# उत्तर प्रदेश में मुख्य चुनाव आयुक्त के युवा संवाद कार्यक्रम स्थगित, निर्वाचन आयोग ने दी सफाई

> मतदाता सूची संशोधन से जुड़े विवाद और विपक्षी दलों के राष्ट्रव्यापी प्रदर्शनों के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के उत्तर प्रदेश दौरे को स्थगित कर दिया गया है, जिस पर चुनाव आयोग ने प्रशासनिक वजहों का हवाला दिया है।

**Type:** article · **Category:** राजनीति · **Published:** 2026-09-25 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/politics/uttar-pradesh-men-mukhya-chunava-ayukta-ke-yuva-snvada-karyakrama-sthagita-election-commission-ne-di-saphai-38341 · **Language:** Hindi
**Tags:** चुनाव आयोग, ज्ञानेश कुमार, उत्तर प्रदेश, मतदाता सूची, कांग्रेस, निर्वाचन आयुक्त

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का उत्तर प्रदेश दौरा स्थगित कर दिया गया है। तय योजना के तहत उन्हें 25 सितंबर को मेरठ स्थित सीसीएसयू में नई पीढ़ी के युवाओं के साथ संवाद करना था। इसके बाद 28 सितंबर को वाराणसी में भी युवाओं के साथ एक अन्य संवाद कार्यक्रम तय था। यह पूरा घटनाक्रम ऐसे वक्त में सामने आया है जब मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक माहौल काफी गर्म है। इस स्थगन को लेकर निर्वाचन आयोग की ओर से स्थिति स्पष्ट की गई है। आयोग ने कहा है कि कार्यक्रमों के समय और तारीखों में फेरबदल एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है और पहले भी कई राज्यों में इस तरह के बदलाव किए जाते रहे हैं।

## कार्यक्रम स्थगित होने पर चुनाव आयोग का आधिकारिक पक्ष
उत्तर प्रदेश के दौरों को लेकर उठ रहे सवालों के बीच निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया कि कार्यक्रमों की रूपरेखा में समायोजन होना एक सतत चलने वाली व्यवस्था है। आयोग के अनुसार, कार्यक्रम स्थलों की उपलब्धता, वरिष्ठ अधिकारियों की व्यस्तता और प्राकृतिक परिस्थितियों जैसे कई कारकों के चलते तिथियों में बदलाव करना जरूरी हो जाता है। आयोग ने दलील दी कि पहले भी हिमाचल प्रदेश, लद्दाख और उत्तराखंड जैसे क्षेत्रों में ईएलसी सम्मेलनों को टाला गया है या उनकी तारीखें बदली गई हैं। साथ ही आयोग ने यह भी साफ किया कि उत्तर प्रदेश के इन दो विशेष सम्मेलनों को स्थगित करने का फैसला 21 सितंबर को ही ले लिया गया था।

## विपक्षी खेमे ने तेज किया विरोध प्रदर्शन
दूसरी तरफ, मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मामले को लेकर राजनीतिक दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरोध में देशव्यापी प्रदर्शन आयोजित करने का ऐलान किया है। कांग्रेस के साथ-साथ अन्य विपक्षी दल भी सड़कों पर उतर रहे हैं। दिल्ली स्थित निर्वाचन आयोग के मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन की योजना बनाई गई है, जबकि जंतर-मंतर पर वामपंथी दल विरोध जता रहे हैं। इसी क्रम में बिहार में राष्ट्रीय जनता दल के कार्यकर्ता भी प्रदर्शन में शामिल हैं।

## मतदाता सूची और आंतरिक असहमति से जुड़ा विवाद
इस पूरे सियासी टकराव का आधार मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया से जुड़े फैसले हैं। सामने आई जानकारी के मुताबिक, दो निर्वाचन आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने से संबंधित विषयों पर अपनी चिंता जाहिर की थी। इन दोनों आयुक्तों ने पिछले कुछ महीनों के दौरान 14 मौकों पर निर्णय लेने की कार्यप्रणाली पर आपत्तियां दर्ज कराई थीं।

आयोग के भीतर मतभेद की इन बातों पर भी निर्वाचन आयोग ने अपना रुख साफ किया है। आयोग का कहना है कि किसी भी संवैधानिक या प्रशासनिक संस्था में विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय, सुझाव और टिप्पणियां आना एक स्वाभाविक और स्वस्थ परंपरा है। निर्वाचन आयोग ने यह भी रेखांकित किया कि पिछले एक वर्ष के दौरान जारी किए गए सभी औपचारिक आदेश आयोग की सर्वसम्मत सहमति और फैसलों के आधार पर ही लागू किए गए हैं।

## इसका आप पर असर
चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची से जुड़े इस विवाद का सीधा असर चुनावी पारदर्शिता और नागरिकों के मताधिकार पर पड़ता है।

- **भारत में:** देश भर के नागरिकों के लिए मतदाता सूची का सटीक होना जरूरी है ताकि योग्य मतदाताओं के नाम अनुचित तरीके से न कटें। लोग चुनाव आयोग के पोर्टल या मतदाता हेल्पलाइन के जरिए अपने नाम की स्थिति समय पर जांच सकते हैं।
- **उत्तर प्रदेश में:** मेरठ और वाराणसी में होने वाले युवा संवाद कार्यक्रम टलने से स्थानीय छात्रों और युवाओं का आयोग के शीर्ष अधिकारियों से सीधा संवाद रुक गया है। इन आयोजनों की नई तारीखों की घोषणा बाद में की जाएगी।
- **राजनीतिक असर:** विपक्षी दलों द्वारा दिल्ली, बिहार और अन्य राज्यों में किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों से चुनावी नियमों की निगरानी तेज होगी। इससे प्रशासनिक स्तर पर मतदाता सूची पुनरीक्षण में अधिक पारदर्शिता लाने का दबाव बनेगा।
- **मतदाताओं के लिए कदम:** आगामी चुनावों को ध्यान में रखते हुए नागरिक अपने क्षेत्र की मतदाता सूची में दर्ज प्रविष्टियों का सत्यापन जरूर कर लें। किसी भी त्रुटि या विसंगति के मामले में स्थानीय निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी के पास सुधार का दावा पेश किया जा सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
मुख्य चुनाव आयुक्त का दौरा रद्द होने और विपक्षी हंगामे के पीछे प्रशासनिक योजना में बदलाव और मतदाता सूची संशोधन से जुड़े आंतरिक मतभेदों का सार्वजनिक होना प्रमुख कारण है।

- **दौरा स्थगित होने का कारण:** निर्वाचन आयोग ने स्थल की उपलब्धता, अधिकारियों के कार्यक्रम और प्राकृतिक परिस्थितियों जैसे कारकों को कार्यक्रम टलने की मुख्य वजह बताया है। आयोग के अनुसार इन दो सम्मेलनों को स्थगित करने का फैसला 21 सितंबर को ही कर लिया गया था।
- **विवाद की शुरुआत:** विवाद तब शुरू हुआ जब यह बात सामने आई कि दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मतदाता सूची से नाम हटाने के तरीकों पर चिंता जताई थी। उन्होंने पिछले कुछ महीनों में 14 बार निर्णय लेने की कार्यप्रणाली पर अपनी आपत्तियां दर्ज की थीं।
- **आयोग का स्पष्टीकरण:** चुनाव आयोग ने आंतरिक मतभेदों पर स्पष्ट किया कि विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग विचार सामने आना एक सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है। आयोग ने यह भी कहा कि पिछले एक वर्ष के दौरान जारी किए गए सभी आदेश सर्वसम्मति से लिए गए निर्णयों का ही परिणाम हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. मुख्य चुनाव आयुक्त का कौन सा दौरा स्थगित हुआ है?
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का उत्तर प्रदेश दौरा स्थगित हुआ है, जिसमें 25 सितंबर को मेरठ के सीसीएसयू और 28 सितंबर को वाराणसी में युवाओं से संवाद होना था।

### 2. चुनाव आयोग ने दौरा स्थगित करने की क्या वजह बताई?
आयोग ने कहा कि आयोजन स्थलों की उपलब्धता, अधिकारियों की व्यस्तता और प्राकृतिक कारणों से कार्यक्रमों में समायोजन एक सामान्य प्रक्रिया है और यह निर्णय 21 सितंबर को लिया गया था।

### 3. विपक्षी दल किस बात को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं?
विपक्षी दल मतदाता सूची संशोधन के तहत नाम हटाए जाने के तौर-तरीकों और मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यशैली के खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शन कर रहे हैं।

### 4. चुनाव आयुक्तों की किन आपत्तियों का जिक्र सामने आया था?
दो चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मुद्दों पर चिंता जताई थी और बीते कुछ महीनों में 14 बार प्रक्रिया पर आपत्ति की थी।

### 5. आंतरिक मतभेदों के दावों पर चुनाव आयोग ने क्या कहा?
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि विचार-विमर्श में अलग राय आना सामान्य है और पिछले एक साल में आयोग के सभी आदेश सर्वसम्मत फैसलों से ही जारी हुए हैं।

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