वोटर लिस्ट के विशेष पुनरीक्षण की मियाद बढ़ी, 6 राज्यों में नई तारीखों का ऐलान चुनाव आयोग ने दिल्ली, महाराष्ट्र और हरियाणा समेत छह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का नया शेड्यूल जारी कर दिया है। मुख्य चुनाव अधिकारियों के अनुरोध के बाद दावे, आपत्तियां और अंतिम सूची जारी करने की तारीखें आगे बढ़ा दी गई हैं। देश भर में मतदाता सूचियों को पूरी तरह सटीक और पारदर्शी बनाने की कवायद के बीच निर्वाचन आयोग ने एक अहम निर्णय लिया है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सहित छह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की समयसीमा में विस्तार कर दिया गया है। आयोग का यह कदम इन राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों की तरफ से मिले व्यावहारिक सुझावों और निवेदनों के आधार पर उठाया गया है, ताकि किसी भी वास्तविक नागरिक का नाम सूची से बाहर न रहे और फर्जी प्रविष्टियों को पूरी तरह हटाया जा सके। किन राज्यों में बदला गया कार्यक्रम निर्वाचन आयोग द्वारा जारी आधिकारिक विवरण के अनुसार, यह समयसीमा महाराष्ट्र, दिल्ली, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, तेलंगाना और नागालैंड में बढ़ाई गई है। इन सभी छह क्षेत्रों में पुनरीक्षण की चल रही गतिविधियों को नए सिरे से समय दिया गया है। आयोग का कहना है कि इस गहन अभियान का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र मतदाता सूची में जुड़ने से वंचित न रह जाए, साथ ही किसी भी अयोग्य या अपात्र व्यक्ति का नाम मतदाता रजिस्टर में दर्ज न होने पाए। विपक्षी खेमे से इस पूरी कवायद को लेकर कई तरह की आपत्तियां उठाई जा रही थीं, जिनके बीच आयोग ने प्रशासनिक स्तर पर समयसीमा बढ़ाकर काम को सुचारू करने का रास्ता निकाला है। महाराष्ट्र में दावों और आपत्तियों की नई समयसीमा महाराष्ट्र में मतदाता सूची के नवीनीकरण की प्रक्रिया को नया समय दिया गया है। राज्य में अब नागरिक 13 नवंबर तक अपने दावे और आपत्तियां प्रस्तुत कर सकेंगे, जबकि इससे पहले यह समयसीमा 26 अक्टूबर को समाप्त हो रही थी। इसके बाद आयोग के अधिकारी 25 नवंबर तक प्राप्त आपत्तियों की जांच, नोटिस जारी करने और दावों के निस्तारण का काम पूरा करेंगे। इन सभी प्रक्रियाओं के संपन्न होने के बाद महाराष्ट्र के लिए अंतिम मतदाता सूची 30 नवंबर को आधिकारिक रूप से प्रकाशित की जाएगी। उल्लेखनीय है कि राज्य में ड्राफ्ट मतदाता सूची 31 अगस्त को जारी हुई थी और दावों के निपटारे की पूर्व निर्धारित तारीख 10 नवंबर थी। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के लिए तय हुआ नया शेड्यूल केंद्र शासित प्रदेश दिल्ली में भी मतदाताओं और प्रशासनिक टीमों को अतिरिक्त समय दिया गया है। दिल्ली के अंतर्गत दावे और आपत्तियां दाखिल करने की आखिरी तारीख, जो पहले 30 अक्टूबर थी, उसे आगे बढ़ाकर 25 नवंबर कर दिया गया है। वहीं दावों की जांच और उनके विधिवत निपटारे की समयसीमा 30 नवंबर से आगे बढ़ाकर 15 दिसंबर निर्धारित की गई है। पूरी प्रक्रिया पूरी होने के उपरांत दिल्ली की अंतिम मतदाता सूची 22 दिसंबर को प्रकाशित की जाएगी। अन्य चार राज्यों में अंतिम प्रकाशन की स्थिति दिल्ली और महाराष्ट्र के अलावा बाकी चार राज्यों हरियाणा, नागालैंड, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के लिए भी अंतिम सूची जारी करने की समयसीमा 30 नवंबर तय की गई है। मुख्य निर्वाचन अधिकारियों की मांग पर मिले इस अतिरिक्त समय से प्रशासनिक तंत्र को घर-घर सत्यापन और फॉर्मों की जांच के लिए पर्याप्त अवसर मिलेगा, जिससे मतदाता सूचियों की त्रुटियों को जमीनी स्तर पर दूर किया जा सकेगा। इसका आप पर असर संबंधित छह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के नागरिकों को मतदाता सूची में नाम जुड़वाने या संशोधन कराने के लिए अतिरिक्त समय मिल गया है। • दावे और आपत्तियां: महाराष्ट्र के निवासी अब 13 नवंबर तक और दिल्ली के मतदाता 25 नवंबर तक अपने आवेदन जमा कर सकते हैं। इसके जरिए नाम जुड़वाने, हटाने या विवरण में सुधार की प्रक्रिया आसानी से पूरी की जा सकती है। • अंतिम सूची का प्रकाशन: हरियाणा, नागालैंड, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र के लिए अंतिम वोटर लिस्ट 30 नवंबर को जारी होगी। दिल्ली के मतदाताओं के लिए यह सूची 22 दिसंबर को सामने आएगी, जिसमें अपना नाम दोबारा जांचा जा सकेगा। • प्रशासनिक सहूलियत: सत्यापन अधिकारियों को घर-घर जाकर फॉर्मों और दावों के निपटारे के लिए ज्यादा समय मिलेगा। इससे वास्तविक मतदाताओं के नाम कटने की संभावना बेहद कम हो जाएगी। • पात्र नागरिकों को अवसर: जिन युवाओं की आयु पात्रता सीमा में आई है या जो हाल ही में स्थानांतरित हुए हैं, वे अब विस्तारित तारीख तक आवेदन दे सकते हैं। इससे उन्हें अगले चुनावों में मतदान का वैधानिक अधिकार मिल सकेगा। ऐसा क्यों हुआ मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की समयसीमा राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के आधिकारिक अनुरोध के बाद बढ़ाई गई है। अधिकारियों को जमीनी स्तर पर सत्यापन और दावों के निपटारे के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता थी। • मुख्य चुनाव अधिकारियों की मांग: संबंधित छह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के शीर्ष चुनाव अधिकारियों ने व्यावहारिक कठिनाइयों को देखते हुए समय बढ़ाने का औपचारिक आग्रह किया था। आयोग ने समीक्षा के बाद इसे स्वीकार कर लिया। • पात्र और अपात्र मतदाताओं की छंटनी: अभियान का प्राथमिक उद्देश्य किसी भी वैध नागरिक का नाम छूटने से बचाना और फर्जी प्रविष्टियों को हटाना है। बड़े पैमाने पर फॉर्मों की जांच के लिए पूर्व निर्धारित समय अपर्याप्त साबित हो रहा था। • आपत्तियों का निस्तारण: राजनीतिक दलों और नागरिकों की ओर से दर्ज कराई जा रही आपत्तियों की विस्तृत जांच जरूरी थी। नोटिस भेजने और सुनवाई की कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के लिए प्रशासन को अतिरिक्त दिनों की दरकार थी। सवाल-जवाब 1. किन राज्यों में विशेष गहन पुनरीक्षण की समयसीमा बढ़ाई गई है? यह विस्तार महाराष्ट्र, दिल्ली, आंध्र प्रदेश, हरियाणा, तेलंगाना और नागालैंड में लागू किया गया है। 2. महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की नई तारीख क्या है? महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तिथि 26 अक्टूबर से बढ़ाकर 13 नवंबर कर दी गई है। 3. दिल्ली में अंतिम मतदाता सूची कब प्रकाशित होगी? दिल्ली में सभी दावों के निपटारे के बाद अंतिम मतदाता सूची 22 दिसंबर को जारी की जाएगी। 4. हरियाणा और तेलंगाना में फाइनल वोटर लिस्ट किस तारीख को आएगी? हरियाणा, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और नागालैंड के लिए अंतिम प्रकाशन 30 नवंबर तक निर्धारित किया गया है। 5. इस समयसीमा विस्तार का मुख्य कारण क्या है? संबंधित राज्यों के मुख्य चुनाव अधिकारियों के निवेदन पर यह बदलाव किया गया ताकि सत्यापन कार्य बिना किसी त्रुटि के पूरा हो सके। https://trendkia.com/politics/votara-lista-ke-vishesha-punarikshana-ki-miyada-barhi-6-rajyon-men-nai-tarikhon-ka-ailana-53228 TrendKia — Har trend, sabse pehle.