# मध्यावधि चुनाव से पहले चुनावी प्रक्रिया और वोटर लिस्ट को लेकर अदालतों में उलझा अमेरिकी न्याय विभाग

> अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा गैर-नागरिक मतदान और मतपत्रों को अलग करने के दावों पर कई राज्यों की अदालतों ने रोक लगा दी है। अलास्का, कैलिफोर्निया, नेवादा और वॉशिंगटन में दाखिल याचिकाओं और चेतावनियों के बीच कानूनी जानकारों ने संस्थागत व्यवस्था पर भरोसा जताया है।

**Type:** article · **Category:** राजनीति · **Published:** 2026-11-02 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/politics/us-midterms-se-pehle-electoral-system-aur-voter-list-par-courts-me-uljha-us-department-of-justice-55223 · **Language:** Hindi
**Tags:** अमेरिकी चुनाव, न्याय विभाग, टॉड ब्लैंच, डोनाल्ड ट्रंप, वोटर लिस्ट, कैलिफोर्निया चुनाव, अलास्का सीनेट, मध्यावधि चुनाव

अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले देश की चुनावी व्यवस्था, वोटर सूचियों की वैधता और मतदान प्रक्रियाओं को लेकर तीखी कानूनी खींचतान शुरू हो गई है। रिपब्लिकन पार्टी के पक्ष में चुनावी सर्वे के कमजोर रुझानों के बीच अमेरिकी न्याय विभाग यानी डिपार्टमेंट ऑफ जस्टिस (DOJ) ने कई राज्यों की चुनाव व्यवस्था और मतदान नियमों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच के नेतृत्व में काम कर रहे न्याय विभाग ने चुनाव सुरक्षा को आधार बनाकर कई राज्यों में मुकदमे दायर किए हैं, चुनावी दफ्तरों से जुड़े दस्तावेज मांगे हैं और मतदान रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। हालांकि, इन कानूनी कदमों को संघीय अदालतों और राज्य स्तर के चुनाव अधिकारियों के कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ा है।

## चुनावी प्रक्रिया पर सवालों की पृष्ठभूमि और संघीय एजेंसियों के कदम
पिछले एक वर्ष के दौरान न्याय विभाग ने अलग-अलग राज्यों से बिना किसी संपादन के पूरी वोटर लिस्ट सौंपने की मांग की है। इसके अतिरिक्त ऐसे कार्यकारी आदेशों पर जोर दिया गया है जिनसे राज्यों के पास मौजूद चुनाव प्रबंधन के अधिकारों पर असर पड़ता है। विभाग की ओर से यह दावा किया गया कि बड़े पैमाने पर गैर-नागरिक मतदान सूची में शामिल हो सकते हैं और मतदान कर सकते हैं। हालांकि, कई द्विदलीय जांचों में यह बात सामने आ चुकी है कि गैर-नागरिकों द्वारा मतदान किए जाने के प्रमाणित मामले बेहद दुर्लभ होते हैं। इसके बावजूद चुनावी तारीखों के बेहद नजदीक आने पर न्याय विभाग ने सभी 50 राज्यों के चुनाव अधिकारियों को आधिकारिक पत्र भेजकर चेतावनी दी कि यदि उन्होंने 22 दिनों तक चुनावी रिकॉर्ड सुरक्षित नहीं रखे, तो उन पर आपराधिक कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

चुनाव अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की ऐसी ही चेतावनियों को लेकर एक संघीय न्यायाधीश ने प्रशासन को फटकार भी लगाई थी। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, लॉस एंजेलिस (UCLA) स्कूल ऑफ लॉ के सेफगार्डिंग डेमोक्रेसी प्रोजेक्ट से जुड़े स्टाफ अटॉर्नी शेल्बी वेमेंट के मुताबिक, इन कानूनी याचिकाओं के जीतने की संभावना बेहद कम होने के बावजूद इन्हें दाखिल किया जा रहा है, ताकि बाद में चुनावी नतीजों की प्रामाणिकता पर सवाल खड़े किए जा सकें। दूसरी ओर, न्याय विभाग के प्रवक्ता का कहना है कि विभाग किसी राजनीतिक समय-सारणी के आधार पर नहीं बल्कि केवल तथ्यों और कानून के तहत कार्रवाई कर रहा है। प्रवक्ता ने यह भी तर्क दिया कि पिछले प्रशासन के न्याय विभाग ने भी 2024 के चुनावों से पहले अलबामा और वर्जीनिया पर मुकदमा दायर किया था, जब संदिग्ध गैर-नागरिकों के नाम हटाने के प्रयासों को रोकने का प्रयास हुआ था।

## न्यायिक आदेश और संस्थागत स्थिरता पर विशेषज्ञों की राय
कानूनी जानकारों का मानना है कि राज्यों में अदालती झटकों के बावजूद इन मुकदमों का मुख्य उद्देश्य चुनाव परिणामों पर संदेह पैदा करने की जमीन तैयार करना हो सकता है। सेंटर फॉर इलेक्शन इनोवेशन एंड रिसर्च के प्रमुख और न्याय विभाग के पूर्व वकील डेविड बेकर का कहना है कि यदि चुनाव नतीजे प्रशासन की मंशा के अनुसार नहीं रहे, तो नतीजों को चुनौती देने की कोशिशें देखने को मिल सकती हैं। हालांकि, उनका यह भी कहना है कि अमेरिकी चुनावी प्रणालियां और संस्थाएं पूरी तरह मजबूत रही हैं और अब तक के तमाम प्रयास अदालतों में टिक नहीं पाए हैं।

ब्रेनन सेंटर के एक विश्लेषण के अनुसार, 2025 में डोनाल्ड ट्रंप के पद संभालने के बाद से 34 संघीय जिला अदालतों ने प्रशासन के खिलाफ फैसले सुनाए हैं, जिनमें वोटर लिस्ट तक सीधी पहुंच की मांगों को रोका गया है और कई कार्यकारी आदेशों के क्रियान्वयन पर रोक लगाई गई है। न्याय विभाग के नागरिक अधिकार प्रभाग के पूर्व उप सहायक अटॉर्नी जनरल और वर्तमान में लोयोला मैरीमाउंट यूनिवर्सिटी में कानून के प्रोफेसर जस्टिन लेविट का मानना है कि इन कदमों का बड़ा हिस्सा महज शक्ति प्रदर्शन और संदेश देने तक सीमित है। लेविट ने स्पष्ट किया कि अमेरिका में चुनाव संचालन की जिम्मेदारी संघीय सरकार के पास नहीं, बल्कि राज्यों और स्थानीय प्रशासन के पास सुरक्षित है।

## कैलिफोर्निया में 20,000 मतपत्रों को लेकर अदालती टकराव
कैलिफोर्निया राज्य इस समय चुनावी कानूनी विवादों का मुख्य केंद्र बन गया है। अक्टूबर के महीने में न्याय विभाग ने एक संघीय मुकदमा दायर कर मांग की थी कि कैलिफोर्निया प्रशासन लगभग 20,000 मतदाताओं से जुड़े डाक मतपत्रों यानी मेल-इन बैलेट्स को अलग करके सील कर दे। विभाग का दावा था कि ये मतदाता गैर-नागरिक हो सकते हैं। बुधवार देर रात अमेरिकी जिला न्यायाधीश डेविड कार्टर ने इस याचिका को सिरे से खारिज करते हुए कड़े शब्दों में आदेश जारी किया।

न्यायाधीश कार्टर ने अपने आदेश में लिखा कि अमेरिकी इतिहास में कभी भी ऐसा नहीं हुआ कि संघीय सरकार ने चुनाव की पूर्व संध्या पर किसी राज्य और स्थानीय प्रशासन को अपनी संवैधानिक चुनावी प्रक्रियाओं को छोड़कर कार्यपालिका की मर्जी के आगे झुकने के लिए मजबूर किया हो। न्याय विभाग ने तत्काल इस फैसले के खिलाफ अपील दाखिल की, जिसे एक संघीय अपीलीय अदालत ने फौरन खारिज कर दिया। अदालत ने पाया कि गैर-नागरिक मतदाताओं की संख्या को लेकर प्रशासन के आंकड़े पहले भी जांच में सही नहीं पाए गए थे और इस आंकड़े पर पहुंचने की प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी सवाल हैं।

इसके अलावा अदालत के आदेश पर न्याय विभाग को इन 20,000 नामों की सूची कोलिशन फॉर ह्यूमन इमिग्रेंट राइट्स नामक संस्था को सौंपनी पड़ी थी। संस्था द्वारा किए गए कानूनी विश्लेषण में खुलासा हुआ कि सूची के 40 प्रतिशत से अधिक नाम कैलिफोर्निया की मौजूदा मतदाता फाइलों में मौजूद ही नहीं हैं। इस खुलासे के बाद न्याय विभाग ने तर्क दिया कि संस्था द्वारा आंकड़े सार्वजनिक करना नियमों का उल्लंघन है और अवमानना कार्रवाई की मांग की। डेविड बेकर ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि चुनाव के नजदीक आने पर जांच से बचने के न्याय विभाग के अपने स्पष्ट नियम हैं, जिनका पूर्व में डोनाल्ड ट्रंप के निजी वकील के रूप में खुद टॉड ब्लैंच ने सितंबर 2024 में हवाला दिया था, लेकिन अब विभाग अपने ही नियमों की अनदेखी कर रहा है। इसके साथ ही विभाग ने कैलिफोर्निया के स्थानीय चुनाव अधिकारियों को ग्रैंड जूरी सबपीना भी जारी किए हैं।

## अलास्का सीनेट सीट पर स्पॉइलर उम्मीदवार का विवाद
अलास्का में सीनेट चुनाव के नतीजों के प्रमाणीकरण को रोकने के लिए न्याय विभाग ने अक्टूबर में एक अलग मुकदमा दायर किया, यदि डेमोक्रेट उम्मीदवार मैरी पेल्टोला यह चुनाव जीतती हैं। इस विवाद की मुख्य वजह मतपत्र पर एक अन्य उम्मीदवार का नाम होना है, जिनका नाम मौजूदा रिपब्लिकन सीनेटर डैनियल सुलिवन से काफी मिलता-जुलता है। यह डमी या स्पॉइलर उम्मीदवार डैनियल जे सुलिवन जूनियर के नाम से पंजीकृत है। अलास्का के सुप्रीम कोर्ट ने गर्मियों में ही यह फैसला सुना दिया था कि डैनियल जे सुलिवन जूनियर का नाम मतपत्र पर बना रह सकता है क्योंकि इससे किसी चुनावी कानून का उल्लंघन नहीं हुआ है।

न्यूयॉर्क टाइम्स की एक जांच में आरोप लगाया गया था कि डेमोक्रेट समर्थित रणनीतिकारों ने सुलिवन जैसे नाम वाले उम्मीदवार को मैदान में उतारने में भूमिका निभाई थी। हालांकि, मैरी पेल्टोला के चुनावी अभियान ने इस बात का पूरी तरह खंडन किया है। जूनो में अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए पेल्टोला ने कहा कि वे केवल अपने और मौजूदा सीनेटर के अलावा मतपत्र पर मौजूद किसी अन्य उम्मीदवार के बारे में कुछ नहीं जानती थीं और मतदाताओं को भ्रमित करने में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं है। दूसरी ओर, ट्रुथ सोशल पर डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि पेल्टोला को मतपत्र से हटा दिया जाना चाहिए और उन पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए। वहीं, टॉड ब्लैंच ने ऐसे उम्मीदवारों को शामिल करने की प्रथा को गैरकानूनी बनाए जाने की वकालत की।

अलास्का के गवर्नर माइकल डनलीवी ने राज्य स्तर पर पेल्टोला के खिलाफ आपराधिक या नागरिक आरोपों की जांच के आदेश दे दिए और न्यूजनेशन के साथ साक्षात्कार में कहा कि जब तक जांच जारी है, वे जीत को प्रमाणित करने का वादा नहीं कर सकते। इसके जवाब में पेल्टोला के प्रवक्ता ने कहा कि गवर्नर का यह रुख अलास्का के मतदाताओं की आवाज को दबाने की कोशिश है। शुक्रवार को एंकरेज में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अलास्का जिले के अमेरिकी अटॉर्नी माइकल हेमैन ने कहा कि वे डैनियल जे सुलिवन को मुखौटा उम्मीदवार बनाने की साजिश से अवगत हैं और संभावित संघीय अपराधों की जांच शुरू कर रहे हैं। हालांकि, रविवार को एक संघीय न्यायाधीश ने न्याय विभाग के मुकदमे को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह मतदाताओं के गुप्त मतदान के अधिकार का उल्लंघन करता है। कुछ ही घंटों बाद विभाग ने इसके खिलाफ भी अपील दायर कर दी।

## नेवादा और वॉशिंगटन राज्यों में आंकड़ों पर उठे सवाल
जुलाई में होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) ने दावा किया था कि कैलिफोर्निया, नेवादा, पेंसिल्वेनिया और न्यू जर्सी, इन चार राज्यों में 2,70,000 से अधिक गैर-नागरिक मतदाताओं की पहचान की गई है। विभाग ने नेवादा में ऐसे 15,903 मतदाताओं के नाम होने की बात कही थी, लेकिन राज्य के अधिकारियों के साथ बैठक में वे कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सके। बाद में यह संख्या घटाकर केवल 185 कर दी गई, लेकिन उसके लिए भी कोई प्रमाण नहीं मिला। नेवादा के उप अटॉर्नी जनरल ग्रेग ओट ने होमलैंड सिक्योरिटी विभाग को भेजे पत्र में स्पष्ट किया कि राज्य के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार वे सभी 185 लोग अमेरिकी नागरिक थे और विभाग ने इसके विपरीत कोई पुख्ता तथ्य नहीं दिया है।

होमलैंड सिक्योरिटी विभाग के प्रवक्ता ने इस पर कहा कि विभाग ने राज्यों के सार्वजनिक वोटर रिकॉर्ड की तुलना अपने पास मौजूद प्रणालियों से की थी। इसके बावजूद ग्रेग ओट ने जोर देकर कहा कि राज्य गैर-नागरिक मतदान के आरोपों को गंभीरता से लेता है, लेकिन बिना प्रमाण के लगाए गए आरोपों के आधार पर वास्तविक नागरिकों को मताधिकार से वंचित करने और मतदाताओं में डर पैदा करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।

इसी तरह की स्थिति वॉशिंगटन राज्य में भी सामने आई, जहां न्याय विभाग ने दावा किया कि संघीय डेटा के अनुसार 400 गैर-नागरिक मतदाता पंजीकृत हैं और उनके मतपत्र अलग रखे जाने चाहिए। इसे विभाग ने बड़े मामले का एक छोटा हिस्सा बताया। वॉशिंगटन के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट स्टीव हॉब्स ने इसका कड़ा जवाब देते हुए लिखा कि चुनाव से ठीक पहले इस तरह पत्र भेजने का समय बेहद निराशाजनक है और यदि कोई वास्तविक चिंता थी, तो उसे एक महीने पहले उठाया जाना चाहिए था। हॉब्स ने कहा कि विभाग ने किसी भी व्यक्ति के अयोग्य होने का कोई व्यक्तिगत प्रमाण नहीं दिया है और न ही यह बताया है कि यह सूची किस स्रोत से तैयार की गई। उन्होंने कहा कि कैलिफोर्निया और अलास्का में हस्तक्षेप के बाद वॉशिंगटन के लिए इन अपुष्ट आरोपों को स्वीकार करना अनुचित होगा।

## टेक्सास में हाथ से मतगणना कराने की मांग
न्याय विभाग के मुकदमों के अलावा टेक्सास में पोटर काउंटी रिपब्लिकन पार्टी ने भी एक अलग याचिका दायर की है। इस याचिका में मांग की गई है कि जब तक सभी मतपत्रों की हाथ से गिनती नहीं की जाती, तब तक चुनाव परिणामों को प्रमाणित न किया जाए। रिपब्लिकन पार्टी ने इस मांग के पीछे बिना किसी साक्ष्य के यह दावा किया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) किसी भी वोटिंग मशीन को बिना पकड़े गए हैक करने में सक्षम है। साथ ही वोटिंग मशीनों के कुछ कलपुर्जे चीन में निर्मित होने का हवाला भी दिया गया। पूर्व उप सहायक अटॉर्नी जनरल जस्टिन लेविट ने इस मुकदमे के तर्कों को पूरी तरह हास्यास्पद और गंभीरता से परे करार दिया है।

## इसका आप पर असर
अमेरिकी चुनाव प्रणाली और वोटर लिस्ट को लेकर अदालतों में चल रही इस कानूनी लड़ाई का सीधा असर वहां के नागरिकों के मतदान के अधिकार और चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर पड़ता है।

- **मतदाताओं के अधिकार:** राज्यों द्वारा कड़ा रुख अपनाने से वैध अमेरिकी नागरिकों के नाम बिना पुख्ता सबूत के वोटर लिस्ट से अचानक हटने का खतरा टल गया है। इसका मतलब है कि सामान्य मतदाता बिना किसी बाधा या डाक मतपत्र सील होने के डर के बिना अपना वोट डाल सकेंगे।
- **चुनाव अधिकारियों पर दबाव:** न्याय विभाग द्वारा 22 दिनों तक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की चेतावनी और आपराधिक जांच के नोटिस से स्थानीय चुनाव कर्मियों पर प्रशासनिक तनाव बढ़ गया है। इससे मतगणना और चुनावी औपचारिकताएं पूरी करने में स्थानीय स्टाफ को अतिरिक्त कानूनी सतर्कता बरतनी पड़ रही है।
- **चुनावी नतीजों पर भरोसा:** मतदान से ठीक पहले बड़े पैमाने पर गैर-नागरिक मतदान के दावों से आम जनता के मन में चुनावी व्यवस्था को लेकर संशय पैदा हो सकता है। अदालतों द्वारा इन याचिकाओं को खारिज किए जाने से यह स्पष्ट हुआ है कि किसी भी आरोप के लिए ठोस सबूत होना अनिवार्य है।
- **प्रमाणन में देरी की आशंका:** अलास्का जैसे राज्यों में जांच और मुकदमों के चलते यदि किसी सीट पर चुनाव परिणाम तुरंत प्रमाणित नहीं होते हैं, तो वहां राजनीतिक अनिश्चितता खिंच सकती है। ऐसी स्थिति में अंतिम विजेता का फैसला होने में कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया लंबी हो सकती है।

## ऐसा क्यों हुआ
अमेरिकी न्याय विभाग और विभिन्न राज्यों के बीच यह टकराव चुनावों से ठीक पहले गैर-नागरिकों द्वारा मतदान किए जाने के अपुष्ट दावों और चुनावी व्यवस्था पर नियंत्रण की खींचतान के कारण पैदा हुआ है।

- **दावों का प्रत्यक्ष कारण:** न्याय विभाग और होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने राज्यों की सार्वजनिक वोटर सूचियों का अपने डेटाबेस से मिलान करके यह निष्कर्ष निकाला कि हजारों गैर-नागरिक पंजीकृत हैं। हालांकि, जब राज्यों ने इन आंकड़ों की जांच की, तो संघीय एजेंसियां किसी भी व्यक्ति के अयोग्य होने का ठोस और व्यक्तिगत प्रमाण पेश नहीं कर सकीं।
- **प्रशासनिक नीतियां और नियम:** चुनाव की तारीख के बिल्कुल नजदीक जांच शुरू न करने के न्याय विभाग के अपने ही दिशानिर्देश मौजूद हैं। इसके बावजूद मध्यावधि चुनावों से चंद दिन पहले राज्यों को नोटिस और चेतावनियां जारी की गईं, जिसके कारण संघीय अदालतों ने इसे चुनावी प्रक्रिया में अनुचित दखल माना।
- **संवैधानिक अधिकार क्षेत्र:** अमेरिकी संविधान के तहत चुनाव आयोजित करने और मतदाता सूचियों के प्रबंधन की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्यों और स्थानीय सरकारों की है, न कि संघीय कार्यपालिका की। इसी संवैधानिक व्यवस्था के चलते संघीय न्यायाधीशों ने कार्यपालिका के आदेशों और मुकदमों को खारिज कर दिया।
- **आगामी कदम:** कई मामलों में अपीलीय अदालतों ने न्याय विभाग की अर्जियों को तुरंत खारिज कर दिया है, लेकिन विभाग ने आगे की अपील जारी रखी है। यदि चुनावी नतीजे विवादित रहते हैं, तो इन लंबित मुकदमों को नतीजों के प्रमाणीकरण को चुनौती देने के आधार के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।

## सवाल-जवाब

### 1. न्याय विभाग ने कैलिफोर्निया में डाक मतपत्रों को लेकर क्या मांग की थी?
न्याय विभाग ने अदालत से मांग की थी कि वह कैलिफोर्निया के लगभग 20,000 मतदाताओं से जुड़े डाक मतपत्रों को अलग रखने का आदेश दे, क्योंकि विभाग का दावा था कि वे गैर-नागरिक हैं।

### 2. कैलिफोर्निया के मामले पर संघीय न्यायाधीश डेविड कार्टर का क्या फैसला रहा?
न्यायाधीश डेविड कार्टर ने न्याय विभाग की मांग को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि अमेरिकी इतिहास में कभी भी संघीय सरकार ने चुनाव से ठीक पहले राज्यों को अपनी संवैधानिक प्रक्रिया छोड़ने के लिए मजबूर नहीं किया है।

### 3. अलास्का के सीनेट चुनाव में किस बात को लेकर कानूनी विवाद हुआ?
अलास्का में मुख्य रिपब्लिकन उम्मीदवार डैनियल सुलिवन के मिलते-जुलते नाम वाले उम्मीदवार डैनियल जे सुलिवन जूनियर के मतपत्र पर मौजूद होने को लेकर विवाद हुआ, जिसके चलते न्याय विभाग ने परिणाम प्रमाणीकरण रोकने के लिए मुकदमा दायर किया।

### 4. नेवादा राज्य में गैर-नागरिक मतदाताओं के आंकड़ों को लेकर क्या सच्चाई सामने आई?
होमलैंड सिक्योरिटी विभाग पहले नेवादा में 15,903 और बाद में 185 गैर-नागरिकों का दावा कर रहा था, लेकिन राज्य की जांच में पाया गया कि वे 185 व्यक्ति प्रमाणित अमेरिकी नागरिक थे।

### 5. वॉशिंगटन राज्य के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट स्टीव हॉब्स ने न्याय विभाग के पत्र पर क्या प्रतिक्रिया दी?
स्टीव हॉब्स ने कहा कि चुनाव से ठीक पहले पत्र भेजने का समय निराशाजनक है और न्याय विभाग ने सूची में शामिल किसी भी व्यक्ति के अयोग्य होने का कोई व्यक्तिगत सबूत पेश नहीं किया।

### 6. टेक्सास के पोटर काउंटी में रिपब्लिकन पार्टी ने क्या मांग उठाई है?
पोटर काउंटी रिपब्लिकन पार्टी ने अदालत में याचिका दाखिल कर मांग की है कि सभी मतपत्रों की हाथ से गिनती किए बिना चुनाव परिणामों को प्रमाणित न किया जाए।

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