# विधान परिषद चुनावों में कांग्रेस को क्यों मिली निराशा, समझें हार के पांच प्रमुख कारण

> हाल ही में चार राज्यों में सम्पन्न हुए विधान परिषद चुनावों में कांग्रेस पार्टी का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है। बैलेट पेपर से हुए इस मतदान में पार्टी को किन रणनीतिक चूकों का सामना करना पड़ा, इसके पांच मुख्य कारण सामने आए हैं।

**Type:** article · **Category:** राजनीति · **Published:** 2026-10-29 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/politics/vidhana-parishada-chunavon-men-congress-ko-kyon-mili-nirasha-samajhen-hara-ke-pancha-pramukha-karana-52917 · **Language:** Hindi
**Tags:** एमएलसी चुनाव, कांग्रेस हार, बिहार चुनाव, मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, राजनीतिक समीक्षा

देश के चार राज्यों के अंतर्गत कुल 28 विधान परिषद सीटों में से 27 के परिणाम सामने आ चुके हैं, जबकि वाराणसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के लिए द्वितीय वरीयता के मतों की गिनती अभी जारी है। इस चुनाव में एनडीए ने कुल 16 सीटों पर अपना परचम लहराया है, जिसमें अकेले भारतीय जनता पार्टी ने 13 सीटों पर जीत दर्ज की है। इसके विपरीत, राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराने वाली कांग्रेस पार्टी को केवल एक सीट से ही संतोष करना पड़ा है। इस चुनाव परिणामों के बाद कांग्रेस के भीतर और राजनीतिक गलियारों में यह बड़ा सवाल उठ रहा है कि बैलेट पेपर से हुए इन चुनावों में पार्टी को इतनी बड़ी असफलता क्यों हाथ लगी।

 

## बिहार में महागठबंधन के भीतर तालमेल की कमी

बिहार की आठ विधान परिषद सीटों पर हुए मुकाबले में विपक्षी दलों के बीच आपसी मतभेद खुलकर सामने आए। इस चुनाव में कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल और वामपंथी दल अलग-अलग मैदान में उतरे, जिसके परिणाम स्वरूप विपक्षी मतों का भारी बिखराव हुआ। कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल ने पटना शिक्षक, पटना स्नातक, दरभंगा शिक्षक, दरभंगा स्नातक तथा कोसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों से अपने-अपने प्रत्याशी खड़े किए। विशेष रूप से दरभंगा शिक्षक सीट पर कांग्रेस के मौजूदा विधान परिषद सदस्य चुनाव लड़ रहे थे। शुरुआत में राष्ट्रीय जनता दल ने इस सीट पर उम्मीदवार नहीं उतारा था, लेकिन बाद में जब कांग्रेस ने सभी पांचों सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने का निर्णय लिया, तो राष्ट्रीय जनता दल ने भी अपने उम्मीदवार मैदान में उतार दिए। इसके साथ ही, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी ने भी दरभंगा में अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया। इन अंदरूनी खींचतान के कारण कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मदन मोहन झा को 2,187 वोट मिले तथा रामदेव राय को 1,498 वोट प्राप्त हुए, जबकि राष्ट्रीय जनता दल के उम्मीदवार कुमार राउत को मात्र 126 वोट हासिल हुए। मतों के इस विभाजन का लाभ उठाते हुए कांग्रेस जनसुराज के उम्मीदवार से मात्र 324 मतों के अंतर से यह सीट हार गई। सहयोगियों का सम्मान न करने की इस नीति के चलते कांग्रेस ने अपनी सीट भी गँवा दी। बिहार की कुल आठ सीटों में से भारतीय जनता पार्टी ने तीन सीटें जीतीं, जबकि जनता दल यूनाइटेड, राष्ट्रीय जनता दल और जनसुराज को एक-एक सीट मिली। इसके अलावा दो सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने विजय प्राप्त की। इस प्रक्रिया में बिहार से कांग्रेस का खाता भी नहीं खुल सका, और पटना ग्रेजुएट सीट पर जनता दल यूनाइटेड के नीरज कुमार ने चौथी बार सफलता हासिल की, जबकि अनंत सिंह के करीबी और जनसुराज प्रत्याशी अनुज सिंह तीसरे स्थान पर रहे।

 

## संगठन का जमीनी स्तर पर कमजोर होना

जिन राज्यों में यह मतदान संपन्न हुआ, वहां कांग्रेस पार्टी का सांगठनिक ढांचा जमीन स्तर पर काफी कमजोर स्थिति में नजर आया। अपवादस्वरूप कर्नाटक को छोड़कर जहां कांग्रेस सत्ता में है और संगठन अपेक्षाकृत मजबूत माना जाता है, पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा। कर्नाटक में बैलेट पेपर से हुए मतदान में भारतीय जनता पार्टी ने तीन और उसकी सहयोगी जनता दल सेक्युलर ने एक सीट पर जीत हासिल की। जनता दल सेक्युलर के एपी रंगनाथ ने कांग्रेस के पांच बार के विधान परिषद सदस्य और सदन में उपनेता पुट्टना को चुनावी शिकस्त दी, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि केवल मजबूत सरकार होने भर से सांगठनिक कमजोरी नहीं छुप सकती।

 

## उम्मीदवार चयन में रणनीतिक भूल

पार्टी की असफलता का एक और बड़ा कारण जिताऊ प्रत्याशियों के चयन में बरती गई लापरवाही रही। ऐसा देखा गया कि संगठन ने मैदानी स्तर पर जीत दर्ज करने की क्षमता रखने वाले नेताओं के बजाय प्रभावशाली और वरिष्ठ नेताओं के करीबी लोगों को प्राथमिकता दी। इसका खामियाजा पार्टी को सीटों की हार के रूप में भुगतना पड़ा। अन्य राजनीतिक दलों जैसे भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी ने जिस सतर्कता और दूरदर्शिता के साथ अपने उम्मीदवारों की सूची तैयार की, उस स्तर की सावधानी कांग्रेस खेमे में देखने को नहीं मिली।

 

## राष्ट्रीय मुद्दों को जनता तक पहुँचाने में विफलता

कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा लगातार युवाओं की बेरोजगारी, परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाएं और सरकारी नौकरियों में अनियमितता जैसे गंभीर मुद्दे उठाए जाते रहे हैं, जो सीधे तौर पर आम जनजीवन से जुड़े हैं। इसके साथ ही पिछले कुछ महीनों से मतदान प्रक्रिया में गड़बड़ी और चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर भी सवाल खड़े किए गए। हालांकि, केंद्रीय स्तर पर खड़े किए गए इन बयानों और मुद्दों को स्थानीय स्तर के नेता जमीन पर उतारने और मतदाताओं के बीच प्रभावी रूप से भुनाने में पूरी तरह असफल रहे।

 

## नेताओं के विवादित बयान और राजनीतिक नुकसान

चुनावी माहौल के नजदीक आते ही कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं के ऐसे बयान सामने आ जाते हैं जिनका पार्टी को भारी राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ता है। विरोधी दल विशेषकर भारतीय जनता पार्टी इन बयानों को तुरंत बड़ा मुद्दा बना लेती है। हाल ही में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर दिए गए बयान पर काफी विवाद हुआ, जिसमें भाजपा ने आरोप लगाया कि खरगे ने प्रधानमंत्री के पिता को निशाना बनाया। इसी प्रकार, वोट चोरी के मुद्दे पर पार्टी नेता दानिश अली की टिप्पणियों ने भी विरोधियों को हमला करने का पूरा अवसर दे दिया, जिसका असर इन स्थानीय चुनावों में भी देखने को मिला।

## इसका आप पर असर
विधान परिषद चुनावों के यह नतीजे देश की मुख्य विपक्षी पार्टी के सांगठनिक स्वास्थ्य और राजनीतिक जमीन पर सीधा प्रभाव डालते हैं।

- **राष्ट्रीय स्तर पर:** इन परिणामों से साफ होता है कि कांग्रेस जमीनी स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने और सहयोगियों को साथ रखने में संघर्ष कर रही है, जिसका असर आगामी राष्ट्रीय रणनीतियों पर पड़ सकता है।
- **बिहार और कर्नाटक में:** क्षेत्रीय मतदाताओं और कार्यकर्ताओं के बीच यह संदेश गया है कि पार्टी के भीतर सांगठनिक समन्वय और उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया में बड़े सुधार की आवश्यकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
कांग्रेस पार्टी को इन विधान परिषद चुनावों में कई अंदरूनी और रणनीतिक कारणों से भारी असफलता का सामना करना पड़ा है। पार्टी के भीतर समन्वय की कमी और कमजोर सांगठनिक पकड़ इसके मुख्य कारक रहे हैं।

- **गठबंधन में मतभेद:** बिहार जैसे राज्यों में सहयोगियों के साथ सीट बंटवारे पर सहमति न बनने से विपक्षी वोटों का भारी बिखराव हुआ।
- **कमजोर जमीनी पकड़:** कर्नाटक जैसे मजबूत गढ़ में भी पार्टी सांगठनिक सतर्कता की कमी के कारण सभी सीटें हार गई।
- **रणनीतिक चूक:** जिताऊ उम्मीदवारों के चयन में पार्टी नेतृत्व ने स्थानीय समीकरणों की अनदेखी की।
- **बयानों का असर:** चुनाव के समय आए कुछ विवादित बयानों को विरोधी दलों ने आक्रामक रूप से चुनावी मुद्दा बना लिया।

## सवाल-जवाब

### 1. किन राज्यों में विधान परिषद चुनाव हुए थे?
देश के 4 राज्यों में कुल 28 एमएलसी सीटों पर चुनाव आयोजित किए गए थे।

### 2. एनडीए ने कुल कितनी सीटों पर जीत दर्ज की?
एनडीए ने 16 सीटों पर शानदार जीत दर्ज की है, जिसमें बीजेपी अकेली 13 सीटों पर विजयी रही।

### 3. बिहार में कांग्रेस का प्रदर्शन कैसा रहा?
बिहार की 8 सीटों में से कांग्रेस पार्टी अपना खाता तक खोलने में असफल रही।

### 4. बिहार में जनसुराज पार्टी को कितनी सीट मिली?
प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज ने बिहार में एक सीट पर जीत हासिल की है।

### 5. कर्नाटक में कांग्रेस का क्या हाल रहा?
कर्नाटक में मजबूत स्थिति और सरकार होने के बावजूद कांग्रेस सभी चारों एमएलसी सीटों पर चुनाव हार गई।

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