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  "title": "वोटर लिस्ट से नाम काटने की साजिश पर भड़के डीके शिवकुमार, फॉर्म 7 के दुरुपयोग को लेकर चेताया",
  "summary": "कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने स्पेशल इंटेंसिव रिविजन के तहत फॉर्म 7 के जरिए वोटरों के नाम हटाने का आरोप लगाया है। उन्होंने प्रशासन से रिकॉर्ड तलब करते हुए नागरिकों से सतर्क रहने को कहा।",
  "content": "कर्नाटक की सियासत में मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण अभियान को लेकर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। राज्य के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी एसआईआर के दौरान बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम सूची से गायब करने का संदेह जताया है। बुधवार देर रात सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो संबोधन में उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि निर्वाचन प्रणाली के फॉर्म 7 प्रावधान का अनुचित फायदा उठाकर लोगों के मताधिकार को छीना जा रहा है। उन्होंने जमीनी कार्यकर्ताओं एवं आम अवाम से आग्रह किया कि यदि कहीं भी ऐसी संदिग्ध हलचल दिखे तो तुरंत उसकी सूचना उच्च स्तर पर साझा करें।\n\nविपक्ष पर निशाना और वंचित वर्गों की सुरक्षा का संकल्प\nमतदाता सूचियों की इस विशेष समीक्षा कवायद को लेकर राष्ट्रव्यापी बेचैनी की ओर इशारा करते हुए मुख्यमंत्री ने अपने संवैधानिक दायित्वों को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सत्ता के शीर्ष पर बैठे व्यक्ति का प्राथमिक फर्ज हर नागरिक के मताधिकार की हिफाजत करना है। शिवकुमार के मुताबिक, भारतीय जनता पार्टी से जुड़े कुछ चेहरे सुनियोजित ढंग से भारी तादाद में आपत्तियां दर्ज कराने के लिए फॉर्म 7 जमा करवा रहे हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि इस षड्यंत्र का सीधा असर समाज के कमजोर तबकों, खासकर अल्पसंख्यकों, अनुसूचित जातियों, जनजातियों एवं पिछड़े वर्गों के मतदाताओं पर डाला जा रहा है।\n\n ## \"एक बड़ी साज़िश चल रही है।\"\nअपने संबोधन में उन्होंने जमीन से मिल रही जमीनी जानकारियों का हवाला दिया। मुख्यमंत्री ने खुलासा किया कि बूथ स्तर के अधिकारियों यानी बीएलओ के दफ्तरों में अनगिनत फॉर्म दाखिल किए जा चुके हैं। उन्होंने बेलगावी, मैसूरु, मुदिगेरे और बाल्की समेत राज्य के कई सुदूर अंचलों का उल्लेख किया, जहां से इस किस्म की गड़बड़ी के मामले सीधे उनके संज्ञान में लाए गए हैं। दूसरी ओर, राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में भी बुधवार को कांग्रेस की अगुवाई वाले विपक्षी इंडिया गठबंधन ने एसआईआर प्रक्रिया और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ अपनी रणनीति तैयार करने के लिए एक अहम बैठक की।\n\nप्रशासन से ब्योरा तलब, गुरुवार को विस्तृत प्रेस वार्ता\nमतदाता सूची में किसी भी अनधिकृत फेरबदल को रोकने के लिए मुख्यमंत्री ने बूथ लेवल एजेंटों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों तथा सजग नागरिकों को सक्रिय होने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सभी से कहा है कि वे अपने-अपने पोलिंग स्टेशनों एवं विधानसभा क्षेत्रों में दाखिल किए जा रहे आपत्ति आवेदनों की बारीकी से पड़ताल करें और ठोस सबूत मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचाएं। प्रशासनिक स्तर पर सख्ती बरतते हुए उन्होंने पुलिस महकमे के आला अफसरों, जिलाधिकारियों और चुनाव से जुड़े अधिकारियों से ऐसे सभी मामलों का पूर्ण डेटा तलब किया है।\n\nशिवकुमार ने घोषणा की कि वे गुरुवार को एक विस्तृत प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए इन तथ्यों को सार्वजनिक करेंगे, जिसके लिए उन्होंने दोपहर से पहले पुख्ता ब्योरा जुटाने का निर्देश दिया है। उन्होंने दो टूक शब्दों में दोहराया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में वोट हर व्यक्ति का मौलिक अधिकार है और किसी भी नागरिक के राजनीतिक, धार्मिक अथवा सामाजिक जुड़ाव से परे जाकर उसके वोट की रक्षा करना उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।\n\nनागरिक समाज के प्रतिनिधिमंडल ने सौंपी ऑडिट रिपोर्ट\nइस वीडियो संदेश से पूर्व बुधवार को ही बेंगलुरु स्थित मुख्यमंत्री के निजी आवास पर नागरिक समाज के एक विशेष शिष्टमंडल ने उनसे मुलाकात की। अभिनेता प्रकाश राज के नेतृत्व में पहुंचे एंटी-एसआईआर गठबंधन के इस दल ने चल रही रिविजन प्रक्रिया पर तैयार की गई अपनी एक स्वतंत्र ऑडिट रिपोर्ट शिवकुमार को सौंपी। इस प्रतिनिधिमंडल में नूर श्रीधर, मुहम्मद यूसुफ कन्नी, के.एल. अशोक, जे.एम. वीरसंगैया, अब्दुल मजीद और केएस जैसे प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद थे, जिन्होंने चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर अपनी गंभीर आपत्तियां दर्ज कराईं।\n\nइसका आप पर असर\nमतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण से जुड़े इस विवाद का सीधा संबंध नागरिकों के वोट देने के बुनियादी अधिकार से है।\n\n• भारत में: देश भर में मतदाता सूचियों के शुद्धिकरण अभियानों को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ रहे हैं। आम नागरिकों को चाहिए कि वे समय-समय पर निर्वाचन पोर्टल पर अपनी प्रविष्टि जांचें ताकि चुनाव के दिन मतदान केंद्र पर किसी अप्रिय स्थिति का सामना न करना पड़े।\n• कर्नाटक में: राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में फॉर्म 7 के तहत आपत्तियां दर्ज होने की शिकायतें सामने आ रही हैं। स्थानीय निवासी तुरंत अपने बूथ लेवल अधिकारी से मिलकर यह सत्यापित कर सकते हैं कि उनके परिवार का नाम मतदाता सूची से हटाने की कोई अर्जी तो नहीं दी गई है।\n• वंचित वर्ग: अल्पसंख्यक, एससी, एसटी और पिछड़े वर्ग के मतदाताओं को लक्षित किए जाने की आशंका जताई गई है। संबंधित क्षेत्रों के स्थानीय नागरिक संगठनों को मतदान केंद्रों पर निगरानी बढ़ाकर पात्र मतदाताओं के नाम कटने से बचाने चाहिए।\n• शिकायत की समयसीमा: मुख्यमंत्री ने गुरुवार दोपहर तक जनता और कार्यकर्ताओं से तथ्यात्मक सबूत मांगे हैं। यदि किसी के पास फर्जी आपत्ति का कोई प्रमाण है, तो वह उसे तुरंत स्थानीय प्रशासन या संबंधित दफ्तर तक पहुंचा सकता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nमतदाता सूचियों के संशोधन के दौरान आपत्तियों के अनुचित इस्तेमाल के संदेह और विपक्षी दलों की शिकायतों ने इस विवाद को जन्म दिया है।\n\n• फॉर्म 7 का कथित दुरुपयोग: निर्वाचन नियमों के अनुसार फॉर्म 7 किसी नाम को हटाने या आपत्ति जताने के लिए भरा जाता है। कर्नाटक में आरोप लगे हैं कि कुछ राजनीतिक तत्वों ने वैध मतदाताओं के नाम कटवाने के लिए इसे थोक में दाखिल किया है।\n• एसआईआर प्रक्रिया को लेकर देशव्यापी अंदेशा: स्पेशल इंटेंसिव रिविजन के तहत चलाए जा रहे सत्यापन कार्य से कई दलों में मतदाता छंटनी की आशंका पैदा हुई है। इसी पृष्ठभूमि में विपक्षी दलों ने निर्वाचन अधिकारियों के स्तर पर निगरानी बढ़ाने की मांग की है।\n• नागरिक समाज की ऑडिट रिपोर्ट: अभिनेता प्रकाश राज और एंटी-एसआईआर गठबंधन के सदस्यों ने जमीनी अध्ययन के बाद अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी। इस दस्तावेज में प्रक्रियागत विसंगतियों की ओर इशारा किए जाने के बाद सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. डीके शिवकुमार ने किस प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं?\nउन्होंने स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी एसआईआर के दौरान फॉर्म 7 का इस्तेमाल करके मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं।\n\n2. फॉर्म 7 का उपयोग किस काम के लिए किया जाता है?\nनिर्वाचन नियमों में फॉर्म 7 का उपयोग मतदाता सूची से किसी मौजूदा नाम को हटाने या उस पर आपत्ति दर्ज करने के लिए किया जाता है।\n\n3. किन इलाकों से गड़बड़ी के मामले सामने आने की बात कही गई है?\nमुख्यमंत्री के अनुसार बेलगावी, बाल्की, मुदिगेरे और मैसूरु समेत राज्य के कई हिस्सों से ऐसी शिकायतें उनके संज्ञान में आई हैं।\n\n4. एंटी-एसआईआर गठबंधन के शिष्टमंडल में कौन शामिल थे?\nइस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अभिनेता प्रकाश राज कर रहे थे और उनके साथ नूर श्रीधर, मुहम्मद यूसुफ कन्नी, जे.एम. वीरसंगैया, के.एल. अशोक और अब्दुल मजीद शामिल थे।\n\n5. मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक स्तर पर क्या कदम उठाए हैं?\nउन्होंने पुलिस अधिकारियों, डिप्टी कमिश्नरों और निर्वाचन अधिकारियों से फॉर्म 7 से जुड़ी शिकायतों का संपूर्ण डेटा तलब किया है।",
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  "category": "राजनीति",
  "publishedAt": "2026-10-01",
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