# वोटर लिस्ट विवाद पर बेंगलुरु में मुख्य चुनाव अधिकारी के दफ्तर पहुंचे डीके शिवकुमार, कानूनी कार्रवाई के भरोसे पर खत्म हुआ धरना

> कर्नाटक में फॉर्म 7 के जरिए बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम काटने का आरोप लगाते हुए डीके शिवकुमार ने धरना दिया, जिसके बाद चुनाव आयोग ने थोक में आवेदन जमा करने वालों के खिलाफ जांच और कानूनी कार्रवाई के निर्देश जारी किए।

**Type:** article · **Category:** राजनीति · **Published:** 2026-10-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/politics/votara-lista-vivada-para-bengaluru-men-mukhya-chunava-adhikari-ke-daphtara-pahunche-dk-shivakumar-kanuni-karravai-ke-bharose-para--41485 · **Language:** Hindi
**Tags:** डीके शिवकुमार, कर्नाटक चुनाव आयोग, फॉर्म 7 विवाद, वोटर लिस्ट, बीके हरिप्रसाद, राहुल गांधी, ज्ञानेश कुमार

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर सियासी टकराव तेज हो गया है। मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार और कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष बी के हरिप्रसाद ने मंत्रियों और पार्टी नेताओं के साथ मिलकर मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। मुख्य चुनाव अधिकारी को मतदाता सूची से नाम हटाने के संबंध में विस्तृत साक्ष्य सौंपे गए और उन सभी व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की औपचारिक मांग की गई, जिन्होंने बड़ी संख्या में फॉर्म 7 जमा किए हैं। यह टकराव उस समय और गहरा गया जब अधिकारी की ओर से कानूनी राय लेने के बाद कदम उठाने की बात कही गई, जिससे असंतुष्ट होकर मुख्यमंत्री वहीं धरने पर बैठ गए। उन्होंने साफ रुख अपनाया कि जब तक संबंधित व्यक्तियों पर मामले दर्ज नहीं होंगे, तब तक यह प्रदर्शन जारी रहेगा।

## थोक में फॉर्म 7 जमा करने का आरोप और जिलों के आंकड़े
मतदाता सूची से किसी भी नागरिक का नाम हटाने के लिए चुनाव आयोग की नियमावली के तहत फॉर्म 7 भरा जाता है। डी के शिवकुमार ने हर जिले के आंकड़े पेश करते हुए आरोप लगाया कि बीजेपी कार्यकर्ताओं को ऐसे नागरिकों की विस्तृत सूची सौंपी गई है जिनके नाम कटवाए जाने हैं। उन्होंने बताया कि जमीनी स्तर पर एक-एक कार्यकर्ता अपने-अपने मतदान केंद्र पर नाम हटवाने के लिए 80 से लेकर 200 तक फॉर्म 7 जमा कर रहा है। शिवकुमार के अनुसार, राज्य में एसआईआर से भी अधिक तादाद में नागरिकों के नाम मतदाता सूची से बाहर किए गए हैं और इसके बाद 45 लाख से अधिक मतदाताओं को नोटिस भेजे गए हैं। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ बड़ा खिलवाड़ करार दिया।

## बी के हरिप्रसाद के सवाल और राहुल गांधी का कड़ा हमला
कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष बी के हरिप्रसाद ने इस पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विषय पर चुनाव आयोग को पहले भी कई पत्र भेजे जा चुके हैं, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। हरिप्रसाद ने सवाल उठाया कि आखिर फॉर्म 7 इतनी भारी संख्या में बीजेपी कार्यकर्ताओं तक कैसे पहुंचा, क्या चुनाव आयोग ने इसे सीधे उपलब्ध कराया या फिर इसे ईपीआईसी नंबर के साथ अलग से छपवाया गया। इस विवाद के सामने आने के बाद राहुल गांधी ने भी तीखा रुख अपनाया। उन्होंने सवाल किया कि कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी इस गंभीर मामले में प्राथमिक जांच और एफआईआर दर्ज करने से क्यों इनकार कर रहे हैं। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार एसआईआर के माध्यम से मिलकर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर कर रहे हैं और उन्हें अपने पद से इस्तीफा देकर सरकारी गवाह बन जाना चाहिए।

## चुनाव आयोग द्वारा जांच के निर्देश और उच्चतम न्यायालय में याचिकाएं
मुख्यमंत्री के कड़े विरोध और लगातार प्रदर्शन के बाद स्थिति में बदलाव देखने को मिला। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के स्तर पर थोक में फॉर्म 7 जमा कराने वाले सभी व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिए गए। चुनाव तंत्र को अब जमा किए गए सभी फॉर्म 7 की सघन जांच करने और उन्हें प्रस्तुत करने वाले लोगों की पहचान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि नियमों का उल्लंघन कर अवैध तरीके से आवेदन जमा करने वालों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज होंगे, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने अपना धरना समाप्त करने का निर्णय लिया। उधर एसआईआर से जुड़े फैसलों को लेकर कानूनी मोर्चे पर भी चुनौतियां बढ़ गई हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में लगातार तीन याचिकाएं दाखिल की गई हैं, जिसमें एक नई याचिका के तहत उनके पिछले 10 महीनों में जारी किए गए 14 आदेशों को रद्द करने की मांग रखी गई है।

## इसका आप पर असर
इस विवाद के बाद चुनाव आयोग द्वारा जांच के आदेश दिए जाने से मतदाता सूची में नाम कटने की प्रक्रिया पर सख्त निगरानी शुरू हो गई है।

- **भारत में:** देशभर में मतदाता सूची संशोधन और फॉर्म 7 के जरिए नाम हटाने की प्रक्रिया को लेकर चुनावी तंत्र में सतर्कता बढ़ सकती है। किसी भी मतदाता का नाम बिना उचित सत्यापन और नोटिस के हटाना अब अधिकारियों के लिए जांच का दायरा बन सकता है।
- **कर्नाटक में:** राज्य के वे मतदाता जिन्हें हाल ही में नाम हटाने के नोटिस जारी हुए हैं, उनके मामलों की अब प्रशासनिक स्तर पर पुनर्समीक्षा होगी। जो नागरिक अपने वोट को लेकर आशंकित हैं, वे अपने स्थानीय बूथ स्तर के अधिकारी या चुनाव आयोग के पोर्टल पर जाकर अपने नाम की पुष्टि कर सकते हैं।
- **राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए:** थोक में नाम कटवाने के आवेदन करने वालों की पहचान कर कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। नियमों का उल्लंघन करके फॉर्म 7 जमा करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ सीधे आपराधिक मामले दर्ज किए जाएंगे।
- **मतदाता सूची पारदर्शिता:** इस घटनाक्रम के बाद 45 लाख नोटिस और अन्य विलोपन आवेदनों की जांच प्रक्रिया में स्थानीय स्तर पर निष्पक्षता सुनिश्चित होने की उम्मीद है। आम नागरिक बिना ठोस आधार के अपने मताधिकार छिनने से बच सकेंगे।

## ऐसा क्यों हुआ
कर्नाटक में यह राजनीतिक घमासान मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए बड़ी संख्या में फॉर्म 7 जमा किए जाने और उस पर चुनावी तंत्र द्वारा त्वरित कार्रवाई न करने के कारण शुरू हुआ।

- **थोक में फॉर्म 7 का जमा होना:** मुख्य विवाद इस बात से उत्पन्न हुआ कि प्रत्येक बूथ पर 80 से लेकर 200 तक फॉर्म 7 जमा किए जा रहे थे, जिससे बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम कटने की आशंका बनी। कांग्रेस नेताओं ने इसे मतदाताओं के अधिकार छीनने की सुनियोजित कोशिश बताया।
- **एफआईआर दर्ज करने में हिचकिचाहट:** मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने सबूत सौंपे जाने के बाद भी तत्काल पुलिस केस दर्ज करने के बजाय कानूनी सलाह लेने की बात कही, जिसके विरोध में मुख्यमंत्री धरने पर बैठ गए। अधिकारियों की इस देरी ने विरोध को और उग्र बना दिया।
- **एसआईआर और नोटिसों की पृष्ठभूमि:** राज्य में एसआईआर प्रक्रिया के तहत बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने और 45 लाख से अधिक मतदाताओं को नोटिस भेजे जाने से पहले ही असंतोष बना हुआ था। इस बीच नए आवेदनों की बाढ़ ने अविश्वास को और गहरा कर दिया।
- **दस्तावेजों की उपलब्धता पर संशय:** यह संदेह पैदा हुआ कि इतने व्यापक स्तर पर ईपीआईसी नंबरों के साथ फॉर्म 7 कार्यकर्ताओं तक कैसे पहुंचे। इन सवालों के चलते चुनावी तंत्र की निष्पक्षता पर सवाल उठे और कानूनी जांच की मांग की गई।

## सवाल-जवाब

### 1. डीके शिवकुमार ने बेंगलुरु में धरना क्यों दिया?
डीके शिवकुमार ने बीजेपी कार्यकर्ताओं द्वारा थोक में फॉर्म 7 जमा कर वोटर लिस्ट से नाम कटवाने का आरोप लगाया और इसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग को लेकर धरना दिया।

### 2. चुनाव आयोग में फॉर्म 7 किस काम आता है?
फॉर्म 7 का उपयोग चुनाव आयोग के नियमों के तहत मतदाता सूची से किसी व्यक्ति का नाम हटाने या आपत्ति दर्ज कराने के लिए किया जाता है।

### 3. प्रत्येक बूथ पर कितने फॉर्म 7 जमा करने का आरोप लगाया गया है?
आरोपों के मुताबिक प्रति बूथ 80 से लेकर 200 फॉर्म 7 वोटर लिस्ट से नाम कटवाने के लिए जमा कराए जा रहे थे।

### 4. कर्नाटक में कितने मतदाताओं को नोटिस भेजे गए थे?
डीके शिवकुमार के अनुसार कर्नाटक में 45 लाख से ज्यादा मतदाताओं को नोटिस भेजे गए हैं।

### 5. मुख्यमंत्री ने अपना धरना किस आश्वासन के बाद समाप्त किया?
चुनाव आयोग द्वारा थोक में फॉर्म 7 जमा कराने वालों की पहचान करने और कानूनी कार्रवाई के निर्देश जारी करने के बाद धरना समाप्त किया गया।

### 6. सुप्रीम कोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ क्या मांग की गई है?
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल नई याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पिछले 10 महीने के 14 आदेश रद्द करने की मांग की गई है।

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