगातार आते रहे। जब डेमोक्रेटिक कांग्रेसनल कैंपेन कमेटी ने यह दावा करते हुए संदेश भेजा कि बिल क्लिंटन, बराक ओबामा और जो बाइडेन सीधे मदद की पुकार लगा रहे हैं, तो हताशा में तीखी प्रतिक्रिया देने के बाद भी संदेशों का आना बंद नहीं हुआ। मैसेज इतिहास की गहन पड़ताल करने पर पता चला कि मार्च 2022 से अब तक एक ही डिवाइस पर 812 अलग-अलग फोन नंबरों से कुल 1,735 राजनीतिक संदेश प्राप्त हुए थे। जेम्स कार्विल के नाम से कम से कम एक दर्जन राजनीतिक संगठनों के लिए 27 बार चंदा मांगा गया। वृत्तचित्र निर्माता केन बर्न्स की ओर से जैकी रोसेन, फिर रॉय कूपर और उसके बाद शेरोड ब्राउन को जिताने की अपीलें भेजी गईं। सीनेट में कोरी बुकर के 25 घंटे के लंबे भाषण के ठीक अगले दिन 2 अप्रैल 2025 को दो घंटे से भी कम समय में तीन अलग-अलग संगठनों की ओर से उनके नाम वाले संदेश भेजे गए। कम चंदा देने वालों के नंबरों की भी आक्रामक ट्रैकिंग फेडरल इलेक्शन कमीशन के आधिकारिक रिकॉर्ड बताते हैं कि जिस रिश्तेदार जॉन के नाम पर यह संदेश आ रहे थे, वे कोई बड़े चंदा दाता नहीं हैं। वर्ष 2017 से अब तक जॉन ने लगभग 160 बार में कुल 1,700 डॉलर का चंदा दिया था, जिसमें उनकी ओर से दिया गया औसत दान मात्र 6 डॉलर था। इस वर्ष जॉन ने कुल छह बार में केवल 51 डॉलर दान किए थे। इसके बावजूद उसी दौरान उनके नाम पर 725 संदेश भेजकर चंदे की भीख मांगी जाती रही। डेमोक्रेटिक सीनेटोरियल कैंपेन कमेटी ने अकेले 28 अलग-अलग फोन नंबरों से 60 संदेश भेजे, जिनमें से 22 संदेश सिर्फ अक्टूबर के शुरुआती 20 दिनों में आए थे। जॉन ने वर्ष 2020 में इस कमेटी को महज एक बार 5 डॉलर दिए थे। इसी प्रकार डेमोक्रेटिक कांग्रेसनल कैंपेन कमेटी ने 41 संदेश भेजे, जबकि उसे केवल 8 डॉलर मिले थे। हाउस मेजॉरिटी पीएसी, जिसे जॉन ने कभी एक पैसा भी नहीं दिया था, लगातार संदेश भेजकर दान की रकम को 900 प्रतिशत तक बढ़ाने के दावे करती रही। इस पूरी व्यवस्था का गणित यह है कि थोक में लाखों संदेश भेजना बेहद सस्ता पड़ता है और यदि कुछ गिने-चुने लोग भी चंदा दे दें तो चुनावी अभियानों का मुनाफा निकल आता है। डेटा ब्रोकर और ट्रैकिंग कोड का अंदरूनी तंत्र इन संदेशों की कड़ियों को जोड़ने पर लगभग हर संदेश में एक वेब लिंक पाया गया, जो कुछ रीडायरेक्ट्स के बाद एक्टब्लू तक ले जाता था। एक्टब्लू वह मुख्य मंच है जिसका उपयोग डेमोक्रेट्स चंदा जमा करने के लिए करते हैं। इन लिंक में खास ट्रैकिंग कोड छिपे होते हैं, जो यह बताते हैं कि संदेश किस अभियान का है और संपर्क विवरण कहां से खरीदा गया है। उदाहरण के लिए, अक्टूबर के एक लिंक में कोड दर्ज था जिसमें अधिग्रहण, पीयर-टू-पीयर चंदा और किराये पर ली गई सूची का ब्योरा संक्षेप में दर्ज था। इन तमाम अलग-अलग अभियानों के ट्रैकिंग कोड में एक नाम बार-बार सामने आया, जो स्टर्लिंग था। स्टर्लिंग डेटा कंपनी एक छोटी फर्म है जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग करके ऐसे संभावित मतदाताओं की पहचान करती है जो डेमोक्रेट्स को चंदा दे सकते हैं। वर्ष 2022 में यह जानकारी सामने आई थी कि स्टर्लिंग ने लगभग 3 करोड़ राजनीतिक दाताओं का एक विशाल डेटाबेस तैयार किया था। इस डेटाबेस में दाताओं की कारों के मॉडल और उनके नेटफ्लिक्स पर देखे जाने वाले कार्यक्रमों तक के सैकड़ों विवरण मौजूद थे। कंपनी इन विवरणों का उपयोग यह भविष्यवाणी करने के लिए करती है कि कोई व्यक्ति किस उम्मीदवार को दान दे सकता है। स्टर्लिंग विभिन्न डेटा ब्रोकरों से उम्र, स्थान, राजनीतिक झुकाव और चंदे के इतिहास का ब्योरा खरीदकर विस्तृत वोटर प्रोफाइल तैयार करती है, जिसे बाद में चुनावी अभियानों को बेचा या किराये पर दिया जाता है। प्राप्त हुए 725 संदेशों में से लगभग आधे संदेशों में स्टर्लिंग से जुड़े कोड पाए गए। इनमें डीसीसीसी, डीएससीसी, जेम्स तलारिको और मार्क केली के चुनावी अभियान शामिल थे। एफईसी के रिकॉर्ड से यह भी खुलासा हुआ कि जो बाइडेन की एक संयुक्त चंदा समिति ने नवंबर 2023 से शुरू होकर चार महीनों के भीतर दानदाताओं की सूची के बदले स्टर्लिंग को लगभग 18.7 लाख डॉलर का भुगतान किया था। उसी दौरान उस समिति का एक संदेश भी कोड के साथ फोन पर आया था। डीएससीसी द्वारा स्टर्लिंग को किया गया पहला भुगतान 22 नवंबर 2023 को दर्ज हुआ, ठीक उसी दिन संबंधित कोड वाला संदेश भी प्राप्त हुआ था। इसके अलावा गर्मियों में डीएससीसी ने स्टर्लिंग को करीब 2,50,000 डॉलर का अतिरिक्त भुगतान किया, जिसके तुरंत बाद संदेशों की एक नई बाढ़ आ गई। डेटाबेस की गलतियों पर कंपनियों का रुख और कानूनी विकल्प स्टर्लिंग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्टिन कुरुज़ ने इस पूरी प्रक्रिया पर बात करते हुए कहा, 'बार-बार चंदे की मांग करना एक जरूरी बुराई है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि बहुत कम लोग स्वेच्छा से चंदा देते हैं, इसलिए हर अभियान उन्हीं सीमित दाताओं के पीछे भागता है और बड़े पैमाने पर टेक्स्ट संदेश भेजना इतना कारगर है कि इसे छोड़ा नहीं जा सकता। कुरुज़ ने कंपनी के मालिकाना डेटा पर विस्तृत बात करने से परहेज किया, लेकिन यह पुष्टि की कि कंपनी खुद संदेश भेजने का काम संभालती है और एक ही रिकॉर्ड को कई अभियानों को किराये पर दे सकती है। उन्होंने दावा किया कि व्यक्तियों से संपर्क की आवृत्ति सीमित रखी जाती है, हालांकि उन्होंने इन सीमाओं का कोई पैमाना नहीं बताया। डेटाबेस की सटीकता को लेकर मार्टिन कुरुज़ ने कहा, 'कोई भी संपर्क डेटाबेस पूरी तरह त्रुटिहीन नहीं होता।' उनका तर्क है कि मध्यम विश्वास के साथ जोड़े गए रिकॉर्ड भी इतने सटीक होते हैं कि उनका उपयोग करना फायदेमंद रहता है। उनके अनुसार जो नंबर गलत होते हैं, वे अंततः चलन से बाहर हो जाते हैं क्योंकि उन पर कोई सक्रियता नहीं दिखती। कुरुज़ ने गलत नंबर पर संदेशों की बाढ़ आने की जिम्मेदारी सीधे तौर पर नहीं ली, लेकिन इससे इनकार भी नहीं किया। उन्होंने इन संदेशों से बचने के लिए एक अनोखी सलाह दी कि लोग इन पर कोई भी जवाब न दें। इस समस्या से निपटने का एक दूसरा रास्ता अदालतों से होकर गुजरता है। अब तक कम से कम दो लोगों ने गलत नंबरों पर भेजे गए चुनावी संदेशों को लेकर डेमोक्रेटिक संगठनों के खिलाफ मुकदमा दायर करके सफलतापूर्वक समझौता हासिल किया है, जिसके तहत उन्हें दोबारा कभी संदेश न भेजने की शर्त शामिल थी। हालांकि मुकदमों के जरिए भी यह कभी साफ नहीं हो सका कि डेटाबेस में गलत नाम फोन नंबरों से कैसे जुड़ जाते हैं। वर्तमान स्थिति यह है कि राजनीतिक कमेटियां अपने समर्थकों के रिश्तेदारों को उनके परिजनों से भी ज्यादा संदेश भेज रही हैं, और उन पर गुस्सा जाहिर करने से भी यह सिलसिला थमता नजर नहीं आता। इसका आप पर असर अमेरिकी राजनीतिक अभियानों द्वारा मोबाइल नंबरों की अनियंत्रित खरीद-फरोख्त से आम नागरिकों की डिजिटल प्राइवेसी और दैनिक शांति पर गंभीर असर पड़ रहा है। • मोबाइल उपयोगकर्ताओं पर असर: राजनीतिक संदेशों पर साधारण 'STOP' का जवाब देने से भी संदेशों का आना पूरी तरह बंद नहीं होता है। अभियानों द्वारा अलग-अलग फोन नंबरों और कई संगठनों के जरिए लगातार नए संदेश भेजे जाते हैं जिससे उपयोगकर्ता परेशान होते हैं। • डेटा प्राइवेसी का जोखिम: डेटा ब्रोकर आम लोगों की गाड़ियों के मॉडल, स्ट्रीमिंग आदतों और निजी जानकारियों को प्रोफाइल बनाकर राजनीतिक दलों को किराये पर बेचते हैं। इससे किसी व्यक्ति की सहमति के बिना उसकी निजी जानकारियां दर्जनों राजनीतिक समितियों तक पहुंच जाती हैं। • गलत पहचान और चंदे का दबाव: डेटाबेस में थोड़ी सी भी गलती होने पर किसी रिश्तेदार के नाम पर आने वाले चंदे के संदेश दूसरे व्यक्ति के फोन पर सालों तक आते रहते हैं। आम नागरिक इन गलत संपर्कों को सुधारने के लिए बिना कानूनी कदम उठाए कोई आसान विकल्प नहीं पाते हैं। • अनचाहे संदेशों से बचाव की रणनीति: डेटा विशेषज्ञों के अनुसार इन संदेशों पर कोई भी जवाब देने या नाराजगी जताने के बजाय पूरी तरह शांत रहना ही बेहतर विकल्प माना जाता है। किसी भी तरह का उत्तर देने से सिस्टम उस नंबर को सक्रिय मानकर भविष्य की सूचियों में शामिल रख सकता है। ऐसा क्यों हुआ राजनीतिक अभियानों द्वारा बड़े पैमाने पर अनचाहे संदेश भेजने की मुख्य वजह बेहद कम लागत में अधिक धन जुटाने की होड़ और डेटा ब्रोकरों द्वारा तैयार किए गए अपूर्ण डेटाबेस हैं। • कम लागत में बड़ा मुनाफा: मोबाइल पर संदेश भेजने की तकनीक बहुत सस्ती होती है और इसमें लाखों लोगों तक तुरंत पहुंचा जा सकता है। अभियानों को पता होता है कि अगर एक फीसदी से भी कम लोग चंदा दे दें, तो इस प्रक्रिया पर हुआ खर्च आसानी से निकल आता है। • डेटा ब्रोकरों का अनियंत्रित कारोबार: स्टर्लिंग जैसी कंपनियां डेटा ब्रोकरों से उम्र, स्थान और व्यक्तिगत प्राथमिकताओं का ब्योरा खरीदकर बड़े पैमाने पर प्रोफाइल तैयार करती हैं। इन एल्गोरिदम में गलत मिलान होने के बावजूद कंपनियां व्यावसायिक मुनाफे के लिए मध्यम सटीकता वाले डेटा का इस्तेमाल करती रहती हैं। • एक ही डेटा का बार-बार इस्तेमाल: एक बार जब किसी व्यक्ति का नाम या नंबर चुनावी सूची में आ जाता है, तो उसे दर्जनों अलग-अलग अभियानों और समितियों को किराये पर दे दिया जाता है। इसके चलते एक समिति को दिया गया छोटा सा चंदा भी कई संगठनों से अनगिनत संदेश आने की वजह बन जाता है। सवाल-जवाब 1. क्या राजनीतिक संदेशों पर 'STOP' लिखने से वे हमेशा के लिए बंद हो जाते हैं? नहीं, कई मामलों में 'STOP' लिखने के बाद भी राजनीतिक संदेश पूरी तरह बंद नहीं होते क्योंकि अभियान नए-नए नंबरों और अन्य सहयोगी संगठनों से संदेश भेजते रहते हैं। 2. स्टर्लिंग डेटा कंपनी क्या काम करती है? यह एक ऐसी तकनीक कंपनी है जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा ब्रोकरों की मदद से 3 करोड़ से अधिक संभावित राजनीतिक दाताओं का डेटाबेस तैयार करके अभियानों को किराये पर देती है। 3. कंपनियों के पास मतदाताओं की निजी जानकारियां कैसे पहुंचती हैं? कंपनियां डेटा ब्रोकरों से लोगों की उम्र, स्थान, गाड़ियों के प्रकार और नेटफ्लिक्स देखने की आदतों जैसी जानकारियां खरीदकर विस्तृत राजनीतिक प्रोफाइल बनाती हैं। 4. अनचाहे संदेशों से छुटकारा पाने के लिए क्या कानूनी विकल्प उपलब्ध हैं? अमेरिका में कुछ नागरिकों ने लगातार आ रहे गलत चुनावी संदेशों के खिलाफ मुकदमे दायर करके राजनीतिक संगठनों से कानूनी समझौते और संदेश न भेजने की गारंटी हासिल की है। https://trendkia.com/politics/us-men-rajanitika-spaima-sndeshon-ka-mayajala-aura-sterling-data-ki-andaruni-hakikata-55064 TrendKia — Har trend, sabse pehle.