# उत्तर प्रदेश की राजनीति में जाट मतदाताओं का दबदबा क्यों है, जानिए पूरा चुनावी गणित

> उत्तर प्रदेश की राजनीति में जाट समुदाय की आबादी महज 2 प्रतिशत है, लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में इनका प्रभाव निर्णायक माना जाता है। आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर सभी राजनीतिक दल इस समुदाय को अपने पक्ष में करने की रणनीति बना रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** राजनीति · **Published:** 2026-09-14 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/politics/uttar-pradesh-ki-rajaniti-men-jat-matadataon-ka-dabadaba-kyon-hai-janie-pura-chunavi-ganita-32300 · **Language:** Hindi
**Tags:** उत्तर प्रदेश चुनाव, जाट वोट, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, आरएलडी, बीजेपी, जयंत चौधरी, राजनीतिक समीकरण

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही सियासी सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं और सभी राजनीतिक दल विभिन्न वर्गों को साधने में जुट गए हैं। इसी कड़ी में सबसे खास चर्चा जाट समुदाय के राजनीतिक वजूद और उनकी चुनावी अहमियत पर हो रही है। उत्तर प्रदेश की कुल आबादी में जाटों की हिस्सेदारी लगभग 2 प्रतिशत है, लेकिन इसके बावजूद प्रदेश की कई विधानसभा सीटों पर उनका प्रभाव काफी बड़ा और निर्णायक माना जाता है। राज्य के पश्चिमी हिस्से में जाट मतदाताओं की मजबूत पकड़ है, जिसके चलते आगामी विधानसभा चुनावों से पहले सत्ताधारी एनडीए और समाजवादी पार्टी-कांग्रेस गठबंधन दोनों ही इस वर्ग को अपने पाले में लाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।

 

## जनसंख्या और भौगोलिक स्थिति का समीकरण

जाट समुदाय की एक बहुत बड़ी आबादी मुख्य रूप से खेती-किसानी से जुड़ी हुई है। पारंपरिक रूप से इस वर्ग का झुकाव राष्ट्रीय लोक दल (RLD) की तरफ रहा है, हालांकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भी पिछले कुछ वर्षों में इस समुदाय के भीतर अपनी पकड़ को काफी मजबूत किया है और जाट मतदाताओं के एक बड़े हिस्से को अपने पक्ष में करने में सफलता पाई है। इसके बावजूद आरएलडी के पास आज भी समुदाय का एक बड़ा जनसमर्थन बना हुआ है। उत्तर प्रदेश के लगभग 99 प्रतिशत जाट मतदाता पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 26 जिलों में ही केंद्रित हैं। इन जिलों के दायरे में कुल 136 विधानसभा क्षेत्र और 27 लोकसभा सीटें आती हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अपनी कम कुल आबादी के बावजूद जाट समुदाय का लगभग 35 से 40 विधानसभा सीटों पर सीधा और मजबूत प्रभाव है, जहां वे चुनावी नतीजों का पासा पलटने की कुवत रखते हैं। इसके अलावा करीब 50 ऐसी सीटें हैं जहां वे मुकाबले के समीकरण को गहराई से प्रभावित करने की स्थिति में रहते हैं।

 

## पिछले विधानसभा चुनावों में वोटिंग का रुख

साल 2007 के विधानसभा चुनावों के दौरान आरएलडी को जाट मतों का एक बहुत बड़ा हिस्सा हासिल हुआ था और उस चुनाव में बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने पूर्ण बहुमत से जीत दर्ज की थी। लोकनीति-सीएसडीएस के आंकड़ों के विश्लेषण से यह बात सामने आती है कि उस चुनाव में 61 प्रतिशत जाट मतदाताओं ने आरएलडी के पक्ष में मतदान किया था, जबकि भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगियों को करीब 18 प्रतिशत जाट वोट मिले थे। इसके विपरीत बीएसपी, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस को क्रमशः 10 प्रतिशत, 8 प्रतिशत और 2 प्रतिशत जाट वोट ही हासिल हो पाए थे। इसके बाद साल 2012 के विधानसभा चुनावों में भी आरएलडी ने अपने जाट वोट बैंक को काफी हद तक बचाए रखा, हालांकि उनकी कुल सीटें कम हो गईं। उस चुनाव में समाजवादी पार्टी ने जीत हासिल की थी। लोकनीति-सीएसडीएस के सर्वेक्षण के मुताबिक साल 2012 में आरएलडी को 45 प्रतिशत जाट वोट प्राप्त हुए थे। इस बार जाटों के वोटों में बीएसपी ने सेंध लगाते हुए 16 प्रतिशत वोट अपनी झोली में डाले, जबकि कांग्रेस को 11 प्रतिशत जाट वोट मिले। वहीं भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी दोनों को ही 7-7 प्रतिशत जाट मतदाताओं का समर्थन मिला था। यहाँ यह बात भी ध्यान देने योग्य है कि साल 2012 के उत्तर प्रदेश चुनावों में आरएलडी और कांग्रेस एक चुनावी गठबंधन के रूप में मैदान में उतरे थे।

 

## राजनीतिक बदलाव और वर्ष 2017 से 2022 का दौर

उत्तर प्रदेश के राजनीतिक परिदृश्य में साल 2017 के चुनाव एक बहुत बड़े बदलाव के वाहक बने। उस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने राज्य की कुल 403 विधानसभा सीटों में से 300 से अधिक पर प्रचंड जीत हासिल की। बीजेपी ने इस दौरान जाट बहुल इलाकों में भी अपनी बड़ी पैठ बनाई, जिसके चलते आरएलडी का प्रभाव कमजोर पड़ गया। आरएलडी उस चुनाव में केवल एक सीट जीतने में सफल रही और उसका कुल वोट शेयर घटकर मात्र 1.80 प्रतिशत पर सिमट गया। इसके उलट बीजेपी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 24 जिलों की 126 सीटों में से अकेले 100 सीटें जीतने में कामयाब रही। इसके बाद साल 2022 के चुनावों में आरएलडी ने समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन किया। इस गठबंधन को यह पूरी उम्मीद थी कि कृषि कानूनों के खिलाफ हुए भारी विरोध प्रदर्शनों के बाद बीजेपी के प्रति जाटों में उपजा गुस्सा उन्हें चुनावी फायदा दिलाएगा। हालांकि जमीनी स्तर पर परिणाम पूरी तरह वैसी उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे, भले ही गठबंधन कुछ हद तक अपना प्रभाव छोड़ने में सफल रहा। साल 2022 के चुनावों में बीजेपी पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 85 सीटें जीतने में फिर से कामयाब रही, जबकि सपा-आरएलडी गठबंधन के खाते में 41 सीटें आईं। इसके बावजूद बीजेपी को कई जाट बहुल इलाकों में नुकसान उठाना पड़ा क्योंकि वह शामली जिले की तीनों सीटें, मेरठ की सात में से चार सीटें, मुजफ्फरनगर की छह में से चार सीटें, मुरादाबाद की सभी छह सीटें, तथा रामपुर और संभल दोनों जिलों की चार में से तीन सीटें हार गई। वहीं दूसरी ओर आरएलडी ने इस बार अपने प्रदर्शन में सुधार करते हुए आठ सीटों पर जीत दर्ज की।

 

## आगामी रणनीतियां और राजनीतिक समीकरण

भारतीय जनता पार्टी का शीर्ष नेतृत्व उत्तर प्रदेश, विशेषकर इसके पश्चिमी हिस्से में जाटों के राजनीतिक महत्व को अच्छी तरह समझता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने अगस्त 2022 में जाट समुदाय से ताल्लुक रखने वाले भूपेंद्र सिंह चौधरी को अपना प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया था, हालांकि दिसंबर 2025 में हुए सांगठनिक फेरबदल के दौरान उनकी जगह एक कुर्मी चेहरे पंकज चौधरी को यह जिम्मेदारी सौंप दी गई। वर्तमान राजनीतिक हालात यह हैं कि जयंत चौधरी के नेतृत्व वाली आरएलडी अब एनडीए का हिस्सा बन चुकी है। इस गठबंधन का मुख्य उद्देश्य जाटों के बीच अपने राजनीतिक समर्थन को और अधिक पुख्ता करना है। चूंकि साल 2022 के विधानसभा चुनाव में जाट मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा सपा-आरएलडी गठबंधन के पाले में चला गया था, इसलिए भाजपा इस बात से पूरी तरह वाकिफ है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जयंत चौधरी की पार्टी के एनडीए में शामिल होने से बीजेपी को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाटों को अपने साथ जोड़े रखने में बड़ी मदद मिलेगी। इसके साथ ही बीजेपी अपने नेतृत्व ढांचे और टिकट वितरण के दौरान भी जाट समुदाय को उचित प्रतिनिधित्व देने पर गंभीरता से विचार कर रही है। संजीव बालियान और सत्यपाल सिंह जैसे दिग्गज नेता जाट समुदाय के बीच भाजपा के जनाधार को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते आए हैं। इसके अलावा बीजेपी ने साल 2024 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया था। इस कदम के जरिए पार्टी ने एक स्पष्ट संदेश देने का प्रयास किया कि उसने आजादी के बाद से देश के सबसे बड़े जाट नेता का सर्वोच्च सम्मान किया है। इसी बीच साल 2027 में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी ने अपनी तैयारियों को बेहद तेज कर दिया है। हाल ही में लखनऊ में शुक्रवार शाम पार्टी के प्रदेश मुख्यालय पर बीजेपी के कोर ग्रुप की एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। करीब दो घंटे से भी ज्यादा समय तक चली इस उच्चस्तरीय बैठक में आगामी चुनावी तैयारियों के साथ-साथ संगठन और सरकार से जुड़े कई प्रमुख अभियानों पर विस्तार से मंथन किया गया।

## इसका आप पर असर
उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए राज्य के राजनीतिक समीकरण सभी नागरिकों और स्थानीय मतदाताओं के दैनिक जीवन तथा विकास कार्यों को गहराई से प्रभावित करेंगे।

- **भारत में:** उत्तर प्रदेश का राजनीतिक घटनाक्रम राष्ट्रीय स्तर पर नीतियों और कृषि से जुड़े मुद्दों को दिशा देता है क्योंकि राज्य की चुनावी गहमागहमी देश की केंद्रीय राजनीति पर सीधा असर डालती है। किसानों और ग्रामीण समुदायों से जुड़े नीतिगत फैसले पूरे देश के कृषि क्षेत्र को प्रभावित करते हैं।

- **उत्तर प्रदेश में:** पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में रहने वाले मतदाताओं के लिए यह चुनावी सरगर्मी स्थानीय विकास, ग्रामीण बुनियादी ढांचे और कृषि नीतियों के केंद्र में रहने का मौका है। स्थानीय निवासियों को अपनी क्षेत्रीय मांगों और किसान कल्याण से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक दलों के सामने मजबूती से रखने का अवसर मिलता है।

## ऐसा क्यों हुआ
जाट समुदाय की राजनीतिक अहमियत का मुख्य कारण उनकी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भौगोलिक सघनता और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था में उनकी केंद्रीय भूमिका है।

- **भौगोलिक संकेन्द्रण:** उत्तर प्रदेश के लगभग 99 प्रतिशत जाट मतदाता पश्चिमी क्षेत्र के 26 जिलों में फैले हुए हैं, जो उन्हें कई विधानसभा सीटों पर नतीजों को पलटने की क्षमता देता है।

- **पारंपरिक राजनीतिक जुड़ाव:** इस समुदाय का पारंपरिक रूप से राष्ट्रीय लोक दल के साथ मजबूत जुड़ाव रहा है, जिसके कारण क्षेत्रीय दलों और बड़े गठबंधनों के लिए उनका समर्थन बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है।

- **हालिया राजनीतिक बदलाव:** हाल के वर्षों में भारतीय द्वारा किए गए सांगठनिक बदलाव और पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न देने जैसे कदम इस समुदाय को अपने पाले में करने की रणनीतिक कोशिशों का हिस्सा रहे हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. उत्तर प्रदेश की कुल आबादी में जाट समुदाय की हिस्सेदारी कितनी है?
उत्तर प्रदेश की कुल आबादी में जाट समुदाय की हिस्सेदारी लगभग 2 प्रतिशत है।

### 2. यूपी के कितने जिलों में जाट आबादी मुख्य रूप से फैली हुई है?
उत्तर प्रदेश के लगभग 99 प्रतिशत जाट मतदाता पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 26 जिलों में फैले हुए हैं।

### 3. किन विधानसभा क्षेत्रों और सीटों पर जाटों का प्रभाव माना जाता है?
ये 26 जिले 136 विधानसभा क्षेत्रों और 27 लोकसभा सीटों के अंतर्गत आते हैं, जिनमें जाटों का 35 से 40 सीटों पर मजबूत असर है।

### 4. साल 2007 के चुनाव में जाटों ने सबसे ज्यादा किस पार्टी को वोट दिया था?
लोकनीति-सीएसडीएस के विश्लेषण के अनुसार 2007 में 61 प्रतिशत जाटों ने राष्ट्रीय लोक दल को वोट दिया था।

### 5. बीजेपी ने जाट समुदाय के बीच समर्थन बढ़ाने के लिए क्या प्रमुख कदम उठाया?
बीजेपी ने 2024 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को भारत रत्न से सम्मानित किया था।

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