उत्तर प्रदेश में युवा स्टार्टअप कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पुरानी सरकारों पर साधा निशाना, अखिलेश यादव का जेपीएनआईसी पर पलटवार लखनऊ में आयोजित स्टार्टअप प्रोत्साहन कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य की रोजगार नीतियों और 2017 से पहले के माहौल की तुलना करते हुए विपक्ष पर हमला बोला, जिसके बाद अखिलेश यादव ने जेपीएनआईसी के निजीकरण का मुद्दा उठाकर पलटवार किया। लखनऊ में आयोजित युवा स्टार्टअप कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य सरकार की रोजगार और तकनीकी प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए पिछली सरकारों के कार्यकाल पर तीखा जुबानी हमला किया। गुरुवार को आयोजित इस विशेष समारोह में मुख्यमंत्री ने राज्य की नई स्टार्टअप नीति की औपचारिक शुरुआत की और राज्य में उद्यमिता को गति देने के लिए वित्तीय प्रोत्साहन राशि वितरित की। हालांकि, मुख्यमंत्री के इस बयान के तुरंत बाद समाजवादी दृष्टिकोण का पक्ष रखते हुए अखिलेश यादव ने भी सरकार पर पलटवार किया और लखनऊ स्थित एक प्रमुख केंद्र के निजीकरण का मुद्दा उठाया। स्टार्टअप नीति और वित्तीय सहायता का वितरण कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने युवा उद्यमियों को प्रोत्साहित करते हुए वित्तीय पैकेज का हस्तांतरण किया। राज्य सरकार ने अपनी स्टार्टअप नीति के तहत कुल 107 नवोन्मेषी स्टार्टअप्स और 9 इन्क्यूबेटर्स को 5 करोड़ से ज्यादा की वित्तीय सहायता सीधे उपलब्ध कराई। युवाओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार युवाओं को स्वावलंबी बनाने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए अपनी पूरी क्षमता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने आंकड़ों का ब्योरा देते हुए स्पष्ट किया कि अब तक 9 लाख से ज्यादा युवाओं को पारदर्शी प्रक्रिया के माध्यम से सरकारी नौकरियां दी जा चुकी हैं, जबकि निजी क्षेत्र में भी लाखों युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं। सरकार ने राज्य के युवाओं के नवोन्मेष को समर्थन देने के लिए अपने खजाने का द्वार खोल दिया है। वर्ष 2017 से पहले की कानून व्यवस्था और छवि पर प्रहार अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वर्ष 2017 से पहले के उत्तर प्रदेश और वर्तमान स्थिति के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों के समय देश भर में उत्तर प्रदेश की छवि बेहद खराब बनी हुई थी और उस दौर में रोजगार या युवाओं के भविष्य पर बात तक नहीं की जाती थी। अपने पुराने अनुभवों को साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, "जब मैं यूपी से बाहर जाता था तो लोग संदेह की निगाहों से देखते थे।" उन्होंने कहा कि उस समय अन्य राज्यों में उत्तर प्रदेश की पहचान टूटी-फूट वाली खस्ताहाल सड़कों और सूर्यास्त होते ही घने अंधेरे में डूब जाने वाले इलाकों से की जाती थी। लोगों का मानना था कि जहां से गड्ढे और अंधेरा शुरू हो, वही उत्तर प्रदेश की सीमा है। दंगे, कर्फ्यू और विकास पर लगा विराम राज्य के पुराने माहौल की विस्तार से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में हर प्रमुख त्यौहार और उत्सव से ठीक पहले उपद्रव या दंगे शुरू हो जाना एक सामान्य बात बन चुकी थी। इसके कारण शिक्षण संस्थान, स्कूल, कॉलेज और मुख्य बाजार महीनों तक बंद रहते थे और आम नागरिकों को कर्फ्यू के साए में दिन बिताने के लिए मजबूर होना पड़ता था। उन्होंने कहा कि ऐसे अराजक और भयपूर्ण वातावरण में इन्क्यूबेटर्स, उच्च शिक्षा, रोजगार सृजन या नवोन्मेष पर चर्चा करना एक दूर की कौड़ी और सपने जैसा प्रतीत होता था। लेकिन आज समय पूरी तरह बदल चुका है और उत्तर प्रदेश का युवा वैश्विक मंचों पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहा है। लखनऊ जेपीएनआईसी लीज पर अखिलेश यादव का तीखा पलटवार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आरोपों के सामने आने के बाद अखिलेश यादव ने भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने मुख्यमंत्री के सीधे आरोपों पर टिप्पणी करने के बजाय लखनऊ स्थित जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (जेपीएनआईसी) के मुद्दे को उठाकर सरकार को घेरा। अखिलेश यादव के कार्यकाल में निर्मित इस महत्वाकांक्षी परियोजना को योगी सरकार द्वारा एक निजी कंपनी को 30 साल की लीज पर सौंपने की तैयारी की जा रही है। इस निर्णय पर कड़ी आपत्ति जताते हुए अखिलेश यादव ने कहा, "स्थापना के समय बीजेपी ने जयप्रकाश नारायण के चित्र का उपयोग किया और आज उनके नाम की इमारत बेची जा रही है।" उन्होंने आरोप लगाया कि यदि वर्तमान सरकार पर कोई अंकुश न हो तो वे देश की प्रमुख संपत्तियों का निजीकरण कर देंगे। इसका आप पर असर उत्तर प्रदेश की नई स्टार्टअप नीति और वित्तीय आवंटन से राज्य के युवा उद्यमियों तथा रोजगार तलाश रहे युवाओं पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ेगा। • उत्तर प्रदेश में: राज्य के 107 नए स्टार्टअप्स और 9 इन्क्यूबेटर्स को 5 करोड़ रुपये से अधिक की सीधी वित्तीय सहायता प्राप्त होगी। इससे स्थानीय स्तर पर तकनीकी नवाचार और नए व्यापारिक मॉडल को बढ़ावा मिलेगा। • भारत में: उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में स्वरोजगार और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र का मजबूत होना राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में योगदान देगा। अन्य राज्यों के निवेशकों को भी उत्तर प्रदेश में बेहतर कारोबारी माहौल मिलेगा। • युवा उद्यमियों के लिए: सरकारी फंड और इन्क्यूबेटर सपोर्ट मिलने से नए विचार वाले युवाओं को अपनी कंपनी खड़ी करने के लिए आसान पूंजी सुलभ होगी। इससे बैंक लोन और शुरुआती फंडिंग की बाधाएं दूर होंगी। • रोजगार के अवसर: स्टार्टअप्स के विस्तार से आईटी, निर्माण और सेवा क्षेत्रों में हजारों नई नौकरियों का सृजन होगा। इससे स्थानीय युवाओं को राज्य के बाहर जाने की आवश्यकता कम होगी। • सार्वजनिक परिसंपत्तियों पर प्रभाव: लखनऊ स्थित जेपीएनआईसी के 30 साल के निजी लीज पर जाने से इसके संचालन और आम नागरिकों की पहुंच के नियमों में बदलाव आ सकता है। सवाल-जवाब 1. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किस कार्यक्रम में विपक्ष पर निशाना साधा? मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में आयोजित यूपी की नई स्टार्टअप नीति की शुरुआत और वित्तीय सहायता वितरण कार्यक्रम के दौरान विपक्ष पर निशाना साधा। 2. स्टार्टअप नीति के तहत कितनी वित्तीय सहायता दी गई? सरकार ने 107 स्टार्टअप्स और 9 इन्क्यूबेटर्स को कुल मिलाकर 5 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता प्रदान की। 3. मुख्यमंत्री के अनुसार 2017 से पहले उत्तर प्रदेश की क्या स्थिति थी? मुख्यमंत्री के अनुसार 2017 से पहले राज्य में खराब सड़कें, अंधेरा, बार-बार कर्फ्यू, त्यौहारों से पहले दंगे और व्यापार व शिक्षा के लिए प्रतिकूल माहौल था। 4. अखिलेश यादव ने किस मुद्दे पर सरकार पर पलटवार किया? अखिलेश यादव ने लखनऊ स्थित जयप्रकाश नारायण इंटरनेशनल सेंटर (जेपीएनआईसी) को 30 साल की लीज पर निजी कंपनी को सौंपने के मुद्दे पर सरकार को घेरा। 5. सरकार ने रोजगार के क्या आंकड़े प्रस्तुत किए? मुख्यमंत्री ने बताया कि उनकी सरकार ने 9 लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां दी हैं और निजी क्षेत्र में लाखों रोजगार पैदा किए हैं। https://trendkia.com/politics/uttar-pradesh-men-yuva-startaapa-karyakrama-men-mukhyamantri-yogi-adityanath-ne-purani-sarakaron-para-sadha-nishana-akhilesh-yadav-23326 TrendKia — Har trend, sabse pehle.